राजस्थान डिजिफेस्ट टाई ग्लोबल समिट में फर्स्ट चेक फर्स्ट कन्विक्शन सेशन की चर्चा में कहा गया कि बीते 10 सालों में स्टार्टअप के फर्स्ट चैक के साइज में बड़ा बदलाव आ गया है। केंद्रीय उद्योग संवर्धन में संयुक्त सचिव संजीव सिंह ने कहा कि सरकार ने 2016 से स्टार्टअप्स में निवेश को प्रोत्साहित किया है। केंद्र सरकार एजुटेक, मैन्यूफैक्चरिंग, डीपटेक, माइक्रो वीसी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रही हैं। सरकार के प्रयासों एवं स्टार्टअप फाउंडर्स की मेहनत से स्टार्टअप्स को लेकर देश में वातावरण पूरी तरह बदल चुका है। निवेशकों की रुचि स्टार्टअप में लगातार बड़ी है। आज भारत दुनिया में यूनिकॉर्न बनाने वाला तीसरा देश बना है। आइवीकैप वेंचर्स के फाउंडर विक्रम गुप्ता ने कहा कि एक दशक में स्टार्टअप्स के क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन हुआ है। स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया जैसे कार्यक्रमों के कारण आज भारत में 2 लाख से ज्यादा स्टार्टअप्स चल रहे हैं। पहले स्टार्टअप्स में निवेश पर मन में संशय रहता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। निवेशक उसके विस्तार की संभावना का आकलन करता है। स्टार्टअप में लक्ष्य के क्रियान्वयन की क्षमता, टीम की प्रतिभा व सफलता के लिए उत्साह का भी मूल्यांकन करता है। निवेशक यह भी ध्यान रखते हैं कि वे स्वयं अपने अनुभव के साथ किस स्तर पर स्टार्टअप के विकास में योगदान दे सकते हैं। कंपनी में निवेश करने से पहले स्टार्टअप जिस क्षेत्र से संबंधित है, उस क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह को गंभीरता से लिया जाता है। बड़ी कंपनियां छोटे निवेश से शुरू हुईं
यूनिकॉर्न इंडिया वेंचर्स के मैनेजिंग पार्टनर अनिल जोशी ने कहा कि सभी बड़ी कंपनियां छोटे निवेश के साथ ही शुरू हुई हैं। स्टार्टअप फाउंडर की विश्वसनीयता पर ही पहला निवेश निर्भर करता है। जहां पहले नई सोच वाले उद्यमियों के पास कम विकल्प होते थे, वहीं आज निवेशकों का रुझान बढ़ाने से स्टार्टअप फाउंडर को मिलने वाले पहले चेक की राशि भी बढ़ी है।
राजस्थान डिजिफेस्ट टाई ग्लोबल समिट में फर्स्ट चेक फर्स्ट कन्विक्शन सेशन की चर्चा में कहा गया कि बीते 10 सालों में स्टार्टअप के फर्स्ट चैक के साइज में बड़ा बदलाव आ गया है। केंद्रीय उद्योग संवर्धन में संयुक्त सचिव संजीव सिंह ने कहा कि सरकार ने 2016 से स्टार्टअप्स में निवेश को प्रोत्साहित किया है। केंद्र सरकार एजुटेक, मैन्यूफैक्चरिंग, डीपटेक, माइक्रो वीसी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रही हैं। सरकार के प्रयासों एवं स्टार्टअप फाउंडर्स की मेहनत से स्टार्टअप्स को लेकर देश में वातावरण पूरी तरह बदल चुका है। निवेशकों की रुचि स्टार्टअप में लगातार बड़ी है। आज भारत दुनिया में यूनिकॉर्न बनाने वाला तीसरा देश बना है। आइवीकैप वेंचर्स के फाउंडर विक्रम गुप्ता ने कहा कि एक दशक में स्टार्टअप्स के क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन हुआ है। स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया जैसे कार्यक्रमों के कारण आज भारत में 2 लाख से ज्यादा स्टार्टअप्स चल रहे हैं। पहले स्टार्टअप्स में निवेश पर मन में संशय रहता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। निवेशक उसके विस्तार की संभावना का आकलन करता है। स्टार्टअप में लक्ष्य के क्रियान्वयन की क्षमता, टीम की प्रतिभा व सफलता के लिए उत्साह का भी मूल्यांकन करता है। निवेशक यह भी ध्यान रखते हैं कि वे स्वयं अपने अनुभव के साथ किस स्तर पर स्टार्टअप के विकास में योगदान दे सकते हैं। कंपनी में निवेश करने से पहले स्टार्टअप जिस क्षेत्र से संबंधित है, उस क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह को गंभीरता से लिया जाता है। बड़ी कंपनियां छोटे निवेश से शुरू हुईं
यूनिकॉर्न इंडिया वेंचर्स के मैनेजिंग पार्टनर अनिल जोशी ने कहा कि सभी बड़ी कंपनियां छोटे निवेश के साथ ही शुरू हुई हैं। स्टार्टअप फाउंडर की विश्वसनीयता पर ही पहला निवेश निर्भर करता है। जहां पहले नई सोच वाले उद्यमियों के पास कम विकल्प होते थे, वहीं आज निवेशकों का रुझान बढ़ाने से स्टार्टअप फाउंडर को मिलने वाले पहले चेक की राशि भी बढ़ी है।