शास्त्रीय संगीत के जाने-माने कलाकार और पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र की तबीयत गुरुवार रात अचानक बिगड़ गई। उन्हें सीने में दर्द होने लगा। उस समय वह मिर्जापुर में अपनी बेटी प्रो. नम्रता मिश्र के आवास पर थे, उन्हें तत्काल वहां के रामकृष्ण सेवाश्रम हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया। डॉक्टरों ने बताया कि पंडित छन्नूलाल को माइनर हार्टअटैक आया है। इसके बाद डाक्टरों की सलाह पर उन्हें शनिवार रात BHU के सर सुंदरलाल अस्पताल लाया गया। यहां उन्हें सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में भर्ती कराया गया। पंडित छन्नूलाल मिश्र लोकसभा चुनाव 2014 में पीएम मोदी के प्रस्तावक थे। एक्सपर्ट डॉक्टरों की निगरानी में ICU में इलाज
BHU में डॉक्टरों की टीम ने पंडित छन्नूलाल की जांच की। उन्हें तुरंत ICU में शिफ्ट कर दिया गया। IMS BHU के डायरेक्टर प्रो. एसएन संखवार की निगरानी में विशेषज्ञों की टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर रखे हुए है। फिलहाल डॉक्टरों के अनुसार, उनकी हालत स्थिर बनी हुई है। लेकिन, पंडित छन्नूलाल की 89 साल की उम्र और अन्य स्वास्थ्य कठिनाइयों को देखते हुए सतर्कता बरती जा रही है। शुगर लेवल और हीमोग्लोबिन की कमी भी
छन्नूलाल मिश्र की बेटी प्रो. नम्रता मिश्र ने बताया- बीते कुछ दिनों से पिताजी का शुगर लेवल काफी बढ़ गया था। साथ ही हीमोग्लोबिन का स्तर भी गिर गया था। इन दोनों कारणों से उनकी तबीयत में अचानक गिरावट आई, जिसके चलते माइनर हार्टअटैक हुआ। MLC धर्मेंद्र राय और सुरेश सिंह ने लिया हालचाल
छन्नूलाल मिश्र की तबीयत खराब होने की खबर मिलते ही वाराणसी और मिर्जापुर के कई जनप्रतिनिधि लोग अस्पताल पहुंचे। MLC धर्मेंद्र राय और सुरेश सिंह ने देर रात अस्पताल पहुंचकर उनका हालचाल लिया। IMS BHU के डायरेक्टर से इलाज और स्वास्थ्य की पूरी जानकारी ली। चंदौली के सांसद वीरेंद्र सिंह सहित सपा पदाधिकारियों ने BHU अस्पताल पहुंच कर हालचाल जाना। आजमगढ़ के हरिहरपुर में जन्मे छन्नूलाल
पंडित छन्नूलाल मिश्र का जन्म 3 अगस्त 1936 को यूपी के आजमगढ़ स्थित हरिहरपुर में हुआ। उनके दादा गुदई महाराज शांता प्रसाद एक प्रसिद्ध तबला वादक थे। छन्नूलाल ने छह साल की उम्र में ही अपने पिता बद्री प्रसाद मिश्र से संगीत की बारीकियां सीखी। छन्नूलाल को 9 साल की उम्र में उनके पहले गुरु उस्ताद गनी अली साहब ने खयाल सिखाया। उन्होंने पहले अपने पिता बद्री प्रसाद मिश्रा के साथ संगीत सीखा और तब किराना घराने के ‘उस्ताद अब्दुल गनी खान’ ने उन्हें शिक्षित किया। इसके बाद ठाकुर जयदेव सिंह ने उन्हें प्रशिक्षित किया। बिहार में सांगीतिक पढ़ाई, 4 दशक पहले वाराणसी आए
पंडित छन्नूलाल को खयाल, ठुमरी, भजन, दादरा, कजरी और चैती के लिए जाना जाता है। इनकी सांगीतिक शिक्षा बिहार के मुजफ्फरपुर में हुई। करीब 4 दशक पहले पंडित छन्नूलाल वाराणसी चले आए। यहां अपनी संगीत साधना की धार को और तेज किया। ठुमरी, दादरा, कजरी, चैती जैसी शास्त्रीय-लोक विधाओं के अनूठे संगम के लिए देश-विदेश में विख्यात हैं। मोदी के प्रस्तावक रहे, पद्मभूषण और पद्मविभूषण से सम्मानित हुए
पंडित छन्नूलाल मिश्र ने धर्म नगरी काशी को अपनी कर्मभूमि बनाया। उन्होंने यहीं रहकर शास्त्रीय संगीत में महारथ हासिल की। वर्ष 2000 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 2010 में उन्हें पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया। फिर 2014 में वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक बने। वहीं 2020 में उन्हें पद्मविभूषण सम्मान से नवाजा गया। खेले मसाने में होली… संगीत छन्नूलाल का
शास्त्रीय संगीत से पं. छन्नूलाल मिश्र ने लोगों के दिलों में जगह बनाई। उनका खेले मसाने में होली का गीत आज भी हर किसी की जुबां पर है। बीते 2 साल से वह गुमनामी की जिदंगी जीने के लिए मजबूर हैं। वजह उनके द्वारा बनाई गई संपत्ति है। 4 बेटियों में बड़ी बेटी संगीता का कोरोना के समय निधन हो चुका है। अनिता और ममता मिश्र की शादी हो गई है। सबसे छोटी बेटी नम्रता मिश्र केबीपीजी कॉलेज में संगीत विभाग में प्रोफेसर हैं। पंडित छन्नूलाल मिश्र मिर्जापुर में सबसे छोटी बेटी नम्रता के घर पर ही रह रहे हैं। बहनों और इकलौते भाई रामकुमार में प्रॉपर्टी को लेकर विवाद चल रहा है। 4 दिन में कोरोना से पत्नी और बेटी ने दम तोड़ा था
पंडित छन्नूलाल मिश्रा की पत्नी मनोरमा मिश्रा की मौत 26 अप्रैल 2021 को हुई थी। वह कोरोना संक्रमित थीं और वाराणसी के एक निजी अस्पताल में भर्ती थीं। इसके बाद 29 अप्रैल 2021 को बड़ी बेटी संगीता मिश्रा की मौत मैदागिन स्थित निजी अस्पताल में हुई। संगीता भी कोरोना संक्रमित थीं और 7 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहीं। छन्नूलाल ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया था। —————— ये खबर भी पढ़िए- भाइयों की नौकरी छूटी, बच्चों ने स्कूल नहीं देखा: हाथरस कांड का पीड़ित परिवार बोला- 5 साल से कैदी बने, घर पर CRPF का पहरा ‘हमारा पूरा परिवार 5 साल से CRPF की सुरक्षा में कैद है। हम घर के गेट पर खड़े ठेले से सब्जी खरीदने जाएंगे, तो CRPF के रजिस्टर में एंट्री करनी होगी। दवा लेने अस्पताल या मेडिकल स्टोर जाना है, तो CRPF की गाड़ी में जाएंगे। ऐसे में हम खेती-बाड़ी कैसे करें? नौकरी कैसे करें? अपने बच्चों को कैसे पढ़ाएं? सबसे बेहतर है कि हमें दूसरे शहर में शिफ्ट कर दिया जाए। जिससे हम बिना सुरक्षा रहकर नौकरी करके अपना घर चला सकें।’ यह दर्द है हाथरस कांड की पीड़िता के भाई का है। पढ़ें पूरी खबर…
शास्त्रीय संगीत के जाने-माने कलाकार और पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र की तबीयत गुरुवार रात अचानक बिगड़ गई। उन्हें सीने में दर्द होने लगा। उस समय वह मिर्जापुर में अपनी बेटी प्रो. नम्रता मिश्र के आवास पर थे, उन्हें तत्काल वहां के रामकृष्ण सेवाश्रम हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया। डॉक्टरों ने बताया कि पंडित छन्नूलाल को माइनर हार्टअटैक आया है। इसके बाद डाक्टरों की सलाह पर उन्हें शनिवार रात BHU के सर सुंदरलाल अस्पताल लाया गया। यहां उन्हें सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में भर्ती कराया गया। पंडित छन्नूलाल मिश्र लोकसभा चुनाव 2014 में पीएम मोदी के प्रस्तावक थे। एक्सपर्ट डॉक्टरों की निगरानी में ICU में इलाज
BHU में डॉक्टरों की टीम ने पंडित छन्नूलाल की जांच की। उन्हें तुरंत ICU में शिफ्ट कर दिया गया। IMS BHU के डायरेक्टर प्रो. एसएन संखवार की निगरानी में विशेषज्ञों की टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर रखे हुए है। फिलहाल डॉक्टरों के अनुसार, उनकी हालत स्थिर बनी हुई है। लेकिन, पंडित छन्नूलाल की 89 साल की उम्र और अन्य स्वास्थ्य कठिनाइयों को देखते हुए सतर्कता बरती जा रही है। शुगर लेवल और हीमोग्लोबिन की कमी भी
छन्नूलाल मिश्र की बेटी प्रो. नम्रता मिश्र ने बताया- बीते कुछ दिनों से पिताजी का शुगर लेवल काफी बढ़ गया था। साथ ही हीमोग्लोबिन का स्तर भी गिर गया था। इन दोनों कारणों से उनकी तबीयत में अचानक गिरावट आई, जिसके चलते माइनर हार्टअटैक हुआ। MLC धर्मेंद्र राय और सुरेश सिंह ने लिया हालचाल
छन्नूलाल मिश्र की तबीयत खराब होने की खबर मिलते ही वाराणसी और मिर्जापुर के कई जनप्रतिनिधि लोग अस्पताल पहुंचे। MLC धर्मेंद्र राय और सुरेश सिंह ने देर रात अस्पताल पहुंचकर उनका हालचाल लिया। IMS BHU के डायरेक्टर से इलाज और स्वास्थ्य की पूरी जानकारी ली। चंदौली के सांसद वीरेंद्र सिंह सहित सपा पदाधिकारियों ने BHU अस्पताल पहुंच कर हालचाल जाना। आजमगढ़ के हरिहरपुर में जन्मे छन्नूलाल
पंडित छन्नूलाल मिश्र का जन्म 3 अगस्त 1936 को यूपी के आजमगढ़ स्थित हरिहरपुर में हुआ। उनके दादा गुदई महाराज शांता प्रसाद एक प्रसिद्ध तबला वादक थे। छन्नूलाल ने छह साल की उम्र में ही अपने पिता बद्री प्रसाद मिश्र से संगीत की बारीकियां सीखी। छन्नूलाल को 9 साल की उम्र में उनके पहले गुरु उस्ताद गनी अली साहब ने खयाल सिखाया। उन्होंने पहले अपने पिता बद्री प्रसाद मिश्रा के साथ संगीत सीखा और तब किराना घराने के ‘उस्ताद अब्दुल गनी खान’ ने उन्हें शिक्षित किया। इसके बाद ठाकुर जयदेव सिंह ने उन्हें प्रशिक्षित किया। बिहार में सांगीतिक पढ़ाई, 4 दशक पहले वाराणसी आए
पंडित छन्नूलाल को खयाल, ठुमरी, भजन, दादरा, कजरी और चैती के लिए जाना जाता है। इनकी सांगीतिक शिक्षा बिहार के मुजफ्फरपुर में हुई। करीब 4 दशक पहले पंडित छन्नूलाल वाराणसी चले आए। यहां अपनी संगीत साधना की धार को और तेज किया। ठुमरी, दादरा, कजरी, चैती जैसी शास्त्रीय-लोक विधाओं के अनूठे संगम के लिए देश-विदेश में विख्यात हैं। मोदी के प्रस्तावक रहे, पद्मभूषण और पद्मविभूषण से सम्मानित हुए
पंडित छन्नूलाल मिश्र ने धर्म नगरी काशी को अपनी कर्मभूमि बनाया। उन्होंने यहीं रहकर शास्त्रीय संगीत में महारथ हासिल की। वर्ष 2000 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 2010 में उन्हें पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया। फिर 2014 में वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक बने। वहीं 2020 में उन्हें पद्मविभूषण सम्मान से नवाजा गया। खेले मसाने में होली… संगीत छन्नूलाल का
शास्त्रीय संगीत से पं. छन्नूलाल मिश्र ने लोगों के दिलों में जगह बनाई। उनका खेले मसाने में होली का गीत आज भी हर किसी की जुबां पर है। बीते 2 साल से वह गुमनामी की जिदंगी जीने के लिए मजबूर हैं। वजह उनके द्वारा बनाई गई संपत्ति है। 4 बेटियों में बड़ी बेटी संगीता का कोरोना के समय निधन हो चुका है। अनिता और ममता मिश्र की शादी हो गई है। सबसे छोटी बेटी नम्रता मिश्र केबीपीजी कॉलेज में संगीत विभाग में प्रोफेसर हैं। पंडित छन्नूलाल मिश्र मिर्जापुर में सबसे छोटी बेटी नम्रता के घर पर ही रह रहे हैं। बहनों और इकलौते भाई रामकुमार में प्रॉपर्टी को लेकर विवाद चल रहा है। 4 दिन में कोरोना से पत्नी और बेटी ने दम तोड़ा था
पंडित छन्नूलाल मिश्रा की पत्नी मनोरमा मिश्रा की मौत 26 अप्रैल 2021 को हुई थी। वह कोरोना संक्रमित थीं और वाराणसी के एक निजी अस्पताल में भर्ती थीं। इसके बाद 29 अप्रैल 2021 को बड़ी बेटी संगीता मिश्रा की मौत मैदागिन स्थित निजी अस्पताल में हुई। संगीता भी कोरोना संक्रमित थीं और 7 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहीं। छन्नूलाल ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया था। —————— ये खबर भी पढ़िए- भाइयों की नौकरी छूटी, बच्चों ने स्कूल नहीं देखा: हाथरस कांड का पीड़ित परिवार बोला- 5 साल से कैदी बने, घर पर CRPF का पहरा ‘हमारा पूरा परिवार 5 साल से CRPF की सुरक्षा में कैद है। हम घर के गेट पर खड़े ठेले से सब्जी खरीदने जाएंगे, तो CRPF के रजिस्टर में एंट्री करनी होगी। दवा लेने अस्पताल या मेडिकल स्टोर जाना है, तो CRPF की गाड़ी में जाएंगे। ऐसे में हम खेती-बाड़ी कैसे करें? नौकरी कैसे करें? अपने बच्चों को कैसे पढ़ाएं? सबसे बेहतर है कि हमें दूसरे शहर में शिफ्ट कर दिया जाए। जिससे हम बिना सुरक्षा रहकर नौकरी करके अपना घर चला सकें।’ यह दर्द है हाथरस कांड की पीड़िता के भाई का है। पढ़ें पूरी खबर…