सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने वनतारा पर लगे जल संसाधनों और कार्बन क्रेडिट के दुरुपयोग के आरोपों को ‘पूरी तरह से निराधार’ करार दिया है। प्राणी बचाव एवं पुनर्वास केंद्र वनतारा ने एक आधिकारिक बयान जारी कर यह जानकारी दी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने सोमवार को एसआईटी की उस रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया, जिसमें कहा गया है कि गुजरात के जामनगर में स्थित वनतारा के संचालन में किसी तरह का कोई कानूनी उल्लंघन नहीं पाया गया है। बयान में कहा गया है कि एसआईटी ने ‘रिलायंस फाउंडेशन’ द्वारा संचालित वनतारा को सभी प्रमुख आरोपों से मुक्त कर दिया, जिसमें यह दावा भी शामिल है कि वह ‘कार्बन क्रेडिट’ से लाभ कमाने के लिए जानवरों का अधिग्रहण कर रहा था। वनतारा ने कहा- एसआईटी की रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि जल संसाधनों और ‘कार्बन क्रेडिट’ के दुरुपयोग के आरोप पूरी तरह से निराधार थे। इनका कोई तथ्यात्मक या कानूनी आधार नहीं था। वनतारा ने न तो ऐसे किसी क्रेडिट के लिए आवेदन किया है और ना ही उसे कोई क्रेडिट मिला है। इसका काम पूरी तरह से परोपकारी माध्यमों से वित्त पोषित है। सुप्रीम कोर्ट ने 25 अगस्त को शीर्ष अदालत के एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में चार सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। न्यायालय ने मीडिया और सोशल मीडिया में आई खबरों के अलावा गैर सरकारी संगठनों और वन्यजीव संगठनों की शिकायतों के आधार पर वनतारा के खिलाफ अनियमितताओं का आरोप लगाने वाली दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान इस एसआईटी का गठन किया था। खरीद-बिक्री के नियमों में भी मिल चुकी है क्लीन चिट
इससे पहले वनतारा को सुप्रीम कोर्ट से जानवरों की खरीद-बिक्री मामले में भी क्लीन चिट मिल चुकी है। कोर्ट ने सोमवार (15 सितंबर) को कहा-जामनगर स्थित वनतारा वाइल्डलाइफ रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर में जानवरों की खरीद-बिक्री नियमों के दायरे में हुई है। इस सेंटर को अंबानी परिवार का रिलायंस फाउंडेशन चलाता है। इससे पहले SC ने 26 अगस्त को 2 पब्लिक इंटरेस्ट पिटीशन (PIL) पर SIT बनाने का आदेश दिया था। एक वकील सीआर जया सुकीन और दूसरी याचिका देव शर्मा ने जुलाई में कोल्हापुर के जैन मठ से हाथी ‘माधुरी’ को वनतारा में ले जाने के विवाद के बाद दायर की थी। अनंत अंबानी ने जानवरों के पुनर्वास को समर्पित अपने ड्रीम प्रोजेक्ट ‘वनतारा’ को लॉन्च किया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज और रिलायंस फाउंडेशन द्वारा वनतारा (स्टार ऑफ फॉरेस्ट) कार्यक्रम शुरू किया गया है। इस कार्यक्रम के तहत, घायल जानवरों का बचाव, उपचार, देखभाल और उनका पुनर्वास शामिल है। वनतारा रिलायंस के जामनगर स्थित रिफाइनरी परिसर के 3000 एकड़ ग्रीनबेल्ट में फैला हुआ है। वनतारा प्रोजेक्ट जानवरों को समर्पित अपनी तरह का देश का पहला सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है। इस पूरे इलाके को घने जंगल की तरह विकसित किया गया है। 200 हाथियों की भी शरणस्थली एलिफेंट हॉस्पिटल
इस प्रोजेक्ट में अब तक घायल और अकेले छोड़ दिए गए 200 हाथियों को लाया जा चुका है। हाथियों के लिए विशेष शेल्टर और जगह-जगह जलाशय भी बनाए गए हैं। इतना ही नहीं, हाथियों को उठाने के लिए क्रेन की भी व्यवस्था है। इन हाथियों का ख्याल रखने के लिए ही 500 से ज्यादा प्रशिक्षित कर्मचारी नियुक्त किए गए हैं। वनतारा में सिर्फ जानवर ही नहीं, पक्षी और सरिसृप का पुनर्वास भी शामिल हैं। यहां गेंडे, चीते समेत कई तरह के लुप्त हो रहे जानवरों का पुनर्वास किया जा रहा है। भारत ही नहीं, यहां विदेशों से भी उपेक्षित जानवरों को लाया गया है और उनकी पूरी देखभाल की जा रही है। जानवरों के लिए हाईटेक हॉस्पिटल भी
यहां जानवरों-पशु-पक्षियों के लिए हाईटेक हॉस्पिटल भी बनाया गया है। यह हॉस्पिटल करीब 25 हाजर वर्गफीट में फैला हुआ है। इसके अलावा 650 एकड़ में एक पुनर्वास सेंटर भी बनाया गया है। हॉस्पिटल में एक्स-रे मशीन, लेजर मशीन, हाइड्रोलिक सर्जिकल टेबल जैसी तमाम हाईटेक सुविधाएं मौजूद हैं। 43 प्रजातियों के 2,000 से अधिक जानवरों की शरण स्थली है वनतारा
वनतारा में 43 प्रजातियों के 2000 से अधिक जानवर बचाव एवं पुनर्वास केंद्र की देखरेख में हैं। केंद्र ने सात भारतीय और विदेशी लुप्तप्राय प्रजातियों का संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम शुरू किया है, जिसका उद्देश्य इन लुप्तप्राय जानवरों की संख्या को बढ़ाकर उन्हें उनके मूल निवास स्थान पर बहाल किया जाना है। 1200 से अधिक सरीसृपों की शरण स्थली
आज वनतारा 200 हाथियों, 300 से अधिक तेंदुओं, बाघों, शेरों, जगुआर, हिरणों जैसे 300 से अधिक शाकाहारी जीवों, मगरमच्छ, सांप और कछुओं जैसे 1200 से अधिक सरीसृपों की शरण स्थली बन चुका है। यहां तमिलनाडु की अलग-अलग जगहों से 1,000 से अधिक मगरमच्छों को भी लाकर बसाया गया है। एनिमल रेस्क्यू एंड रीहैबिलिटेशन सेंटर को मैनेज करने के लिए 2100 लोगों का स्टाफ है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने वनतारा पर लगे जल संसाधनों और कार्बन क्रेडिट के दुरुपयोग के आरोपों को ‘पूरी तरह से निराधार’ करार दिया है। प्राणी बचाव एवं पुनर्वास केंद्र वनतारा ने एक आधिकारिक बयान जारी कर यह जानकारी दी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने सोमवार को एसआईटी की उस रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया, जिसमें कहा गया है कि गुजरात के जामनगर में स्थित वनतारा के संचालन में किसी तरह का कोई कानूनी उल्लंघन नहीं पाया गया है। बयान में कहा गया है कि एसआईटी ने ‘रिलायंस फाउंडेशन’ द्वारा संचालित वनतारा को सभी प्रमुख आरोपों से मुक्त कर दिया, जिसमें यह दावा भी शामिल है कि वह ‘कार्बन क्रेडिट’ से लाभ कमाने के लिए जानवरों का अधिग्रहण कर रहा था। वनतारा ने कहा- एसआईटी की रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि जल संसाधनों और ‘कार्बन क्रेडिट’ के दुरुपयोग के आरोप पूरी तरह से निराधार थे। इनका कोई तथ्यात्मक या कानूनी आधार नहीं था। वनतारा ने न तो ऐसे किसी क्रेडिट के लिए आवेदन किया है और ना ही उसे कोई क्रेडिट मिला है। इसका काम पूरी तरह से परोपकारी माध्यमों से वित्त पोषित है। सुप्रीम कोर्ट ने 25 अगस्त को शीर्ष अदालत के एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में चार सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। न्यायालय ने मीडिया और सोशल मीडिया में आई खबरों के अलावा गैर सरकारी संगठनों और वन्यजीव संगठनों की शिकायतों के आधार पर वनतारा के खिलाफ अनियमितताओं का आरोप लगाने वाली दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान इस एसआईटी का गठन किया था। खरीद-बिक्री के नियमों में भी मिल चुकी है क्लीन चिट
इससे पहले वनतारा को सुप्रीम कोर्ट से जानवरों की खरीद-बिक्री मामले में भी क्लीन चिट मिल चुकी है। कोर्ट ने सोमवार (15 सितंबर) को कहा-जामनगर स्थित वनतारा वाइल्डलाइफ रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर में जानवरों की खरीद-बिक्री नियमों के दायरे में हुई है। इस सेंटर को अंबानी परिवार का रिलायंस फाउंडेशन चलाता है। इससे पहले SC ने 26 अगस्त को 2 पब्लिक इंटरेस्ट पिटीशन (PIL) पर SIT बनाने का आदेश दिया था। एक वकील सीआर जया सुकीन और दूसरी याचिका देव शर्मा ने जुलाई में कोल्हापुर के जैन मठ से हाथी ‘माधुरी’ को वनतारा में ले जाने के विवाद के बाद दायर की थी। अनंत अंबानी ने जानवरों के पुनर्वास को समर्पित अपने ड्रीम प्रोजेक्ट ‘वनतारा’ को लॉन्च किया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज और रिलायंस फाउंडेशन द्वारा वनतारा (स्टार ऑफ फॉरेस्ट) कार्यक्रम शुरू किया गया है। इस कार्यक्रम के तहत, घायल जानवरों का बचाव, उपचार, देखभाल और उनका पुनर्वास शामिल है। वनतारा रिलायंस के जामनगर स्थित रिफाइनरी परिसर के 3000 एकड़ ग्रीनबेल्ट में फैला हुआ है। वनतारा प्रोजेक्ट जानवरों को समर्पित अपनी तरह का देश का पहला सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है। इस पूरे इलाके को घने जंगल की तरह विकसित किया गया है। 200 हाथियों की भी शरणस्थली एलिफेंट हॉस्पिटल
इस प्रोजेक्ट में अब तक घायल और अकेले छोड़ दिए गए 200 हाथियों को लाया जा चुका है। हाथियों के लिए विशेष शेल्टर और जगह-जगह जलाशय भी बनाए गए हैं। इतना ही नहीं, हाथियों को उठाने के लिए क्रेन की भी व्यवस्था है। इन हाथियों का ख्याल रखने के लिए ही 500 से ज्यादा प्रशिक्षित कर्मचारी नियुक्त किए गए हैं। वनतारा में सिर्फ जानवर ही नहीं, पक्षी और सरिसृप का पुनर्वास भी शामिल हैं। यहां गेंडे, चीते समेत कई तरह के लुप्त हो रहे जानवरों का पुनर्वास किया जा रहा है। भारत ही नहीं, यहां विदेशों से भी उपेक्षित जानवरों को लाया गया है और उनकी पूरी देखभाल की जा रही है। जानवरों के लिए हाईटेक हॉस्पिटल भी
यहां जानवरों-पशु-पक्षियों के लिए हाईटेक हॉस्पिटल भी बनाया गया है। यह हॉस्पिटल करीब 25 हाजर वर्गफीट में फैला हुआ है। इसके अलावा 650 एकड़ में एक पुनर्वास सेंटर भी बनाया गया है। हॉस्पिटल में एक्स-रे मशीन, लेजर मशीन, हाइड्रोलिक सर्जिकल टेबल जैसी तमाम हाईटेक सुविधाएं मौजूद हैं। 43 प्रजातियों के 2,000 से अधिक जानवरों की शरण स्थली है वनतारा
वनतारा में 43 प्रजातियों के 2000 से अधिक जानवर बचाव एवं पुनर्वास केंद्र की देखरेख में हैं। केंद्र ने सात भारतीय और विदेशी लुप्तप्राय प्रजातियों का संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम शुरू किया है, जिसका उद्देश्य इन लुप्तप्राय जानवरों की संख्या को बढ़ाकर उन्हें उनके मूल निवास स्थान पर बहाल किया जाना है। 1200 से अधिक सरीसृपों की शरण स्थली
आज वनतारा 200 हाथियों, 300 से अधिक तेंदुओं, बाघों, शेरों, जगुआर, हिरणों जैसे 300 से अधिक शाकाहारी जीवों, मगरमच्छ, सांप और कछुओं जैसे 1200 से अधिक सरीसृपों की शरण स्थली बन चुका है। यहां तमिलनाडु की अलग-अलग जगहों से 1,000 से अधिक मगरमच्छों को भी लाकर बसाया गया है। एनिमल रेस्क्यू एंड रीहैबिलिटेशन सेंटर को मैनेज करने के लिए 2100 लोगों का स्टाफ है।