सब इंस्पेक्टर भर्ती रद्द होने के बाद लोग फर्जी बोल रहे हैं। मैंने साढ़े 15 साल तक फौज की नौकरी की। कभी नहीं सोचा था कि फौज से रिटायर होने के बाद फर्जी का टैग लग जाएगा। ये दर्द है 26/11 को मुंबई के होटल ताज में हुए हमले के बाद ऑपरेशन में भाग लेने वाले एनएसजी कमांडो भागीरथ सिंह राठौड़ का। फौज से रिटायर्ड होने के बाद एसआई भर्ती में चयनित भागीरथ सिंह राठौड़ का कहना है कि आखिरी दम तक लड़ेंगे। ये लड़ाई अब सम्मान की हो गई है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… 18 साल की उम्र में साल 2004 में चूरू के सुजानगढ़ निवासी भागीरथ सिंह राठौड़ ने आर्मी टेक्निकल में जॉइन किया। दो साल गोवा में सिग्नल ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण लिया। इसके बाद जम्मू-कश्मीर के अखनूर, राजौरी, पुंछ और बाॅर्डर इलाके हसन पर ड्यूटी की। फौज में रहते हुए ही साल 2008 में एनएसजी के लिए आवेदन किया। हरियाणा के मानेसर में अगस्त से अक्टूबर 2008 यानी तीन महीने की कम्युनिकेशन की ट्रेनिंग लेते ही जीवन के सबसे बड़े ऑपरेशन में भाग लेने का मौका मिला। 26 नवंबर 2008 को मुंबई के ताज होटल पर आतंकवादी हमला हुआ। भागीरथ बताते हैं कि हमले के बाद हरियाणा के मानेसर में हमारे ट्रेनिंग सेंटर पर हूटर बजा। हमें मुंबई जाने के लिए तैयार रहने के ऑर्डर दिए गए। 27 नवंबर को एनएसजी के 200 कमांडो मुंबई के लिए रवाना हुए। मुंबई एयरपोर्ट पहुंचते ही हेलिकॉप्टर से होटल ताज पहुंचे। आठ-आठ कमांडो की टीम ने होटल ताज में प्रवेश किया। टीम में 7 कमांडों और एक कम्युनिकेशन का कमांडो शामिल था। मुझ पर कम्युनिकेशन का जिम्मा था। होटल ताज में घुसते ही लहूलुहान लोग दिखे। हर तरफ चीख पुकार मची हुई थी। लगातार गोलियों की आवाज गूंज रही थी। आज भी बात करते ही वो मंजर आंखों के सामने आ जाता है। श्रीमाधोपुर में बन गए थे पटवारी
भागीरथ ने बताया- तीन साल एनएसजी में तैनात रहने के बाद फिर से आर्मी में लौट आया। इस दौरान उधमपुर, असम, अरुणाचल प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर पोस्टिंग रही। साल 2020 में चंडीगढ़ से रिटायर हुआ। पिता को गले का कैंसर हो गया। परिवार में इकलौता होने के कारण राजस्थान में ही रहने की ठानी। इस दौरान कई नौकरियों के लिए ट्राई किया। पटवारी एग्जाम में एक्स सर्विसमैन में पहली रैंक हासिल की। श्रीमाधोपुर के मूंडला में नौकरी भी लग गई। पिता की इच्छा थी की सब इंस्पेक्टर बनूं, इसलिए तैयारी की और नौकरी प्राप्त की। सुप्रीम कोर्ट भी जाना पड़ा तो जाएंगे
40 साल के भागीरथ सिंह राठौड़ ने एसआई भर्ती में 1434वीं रैंक हासिल की। रिजर्व पुलिस के रूप में तैनात रहे। राठौड़ का कहना है- अब लड़ाई सम्मान की है। माथे पर लगे फर्जी के टैग को मिटाना है। अभी डिवीजन बेंच में गए हैं। जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगे। पीएम मोदी तक जाना पड़े तो जाएंगे। हम हार नहीं मानने वाले हैं। हमारे कई साथियों ने मेहनत कर नौकरी हासिल की है। कुछ लोग फर्जी हो सकते हैं। हम फर्जी नहीं हैं। कोटपूतली के कुचिना गांव के रहने वाले रिटायर फौजी अवनीश कुमार ने बताया कि बच्ची नीट की तैयारी कर रही है। अब या तो बच्ची नीट की तैयारी कर सकती है या फिर मैं फिर से एसआई की तैयारी। अवनीश बताते हैं- साल 2003 में फौज जॉइन की। 2010 में शांति सेना के रूप में सूडान गया। भारत और चीन के बीच बॉर्डर पर तनाव के बीच 6 महीने तक पैंगोंग लेक पर सेवाएं दीं। 17 साल फौज में सेवा के बाद एसआई भर्ती में सिलेक्ट हुआ था। एसआई भर्ती से पहले पटवारी की नौकरी लगी, लेकिन जॉइन नहीं किया। वीडीओ के लिए नौकरी लगी थी। दौसा में जॉइन भी कर लिया। सब इंस्पेक्टर के लिए चयन हो गया तो नौकरी छोड़ दी। अब हमें कह रहे हैं कि फिर से तैयारी कर लो। हर बार एक जैसी तैयारी कैसे संभव है? एक्स सर्विसमैन शैलेन्द्र शर्मा ने 19 साल की उम्र में भारतीय सेना जॉइन की थी। 15 साल नेवी में रहे। साल 2018 में नेवी में रहते हुए ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी थी। सब इंस्पेक्टर के लिए चयन हुआ था। आरएएस प्री भी क्लियर किया था। हाईकोर्ट में जेजेए भर्ती में नौकरी भी लग गई थी, लेकिन उन्होंने सब इंस्पेक्टर बनना चुना। कहते हैं- बेरोजगार और जमीन तलाशने की कोशिश में लगे नेताओं ने एसआई भर्ती को लेकर अफवाहें उड़ाई। फर्जी का कलंक सहा नहीं जा रहा है। अब इसके खिलाफ लड़ेंगे। भारतीय सेना की जाट रेजिमेंट में सेवा दे चुके रिटायर फौजी जगदीश प्रसाद जाट बताते हैं कि सियाचिन ग्लेशियर में लास्ट पोस्टिंग थी। इसके बाद यहां आकर वीडीओ भर्ती में सिलेक्शन हुआ। जोधपुर में 6 महीने जॉब की। इसके बाद सब इंस्पेक्टर पद पर चयन हो गया। जगदीश कहते हैं कि जांच चल रही है, जो भी दोषी मिले, उसको सजा दी जानी चाहिए लेकिन निर्दोषों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।
सब इंस्पेक्टर भर्ती रद्द होने के बाद लोग फर्जी बोल रहे हैं। मैंने साढ़े 15 साल तक फौज की नौकरी की। कभी नहीं सोचा था कि फौज से रिटायर होने के बाद फर्जी का टैग लग जाएगा। ये दर्द है 26/11 को मुंबई के होटल ताज में हुए हमले के बाद ऑपरेशन में भाग लेने वाले एनएसजी कमांडो भागीरथ सिंह राठौड़ का। फौज से रिटायर्ड होने के बाद एसआई भर्ती में चयनित भागीरथ सिंह राठौड़ का कहना है कि आखिरी दम तक लड़ेंगे। ये लड़ाई अब सम्मान की हो गई है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… 18 साल की उम्र में साल 2004 में चूरू के सुजानगढ़ निवासी भागीरथ सिंह राठौड़ ने आर्मी टेक्निकल में जॉइन किया। दो साल गोवा में सिग्नल ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण लिया। इसके बाद जम्मू-कश्मीर के अखनूर, राजौरी, पुंछ और बाॅर्डर इलाके हसन पर ड्यूटी की। फौज में रहते हुए ही साल 2008 में एनएसजी के लिए आवेदन किया। हरियाणा के मानेसर में अगस्त से अक्टूबर 2008 यानी तीन महीने की कम्युनिकेशन की ट्रेनिंग लेते ही जीवन के सबसे बड़े ऑपरेशन में भाग लेने का मौका मिला। 26 नवंबर 2008 को मुंबई के ताज होटल पर आतंकवादी हमला हुआ। भागीरथ बताते हैं कि हमले के बाद हरियाणा के मानेसर में हमारे ट्रेनिंग सेंटर पर हूटर बजा। हमें मुंबई जाने के लिए तैयार रहने के ऑर्डर दिए गए। 27 नवंबर को एनएसजी के 200 कमांडो मुंबई के लिए रवाना हुए। मुंबई एयरपोर्ट पहुंचते ही हेलिकॉप्टर से होटल ताज पहुंचे। आठ-आठ कमांडो की टीम ने होटल ताज में प्रवेश किया। टीम में 7 कमांडों और एक कम्युनिकेशन का कमांडो शामिल था। मुझ पर कम्युनिकेशन का जिम्मा था। होटल ताज में घुसते ही लहूलुहान लोग दिखे। हर तरफ चीख पुकार मची हुई थी। लगातार गोलियों की आवाज गूंज रही थी। आज भी बात करते ही वो मंजर आंखों के सामने आ जाता है। श्रीमाधोपुर में बन गए थे पटवारी
भागीरथ ने बताया- तीन साल एनएसजी में तैनात रहने के बाद फिर से आर्मी में लौट आया। इस दौरान उधमपुर, असम, अरुणाचल प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर पोस्टिंग रही। साल 2020 में चंडीगढ़ से रिटायर हुआ। पिता को गले का कैंसर हो गया। परिवार में इकलौता होने के कारण राजस्थान में ही रहने की ठानी। इस दौरान कई नौकरियों के लिए ट्राई किया। पटवारी एग्जाम में एक्स सर्विसमैन में पहली रैंक हासिल की। श्रीमाधोपुर के मूंडला में नौकरी भी लग गई। पिता की इच्छा थी की सब इंस्पेक्टर बनूं, इसलिए तैयारी की और नौकरी प्राप्त की। सुप्रीम कोर्ट भी जाना पड़ा तो जाएंगे
40 साल के भागीरथ सिंह राठौड़ ने एसआई भर्ती में 1434वीं रैंक हासिल की। रिजर्व पुलिस के रूप में तैनात रहे। राठौड़ का कहना है- अब लड़ाई सम्मान की है। माथे पर लगे फर्जी के टैग को मिटाना है। अभी डिवीजन बेंच में गए हैं। जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगे। पीएम मोदी तक जाना पड़े तो जाएंगे। हम हार नहीं मानने वाले हैं। हमारे कई साथियों ने मेहनत कर नौकरी हासिल की है। कुछ लोग फर्जी हो सकते हैं। हम फर्जी नहीं हैं। कोटपूतली के कुचिना गांव के रहने वाले रिटायर फौजी अवनीश कुमार ने बताया कि बच्ची नीट की तैयारी कर रही है। अब या तो बच्ची नीट की तैयारी कर सकती है या फिर मैं फिर से एसआई की तैयारी। अवनीश बताते हैं- साल 2003 में फौज जॉइन की। 2010 में शांति सेना के रूप में सूडान गया। भारत और चीन के बीच बॉर्डर पर तनाव के बीच 6 महीने तक पैंगोंग लेक पर सेवाएं दीं। 17 साल फौज में सेवा के बाद एसआई भर्ती में सिलेक्ट हुआ था। एसआई भर्ती से पहले पटवारी की नौकरी लगी, लेकिन जॉइन नहीं किया। वीडीओ के लिए नौकरी लगी थी। दौसा में जॉइन भी कर लिया। सब इंस्पेक्टर के लिए चयन हो गया तो नौकरी छोड़ दी। अब हमें कह रहे हैं कि फिर से तैयारी कर लो। हर बार एक जैसी तैयारी कैसे संभव है? एक्स सर्विसमैन शैलेन्द्र शर्मा ने 19 साल की उम्र में भारतीय सेना जॉइन की थी। 15 साल नेवी में रहे। साल 2018 में नेवी में रहते हुए ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी थी। सब इंस्पेक्टर के लिए चयन हुआ था। आरएएस प्री भी क्लियर किया था। हाईकोर्ट में जेजेए भर्ती में नौकरी भी लग गई थी, लेकिन उन्होंने सब इंस्पेक्टर बनना चुना। कहते हैं- बेरोजगार और जमीन तलाशने की कोशिश में लगे नेताओं ने एसआई भर्ती को लेकर अफवाहें उड़ाई। फर्जी का कलंक सहा नहीं जा रहा है। अब इसके खिलाफ लड़ेंगे। भारतीय सेना की जाट रेजिमेंट में सेवा दे चुके रिटायर फौजी जगदीश प्रसाद जाट बताते हैं कि सियाचिन ग्लेशियर में लास्ट पोस्टिंग थी। इसके बाद यहां आकर वीडीओ भर्ती में सिलेक्शन हुआ। जोधपुर में 6 महीने जॉब की। इसके बाद सब इंस्पेक्टर पद पर चयन हो गया। जगदीश कहते हैं कि जांच चल रही है, जो भी दोषी मिले, उसको सजा दी जानी चाहिए लेकिन निर्दोषों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।