कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता बनने जा रहे हैं। वे 7 जनवरी को यह रिकॉर्ड अपने नाम कर लेंगे। उन्होंने मंगलवार को मुख्यमंत्री पद पर 2,792 दिन पूरे कर लिए हैं। इसी के साथ उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री देवराज उर्स के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। देवराज उर्स ने 1972-77 और 1978-80 के बीच दो कार्यकाल में मुख्यमंत्री के रूप में काम किया था। उन्हें सामाजिक न्याय और भूमि सुधारों का प्रमुख चेहरा माना जाता है। सिद्धारमैया उर्स के बाद ऐसे इकलौते मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने पांच साल का पूर्ण कार्यकाल पूरा किया। सिद्धारमैया का पहला कार्यकाल 13 मई 2013 से 15 मई 2018 तक 1,829 दिनों का रहा। दूसरे कार्यकाल में, 20 मई 2023 से अब तक वह 963 दिन पूरे कर चुके हैं। सिद्धारमैया जनता दल से राजनीति की शुरुआत की सिद्धारमैया ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कर्नाटक में समाजवादी विचारधारा के साथ की। वे पहले जनता दल से जुड़े और राज्य की राजनीति में सक्रिय हुए। वे पहली बार मैसूरु क्षेत्र से विधायक बने। इसके बाद कई बार विधानसभा पहुंचे। जनता दल (एस) के दौर में वे पार्टी के प्रमुख नेताओं में रहे। इस दौरान उन्होंने उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जैसे अहम पद संभाले। सिद्धारमैया जनता परिवार में रहते हुए कांग्रेस विरोधी राजनीति के लिए जाने जाते थे। गरीब किसान परिवार से आने वाले सिद्धारमैया ने जेडी(एस) में रहते हुए उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री के रूप में काम किया। 2004 में कांग्रेस-जेडी(एस) गठबंधन सरकार में वह मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने पिछड़ा वर्ग राजनीति में खुद को स्थापित किया और ‘अहिंदा’ (अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित) मंच को आगे बढ़ाया। 2006 में कांग्रेस का दामन थामा, दो बार CM बने हालांकि, पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा के नेतृत्व वाली जेडी(एस) से बाहर किए जाने के बाद उन्होंने कांग्रेस का रुख किया। 2006 में सिद्धारमैया ने कांग्रेस का दामन थामा। इसके बाद पार्टी में उनकी भूमिका लगातार मजबूत होती गई। 2013 में कांग्रेस की जीत के बाद वे कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने। यह उनका पहला पूर्ण कार्यकाल रहा। 2018 के बाद वे विधानसभा में विपक्ष के वरिष्ठ नेता के रूप में सक्रिय रहे। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद वे दोबारा मुख्यमंत्री बने। नौ बार विधायक रह चुके सिद्धारमैया अब तक 16 राज्य बजट पेश कर चुके हैं। उन्होंने संकेत दिए हैं कि यह उनका अंतिम मुख्यमंत्री कार्यकाल हो सकता है, हालांकि सक्रिय राजनीति में बने रहने को लेकर उन्होंने स्पष्ट रुख नहीं लिया है। ————————————– कर्नाटक की यह खबर भी पढ़ें… कर्नाटक में पुलिस ने 1-साल के बच्चे की बलि रुकवाई:खजाने की तलाश में घर में गड्ढा खोदकर पूजा की जा रही थी कर्नाटक के बेंगलुरु ग्रामीण जिले में 3 जनवरी को 1 साल के बच्चे की बलि दी जा रही थी। अज्ञात कॉलर ने पुलिस को कॉल कर इसकी जानकारी दी। बलि होने से पहले ही पुलिस मौके पर पहुंची और बलि रुकवाई। पुलिस के मुताबिक खजाने की तलाश में इस पूरी घटना को अंजान दिया जा रहा था। सैयद इमरान नाम के व्यक्ति के घर में ये बलि दी जा रही थी। पूरी खबर पढ़ें…
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता बनने जा रहे हैं। वे 7 जनवरी को यह रिकॉर्ड अपने नाम कर लेंगे। उन्होंने मंगलवार को मुख्यमंत्री पद पर 2,792 दिन पूरे कर लिए हैं। इसी के साथ उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री देवराज उर्स के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। देवराज उर्स ने 1972-77 और 1978-80 के बीच दो कार्यकाल में मुख्यमंत्री के रूप में काम किया था। उन्हें सामाजिक न्याय और भूमि सुधारों का प्रमुख चेहरा माना जाता है। सिद्धारमैया उर्स के बाद ऐसे इकलौते मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने पांच साल का पूर्ण कार्यकाल पूरा किया। सिद्धारमैया का पहला कार्यकाल 13 मई 2013 से 15 मई 2018 तक 1,829 दिनों का रहा। दूसरे कार्यकाल में, 20 मई 2023 से अब तक वह 963 दिन पूरे कर चुके हैं। सिद्धारमैया जनता दल से राजनीति की शुरुआत की सिद्धारमैया ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कर्नाटक में समाजवादी विचारधारा के साथ की। वे पहले जनता दल से जुड़े और राज्य की राजनीति में सक्रिय हुए। वे पहली बार मैसूरु क्षेत्र से विधायक बने। इसके बाद कई बार विधानसभा पहुंचे। जनता दल (एस) के दौर में वे पार्टी के प्रमुख नेताओं में रहे। इस दौरान उन्होंने उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जैसे अहम पद संभाले। सिद्धारमैया जनता परिवार में रहते हुए कांग्रेस विरोधी राजनीति के लिए जाने जाते थे। गरीब किसान परिवार से आने वाले सिद्धारमैया ने जेडी(एस) में रहते हुए उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री के रूप में काम किया। 2004 में कांग्रेस-जेडी(एस) गठबंधन सरकार में वह मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने पिछड़ा वर्ग राजनीति में खुद को स्थापित किया और ‘अहिंदा’ (अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित) मंच को आगे बढ़ाया। 2006 में कांग्रेस का दामन थामा, दो बार CM बने हालांकि, पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा के नेतृत्व वाली जेडी(एस) से बाहर किए जाने के बाद उन्होंने कांग्रेस का रुख किया। 2006 में सिद्धारमैया ने कांग्रेस का दामन थामा। इसके बाद पार्टी में उनकी भूमिका लगातार मजबूत होती गई। 2013 में कांग्रेस की जीत के बाद वे कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने। यह उनका पहला पूर्ण कार्यकाल रहा। 2018 के बाद वे विधानसभा में विपक्ष के वरिष्ठ नेता के रूप में सक्रिय रहे। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद वे दोबारा मुख्यमंत्री बने। नौ बार विधायक रह चुके सिद्धारमैया अब तक 16 राज्य बजट पेश कर चुके हैं। उन्होंने संकेत दिए हैं कि यह उनका अंतिम मुख्यमंत्री कार्यकाल हो सकता है, हालांकि सक्रिय राजनीति में बने रहने को लेकर उन्होंने स्पष्ट रुख नहीं लिया है। ————————————– कर्नाटक की यह खबर भी पढ़ें… कर्नाटक में पुलिस ने 1-साल के बच्चे की बलि रुकवाई:खजाने की तलाश में घर में गड्ढा खोदकर पूजा की जा रही थी कर्नाटक के बेंगलुरु ग्रामीण जिले में 3 जनवरी को 1 साल के बच्चे की बलि दी जा रही थी। अज्ञात कॉलर ने पुलिस को कॉल कर इसकी जानकारी दी। बलि होने से पहले ही पुलिस मौके पर पहुंची और बलि रुकवाई। पुलिस के मुताबिक खजाने की तलाश में इस पूरी घटना को अंजान दिया जा रहा था। सैयद इमरान नाम के व्यक्ति के घर में ये बलि दी जा रही थी। पूरी खबर पढ़ें…