महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर नया टकराव सामने आ गया है। ओबीसी संगठन के सदस्यों ठाणे जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर सरकारी प्रस्ताव की प्रतियां फाड़ीं। और भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति सरकार पर अन्याय करने का आरोप लगाते हुए नारे लगाए। इससे पहले सरकार ने मंगलवार को मराठा आंदोलनकारी नेता मनोज जरांगे की 8 में से 6 मांगें मान लीं और मराठाओं को मराठा-कुणबी जाति प्रमाणपत्र देने का निर्णय लिया। इससे मराठा समुदाय को ओबीसी कोटे में आरक्षण का लाभ मिल सकेगा। जरांगे ने बुधवार को आजाद मैदान में अपना अनशन खत्म करने के बाद कहा कि अब मराठवाड़ा और पश्चिम महाराष्ट्र के मराठा समुदाय को आरक्षण मिलेगा। ओबीसी नेता भुजबल कैबिनेट बैठक से गायब सरकार के फैसले से मराठा समुदाय में संतोष है, जबकि ओबीसी समाज में नाराजगी दिख रही है। ओबीसी नेता और मंत्री छगन भुजबल कैबिनेट बैठक से अनुपस्थित रहे और दोहराया कि यदि मराठाओं को ओबीसी कोटे में शामिल किया तो बड़ा आंदोलन होगा। ओबीसी कार्यकर्ता लक्ष्मण हाके ने चेतावनी दी कि सरकार के पास मराठाओं को कुणबी प्रमाणपत्र देने का अधिकार नहीं है और ओबीसी समुदाय सड़कों पर उतरकर इसका विरोध करेगा। सरकारी प्रस्ताव में हैदराबाद गजेटियर लागू करने की बात सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग की तरफ से जारी सरकारी आदेश में हैदराबाद गजेटियर को लागू करने का भी उल्लेख किया गया है। यह ब्रिटिशकालीन दस्तावेज है जिसमें मराठवाड़ा के मराठों के पूर्वजों का विवरण है। मराठवाड़ा उस समय हैदराबाद राज्य का हिस्सा था और अब महाराष्ट्र में है। इस गजेटियर के लागू होने से मराठवाड़ा के मराठों को कुनबी का दर्जा देने का रास्ता साफ होगा, जिससे वे सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण का लाभ पाने के पात्र बनेंगे। ———————— ये खबर भी पढ़ें…. मराठा आंदोलन; आजाद मैदान से 125 टन कचरा निकला: प्रदर्शनकारियों ने 5 दिन में जमा किया था; HC ने पूछा- संपत्ति के नुकसान की भरपाई कौन करेगा 29 अगस्त से 2 सितंबर तक चले मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान आजाद मैदान और उसके आसपास के इलाकों से 125 मीट्रिक टन से ज्यादा कचरा निकला। 5 दिनों तक कुल 466 कर्मचारी सफाई में लगे हुए थे। जरांगे का अनशन 2 सितंबर को बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद खत्म हुआ। जरांगे ने अनशन खत्म करते हुए कहा था, ‘हम जीत गए हैं। सरकार ने हमारी मांगें मान ली हैं।’पढ़ें पूर खबर…
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर नया टकराव सामने आ गया है। ओबीसी संगठन के सदस्यों ठाणे जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर सरकारी प्रस्ताव की प्रतियां फाड़ीं। और भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति सरकार पर अन्याय करने का आरोप लगाते हुए नारे लगाए। इससे पहले सरकार ने मंगलवार को मराठा आंदोलनकारी नेता मनोज जरांगे की 8 में से 6 मांगें मान लीं और मराठाओं को मराठा-कुणबी जाति प्रमाणपत्र देने का निर्णय लिया। इससे मराठा समुदाय को ओबीसी कोटे में आरक्षण का लाभ मिल सकेगा। जरांगे ने बुधवार को आजाद मैदान में अपना अनशन खत्म करने के बाद कहा कि अब मराठवाड़ा और पश्चिम महाराष्ट्र के मराठा समुदाय को आरक्षण मिलेगा। ओबीसी नेता भुजबल कैबिनेट बैठक से गायब सरकार के फैसले से मराठा समुदाय में संतोष है, जबकि ओबीसी समाज में नाराजगी दिख रही है। ओबीसी नेता और मंत्री छगन भुजबल कैबिनेट बैठक से अनुपस्थित रहे और दोहराया कि यदि मराठाओं को ओबीसी कोटे में शामिल किया तो बड़ा आंदोलन होगा। ओबीसी कार्यकर्ता लक्ष्मण हाके ने चेतावनी दी कि सरकार के पास मराठाओं को कुणबी प्रमाणपत्र देने का अधिकार नहीं है और ओबीसी समुदाय सड़कों पर उतरकर इसका विरोध करेगा। सरकारी प्रस्ताव में हैदराबाद गजेटियर लागू करने की बात सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग की तरफ से जारी सरकारी आदेश में हैदराबाद गजेटियर को लागू करने का भी उल्लेख किया गया है। यह ब्रिटिशकालीन दस्तावेज है जिसमें मराठवाड़ा के मराठों के पूर्वजों का विवरण है। मराठवाड़ा उस समय हैदराबाद राज्य का हिस्सा था और अब महाराष्ट्र में है। इस गजेटियर के लागू होने से मराठवाड़ा के मराठों को कुनबी का दर्जा देने का रास्ता साफ होगा, जिससे वे सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण का लाभ पाने के पात्र बनेंगे। ———————— ये खबर भी पढ़ें…. मराठा आंदोलन; आजाद मैदान से 125 टन कचरा निकला: प्रदर्शनकारियों ने 5 दिन में जमा किया था; HC ने पूछा- संपत्ति के नुकसान की भरपाई कौन करेगा 29 अगस्त से 2 सितंबर तक चले मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान आजाद मैदान और उसके आसपास के इलाकों से 125 मीट्रिक टन से ज्यादा कचरा निकला। 5 दिनों तक कुल 466 कर्मचारी सफाई में लगे हुए थे। जरांगे का अनशन 2 सितंबर को बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद खत्म हुआ। जरांगे ने अनशन खत्म करते हुए कहा था, ‘हम जीत गए हैं। सरकार ने हमारी मांगें मान ली हैं।’पढ़ें पूर खबर…