सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि कुछ राज्य जब अपने विकास को दिखाना चाहते हैं तो दावा करते हैं कि उनकी प्रति व्यक्ति आय बहुत ज्यादा है, प्रति व्यक्ति आय में तीसरे स्थान पर एक राज्य है, पर 70% आबादी गरीबी रेखा से नीचे है। यह क्या हो रहा है? ये विरोधाभासी चीजें हैं। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि हमें चिंता है कि क्या गरीबों को दिए जाने वाले लाभ उन तक पहुंच रहे हैं जो इसके हकदार नहीं हैं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट प्रवासी मजदूरों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की समस्याओं से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इस दौरान उसने केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ लेने के मामले में कुछ राज्यों के विरोधाभासी रुख पर चिंता जताई। इस दौरान याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि ई-श्रम पोर्टल पर राशन कार्ड जारी करने के लिए आवेदन करने वाले 30 करोड़ लोगों में से 8 करोड़ को अभी तक राशन कार्ड नहीं दिए गए हैं। कोर्ट ने सरकार से फ्री राशन वितरण पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने कहा है। साथ ही कहा कि गरीबों को राशन कार्ड उपलब्ध कराने के लिए एक सरकार प्रभावी तंत्र बनाए। याचिकाकर्ता के वकील की दलीलें क्या है पूरा मामला यह मामला कोविड-19 महामारी के दौरान प्रवासी मजदूरों से जुड़ा है। 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि वह सभी प्रवासी मजदूरों का ई श्रम पोर्टल पर रजिस्टर्ड करे और उन्हें मुफ्त राशन उपलब्ध कराए। लेकिन अब तक यह पूरी तरह से लागू नहीं हुआ, जिस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और केंद्र से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। हालांकि, केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत करीब 81.35 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दे रही है और इसी तरह की एक अन्य योजना के तहत 11 करोड़ अन्य लोग शामिल हैं। दिसंबर 2024 में कहा था- 81 करोड़ सुविधा ले रहे, सिर्फ टैक्सपेयर इससे बाहर सुप्रीम कोर्ट ने 9 दिसंबर 2024 को केंद्र सरकार के मुफ्त राशन बांटने पर सख्त टिप्पणी की थी। तब कोर्ट ने कहा था- कब तक ऐसे मुफ्त राशन बांटा जाएगा। सरकार रोजगार के अवसर क्यों नहीं पैदा कर रही? कोर्ट ने यह कहकर सरकारी मुफ्त योजनाओं (Freebies) पर नाराजगी जताई थी कि अगर 81 करोड़ लोग फ्री राशन ले रहे हैं, तो इसका मतलब है कि केवल करदाता ही इससे बाहर हैं। पढ़ें पूरी खबर…
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि कुछ राज्य जब अपने विकास को दिखाना चाहते हैं तो दावा करते हैं कि उनकी प्रति व्यक्ति आय बहुत ज्यादा है, प्रति व्यक्ति आय में तीसरे स्थान पर एक राज्य है, पर 70% आबादी गरीबी रेखा से नीचे है। यह क्या हो रहा है? ये विरोधाभासी चीजें हैं। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि हमें चिंता है कि क्या गरीबों को दिए जाने वाले लाभ उन तक पहुंच रहे हैं जो इसके हकदार नहीं हैं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट प्रवासी मजदूरों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की समस्याओं से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इस दौरान उसने केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ लेने के मामले में कुछ राज्यों के विरोधाभासी रुख पर चिंता जताई। इस दौरान याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि ई-श्रम पोर्टल पर राशन कार्ड जारी करने के लिए आवेदन करने वाले 30 करोड़ लोगों में से 8 करोड़ को अभी तक राशन कार्ड नहीं दिए गए हैं। कोर्ट ने सरकार से फ्री राशन वितरण पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने कहा है। साथ ही कहा कि गरीबों को राशन कार्ड उपलब्ध कराने के लिए एक सरकार प्रभावी तंत्र बनाए। याचिकाकर्ता के वकील की दलीलें क्या है पूरा मामला यह मामला कोविड-19 महामारी के दौरान प्रवासी मजदूरों से जुड़ा है। 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि वह सभी प्रवासी मजदूरों का ई श्रम पोर्टल पर रजिस्टर्ड करे और उन्हें मुफ्त राशन उपलब्ध कराए। लेकिन अब तक यह पूरी तरह से लागू नहीं हुआ, जिस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और केंद्र से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। हालांकि, केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत करीब 81.35 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दे रही है और इसी तरह की एक अन्य योजना के तहत 11 करोड़ अन्य लोग शामिल हैं। दिसंबर 2024 में कहा था- 81 करोड़ सुविधा ले रहे, सिर्फ टैक्सपेयर इससे बाहर सुप्रीम कोर्ट ने 9 दिसंबर 2024 को केंद्र सरकार के मुफ्त राशन बांटने पर सख्त टिप्पणी की थी। तब कोर्ट ने कहा था- कब तक ऐसे मुफ्त राशन बांटा जाएगा। सरकार रोजगार के अवसर क्यों नहीं पैदा कर रही? कोर्ट ने यह कहकर सरकारी मुफ्त योजनाओं (Freebies) पर नाराजगी जताई थी कि अगर 81 करोड़ लोग फ्री राशन ले रहे हैं, तो इसका मतलब है कि केवल करदाता ही इससे बाहर हैं। पढ़ें पूरी खबर…