हरियाणा के चरखी दादरी जिले के गांव बौंद कलां निवासी करीब 27 वर्षीय जवान बलजीत चौहान शहीद हो गए। गुरुवार को उनके पैतृक गांव में उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उन्हें उनके दोनों बड़े भाइयों ने मुखाग्नि दी। शहीद की अंतिम यात्रा में भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा के सांसद धर्मबीर सिंह और विधायक सुनील सांगवान पहुंचे थे। शहीद की पार्थिव देह के साथ आए सेना के जवानों ने बलजीत चौहान को बंदूकों से सलामी दी।इस दौरान गांव और आसपास के लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। बता दें कि बलजीत 5पैरा रेजिमेंट स्पेशल फोर्स में तैनात थे। करीब 5 साल पहले उन्होंने सेना जॉइन की थी। बलजीत चौहान पंजाब के पठानकोट में एनएसजी कमांडो ट्रायल कोर्स के लिए गए थे। जानकारी के अनुसार, पैराशूट न खुलने के कारण हादसे के दौरान बलजीत शहीद हुए हैं। शहीद की अंतिम यात्रा के PHOTOS… 2 भाई संभालते हैं खेती
गांव बौंद कलां के सरपंच अत्तर सिंह ने बताया कि शहीद बलजीत के पिता दिव्यांग हैं और पिछले करीब 4-5 साल से चलने-फिरने में दिक्कत होने के कारण व्हीलचेयर पर ही हैं। वहीं बलजीत चौहान भी होनहार बच्चा था। जो करीब 5-6 साल पहले अपनी मेहनत के बलबूते ज्वाइनिंग ली और अपने परिवार की जिम्मेदारी भी अपने कंधों पर उठाई। अभी तक बलजीत की शादी नहीं हुई थी। बलजीत के 2 भाई और है, जो खेती करते है। 4 नवंबर को हुए शहीद
बलजीत चौहान का चयन कुमाऊं रेजिमेंट में हुआ था। उन्होंने बाद में 13 एसएफ में बेंगलुरु में जाने का निर्णय लिया। बलजीत 5 पैरा एसएफ पंजाब के पठानकोट में एनएसजी कमांडो का ट्रायल कोर्स कर रहे थे। इसी दौरान 4 नवंबर को इवेंट के दौरान बलजीत चौहान शहीद हो गए।
हरियाणा के चरखी दादरी जिले के गांव बौंद कलां निवासी करीब 27 वर्षीय जवान बलजीत चौहान शहीद हो गए। गुरुवार को उनके पैतृक गांव में उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उन्हें उनके दोनों बड़े भाइयों ने मुखाग्नि दी। शहीद की अंतिम यात्रा में भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा के सांसद धर्मबीर सिंह और विधायक सुनील सांगवान पहुंचे थे। शहीद की पार्थिव देह के साथ आए सेना के जवानों ने बलजीत चौहान को बंदूकों से सलामी दी।इस दौरान गांव और आसपास के लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। बता दें कि बलजीत 5पैरा रेजिमेंट स्पेशल फोर्स में तैनात थे। करीब 5 साल पहले उन्होंने सेना जॉइन की थी। बलजीत चौहान पंजाब के पठानकोट में एनएसजी कमांडो ट्रायल कोर्स के लिए गए थे। जानकारी के अनुसार, पैराशूट न खुलने के कारण हादसे के दौरान बलजीत शहीद हुए हैं। शहीद की अंतिम यात्रा के PHOTOS… 2 भाई संभालते हैं खेती
गांव बौंद कलां के सरपंच अत्तर सिंह ने बताया कि शहीद बलजीत के पिता दिव्यांग हैं और पिछले करीब 4-5 साल से चलने-फिरने में दिक्कत होने के कारण व्हीलचेयर पर ही हैं। वहीं बलजीत चौहान भी होनहार बच्चा था। जो करीब 5-6 साल पहले अपनी मेहनत के बलबूते ज्वाइनिंग ली और अपने परिवार की जिम्मेदारी भी अपने कंधों पर उठाई। अभी तक बलजीत की शादी नहीं हुई थी। बलजीत के 2 भाई और है, जो खेती करते है। 4 नवंबर को हुए शहीद
बलजीत चौहान का चयन कुमाऊं रेजिमेंट में हुआ था। उन्होंने बाद में 13 एसएफ में बेंगलुरु में जाने का निर्णय लिया। बलजीत 5 पैरा एसएफ पंजाब के पठानकोट में एनएसजी कमांडो का ट्रायल कोर्स कर रहे थे। इसी दौरान 4 नवंबर को इवेंट के दौरान बलजीत चौहान शहीद हो गए।