दिल्ली ब्लास्ट के बाद जांच एजेंसियों के निशाने पर आई फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी पर शिकंजा कस गया है। फरीदाबाद पुलिस ने भी एसीपी क्राइम वरुण दहिया की अगुआई में SIT बना दी है। यह टीम दिल्ली ब्लास्ट के लोकल कनेक्शन की जांच करेगी। वहीं, मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग के आरोपों के बारे में तथ्यों को जानने के लिए ED गिरफ्तार चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी को यूनिवर्सिटी कैंपस लाने की तैयारी में है। जिससे फंडिंग और गलत तरीके से स्टूडेंट्स से ली है फीस को लेकर जानकारी ली जाएगी। तीन दिन पहले जम्मू कश्मीर में आरोपी जसीर बिलाल वानी के पिता द्वारा आग लगाकर सुसाइड करने के बाद नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने अपनी जांच स्ट्रेटजी बदल दी है। अब ‘टारगेटेड लिंक वाले व्यक्ति पर फोकस किया जाएगा। यानी बिना पुख्ता सबूत के किसी को भी एक घंटे से ज्यादा नहीं रोका जा रहा। सस्पेक्टेड की बनाई 3 कैटेगरी… स्टूडेंट्स के पेरेंट्स कल पहुंचेंगे यूनिवर्सिटी
मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस और अन्य कोर्सों के करीब 500 स्टूडेंट्स के माता-पिता कैंपस कल आकर अपना पक्ष रखेंगे। चंडीगढ़ के एडवोकेट कृष्णपाल सिंह ने कहा कि पेरेंट्स तस्वीर साफ करना चाहते हैं कि उनके बच्चे निर्दोष हैं और जांच के नाम पर उनके भविष्य से खिलवाड़ न हो। माता-पिता चिंतित हैं कि मिसिंग फैकल्टी मेंबर्स और चल रही जांच से कॉलेज की छवि खराब हो रही है, जिसका असर स्टूडेंट्स के करियर पर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि बच्चे सालों की मेहनत से एमबीबीएस में आए हैं। कुछ डॉक्टरों की गलती का ठीकरा स्टूडेंट्स पर क्यों? हम चाहते हैं कि एजेंसियां स्टूडेंट्स के रिकॉर्ड चेक करें और क्लियरेंस सर्टिफिकेट दें, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रहे। पेरेंट्स ने वॉट्सएप ग्रुप बनाया
अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन की गिरफ्तारी के बाद कॉलेज के छात्रों के अभिभावकों में डर का माहौल है। इसको लेकर अभिभावक अब इकट्ठे होने लगे हैं एक दूसरे से आपस में बात कर रहे हैं। पेरेंट्स वॉट्सएप ग्रुप बनाकर बात कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई बच्चों का तो पढ़ाई का लास्ट ईयर चल रहा है, उसकी तरफ किसी का भी ध्यान नहीं है। ना तो जांच एजेंसियों और न ही सरकार का कोई ध्यान है। 48 घंटे बाद भी मौलवी और उर्दू शिक्षक रिहा नहीं
फरीदाबाद क्राइम ब्रांच द्वारा मंगलवार देर शाम सोहना के रायपुर गांव स्थित शाही जामा मस्जिद से पकड़े मौलवी तैयब हुसैन व उर्दू शिक्षक फरहान को 48 घंटे बाद भी नहीं छोड़ा गया है। दोनों नूंह जिले के घासेड़ा गांव के निवासी हैं। ब्लास्ट का मुख्य आरोपी डॉ. उमर मोहम्मद उन नबी, इस मस्जिद में नमाज पढ़ने आता था। जांच एजेंसियां पता कर रही हैं कि उमर की मौलवी या शिक्षक से किस तरह की मुलाकात होती थी। एनआईए ने यहां लगे सीसीटीवी की डीवीआर भी अपने कब्जे में ली है। सूत्रों का कहना है कि एक महीने के बैकअप में से एक दिन की फुटेज जानबूझ कर डिलीट की गई थी, इसीलिए जांच एजेंसियों को शक है। उनका इस साजिश से क्या लिंक है, इसकी जानकारी हासिल की जा रही है। दरअसल, उमर ने अमोनियम नाइट्रेट जैसा विस्फोटक सोहना मंडी से खरीदा था, जो ब्लास्ट में इस्तेमाल हुआ। अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर फोकस
अल फलाह यूनिवर्सिटी के 200 से ज्यादा डॉक्टर और स्टाफ की जांच चल रही है। एजेंसियां कैंपस पर अस्थायी कमांड सेंटर स्थापित कर चुकी हैं। 1,000 से अधिक लोगों से पूछताछ हुई, कई संदिग्धों ने मोबाइल डेटा डिलीट किया, जिसकी रिकवरी हो रही है। हालांकि जांच एजेंसियां ज्यादा जानकारी शेयर नहीं कर रही हैं। पुराना टेरर लिंक उजागर
जांच में 2008 दिल्ली-अहमदाबाद ब्लास्ट के आरोपी मिर्जा शादाब बैग का नाम सामने आया, जो अल-फलाह का पूर्व छात्र था। IM (इंडियन मुजाहिदीन) से कनेक्शन की पड़ताल हो रही है। व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल का स्ट्रक्चर
यह मॉड्यूल ‘शिक्षित’ लोगों पर आधारित है, जहां डॉक्टर, प्रोफेसर और स्टूडेंट्स को रिक्रूट किया गया। मुख्य आरोपी डॉ. उमर मुहम्मद उन नबी अल-फलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर था। जांच में पाया गया कि यूनिवर्सिटी कैंपस को ‘कवर’ के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। ————— ये खबर भी पढ़ें… दिल्ली ब्लास्ट, डॉ. मुजम्मिल फरीदाबाद में आटा चक्की से यूरिया पीसता था, इलेक्ट्रॉनिक मशीन बरामद NIA की टीम ने बुधवार देर रात फरीदाबाद के गांव धौज में टैक्सी ड्राइवर के घर से आटा-चक्की और इलेक्ट्रिकल मशीन बरामद की। सूत्रों के मुताबिक इसी आटा चक्की में डॉ. मुजम्मिल यूरिया पीसता था, फिर मशीन से उसे रिफाइन करता था। इसके बाद केमिकल मिलाकर विस्फोटक बनाता था। केमिकल अल-फलाह यूनिवर्सिटी की लैब से चुराया था। पूरी खबर पढ़ें…
दिल्ली ब्लास्ट के बाद जांच एजेंसियों के निशाने पर आई फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी पर शिकंजा कस गया है। फरीदाबाद पुलिस ने भी एसीपी क्राइम वरुण दहिया की अगुआई में SIT बना दी है। यह टीम दिल्ली ब्लास्ट के लोकल कनेक्शन की जांच करेगी। वहीं, मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग के आरोपों के बारे में तथ्यों को जानने के लिए ED गिरफ्तार चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी को यूनिवर्सिटी कैंपस लाने की तैयारी में है। जिससे फंडिंग और गलत तरीके से स्टूडेंट्स से ली है फीस को लेकर जानकारी ली जाएगी। तीन दिन पहले जम्मू कश्मीर में आरोपी जसीर बिलाल वानी के पिता द्वारा आग लगाकर सुसाइड करने के बाद नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने अपनी जांच स्ट्रेटजी बदल दी है। अब ‘टारगेटेड लिंक वाले व्यक्ति पर फोकस किया जाएगा। यानी बिना पुख्ता सबूत के किसी को भी एक घंटे से ज्यादा नहीं रोका जा रहा। सस्पेक्टेड की बनाई 3 कैटेगरी… स्टूडेंट्स के पेरेंट्स कल पहुंचेंगे यूनिवर्सिटी
मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस और अन्य कोर्सों के करीब 500 स्टूडेंट्स के माता-पिता कैंपस कल आकर अपना पक्ष रखेंगे। चंडीगढ़ के एडवोकेट कृष्णपाल सिंह ने कहा कि पेरेंट्स तस्वीर साफ करना चाहते हैं कि उनके बच्चे निर्दोष हैं और जांच के नाम पर उनके भविष्य से खिलवाड़ न हो। माता-पिता चिंतित हैं कि मिसिंग फैकल्टी मेंबर्स और चल रही जांच से कॉलेज की छवि खराब हो रही है, जिसका असर स्टूडेंट्स के करियर पर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि बच्चे सालों की मेहनत से एमबीबीएस में आए हैं। कुछ डॉक्टरों की गलती का ठीकरा स्टूडेंट्स पर क्यों? हम चाहते हैं कि एजेंसियां स्टूडेंट्स के रिकॉर्ड चेक करें और क्लियरेंस सर्टिफिकेट दें, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रहे। पेरेंट्स ने वॉट्सएप ग्रुप बनाया
अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन की गिरफ्तारी के बाद कॉलेज के छात्रों के अभिभावकों में डर का माहौल है। इसको लेकर अभिभावक अब इकट्ठे होने लगे हैं एक दूसरे से आपस में बात कर रहे हैं। पेरेंट्स वॉट्सएप ग्रुप बनाकर बात कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई बच्चों का तो पढ़ाई का लास्ट ईयर चल रहा है, उसकी तरफ किसी का भी ध्यान नहीं है। ना तो जांच एजेंसियों और न ही सरकार का कोई ध्यान है। 48 घंटे बाद भी मौलवी और उर्दू शिक्षक रिहा नहीं
फरीदाबाद क्राइम ब्रांच द्वारा मंगलवार देर शाम सोहना के रायपुर गांव स्थित शाही जामा मस्जिद से पकड़े मौलवी तैयब हुसैन व उर्दू शिक्षक फरहान को 48 घंटे बाद भी नहीं छोड़ा गया है। दोनों नूंह जिले के घासेड़ा गांव के निवासी हैं। ब्लास्ट का मुख्य आरोपी डॉ. उमर मोहम्मद उन नबी, इस मस्जिद में नमाज पढ़ने आता था। जांच एजेंसियां पता कर रही हैं कि उमर की मौलवी या शिक्षक से किस तरह की मुलाकात होती थी। एनआईए ने यहां लगे सीसीटीवी की डीवीआर भी अपने कब्जे में ली है। सूत्रों का कहना है कि एक महीने के बैकअप में से एक दिन की फुटेज जानबूझ कर डिलीट की गई थी, इसीलिए जांच एजेंसियों को शक है। उनका इस साजिश से क्या लिंक है, इसकी जानकारी हासिल की जा रही है। दरअसल, उमर ने अमोनियम नाइट्रेट जैसा विस्फोटक सोहना मंडी से खरीदा था, जो ब्लास्ट में इस्तेमाल हुआ। अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर फोकस
अल फलाह यूनिवर्सिटी के 200 से ज्यादा डॉक्टर और स्टाफ की जांच चल रही है। एजेंसियां कैंपस पर अस्थायी कमांड सेंटर स्थापित कर चुकी हैं। 1,000 से अधिक लोगों से पूछताछ हुई, कई संदिग्धों ने मोबाइल डेटा डिलीट किया, जिसकी रिकवरी हो रही है। हालांकि जांच एजेंसियां ज्यादा जानकारी शेयर नहीं कर रही हैं। पुराना टेरर लिंक उजागर
जांच में 2008 दिल्ली-अहमदाबाद ब्लास्ट के आरोपी मिर्जा शादाब बैग का नाम सामने आया, जो अल-फलाह का पूर्व छात्र था। IM (इंडियन मुजाहिदीन) से कनेक्शन की पड़ताल हो रही है। व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल का स्ट्रक्चर
यह मॉड्यूल ‘शिक्षित’ लोगों पर आधारित है, जहां डॉक्टर, प्रोफेसर और स्टूडेंट्स को रिक्रूट किया गया। मुख्य आरोपी डॉ. उमर मुहम्मद उन नबी अल-फलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर था। जांच में पाया गया कि यूनिवर्सिटी कैंपस को ‘कवर’ के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। ————— ये खबर भी पढ़ें… दिल्ली ब्लास्ट, डॉ. मुजम्मिल फरीदाबाद में आटा चक्की से यूरिया पीसता था, इलेक्ट्रॉनिक मशीन बरामद NIA की टीम ने बुधवार देर रात फरीदाबाद के गांव धौज में टैक्सी ड्राइवर के घर से आटा-चक्की और इलेक्ट्रिकल मशीन बरामद की। सूत्रों के मुताबिक इसी आटा चक्की में डॉ. मुजम्मिल यूरिया पीसता था, फिर मशीन से उसे रिफाइन करता था। इसके बाद केमिकल मिलाकर विस्फोटक बनाता था। केमिकल अल-फलाह यूनिवर्सिटी की लैब से चुराया था। पूरी खबर पढ़ें…