सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार को ट्रिब्यूनलों की बदहाल स्थिति पर फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव की वजह से हाईकोर्ट जज ट्रिब्यूनलों में पोस्ट-रिटायरमेंट रोल लेने से बच रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि सरकार हालात सुधार नहीं सकती तो सभी ट्रिब्यूनल बंद कर देना चाहिए। यहां आने वाले मामलों को हाईकोर्ट को भेजा जाना चाहिए। ट्रिब्यूनल में हाईकोर्ट की नियुक्ति की याचिका NGT बार एसोसिएशन वेस्टर्न जोन ने लगाई है। दरअसल, यह मामला वेस्टर्न जोन के ट्रिब्यूनल में 2 जजों की नियुक्ति से जुड़ा है। नियुक्ति पत्र जारी होने के बाद भी इन्होंने पदभार ग्रहण नहीं किया था। अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर को होगी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और आर. महादेवन ने कहा कि यह कमी केंद्र सरकार की वजह से है। उसने ट्रिब्यूनल बनाए लेकिन उन्हें चलाने के लिए पर्याप्त बजट या संसाधन नहीं दिए। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा- हम रिटायर जजों के जॉइन नहीं करने में कोई कोई दोष नहीं देखते हैं। एजेंसियों को देखना चाहिए कि क्या खामियां हैं। एक समान तरीका अपनाया जाए, जिससे आप बुनियादी ढांचा और सुविधाएं प्रदान कर सकें। आखिरकार, वे सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस और पूर्व जज हैं।
कोर्ट रूम LIVE सुप्रीम कोर्ट: एडिशनल सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी से कहा, “संसद ने अधिनियम पारित किए हैं। न्यायिक प्रभाव को नहीं लिया गया। कोई खर्च नहीं दिया जाता। उन्हें स्टेशनरी, आवास, कार की भीख मांगनी पड़ती है। आपके विभाग की सबसे जर्जर कार ट्रिब्यूनल अध्यक्ष को दी जाती है। आप पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और जजों के साथ कैसा व्यवहार कर रहे हैं?
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल: 2 सेवानिवृत्त जजों ने नियुक्ति मिलने के बावजूद कार्यभार ग्रहण करने से इनकार कर दिया, इससे पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी पड़ेगी। जस्टिस महादेवन: पिछले हफ्ते, जस्टिस पारदीवाला और जस्टिस महादेवन की खंडपीठ ने एक फैसला सुनाया था, जिसमें केंद्र को NCLT में सुविधाओं को बेहतर करने का आदेश दिया था। एएसजी बनर्जी: कुछ स्थितियों में पूर्व जज दिल्ली से बाहर नियुक्ति स्वीकार करने को तैयार नहीं होते। देश में हैं 10 से ज्यादा ट्रिब्यूनल
प्रशासनिक: सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल, स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल
कर: आयकर अपीलीय ट्रिब्यूनल, सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और सेवा कर अपीलीय ट्रिब्यूनल
श्रम: केंद्रीय सरकारी औद्योगिक ट्रिब्यूनल
उपभोक्ता: राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग
कंपनी/कॉरपोरेट: राष्ट्रीय कंपनी कानून ट्रिब्यूनल, राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय ट्रिब्यूनल
पर्यावरण: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल
वित्तीय/प्रतिभूति: ऋण वसूली ट्रिब्यूनल, सिक्योरिटीस अपीलीय ट्रिब्यूनल
सशस्त्र बल: सशस्त्र बल ट्रिब्यूनल
दूरसंचार: दूरसंचार डिस्प्यूट सेटलमेंट और अपीलीय ट्रिब्यूनल ……………… सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट ने अंबानी के वनतारा को क्लीनचिट दी:कहा- जानवरों की खरीद-बिक्री कानूनी; जैन मठ से हथिनी की शिफ्टिंग पर विवाद सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा, ‘जामनगर स्थित वनतारा वाइल्डलाइफ रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर में जानवरों की खरीद-बिक्री नियमों के दायरे में हुई है।’ इस सेंटर को अंबानी परिवार का रिलायंस फाउंडेशन चलाता है। कोर्ट ने कहा कि विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट में कोई गड़बड़ी नहीं मिली है। जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने कहा- अब इस मामले को बार-बार उठाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। स्वतंत्र समिति ने जांच की है और हम उसी पर भरोसा करेंगे। इससे पहले SC ने 26 अगस्त को 2 पब्लिक इंटरेस्ट पिटीशन (PIL) पर SIT बनाने का आदेश दिया था। एक वकील सीआर जया सुकीन और दूसरी याचिका देव शर्मा ने जुलाई में कोल्हापुर के जैन मठ से हाथी ‘माधुरी’ को वनतारा में ले जाने के विवाद के बाद दायर की थी। पढ़ें पूरी खबर…
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार को ट्रिब्यूनलों की बदहाल स्थिति पर फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव की वजह से हाईकोर्ट जज ट्रिब्यूनलों में पोस्ट-रिटायरमेंट रोल लेने से बच रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि सरकार हालात सुधार नहीं सकती तो सभी ट्रिब्यूनल बंद कर देना चाहिए। यहां आने वाले मामलों को हाईकोर्ट को भेजा जाना चाहिए। ट्रिब्यूनल में हाईकोर्ट की नियुक्ति की याचिका NGT बार एसोसिएशन वेस्टर्न जोन ने लगाई है। दरअसल, यह मामला वेस्टर्न जोन के ट्रिब्यूनल में 2 जजों की नियुक्ति से जुड़ा है। नियुक्ति पत्र जारी होने के बाद भी इन्होंने पदभार ग्रहण नहीं किया था। अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर को होगी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और आर. महादेवन ने कहा कि यह कमी केंद्र सरकार की वजह से है। उसने ट्रिब्यूनल बनाए लेकिन उन्हें चलाने के लिए पर्याप्त बजट या संसाधन नहीं दिए। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा- हम रिटायर जजों के जॉइन नहीं करने में कोई कोई दोष नहीं देखते हैं। एजेंसियों को देखना चाहिए कि क्या खामियां हैं। एक समान तरीका अपनाया जाए, जिससे आप बुनियादी ढांचा और सुविधाएं प्रदान कर सकें। आखिरकार, वे सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस और पूर्व जज हैं।
कोर्ट रूम LIVE सुप्रीम कोर्ट: एडिशनल सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी से कहा, “संसद ने अधिनियम पारित किए हैं। न्यायिक प्रभाव को नहीं लिया गया। कोई खर्च नहीं दिया जाता। उन्हें स्टेशनरी, आवास, कार की भीख मांगनी पड़ती है। आपके विभाग की सबसे जर्जर कार ट्रिब्यूनल अध्यक्ष को दी जाती है। आप पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और जजों के साथ कैसा व्यवहार कर रहे हैं?
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल: 2 सेवानिवृत्त जजों ने नियुक्ति मिलने के बावजूद कार्यभार ग्रहण करने से इनकार कर दिया, इससे पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी पड़ेगी। जस्टिस महादेवन: पिछले हफ्ते, जस्टिस पारदीवाला और जस्टिस महादेवन की खंडपीठ ने एक फैसला सुनाया था, जिसमें केंद्र को NCLT में सुविधाओं को बेहतर करने का आदेश दिया था। एएसजी बनर्जी: कुछ स्थितियों में पूर्व जज दिल्ली से बाहर नियुक्ति स्वीकार करने को तैयार नहीं होते। देश में हैं 10 से ज्यादा ट्रिब्यूनल
प्रशासनिक: सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल, स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल
कर: आयकर अपीलीय ट्रिब्यूनल, सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और सेवा कर अपीलीय ट्रिब्यूनल
श्रम: केंद्रीय सरकारी औद्योगिक ट्रिब्यूनल
उपभोक्ता: राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग
कंपनी/कॉरपोरेट: राष्ट्रीय कंपनी कानून ट्रिब्यूनल, राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय ट्रिब्यूनल
पर्यावरण: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल
वित्तीय/प्रतिभूति: ऋण वसूली ट्रिब्यूनल, सिक्योरिटीस अपीलीय ट्रिब्यूनल
सशस्त्र बल: सशस्त्र बल ट्रिब्यूनल
दूरसंचार: दूरसंचार डिस्प्यूट सेटलमेंट और अपीलीय ट्रिब्यूनल ……………… सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट ने अंबानी के वनतारा को क्लीनचिट दी:कहा- जानवरों की खरीद-बिक्री कानूनी; जैन मठ से हथिनी की शिफ्टिंग पर विवाद सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा, ‘जामनगर स्थित वनतारा वाइल्डलाइफ रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर में जानवरों की खरीद-बिक्री नियमों के दायरे में हुई है।’ इस सेंटर को अंबानी परिवार का रिलायंस फाउंडेशन चलाता है। कोर्ट ने कहा कि विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट में कोई गड़बड़ी नहीं मिली है। जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने कहा- अब इस मामले को बार-बार उठाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। स्वतंत्र समिति ने जांच की है और हम उसी पर भरोसा करेंगे। इससे पहले SC ने 26 अगस्त को 2 पब्लिक इंटरेस्ट पिटीशन (PIL) पर SIT बनाने का आदेश दिया था। एक वकील सीआर जया सुकीन और दूसरी याचिका देव शर्मा ने जुलाई में कोल्हापुर के जैन मठ से हाथी ‘माधुरी’ को वनतारा में ले जाने के विवाद के बाद दायर की थी। पढ़ें पूरी खबर…