पन्ना में एक मजदूर महिला की किस्मत बदल गई। उसे एक हफ्ते के अंदर अपनी खदान से कीमती 8 हीरे मिले हैं। महिला का नाम रचना गोलदार है। वह बड़गड़ी गांव की रहने वाली है। रचना ने हीरा कार्यालय से पट्टा लेकर हजारा मुद्दा क्षेत्र में खदान लगाई थी। हीरा पारखी अनुपम सिंह ने बताया कि इन 8 हीरों में से 6 जेम्स क्वॉलिटी के हैं, जिनका कुल वजन 2.53 कैरेट है। इनमें सबसे बड़े हीरे का वजन 0.79 कैरेट है। इसके अलावा 2 हीरे ऑफ-कलर के हैं। रचना गोलदार ने सभी हीरों को हीरा कार्यालय में जमा करा दिया है। इन्हें आगामी नीलामी में रखा जाएगा। इस साल में पहली बार एक साथ 8 हीरे जमा हुए हैं। इसके पहले भी 7 हीरे एक साथ जमा हुए थे। 4 से 5 लाख रुपए है अनुमानित कीमत
हीरा पारखी अनुपम सिंह के अनुसार, इन सभी हीरों की अनुमानित कीमत करीब 4 से 5 लाख रुपए है। नीलामी के बाद साढ़े 12 प्रतिशत रॉयल्टी काट कर बाकी पैसे महिला के खाते में डाल दिए जाएंगे। रचना गोलदार के कुल 3 बच्चे हैं। इनमें एक लड़की और 2 लड़के हैं। दोनों लड़के बाहर प्राइवेट जॉब करते हैं। लड़की की शादी हो गई है। पति भी हीरा खदान का ही काम करते हैं। महिला ने बताया कि हीरे की नीलामी से मिलने वाले पैसों से वह अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारेगी। आगे भी हीरे की खदान लगाएगी। सरकारी जमीन का पट्टा पाने की प्रक्रिया
पन्ना में सरकारी जमीन का पट्टा पाने के लिए आवेदन फॉर्म भरना होता है। हीरा कार्यालय में आवेदन के साथ तीन फोटो, आधार कार्ड की कॉपी और 200 रुपए का बैंक चालान पन्ना की SBI शाखा में जमा करना होता है। चालान की एक कॉपी कार्यालय में भी जमा कराना पड़ती है। इसके बाद 20 दिन के अंदर पट्टा मिल जाता है। निजी जमीन में पट्टे आवंटन की प्रक्रिया
निजी जमीन में हीरा खदान चलाने के लिए जमीन मालिक से सहमति और समझौता पत्र, बिक्रीनामा, किरायानामा जरूरी है। 3 फोटो, आधार कार्ड की कॉपी, 200 रुपए का चालान जमा कराने के बाद पट्टा जारी कर दिया जाता है। निजी खदान कहीं भी संचालित तो हो सकती है, लेकिन इलाके का हीरा खनन क्षेत्र के नक्शे में होना जरूरी है। ऐसे निकलता है हीरा
फॉर्म वगैरह की प्रक्रिया पूरी करने के बाद हीरा कार्यालय 8 बाई 8 मीटर का पट्टा जारी करता है। इसके बाद ठेकेदार खुद या लेबर लगाकर हीरे को खोज सकता है। हीरा पट्टा खदान में तैनात लोग बताते हैं कि मिट्टी को छांटकर बाहर फेंक दिया जाता है। पथरीली मिट्टी को पानी में धोते हैं। इसके बाद सुखाकर इसकी छनाई की जाती है। उसी में से हीरे निकलते हैं जो कि किस्मत और मेहनत का खेल है। 12% राजस्व काटती है सरकार
हीरा मिलने पर इसे हीरा कार्यालय में जमा कराना होता है। वहां से बाकायदा नीलामी की प्रक्रिया होती है, जिसमें देश के बड़े कारोबारी भाग लेते हैं। वे दाम लगाते हैं। जो दाम तय होता है, उसमें से 12% राशि राजस्व सरकार काट लेती है। बची हुई रकम हीरा ढूंढने वाले को दे दी जाती है। काटी जाने वाली राशि में 11% रॉयल्टी और 1% TDS होता है। नीलामी की प्रक्रिया हर तीन महीने में एक बार व साल में चार बार कराई जाती है। इसके लिए अखबारों में बाकायदा विज्ञापन जारी होता है। ऐसे तय होती है हीरे की कीमत
कलर क्लीयरिटी, कट और वजन से हीरे की कीमत तय होती है। सबसे अच्छा हीरा जैम क्वालिटी में ई और डी श्रेणी का माना जाता है। पन्ना में अमूमन ई श्रेणी का हीरा मिल जाता है। जैम क्वालिटी के हीरे की अंगूठी और दूसरी ज्वैलरी बनती है। जबकि दूसरा इंडस्ट्रियल ब्लैक हीरा होता है। इसका ग्लास कटिंग, एयरप्लेन के छर्रे सहित दूसरी व्यवसायिक गतिविधियों में उपयोग होता है। इसकी कीमत कम होती है। हीरा 50 हजार से लेकर 15 लाख रुपए कैरेट तक बिक सकता है। 1961 से हो रहा हीरा नीलामी
पन्ना में 1961 से हीरा कार्यालय काम कर रहा है। तब से हर तीन महीने पर हीरा की नीलामी होती है। हीरे की नीलामी में गुजरात, मुम्बई, दिल्ली, हैदराबाद सहित कई राज्यों के व्यापारी आते हैं। हीरा तलाश करने वाले को तुआदार कहते हैं। हीरा कार्यालय में तुआदार हीरा का परीक्षण कराकर जमा कराता है। वजन और हीरे की क्वालिटी के आधार पर उसकी न्यूनतम कीमत तय की जाती है। इसके बाद नीलामी होती है। अधिकतम कीमत में हीरा नीलाम किया जाता है। 11.50 टैक्स काटकर शेष राशि तुआदार मतलब हीरा खोजने वाले को दे दी जाती है।
पन्ना में एक मजदूर महिला की किस्मत बदल गई। उसे एक हफ्ते के अंदर अपनी खदान से कीमती 8 हीरे मिले हैं। महिला का नाम रचना गोलदार है। वह बड़गड़ी गांव की रहने वाली है। रचना ने हीरा कार्यालय से पट्टा लेकर हजारा मुद्दा क्षेत्र में खदान लगाई थी। हीरा पारखी अनुपम सिंह ने बताया कि इन 8 हीरों में से 6 जेम्स क्वॉलिटी के हैं, जिनका कुल वजन 2.53 कैरेट है। इनमें सबसे बड़े हीरे का वजन 0.79 कैरेट है। इसके अलावा 2 हीरे ऑफ-कलर के हैं। रचना गोलदार ने सभी हीरों को हीरा कार्यालय में जमा करा दिया है। इन्हें आगामी नीलामी में रखा जाएगा। इस साल में पहली बार एक साथ 8 हीरे जमा हुए हैं। इसके पहले भी 7 हीरे एक साथ जमा हुए थे। 4 से 5 लाख रुपए है अनुमानित कीमत
हीरा पारखी अनुपम सिंह के अनुसार, इन सभी हीरों की अनुमानित कीमत करीब 4 से 5 लाख रुपए है। नीलामी के बाद साढ़े 12 प्रतिशत रॉयल्टी काट कर बाकी पैसे महिला के खाते में डाल दिए जाएंगे। रचना गोलदार के कुल 3 बच्चे हैं। इनमें एक लड़की और 2 लड़के हैं। दोनों लड़के बाहर प्राइवेट जॉब करते हैं। लड़की की शादी हो गई है। पति भी हीरा खदान का ही काम करते हैं। महिला ने बताया कि हीरे की नीलामी से मिलने वाले पैसों से वह अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारेगी। आगे भी हीरे की खदान लगाएगी। सरकारी जमीन का पट्टा पाने की प्रक्रिया
पन्ना में सरकारी जमीन का पट्टा पाने के लिए आवेदन फॉर्म भरना होता है। हीरा कार्यालय में आवेदन के साथ तीन फोटो, आधार कार्ड की कॉपी और 200 रुपए का बैंक चालान पन्ना की SBI शाखा में जमा करना होता है। चालान की एक कॉपी कार्यालय में भी जमा कराना पड़ती है। इसके बाद 20 दिन के अंदर पट्टा मिल जाता है। निजी जमीन में पट्टे आवंटन की प्रक्रिया
निजी जमीन में हीरा खदान चलाने के लिए जमीन मालिक से सहमति और समझौता पत्र, बिक्रीनामा, किरायानामा जरूरी है। 3 फोटो, आधार कार्ड की कॉपी, 200 रुपए का चालान जमा कराने के बाद पट्टा जारी कर दिया जाता है। निजी खदान कहीं भी संचालित तो हो सकती है, लेकिन इलाके का हीरा खनन क्षेत्र के नक्शे में होना जरूरी है। ऐसे निकलता है हीरा
फॉर्म वगैरह की प्रक्रिया पूरी करने के बाद हीरा कार्यालय 8 बाई 8 मीटर का पट्टा जारी करता है। इसके बाद ठेकेदार खुद या लेबर लगाकर हीरे को खोज सकता है। हीरा पट्टा खदान में तैनात लोग बताते हैं कि मिट्टी को छांटकर बाहर फेंक दिया जाता है। पथरीली मिट्टी को पानी में धोते हैं। इसके बाद सुखाकर इसकी छनाई की जाती है। उसी में से हीरे निकलते हैं जो कि किस्मत और मेहनत का खेल है। 12% राजस्व काटती है सरकार
हीरा मिलने पर इसे हीरा कार्यालय में जमा कराना होता है। वहां से बाकायदा नीलामी की प्रक्रिया होती है, जिसमें देश के बड़े कारोबारी भाग लेते हैं। वे दाम लगाते हैं। जो दाम तय होता है, उसमें से 12% राशि राजस्व सरकार काट लेती है। बची हुई रकम हीरा ढूंढने वाले को दे दी जाती है। काटी जाने वाली राशि में 11% रॉयल्टी और 1% TDS होता है। नीलामी की प्रक्रिया हर तीन महीने में एक बार व साल में चार बार कराई जाती है। इसके लिए अखबारों में बाकायदा विज्ञापन जारी होता है। ऐसे तय होती है हीरे की कीमत
कलर क्लीयरिटी, कट और वजन से हीरे की कीमत तय होती है। सबसे अच्छा हीरा जैम क्वालिटी में ई और डी श्रेणी का माना जाता है। पन्ना में अमूमन ई श्रेणी का हीरा मिल जाता है। जैम क्वालिटी के हीरे की अंगूठी और दूसरी ज्वैलरी बनती है। जबकि दूसरा इंडस्ट्रियल ब्लैक हीरा होता है। इसका ग्लास कटिंग, एयरप्लेन के छर्रे सहित दूसरी व्यवसायिक गतिविधियों में उपयोग होता है। इसकी कीमत कम होती है। हीरा 50 हजार से लेकर 15 लाख रुपए कैरेट तक बिक सकता है। 1961 से हो रहा हीरा नीलामी
पन्ना में 1961 से हीरा कार्यालय काम कर रहा है। तब से हर तीन महीने पर हीरा की नीलामी होती है। हीरे की नीलामी में गुजरात, मुम्बई, दिल्ली, हैदराबाद सहित कई राज्यों के व्यापारी आते हैं। हीरा तलाश करने वाले को तुआदार कहते हैं। हीरा कार्यालय में तुआदार हीरा का परीक्षण कराकर जमा कराता है। वजन और हीरे की क्वालिटी के आधार पर उसकी न्यूनतम कीमत तय की जाती है। इसके बाद नीलामी होती है। अधिकतम कीमत में हीरा नीलाम किया जाता है। 11.50 टैक्स काटकर शेष राशि तुआदार मतलब हीरा खोजने वाले को दे दी जाती है।