अंकिता भंडारी हत्याकांड में यदि जांच औपचारिक रूप से CBI को सौंपी जाती है, तो यह प्रक्रिया सिर्फ केस टेकओवर तक सीमित नहीं रहेगी। दैनिक भास्कर एप से बातचीत में एक सीबीआई अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि एजेंसी जांच की शुरुआत नई एफआईआर दर्ज करने से करेगी और इसके बाद स्थानीय SIT की अब तक की पूरी जांच, सबूतों और फोरेंसिक पहलुओं की चरणबद्ध समीक्षा की जाएगी। अधिकारी के मुताबिक, सीबीआई इस केस में वैज्ञानिक, डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर यह परखने की कोशिश करेगी कि हत्या के पीछे केवल आरोपी ही नहीं, बल्कि किसी बड़े सिस्टम फेल्योर या कथित वीआईपी भूमिका की कोई कड़ी तो छूटी नहीं है। नई एफआईआर (FIR) और केस टेकओवर सीबीआई जांच की शुरुआत सबसे पहले एक नई एफआईआर दर्ज करने से होगी। हालांकि, स्थानीय पुलिस पहले ही एफआईआर दर्ज कर चुकी होती है, लेकिन सीबीआई उसी एफआईआर को अपने रिकॉर्ड में नए नंबर के साथ ‘री-रजिस्टर’ करेगी। इसके बाद, स्थानीय पुलिस (SIT) को अब तक की सारी फाइलें, सबूत और दस्तावेज औपचारिक रूप से सीबीआई को सौंपने होंगे। केस डायरी और पुलिस जांच की होगी समीक्षा सीबीआई की टीम सबसे पहले स्थानीय पुलिस द्वारा तैयार की गई ‘केस डायरी’ का अध्ययन करेगी। इसमें वे क्या सही हुआ, क्या गलत इसकी जांच की जाएगी। सीबीआई यह परखेगी कि पुलिस ने शुरुआती घंटों में क्या कार्रवाई की? क्या कोई सबूत छूट गया? या क्या किसी सबूत के साथ छेड़छाड़ की गई? अंकिता केस में रिसॉर्ट पर बुलडोजर चलाने या कमरे में आग लगने जैसी घटनाओं की सीबीआई बारीकी से समीक्षा करेगी कि कहीं यह सबूत मिटाने की कोशिश तो नहीं थी। क्राइम सीन री-क्रिएशन किया जाएगा यह सीबीआई जांच का सबसे अहम हिस्सा होता है। सीबीआई की टीम फोरेंसिक एक्सपर्ट्स (CFSL) के साथ घटना स्थल (वनंतरा रिसॉर्ट और नहर) का दौरा करेगी। टीम उसी समय और उसी परिस्थिति में घटना को दोहराने की कोशिश करेगी। जैसे- अंकिता को कब कमरे से निकाला गया, कौन सी गाड़ी इस्तेमाल हुई, नहर में धक्का कैसे दिया गया। इससे यह पता चलता है कि आरोपियों द्वारा बयां की गई कहानी साइंस और फिजिक्स के हिसाब से संभव है या नहीं। फोरेंसिक और डिजिटल सबूतों की गहराई से जांच स्थानीय पुलिस कई बार चश्मदीद गवाहों पर ज्यादा निर्भर करती है, लेकिन सीबीआई साइंटिफिक एविडेंस के आधार पर अपनी जांच को आगे लेकर जाएगी। सीबीआई आरोपियों और पीड़िता के मोबाइल डेटा, डिलीट की गई वॉट्सऐप चैट, टावर लोकेशन और कॉल रिकॉर्डिंग को रिकवर करने के लिए हैदराबाद या चंडीगढ़ की उन्नत लैब की मदद ले सकती है। रिसॉर्ट के डीवीआर (DVR) और सीसीटीवी फुटेज की जांच की जाएगी ताकि यह देखा जा सके कि फुटेज के साथ कोई छेड़छाड़ तो नहीं हुई है। आरोपियों और गवाहों से फिर से पूछताछ सीबीआई कभी भी पुलिस द्वारा ली गई गवाही पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करती। आरोपियों (पुलकित आर्य और अन्य) को रिमांड पर लेकर फिर से, और अलग-अलग कमरों में बैठाकर पूछताछ जाएगी। अगर बयानों में विरोधाभास मिलता है, तो सीबीआई उनका ‘नार्को टेस्ट’ या ‘पॉलीग्राफ टेस्ट’ (ब्रेन मैपिंग) करवाने की अनुमति कोर्ट से मांग सकती है। रिसॉर्ट के कर्मचारियों और पूर्व में काम कर चुके लोगों से भी दोबारा पूछताछ होगी। ‘वीआईपी गेस्ट’ और पुरानी कड़ियों को जोड़ा जाएगा अंकिता केस में सबसे बड़ा सवाल उस “वीआईपी गेस्ट” को लेकर है। सीबीआई का फोकस केवल हत्या तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वह उस मोटिव तक जाएगी। सीबीआई उन सभी लोगों की सूची खंगालेगी जो उस रिसॉर्ट में आते थे। वह वित्तीय लेन-देन की जांच करेगी कि रिसॉर्ट में पैसा कहां से आ रहा था और कौन लोग इसके पीछे थे। नई चार्जशीट दाखिल करेगी सीबीआई अधिकारी ने बताया कि तमाम सबूत, फोरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद आखिर में, सीबीआई अदालत में अपनी चार्जशीट दाखिल करती है। सीबीआई की चार्जशीट बहुत विस्तृत होगी, जिसमें हर आरोप के पीछे एक ठोस सबूत नत्थी किया जाता है, ताकि कोर्ट में केस टिक सके। उर्मिला और राठौर का वॉयस सैंपल लेने की तैयारी अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित VIP एंगल की जांच निर्णायक मोड़ पर है। वायरल ऑडियो क्लिप के मामले में SIT ने उर्मिला सनावर और पूर्व विधायक सुरेश राठौर के वॉयस सैंपल लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, वहीं VIP एंगल की जांच CBI को सौंपे जाने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। हरिद्वार और देहरादून में दर्ज चार मुकदमों की जांच कर रही SIT दोनों से पूछताछ कर चुकी है। अब कोर्ट से अनुमति लेकर मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में आवाज के नमूने लिए जाएंगे और उन्हें फॉरेंसिक लैब भेजा जाएगा। साथ ही, दोनों के मोबाइल फोन जमा कराने को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई बाकी है, जिससे ऑडियो की उत्पत्ति और प्रसार की कड़ी सामने आ सकती है। VIP एंगल में आगे क्या होगा? वीआईपी के नाम को लेकर बनी असमंजस की स्थिति और समाज में फैली शंकाओं को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पहलू की जांच CBI से कराने का निर्णय लिया है। बसंत विहार थाने में दर्ज वह एफआईआर, जो पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने वीआईपी का नाम उजागर करने की मांग को लेकर दर्ज कराई थी, अब CBI जांच का आधार बनेगी। पुलिस मुख्यालय के माध्यम से इस एफआईआर से जुड़ी पूरी पत्रावली शासन को भेज दी गई है, जिसे आगे केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपा जाएगा। CBI जांच शुरू होने के बाद संभावना है कि वह ऑडियो क्लिप, SIT की अब तक की जांच, गवाहों के बयान और तकनीकी साक्ष्यों की नए सिरे से समीक्षा करेगी। 4 पॉइंट्स में जानिए, कैसे बदल सकती है जांच की दिशा? ———————- ये खबर भी पढ़ें… ‘VIP’ के नाम से अंकिता के घरवाले अंजान:पिता बोले- झूठ बोल रही SIT, एसपी ने कहा- उन्हीं के लिए तो हम लड़ रहे अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच के लिए बनाई गई SIT ने शनिवार को VIP का नाम धर्मेंद्र उर्फ प्रधान बताया जिसे अंकिता ने पिता ने खारिज कर दिया है। उत्तराखंड के पौड़ी जिले में रहने वाले अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी ने कहा कि जांच के दौरान एसआईटी ने कभी किसी VIP का जिक्र नहीं किया।(पढ़ें पूरी खबर)
अंकिता भंडारी हत्याकांड में यदि जांच औपचारिक रूप से CBI को सौंपी जाती है, तो यह प्रक्रिया सिर्फ केस टेकओवर तक सीमित नहीं रहेगी। दैनिक भास्कर एप से बातचीत में एक सीबीआई अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि एजेंसी जांच की शुरुआत नई एफआईआर दर्ज करने से करेगी और इसके बाद स्थानीय SIT की अब तक की पूरी जांच, सबूतों और फोरेंसिक पहलुओं की चरणबद्ध समीक्षा की जाएगी। अधिकारी के मुताबिक, सीबीआई इस केस में वैज्ञानिक, डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर यह परखने की कोशिश करेगी कि हत्या के पीछे केवल आरोपी ही नहीं, बल्कि किसी बड़े सिस्टम फेल्योर या कथित वीआईपी भूमिका की कोई कड़ी तो छूटी नहीं है। नई एफआईआर (FIR) और केस टेकओवर सीबीआई जांच की शुरुआत सबसे पहले एक नई एफआईआर दर्ज करने से होगी। हालांकि, स्थानीय पुलिस पहले ही एफआईआर दर्ज कर चुकी होती है, लेकिन सीबीआई उसी एफआईआर को अपने रिकॉर्ड में नए नंबर के साथ ‘री-रजिस्टर’ करेगी। इसके बाद, स्थानीय पुलिस (SIT) को अब तक की सारी फाइलें, सबूत और दस्तावेज औपचारिक रूप से सीबीआई को सौंपने होंगे। केस डायरी और पुलिस जांच की होगी समीक्षा सीबीआई की टीम सबसे पहले स्थानीय पुलिस द्वारा तैयार की गई ‘केस डायरी’ का अध्ययन करेगी। इसमें वे क्या सही हुआ, क्या गलत इसकी जांच की जाएगी। सीबीआई यह परखेगी कि पुलिस ने शुरुआती घंटों में क्या कार्रवाई की? क्या कोई सबूत छूट गया? या क्या किसी सबूत के साथ छेड़छाड़ की गई? अंकिता केस में रिसॉर्ट पर बुलडोजर चलाने या कमरे में आग लगने जैसी घटनाओं की सीबीआई बारीकी से समीक्षा करेगी कि कहीं यह सबूत मिटाने की कोशिश तो नहीं थी। क्राइम सीन री-क्रिएशन किया जाएगा यह सीबीआई जांच का सबसे अहम हिस्सा होता है। सीबीआई की टीम फोरेंसिक एक्सपर्ट्स (CFSL) के साथ घटना स्थल (वनंतरा रिसॉर्ट और नहर) का दौरा करेगी। टीम उसी समय और उसी परिस्थिति में घटना को दोहराने की कोशिश करेगी। जैसे- अंकिता को कब कमरे से निकाला गया, कौन सी गाड़ी इस्तेमाल हुई, नहर में धक्का कैसे दिया गया। इससे यह पता चलता है कि आरोपियों द्वारा बयां की गई कहानी साइंस और फिजिक्स के हिसाब से संभव है या नहीं। फोरेंसिक और डिजिटल सबूतों की गहराई से जांच स्थानीय पुलिस कई बार चश्मदीद गवाहों पर ज्यादा निर्भर करती है, लेकिन सीबीआई साइंटिफिक एविडेंस के आधार पर अपनी जांच को आगे लेकर जाएगी। सीबीआई आरोपियों और पीड़िता के मोबाइल डेटा, डिलीट की गई वॉट्सऐप चैट, टावर लोकेशन और कॉल रिकॉर्डिंग को रिकवर करने के लिए हैदराबाद या चंडीगढ़ की उन्नत लैब की मदद ले सकती है। रिसॉर्ट के डीवीआर (DVR) और सीसीटीवी फुटेज की जांच की जाएगी ताकि यह देखा जा सके कि फुटेज के साथ कोई छेड़छाड़ तो नहीं हुई है। आरोपियों और गवाहों से फिर से पूछताछ सीबीआई कभी भी पुलिस द्वारा ली गई गवाही पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करती। आरोपियों (पुलकित आर्य और अन्य) को रिमांड पर लेकर फिर से, और अलग-अलग कमरों में बैठाकर पूछताछ जाएगी। अगर बयानों में विरोधाभास मिलता है, तो सीबीआई उनका ‘नार्को टेस्ट’ या ‘पॉलीग्राफ टेस्ट’ (ब्रेन मैपिंग) करवाने की अनुमति कोर्ट से मांग सकती है। रिसॉर्ट के कर्मचारियों और पूर्व में काम कर चुके लोगों से भी दोबारा पूछताछ होगी। ‘वीआईपी गेस्ट’ और पुरानी कड़ियों को जोड़ा जाएगा अंकिता केस में सबसे बड़ा सवाल उस “वीआईपी गेस्ट” को लेकर है। सीबीआई का फोकस केवल हत्या तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वह उस मोटिव तक जाएगी। सीबीआई उन सभी लोगों की सूची खंगालेगी जो उस रिसॉर्ट में आते थे। वह वित्तीय लेन-देन की जांच करेगी कि रिसॉर्ट में पैसा कहां से आ रहा था और कौन लोग इसके पीछे थे। नई चार्जशीट दाखिल करेगी सीबीआई अधिकारी ने बताया कि तमाम सबूत, फोरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद आखिर में, सीबीआई अदालत में अपनी चार्जशीट दाखिल करती है। सीबीआई की चार्जशीट बहुत विस्तृत होगी, जिसमें हर आरोप के पीछे एक ठोस सबूत नत्थी किया जाता है, ताकि कोर्ट में केस टिक सके। उर्मिला और राठौर का वॉयस सैंपल लेने की तैयारी अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित VIP एंगल की जांच निर्णायक मोड़ पर है। वायरल ऑडियो क्लिप के मामले में SIT ने उर्मिला सनावर और पूर्व विधायक सुरेश राठौर के वॉयस सैंपल लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, वहीं VIP एंगल की जांच CBI को सौंपे जाने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। हरिद्वार और देहरादून में दर्ज चार मुकदमों की जांच कर रही SIT दोनों से पूछताछ कर चुकी है। अब कोर्ट से अनुमति लेकर मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में आवाज के नमूने लिए जाएंगे और उन्हें फॉरेंसिक लैब भेजा जाएगा। साथ ही, दोनों के मोबाइल फोन जमा कराने को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई बाकी है, जिससे ऑडियो की उत्पत्ति और प्रसार की कड़ी सामने आ सकती है। VIP एंगल में आगे क्या होगा? वीआईपी के नाम को लेकर बनी असमंजस की स्थिति और समाज में फैली शंकाओं को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पहलू की जांच CBI से कराने का निर्णय लिया है। बसंत विहार थाने में दर्ज वह एफआईआर, जो पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने वीआईपी का नाम उजागर करने की मांग को लेकर दर्ज कराई थी, अब CBI जांच का आधार बनेगी। पुलिस मुख्यालय के माध्यम से इस एफआईआर से जुड़ी पूरी पत्रावली शासन को भेज दी गई है, जिसे आगे केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपा जाएगा। CBI जांच शुरू होने के बाद संभावना है कि वह ऑडियो क्लिप, SIT की अब तक की जांच, गवाहों के बयान और तकनीकी साक्ष्यों की नए सिरे से समीक्षा करेगी। 4 पॉइंट्स में जानिए, कैसे बदल सकती है जांच की दिशा? ———————- ये खबर भी पढ़ें… ‘VIP’ के नाम से अंकिता के घरवाले अंजान:पिता बोले- झूठ बोल रही SIT, एसपी ने कहा- उन्हीं के लिए तो हम लड़ रहे अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच के लिए बनाई गई SIT ने शनिवार को VIP का नाम धर्मेंद्र उर्फ प्रधान बताया जिसे अंकिता ने पिता ने खारिज कर दिया है। उत्तराखंड के पौड़ी जिले में रहने वाले अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी ने कहा कि जांच के दौरान एसआईटी ने कभी किसी VIP का जिक्र नहीं किया।(पढ़ें पूरी खबर)