दौसा के बद्री प्रसाद (65) ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर देवस्थान विभाग की वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना 2025 के लिए आवेदन किया था। लॉटरी निकली तो उसमें केवल पत्नी का ही नाम था। बद्री प्रसाद का नाम लॉटरी में नहीं निकला। उम्र के इस पड़ाव पर बिना पति के उनकी पत्नी का अकेले यात्रा पर जाना संभव ही नहीं है। बद्री प्रसाद की तरह पत्नी के साथ यात्रा करने की इच्छा रखने वाले कई दंपती हर रोज देवस्थान विभाग के दफ्तर के चक्कर लगा रहे हैं। किसी के पति का नाम आया तो पत्नी छूट गई। कहीं पत्नी का चयन हुआ तो पति बाहर रह गया। कुछ मामलों में तो गड़बड़ी इतनी बढ़ी कि पति का नाम रेल यात्रा वालों की सूची में आया और पत्नी का नाम हवाई यात्रा में। अब सवाल यह है कि धर्मस्थलों की यात्रा पति-पत्नी अलग-अलग कैसे कर पाएंगे। 50 हजार को AC ट्रेन और 6 हजार को प्लेन से करवानी है यात्रा
देवस्थान विभाग के माध्यम से राज्य के वरिष्ठ नागरिकों के लिए हर साल तीर्थ यात्रा योजना चलाई जाती है। इस साल वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना 2025 के अंतर्गत 50 हजार वरिष्ठ नागरिकों को रेल मार्ग से और 6 हजार को हवाई मार्ग से यात्रा कराने का लक्ष्य रखा गया है। यानी कुल 56 हजार वरिष्ठ नागरिकों को इस योजना के जरिए धार्मिक स्थलों तक पहुंचाना है। 10 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया चली। इनमें 1 लाख 84 हजार से अधिक यात्रियों ने आवेदन किया। चयन प्रक्रिया लॉटरी के जरिए की गई। लॉटरी में नाम आने के बाद ही यह तकनीकी खामी स्पष्ट रूप से सामने आई है। तकनीकी गड़बड़ी बनी परेशानी की जड़
देवस्थान विभाग के अधिकारियों की मानें वेबसाइट https://devasthan.rajasthan.gov.in पर फॉर्म भरते समय ही तकनीकी एरर आ गया था। जिन दंपती ने साथ में आवेदन किया, उनके फॉर्म में या तो नाम कट गए, या फोटो गायब हो गए, या डेटा अलग-अलग श्रेणियों में चला गया। यह जानकारी विभाग के उच्च अधिकारियों को उसी समय दी गई थी। समय रहते पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। अब लॉटरी के बाद हजारों बुजुर्ग दंपती की परेशानी सामने आ रही है। कई आवेदक बताते हैं- हमने साफ-साफ पति-पत्नी के नाम एक साथ भर दिए थे। लिस्ट में नाम आते समय सिस्टम ने खुद ही हमें अलग कर दिया। फॉर्म में एडिटिंग का ऑप्शन ही नहीं
पोर्टल पर फॉर्म संबंधी गड़बड़ियों का एक बड़ा कारण यह भी रहा कि आवेदन सब्मिट करने के बाद उसमें किसी भी तरह का एडिटिंग का ऑप्शन नहीं दिया गया था। अगर फॉर्म भरते समय किसी आवेदक से कोई डॉक्यूमेंट या जानकारी छूट गई तो उसे दोबारा सुधारने का मौका नहीं मिला। यही वजह रही कि कई फॉर्म अधूरे या गलत सब्मिट हो गए। इसके अलावा ई-मित्र केंद्रों पर भरे गए फॉर्म में भी गड़बड़ी सामने आई है। कई जगहों पर लालच के चलते ई-मित्र संचालकों ने एक ही दंपती के नाम से दो-दो अलग-अलग जगह पर यात्रा के फॉर्म भर दिए। नतीजा यह हुआ कि लॉटरी में पति-पत्नी में से सिर्फ एक का ही नाम आया और दूसरा बाहर रह गया। बुजुर्ग दंपती से सुनिए, उनकी परेशानी केस-1
जयपुर निवासी दंपती ने पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि उन्होंने काठमांडू जाने के लिए हवाई यात्रा का फॉर्म भरा था। उसमें केवल पति का नाम आया, जबकि पत्नी का नाम ट्रेन की पहली सूची में रामेश्वरम की यात्रा में आ गया। ऐसे में अब दोनों के लिए साथ यात्रा करना मुश्किल है। दंपती ने भास्कर को अपनी यात्रा से जुड़े दस्तावेज दिखाते हुए कहा- यदि इस बार अकेले चले जाते हैं, तो अगली बार भी दोनों साथ नहीं जा पाएंगे। इसकी वजह सरकार का नियम है। जनआधार कार्ड से यात्रा का मौका केवल एक बार ही मिलता है। केस-2
जयपुर सांगानेर निवासी कौशल्या देवी का नाम फ्लाइट से नेपाल जाने वाली सूची में आया है। उनके पति दुर्गादास शर्मा का नाम छूट गया। कौशल्या देवी से जब दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने बात की तो उन्होंने दुखी मन से कहा- मेरे पति और मैं बुजुर्ग हैं। बीमार रहते हैं। मैं अकेले यात्रा नहीं कर सकती। हमें साथ भेजा जाए नहीं तो हम दोनों ही घर पर रह जाएंगे। दुर्गादास शर्मा ने बताया कि उन्होंने फॉर्म भरा था। दोनों के नाम थे। लेकिन एक का ही नाम आया है। अब क्या करें समझ नहीं आ रहा है। केस-3
जैसलमेर रामदेवरा निवासी 65 साल के गोपीलाल बताते हैं- हमने एक ही फॉर्म भरा था, जिसमें अपना और अपनी पत्नी विंध्या (60) दोनों का नाम लिखा था। पत्नी का नाम ट्रेन से यात्रा पर जाने वाली मुख्य सूची में आ गया। मेरा किसी भी लिस्ट में नाम नहीं आया है। पत्नी का तो अकेले जाना संभव ही नहीं है। अगर उन्हें भेज भी देते हैं तो एक यात्रा के बाद आगे की यात्रा के लिए जनाधार लॉक हो जाएगा। फिर मैं कभी नहीं जा पाऊंगा। सरकार को हमारे लिए सोचना चाहिए। शिकायतें बढ़ीं, लेकिन समाधान नहीं
देवस्थान विभाग के सामने अब रोजाना दर्जनों शिकायतें पहुंच रही हैं। दंपती का अलग-अलग सूची में बंटे होने या एक का नाम आने और दूसरे का छूट जाने की समस्या बार-बार दोहराई जा रही है। विभाग के अधिकारी तकनीकी गड़बड़ी को मान रहे हैं। लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। विभाग का कहना है- लॉटरी प्रक्रिया पूरी तरह कम्प्यूटराइज्ड है। किसी भी अधिकारी का इसमें हाथ नहीं है। तकनीकी गड़बड़ी जरूर हुई है, उसका समाधान तलाश रहे हैं। रिपोर्ट मांगकर उचित रास्ता निकालेंगे
देवस्थान विभाग के अतिरिक्त आयुक्त अशोक कुमार ने बताया- 60-70 हजार ऐसे लोग हैं, जो जीवन साथी या सहायक के साथ जा रहे हैं तो टेक्निकल समस्या तो नहीं है। फॉर्म भरने के बाद एडिटिंग का ऑप्शन नहीं था, जिसके कारण कुछ नाम छूट सकते हैं। फिर भी अगर इस तरह की समस्या आई है तो हम इसे जरूर दिखाएंगे। इसके लिए हम सभी संबधित अधिकारियों से जानकारी प्राप्त करके रिपोर्ट मांगेंगे। फिर शिकायतों के आधार पर उचित निर्णय जरूर लिया जाएगा। ताकि बुजुर्गों की समस्या का समाधान हो। साथ ही जिन मामलों में पति-पत्नी दोनों का हो गया है, लेकिन नाम अलग-अलग लिस्ट में आया है, उनके लिए भी उचित रास्ता निकाला जाएगा। भविष्य में ये समस्या नहीं हो इसके लिए पोर्टल को भी अपडेट करवाने के लिए लिखेंगे।
दौसा के बद्री प्रसाद (65) ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर देवस्थान विभाग की वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना 2025 के लिए आवेदन किया था। लॉटरी निकली तो उसमें केवल पत्नी का ही नाम था। बद्री प्रसाद का नाम लॉटरी में नहीं निकला। उम्र के इस पड़ाव पर बिना पति के उनकी पत्नी का अकेले यात्रा पर जाना संभव ही नहीं है। बद्री प्रसाद की तरह पत्नी के साथ यात्रा करने की इच्छा रखने वाले कई दंपती हर रोज देवस्थान विभाग के दफ्तर के चक्कर लगा रहे हैं। किसी के पति का नाम आया तो पत्नी छूट गई। कहीं पत्नी का चयन हुआ तो पति बाहर रह गया। कुछ मामलों में तो गड़बड़ी इतनी बढ़ी कि पति का नाम रेल यात्रा वालों की सूची में आया और पत्नी का नाम हवाई यात्रा में। अब सवाल यह है कि धर्मस्थलों की यात्रा पति-पत्नी अलग-अलग कैसे कर पाएंगे। 50 हजार को AC ट्रेन और 6 हजार को प्लेन से करवानी है यात्रा
देवस्थान विभाग के माध्यम से राज्य के वरिष्ठ नागरिकों के लिए हर साल तीर्थ यात्रा योजना चलाई जाती है। इस साल वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना 2025 के अंतर्गत 50 हजार वरिष्ठ नागरिकों को रेल मार्ग से और 6 हजार को हवाई मार्ग से यात्रा कराने का लक्ष्य रखा गया है। यानी कुल 56 हजार वरिष्ठ नागरिकों को इस योजना के जरिए धार्मिक स्थलों तक पहुंचाना है। 10 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया चली। इनमें 1 लाख 84 हजार से अधिक यात्रियों ने आवेदन किया। चयन प्रक्रिया लॉटरी के जरिए की गई। लॉटरी में नाम आने के बाद ही यह तकनीकी खामी स्पष्ट रूप से सामने आई है। तकनीकी गड़बड़ी बनी परेशानी की जड़
देवस्थान विभाग के अधिकारियों की मानें वेबसाइट https://devasthan.rajasthan.gov.in पर फॉर्म भरते समय ही तकनीकी एरर आ गया था। जिन दंपती ने साथ में आवेदन किया, उनके फॉर्म में या तो नाम कट गए, या फोटो गायब हो गए, या डेटा अलग-अलग श्रेणियों में चला गया। यह जानकारी विभाग के उच्च अधिकारियों को उसी समय दी गई थी। समय रहते पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। अब लॉटरी के बाद हजारों बुजुर्ग दंपती की परेशानी सामने आ रही है। कई आवेदक बताते हैं- हमने साफ-साफ पति-पत्नी के नाम एक साथ भर दिए थे। लिस्ट में नाम आते समय सिस्टम ने खुद ही हमें अलग कर दिया। फॉर्म में एडिटिंग का ऑप्शन ही नहीं
पोर्टल पर फॉर्म संबंधी गड़बड़ियों का एक बड़ा कारण यह भी रहा कि आवेदन सब्मिट करने के बाद उसमें किसी भी तरह का एडिटिंग का ऑप्शन नहीं दिया गया था। अगर फॉर्म भरते समय किसी आवेदक से कोई डॉक्यूमेंट या जानकारी छूट गई तो उसे दोबारा सुधारने का मौका नहीं मिला। यही वजह रही कि कई फॉर्म अधूरे या गलत सब्मिट हो गए। इसके अलावा ई-मित्र केंद्रों पर भरे गए फॉर्म में भी गड़बड़ी सामने आई है। कई जगहों पर लालच के चलते ई-मित्र संचालकों ने एक ही दंपती के नाम से दो-दो अलग-अलग जगह पर यात्रा के फॉर्म भर दिए। नतीजा यह हुआ कि लॉटरी में पति-पत्नी में से सिर्फ एक का ही नाम आया और दूसरा बाहर रह गया। बुजुर्ग दंपती से सुनिए, उनकी परेशानी केस-1
जयपुर निवासी दंपती ने पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि उन्होंने काठमांडू जाने के लिए हवाई यात्रा का फॉर्म भरा था। उसमें केवल पति का नाम आया, जबकि पत्नी का नाम ट्रेन की पहली सूची में रामेश्वरम की यात्रा में आ गया। ऐसे में अब दोनों के लिए साथ यात्रा करना मुश्किल है। दंपती ने भास्कर को अपनी यात्रा से जुड़े दस्तावेज दिखाते हुए कहा- यदि इस बार अकेले चले जाते हैं, तो अगली बार भी दोनों साथ नहीं जा पाएंगे। इसकी वजह सरकार का नियम है। जनआधार कार्ड से यात्रा का मौका केवल एक बार ही मिलता है। केस-2
जयपुर सांगानेर निवासी कौशल्या देवी का नाम फ्लाइट से नेपाल जाने वाली सूची में आया है। उनके पति दुर्गादास शर्मा का नाम छूट गया। कौशल्या देवी से जब दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने बात की तो उन्होंने दुखी मन से कहा- मेरे पति और मैं बुजुर्ग हैं। बीमार रहते हैं। मैं अकेले यात्रा नहीं कर सकती। हमें साथ भेजा जाए नहीं तो हम दोनों ही घर पर रह जाएंगे। दुर्गादास शर्मा ने बताया कि उन्होंने फॉर्म भरा था। दोनों के नाम थे। लेकिन एक का ही नाम आया है। अब क्या करें समझ नहीं आ रहा है। केस-3
जैसलमेर रामदेवरा निवासी 65 साल के गोपीलाल बताते हैं- हमने एक ही फॉर्म भरा था, जिसमें अपना और अपनी पत्नी विंध्या (60) दोनों का नाम लिखा था। पत्नी का नाम ट्रेन से यात्रा पर जाने वाली मुख्य सूची में आ गया। मेरा किसी भी लिस्ट में नाम नहीं आया है। पत्नी का तो अकेले जाना संभव ही नहीं है। अगर उन्हें भेज भी देते हैं तो एक यात्रा के बाद आगे की यात्रा के लिए जनाधार लॉक हो जाएगा। फिर मैं कभी नहीं जा पाऊंगा। सरकार को हमारे लिए सोचना चाहिए। शिकायतें बढ़ीं, लेकिन समाधान नहीं
देवस्थान विभाग के सामने अब रोजाना दर्जनों शिकायतें पहुंच रही हैं। दंपती का अलग-अलग सूची में बंटे होने या एक का नाम आने और दूसरे का छूट जाने की समस्या बार-बार दोहराई जा रही है। विभाग के अधिकारी तकनीकी गड़बड़ी को मान रहे हैं। लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। विभाग का कहना है- लॉटरी प्रक्रिया पूरी तरह कम्प्यूटराइज्ड है। किसी भी अधिकारी का इसमें हाथ नहीं है। तकनीकी गड़बड़ी जरूर हुई है, उसका समाधान तलाश रहे हैं। रिपोर्ट मांगकर उचित रास्ता निकालेंगे
देवस्थान विभाग के अतिरिक्त आयुक्त अशोक कुमार ने बताया- 60-70 हजार ऐसे लोग हैं, जो जीवन साथी या सहायक के साथ जा रहे हैं तो टेक्निकल समस्या तो नहीं है। फॉर्म भरने के बाद एडिटिंग का ऑप्शन नहीं था, जिसके कारण कुछ नाम छूट सकते हैं। फिर भी अगर इस तरह की समस्या आई है तो हम इसे जरूर दिखाएंगे। इसके लिए हम सभी संबधित अधिकारियों से जानकारी प्राप्त करके रिपोर्ट मांगेंगे। फिर शिकायतों के आधार पर उचित निर्णय जरूर लिया जाएगा। ताकि बुजुर्गों की समस्या का समाधान हो। साथ ही जिन मामलों में पति-पत्नी दोनों का हो गया है, लेकिन नाम अलग-अलग लिस्ट में आया है, उनके लिए भी उचित रास्ता निकाला जाएगा। भविष्य में ये समस्या नहीं हो इसके लिए पोर्टल को भी अपडेट करवाने के लिए लिखेंगे।