भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने शुक्रवार को पणजी में कहा कि मध्यस्थता कानून की कमजोरी का संकेत नहीं है, बल्कि यह उसका सबसे बड़ा विकास है। यह न्याय के कल्चर से भागीदारी के कल्चर की ओर एक सच्चा बदलाव है, जहां हम सद्भाव पैदा करते हैं। CJI दक्षिण गोवा के सांकवाले गांव में इंडिया इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लीगल एजुकेशन एंड रिसर्च के इवेंट मिडिएशन अवेयरनेस वॉकथॉन में भाग लिया। यहां ‘मध्यस्थता: आज के संदर्भ में कितना महत्वपूर्ण’ विषय पर बोलते हुए उन्होंने अपनी बात रखी। CJI सूर्यकांत ने कहा कि वह एक मल्टी-डोर कोर्टहाउस की ओर बदलाव की कल्पना करते हैं, जहां कोर्ट सिर्फ ट्रायल की जगह नहीं, बल्कि विवाद समाधान के लिए एक व्यापक केंद्र हो। कार्यक्रम में उन्होंने 2 लाख मिडिएटर्स के साथ वॉकथॉन में भाग लिया। साथ ही पौधारोपण भी किया। मीडिएशन पर CJI के बयान की बड़ी बातें… देश को 2.5 लाख से ज्यादा मध्यस्थों की जरूरत: CJI CJI ने कहा कि विवादों के निपटारे में मीडिएशन को ट्रायल के विकल्प के तौर पर अपनाने के लिए जागरूकता जरूरी है। उनके मुताबिक, हाल के वर्षों में मीडिएशन की सफलता दर में 30% से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। CJI सूर्यकांत ने कहा कि देश में मीडिएशन के लिए बड़ी संख्या में प्रशिक्षित लोगों की जरूरत है। ‘कमर्शियल विवाद में अच्छे रिजल्ट’ CJI सूर्यकांत ने कहा किकमर्शियल विवाद, वैवाहिक मामले, मोटर एक्सीडेंट क्लेम और धारा 138 (चेक बाउंस) से जुड़े मामलों में मीडिएशन के अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। 22 नवंबर: शपथ लेने से पहले CJI ने कहा था- पेंडिंग केस निपटाना और विवाद सुलझाने में मीडिएशन प्रायोरिटी होगा चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया पद की शपथ लेने से पहले जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था कि देश में 5 करोड़ से ज्यादा पेंडिंग केस न्यायपालिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं। उन्होंने कहा था कि इन बैकलॉग से निपटना और विवाद सुलझाने के लिए मीडिएशन को बढ़ावा देना, उनकी दो प्रायोरिटी होंगी। पूरी खबर पढ़ें… ———————— ये खबर भी पढ़ें… SC बोला-रिटायरमेंट से पहले जजों का ताबड़तोड़ फैसले सुनाना दुर्भाग्यपूर्ण:ऐसा लगता है कि जज लास्ट ओवर में छक्के मार रहे हैं सुप्रीम कोर्ट ने 18 दिसंबर को न्यायपालिका में भ्रष्ट आचरण को लेकर अप्रत्यक्ष रूप से अहम टिप्पणी की थी। कोर्ट ने भ्रष्टाचार का जिक्र किए बिना कहा कि रिटायरमेंट से ठीक पहले जजों का बाहरी कारणों से प्रभावित होकर ताबड़तोड़ फैसले सुनाना दुर्भाग्यपूर्ण है। पूरी खबर पढ़ें…
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने शुक्रवार को पणजी में कहा कि मध्यस्थता कानून की कमजोरी का संकेत नहीं है, बल्कि यह उसका सबसे बड़ा विकास है। यह न्याय के कल्चर से भागीदारी के कल्चर की ओर एक सच्चा बदलाव है, जहां हम सद्भाव पैदा करते हैं। CJI दक्षिण गोवा के सांकवाले गांव में इंडिया इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लीगल एजुकेशन एंड रिसर्च के इवेंट मिडिएशन अवेयरनेस वॉकथॉन में भाग लिया। यहां ‘मध्यस्थता: आज के संदर्भ में कितना महत्वपूर्ण’ विषय पर बोलते हुए उन्होंने अपनी बात रखी। CJI सूर्यकांत ने कहा कि वह एक मल्टी-डोर कोर्टहाउस की ओर बदलाव की कल्पना करते हैं, जहां कोर्ट सिर्फ ट्रायल की जगह नहीं, बल्कि विवाद समाधान के लिए एक व्यापक केंद्र हो। कार्यक्रम में उन्होंने 2 लाख मिडिएटर्स के साथ वॉकथॉन में भाग लिया। साथ ही पौधारोपण भी किया। मीडिएशन पर CJI के बयान की बड़ी बातें… देश को 2.5 लाख से ज्यादा मध्यस्थों की जरूरत: CJI CJI ने कहा कि विवादों के निपटारे में मीडिएशन को ट्रायल के विकल्प के तौर पर अपनाने के लिए जागरूकता जरूरी है। उनके मुताबिक, हाल के वर्षों में मीडिएशन की सफलता दर में 30% से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। CJI सूर्यकांत ने कहा कि देश में मीडिएशन के लिए बड़ी संख्या में प्रशिक्षित लोगों की जरूरत है। ‘कमर्शियल विवाद में अच्छे रिजल्ट’ CJI सूर्यकांत ने कहा किकमर्शियल विवाद, वैवाहिक मामले, मोटर एक्सीडेंट क्लेम और धारा 138 (चेक बाउंस) से जुड़े मामलों में मीडिएशन के अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। 22 नवंबर: शपथ लेने से पहले CJI ने कहा था- पेंडिंग केस निपटाना और विवाद सुलझाने में मीडिएशन प्रायोरिटी होगा चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया पद की शपथ लेने से पहले जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था कि देश में 5 करोड़ से ज्यादा पेंडिंग केस न्यायपालिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं। उन्होंने कहा था कि इन बैकलॉग से निपटना और विवाद सुलझाने के लिए मीडिएशन को बढ़ावा देना, उनकी दो प्रायोरिटी होंगी। पूरी खबर पढ़ें… ———————— ये खबर भी पढ़ें… SC बोला-रिटायरमेंट से पहले जजों का ताबड़तोड़ फैसले सुनाना दुर्भाग्यपूर्ण:ऐसा लगता है कि जज लास्ट ओवर में छक्के मार रहे हैं सुप्रीम कोर्ट ने 18 दिसंबर को न्यायपालिका में भ्रष्ट आचरण को लेकर अप्रत्यक्ष रूप से अहम टिप्पणी की थी। कोर्ट ने भ्रष्टाचार का जिक्र किए बिना कहा कि रिटायरमेंट से ठीक पहले जजों का बाहरी कारणों से प्रभावित होकर ताबड़तोड़ फैसले सुनाना दुर्भाग्यपूर्ण है। पूरी खबर पढ़ें…