उत्तराखंड में चार धाम यात्रा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 20 मार्च से शुरू हो गया है। यात्रा पर आने वाले सभी श्रद्धालुओं को रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। इसके लिए उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद की वेबसाइट www.registrationandtouristcare.uk.gov.in रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। इसके लिए आधार नंबर को अनिवार्य कर दिया गया है। यात्रियों को रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में अपना नाम, पता, मोबाइल नंबर के साथ गाड़ी नंबर भी भरना होगा। इसके बाद आपको ई रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मिलेगा, जिससे यात्रा पर जा सकेंगे। चारधाम यात्रा 30 अप्रैल से शुरू होगी। इसी दिन उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिरों के कपाट खुलेंगे। केदारनाथ मंदिर 2 मई को (रुद्रप्रयाग जिला) और बद्रीनाथ मंदिर 4 मई को (चमोली जिला) श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। हेमकुंड साहिब के कपाट 25 मई को खुलेंगे। यात्रा शुरू होने पर ऑफलाइन पंजीकरण शुरू होगा पर्यटन विकास परिषद रजिस्ट्रेशन के लिए वेबसाइट के अलावा मोबाइल नंबर, वॉट्सऐप और टोल फ्री नंबर भी जारी करेगा। जिस पर कॉल कर आप अपना रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। यात्रा शुरू होने के बाद हरिद्वार और ऋषिकेश में ऑफलाइन पंजीकरण प्रक्रिया भी शुरू होगी। जो श्रद्धालु ऑनलाइन पंजीकरण नहीं कर सकते, वह ऑफलाइन पंजीकरण कर यात्रा पर जाएंगे। चारों धामों में यात्रियों को दर्शन के लिए भी टोकन व्यवस्था लागू होगी। चारों धाम से जुड़ी खास बातें बद्रीनाथ धाम – बद्रीनाथ धाम भगवान विष्णु को समर्पित मंदिर है। यह नर-नारायण दो पहाड़ों के बीच बना हुआ है। इस क्षेत्र को बदरीवन कहते हैं। इस मंदिर के पुजारी को रावल कहते हैं। रावल आदि गुरु शंकराचार्य के कुटुंब से ही होते हैं। केरल के नंबूदरी पुजारी ही यहां पूजा करते हैं। केदारनाथ धाम – प्राचीन समय में बदरीवन में विष्णु जी के अवतार नर-नारायण ने यहां पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजा की थी। नर-नारायण की भक्ति से प्रसन्न होकर शिव जी प्रकट हुए। शिव जी ने नर-नारायण से वर मांगने को कहा तो उन्होंने वर मांगा कि आप हमेशा इसी क्षेत्र में वास करें। शिव जी ने वर देते हुए कहा कि अब से वे यहीं रहेंगे और ये क्षेत्र केदार क्षेत्र के नाम से जाना जाएगा। इसके बाद शिव जी ज्योति स्वरूप में यहां स्थित शिवलिंग में समा गए। गंगोत्री – ये गंगा नदी का मंदिर है। गंगा नदी का उद्गम गोमुख है और गंगोत्री में गंगा देवी की पूजा की जाती है। गंगोत्री के पास वह जगह है, जहां राजा भगीरथ ने देवी गंगा को धरती पर लाने के लिए तप किया था। यमनोत्री – ये यमुना नदी का उद्गम स्थल माना जाता है। यहां देवी यमुना की पूजा की जाती है। यमुनोत्री मंदिर के बारे में कहा जाता है कि टिहरी गढ़वाल के महाराजा प्रतापशाह ने देवी यमुना का मंदिर बनवाया था। बाद में मंदिर का पुनः निर्माण जयपुर की महारानी गुलेरिया ने करवाया था। यमुना नदी का वास्तविक स्रोत जमी हुई बर्फ की एक झील और हिमनंद (चंपासर ग्लेशियर) है। ————————————————— चारधाम से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… यात्रा को लेकर हाईलेवल मीटिं, :सीएम ने कहा- यात्रा से पहले सभी तैयारी पूरी करें,अधिकारी ग्राउंड पर जाकर रिपोर्ट करें चार धाम यात्रा की तैयारी को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज और स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत भी मौजूद रहे। इसके साथ ही सभी विभागों के अधिकारी बैठक में शामिल हुए। पूरी खबर पढ़ें…
उत्तराखंड में चार धाम यात्रा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 20 मार्च से शुरू हो गया है। यात्रा पर आने वाले सभी श्रद्धालुओं को रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। इसके लिए उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद की वेबसाइट www.registrationandtouristcare.uk.gov.in रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। इसके लिए आधार नंबर को अनिवार्य कर दिया गया है। यात्रियों को रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में अपना नाम, पता, मोबाइल नंबर के साथ गाड़ी नंबर भी भरना होगा। इसके बाद आपको ई रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मिलेगा, जिससे यात्रा पर जा सकेंगे। चारधाम यात्रा 30 अप्रैल से शुरू होगी। इसी दिन उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिरों के कपाट खुलेंगे। केदारनाथ मंदिर 2 मई को (रुद्रप्रयाग जिला) और बद्रीनाथ मंदिर 4 मई को (चमोली जिला) श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। हेमकुंड साहिब के कपाट 25 मई को खुलेंगे। यात्रा शुरू होने पर ऑफलाइन पंजीकरण शुरू होगा पर्यटन विकास परिषद रजिस्ट्रेशन के लिए वेबसाइट के अलावा मोबाइल नंबर, वॉट्सऐप और टोल फ्री नंबर भी जारी करेगा। जिस पर कॉल कर आप अपना रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। यात्रा शुरू होने के बाद हरिद्वार और ऋषिकेश में ऑफलाइन पंजीकरण प्रक्रिया भी शुरू होगी। जो श्रद्धालु ऑनलाइन पंजीकरण नहीं कर सकते, वह ऑफलाइन पंजीकरण कर यात्रा पर जाएंगे। चारों धामों में यात्रियों को दर्शन के लिए भी टोकन व्यवस्था लागू होगी। चारों धाम से जुड़ी खास बातें बद्रीनाथ धाम – बद्रीनाथ धाम भगवान विष्णु को समर्पित मंदिर है। यह नर-नारायण दो पहाड़ों के बीच बना हुआ है। इस क्षेत्र को बदरीवन कहते हैं। इस मंदिर के पुजारी को रावल कहते हैं। रावल आदि गुरु शंकराचार्य के कुटुंब से ही होते हैं। केरल के नंबूदरी पुजारी ही यहां पूजा करते हैं। केदारनाथ धाम – प्राचीन समय में बदरीवन में विष्णु जी के अवतार नर-नारायण ने यहां पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजा की थी। नर-नारायण की भक्ति से प्रसन्न होकर शिव जी प्रकट हुए। शिव जी ने नर-नारायण से वर मांगने को कहा तो उन्होंने वर मांगा कि आप हमेशा इसी क्षेत्र में वास करें। शिव जी ने वर देते हुए कहा कि अब से वे यहीं रहेंगे और ये क्षेत्र केदार क्षेत्र के नाम से जाना जाएगा। इसके बाद शिव जी ज्योति स्वरूप में यहां स्थित शिवलिंग में समा गए। गंगोत्री – ये गंगा नदी का मंदिर है। गंगा नदी का उद्गम गोमुख है और गंगोत्री में गंगा देवी की पूजा की जाती है। गंगोत्री के पास वह जगह है, जहां राजा भगीरथ ने देवी गंगा को धरती पर लाने के लिए तप किया था। यमनोत्री – ये यमुना नदी का उद्गम स्थल माना जाता है। यहां देवी यमुना की पूजा की जाती है। यमुनोत्री मंदिर के बारे में कहा जाता है कि टिहरी गढ़वाल के महाराजा प्रतापशाह ने देवी यमुना का मंदिर बनवाया था। बाद में मंदिर का पुनः निर्माण जयपुर की महारानी गुलेरिया ने करवाया था। यमुना नदी का वास्तविक स्रोत जमी हुई बर्फ की एक झील और हिमनंद (चंपासर ग्लेशियर) है। ————————————————— चारधाम से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… यात्रा को लेकर हाईलेवल मीटिं, :सीएम ने कहा- यात्रा से पहले सभी तैयारी पूरी करें,अधिकारी ग्राउंड पर जाकर रिपोर्ट करें चार धाम यात्रा की तैयारी को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज और स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत भी मौजूद रहे। इसके साथ ही सभी विभागों के अधिकारी बैठक में शामिल हुए। पूरी खबर पढ़ें…