इंदौर के एमवाय अस्पताल में नवजात की मौत के मामले में पोस्टमार्टम टीम में शामिल डॉक्टर ने बताया कि चूहे बच्ची की तीन उंगलियां पूरी खा गए थे। बच्ची शायद कुछ दिन और जिंदा रह सकती थी। चूहों के काटने के कारण उसे इन्फेक्शन हुआ और कार्डियक शॉक से उसकी मौत हो गई। डॉक्टर ने नाम नहीं छापने की शर्त पर ये जानकारी दी। भास्कर ने कुछ पीडियाट्रिक्स से भी बात की। उनका कहना था कि ऐसे गंभीर केस में चूहे के कारण इन्फेक्शन और शॉक से डेथ होने के चांस बढ़ जाते हैं। नवजात का जन्म 30 अगस्त को धार के जिला अस्पताल में हुआ था। पिता जिले राजोद के रूपापाड़ा गांव के रहने वाले हैं। पत्नी मंजू को राजोद पीएचसी से धार और वहां से बच्ची को जन्म के बाद इंदौर रेफर किया गया था। बेटी से मिलने नहीं दिया, दो दिन बाद लौट गया
पत्नी मंजू को धार में छोड़कर देवराम बच्ची को इंदौर लाया था। यहां एमवाय अस्पताल में उसे भर्ती कराया। देवराम को न तो कोई एडमिशन का कागज दिया और न ही कोई पास बनाकर दिया। वह दो दिन में कई बार वार्ड में गया, पर स्टाफ ने उसे भगा दिया। फिर एक कर्मचारी ने कहा कि जैसे ही जानकारी मिलेगी, तुम्हें फोन आ जाएगा। इसके बाद देवराम लौट गया। एक ही सवाल, सभी जवाब देने से बचते रहे सवाल- परिजन आरोप लगा रहे हैं कि सब जानकारी होने के बाद भी जानबूझकर लावारिस बताकर अंतिम संस्कार करने वाले थे। डीन डॉक्टर अरविंद घनघोरिया ने कहा, डॉ. बृजेश लाहोटी ही आपको ज्यादा जानकारी दे पाएंगे। आप उनसे बात करें। पीडियाट्रिक विभाग के डॉ. बृजेश लाहोटी ने कहा, इस बारे में एमवाय अधीक्षक से बात करें क्योंकि मैं उस दिन छुट्टी पर था। एमवाय अधीक्षक डॉ. अशोक यादव ने कहा, परिवार झूठा आरोप लगा रहा है। हमने ही पुलिस को एड्रेस दिया था, जगह को लेकर कन्फ्यूजन था। परिजन को ढूंढने का काम पुलिस का है, डॉक्टर्स का नहीं। मेडिकोलीगल केस था, ऐसे अंतिम संस्कार नहीं करते हैं। आरोप गलत है। गर्भवती, गंभीर और बच्चों को एक जैसा खाना
एमवाय अस्पताल में सर्जरी के मरीज, गर्भवती, कैंसर मरीज या अन्य भर्ती मरीजों की एक जैसी डाइट ही दी जाती है। प्रबंधन का कहना है कि 49 रुपए प्रति व्यक्ति डाइट खर्च है। इसमें सुबह चाय-नाश्ता दूध, दोपहर में खाना, शाम में स्नैक्स और रात का खाना शामिल है।
इंदौर के एमवाय अस्पताल में नवजात की मौत के मामले में पोस्टमार्टम टीम में शामिल डॉक्टर ने बताया कि चूहे बच्ची की तीन उंगलियां पूरी खा गए थे। बच्ची शायद कुछ दिन और जिंदा रह सकती थी। चूहों के काटने के कारण उसे इन्फेक्शन हुआ और कार्डियक शॉक से उसकी मौत हो गई। डॉक्टर ने नाम नहीं छापने की शर्त पर ये जानकारी दी। भास्कर ने कुछ पीडियाट्रिक्स से भी बात की। उनका कहना था कि ऐसे गंभीर केस में चूहे के कारण इन्फेक्शन और शॉक से डेथ होने के चांस बढ़ जाते हैं। नवजात का जन्म 30 अगस्त को धार के जिला अस्पताल में हुआ था। पिता जिले राजोद के रूपापाड़ा गांव के रहने वाले हैं। पत्नी मंजू को राजोद पीएचसी से धार और वहां से बच्ची को जन्म के बाद इंदौर रेफर किया गया था। बेटी से मिलने नहीं दिया, दो दिन बाद लौट गया
पत्नी मंजू को धार में छोड़कर देवराम बच्ची को इंदौर लाया था। यहां एमवाय अस्पताल में उसे भर्ती कराया। देवराम को न तो कोई एडमिशन का कागज दिया और न ही कोई पास बनाकर दिया। वह दो दिन में कई बार वार्ड में गया, पर स्टाफ ने उसे भगा दिया। फिर एक कर्मचारी ने कहा कि जैसे ही जानकारी मिलेगी, तुम्हें फोन आ जाएगा। इसके बाद देवराम लौट गया। एक ही सवाल, सभी जवाब देने से बचते रहे सवाल- परिजन आरोप लगा रहे हैं कि सब जानकारी होने के बाद भी जानबूझकर लावारिस बताकर अंतिम संस्कार करने वाले थे। डीन डॉक्टर अरविंद घनघोरिया ने कहा, डॉ. बृजेश लाहोटी ही आपको ज्यादा जानकारी दे पाएंगे। आप उनसे बात करें। पीडियाट्रिक विभाग के डॉ. बृजेश लाहोटी ने कहा, इस बारे में एमवाय अधीक्षक से बात करें क्योंकि मैं उस दिन छुट्टी पर था। एमवाय अधीक्षक डॉ. अशोक यादव ने कहा, परिवार झूठा आरोप लगा रहा है। हमने ही पुलिस को एड्रेस दिया था, जगह को लेकर कन्फ्यूजन था। परिजन को ढूंढने का काम पुलिस का है, डॉक्टर्स का नहीं। मेडिकोलीगल केस था, ऐसे अंतिम संस्कार नहीं करते हैं। आरोप गलत है। गर्भवती, गंभीर और बच्चों को एक जैसा खाना
एमवाय अस्पताल में सर्जरी के मरीज, गर्भवती, कैंसर मरीज या अन्य भर्ती मरीजों की एक जैसी डाइट ही दी जाती है। प्रबंधन का कहना है कि 49 रुपए प्रति व्यक्ति डाइट खर्च है। इसमें सुबह चाय-नाश्ता दूध, दोपहर में खाना, शाम में स्नैक्स और रात का खाना शामिल है।