‘गर्भ में 5 महीने की बेटी है। 30 हजार लाइए इसे कोख से निकाल दूंगा। आप देरी तो कर दी है, लेकिन फिर भी काम हो जाएगा। अगर आप पहले आते तो दवा से काम हो जाता, अब इंजेक्शन देकर इसे गर्भ में ही मारना होगा। इसके बाद नॉर्मल डिलिवरी की तरह इसे पेट से बाहर निकाल देंगे। थोड़ी बहुत सर्जरी की जरूरत पड़ी तो वह भी हो जाएगी, टेंशन लेने की जरूरत नहीं है…।’ यह गर्भ में बेटी का पता लगाकर उसे मौत के घाट उतारने का सुझाव देते बिहार के डॉक्टर हैं। एक दो नहीं, ऐसे 12 से अधिक डॉक्टर भास्कर के कैमरे पर गर्भ में पल रही बेटियों को जन्म से पहले मारने प्लान बताते कैद हुए हैं। भास्कर इन्वेस्टिगेशन में देखिए और पढ़िए बिहार में जन्म से पहले गर्भ में कैसे मारी जा रहीं बेटियां… 300 में तैयार हो रही अल्ट्रासाउंड की फेक रिपोर्ट डॉक्टर और हॉस्पिटल को एक्सपोज करने के लिए रिपोर्टर को अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट चाहिए थी। भास्कर रिपोर्टर कपल बनकर पटना के एक अल्ट्रासाउंड सेंटर पहुंचे। यहां महिला रिपोर्टर ने खुद को सरकारी टीचर बताया और छुट्टी के लिए 5 महीने की गर्भवती होने की रिपोर्ट बनाने को कहा। अल्ट्रासाउंड सेंटर 300 रुपए में रिपोर्ट बनाने को तैयार हो गया। बिना किसी और वेरिफिकेशन के अल्ट्रासाउंड सेंटर ने रिपोर्टर को 5 महीने की गर्भवती होने की रिपोर्ट दे दी। अल्ट्रासाउंड की फर्जी रिपोर्ट लेकर भास्कर रिपोर्टर कपल बनकर पटना के बायपास इलाके में स्थित मर्सी हॉस्पिटल पहुंचे। काउंटर पर रिसेप्शनिस्ट और हॉस्पिटल के मैनेजर बैठे थे। रिपोर्टर ने मैनेजर से कहा, ये मेरी पत्नी है। 5 महीने की प्रेग्नेंट है। अल्ट्रासाउंड कराया तो पता चला लड़की है। हम लड़की नहीं चाहते हैं। मैनेजर बोला – आपका काम हो जाएगा। मैनेजर ने कहीं कॉल किया और कुछ देर बाद रिपोर्टर से कहा बैठिए डायरेक्टर साहब आ रहें हैं। एक घंटे बाद डायरेक्टर ने चैंबर में बुलाया कपल बनकर हॉस्पिटल पहुंचे रिपोर्टर को एक घंटे तक हॉस्पिटल में बैठाया गया। इस दौरान दोनों रिपोर्टर पर हॉस्पिटल के स्टाफ नजर रखते रहे। एक घंटे इंतजार के बाद हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉक्टर योगेंद्र आए। चैंबर में बैठते ही उन्होंने सबसे पहले रिपोर्टर को बुलाया। डॉक्टर योगेंद्र को पहले से पता था, हम किस काम से आए हैं। रिपोर्टर के चैंबर में पहुंचते ही डॉक्टर ने पूरा प्लान बताना शुरू किया। रिपोर्टर – मेरी एक बेटी पहले से है, इतनी महंगाई में दूसरी बेटी नहीं रख सकते? योगेश – अल्ट्रा साउंड रिपोर्ट लाए हैं, दिखाइए? रिपोर्टर – हां लाए हैं। योगेश – (रिपोर्ट देखते हुए) दवा खिलाई है। रिपोर्टर – नहीं सर योगेश – 5 महीने की हो गई है तो होने दीजिए, बाकी अगर आपको नहीं रखना हो तो हो जाएगा। रिपोर्टर – डॉक्टर साहब आप प्रोसेस बताएं, क्या करना होगा इसके लिए? योगेश – इसमें पहले दवा देंगे उससे नहीं हुआ तो ऑपरेशन भी करना पड़ सकता है। रिपोर्टर – कोई दिक्कत तो नहीं होगी। योगेश – देखिए इसमें भी नॉर्मल डिलीवरी की तरह ही होता है। रिपोर्टर – मतलब, नहीं समझा? योगेश – पहले दवा देंगे, ब्लीडिंग होगी, बच्चेदानी का मुंह खुल जाएगा, फिर बच्चा निकाल देंगे। रिपोर्टर – इसमें कोई दिक्कत तो नहीं होगी सर? योगेश – अगर ऐसे बच्चा नहीं निकला तो, ऑपरेशन करके निकालेंगे। रिपोर्टर – बहुत ब्लीडिंग तो नहीं होगी सर? योगेश – हां, इसमें तो थोड़ा ब्लीडिंग का चांस रहता ही है। रिपोर्टर – इसके बाद दोबारा बच्चा कर सकते हैं, या नहीं? योगेश – जैसे नॉर्मल डिलिवरी होती है, उसी तरह होगा। शरीर पर असर नहीं होना चाहिए। रिपोर्टर – इसमें कितना वक्त लगता है, खर्च कितना आएगा? योगेश – दो से तीन दिन एडमिट होना होगा, उस समय खर्च पता चलेगा। रिपोर्टर – खर्च का पहले पता रहेगा तो ठीक होगा? योगेश – मैडम से पूछ लेते हैं, आप बाहर वेट कीजिए। मोबाइल बाहर रखवाकर रिपोर्टर को बुलाया रिपोर्टर कपल काफी देर तक बाहर बैठे रहे। थोड़ी देर बाद, रिसेप्शनिस्ट रिपोर्टर के पास आई और कहा कि अपना मोबाइल बाहर रखकर अंदर चलिए। हम मोबाइल बाहर छोड़कर अंदर गया। थोड़ी देर तक माहौल बनाने के बाद पैसे की डील की गई। चैंबर में जाते ही डॉक्टर योगेश ने बताया, देखिए ये पूरा इलीगल है। बच्चा 5 महीने का हो गया है। आपका काम हो जाएगा 30 से 32 हजार का खर्च आएगा और 3 दिन का समय लगेगा। मरीज को एडमिट करना पड़ेगा। हम घर में राय विमर्श करने की बात कहकर बाहर आ गए और मैनेजर से कहा कि पैसा ज्यादा बता रहे हैं। मैनेजर ने कहा कि आइए ना कुछ कम करा देंगे। रिपोर्टर कपल बनकर पटना के बायपास स्थित ईश्वर दयाल मेमोरियल अस्पताल पहुंचे। रिसेप्शन पर एक लड़की मिली जो हमारी समस्या सुनने के बाद इलाज की व्यवस्था कराने में जुट गई। लड़की ने कहा डॉक्टर नहीं हैं, मैनेजर हैं। मैनेजर ने ही रिपोर्टर को चैंबर में बुलाया। रिपोर्टर – मैं अपनी पत्नी के साथ आया हूं, पत्नी 5 माह की प्रेग्नेंट हैं। अल्ट्रा साउंड में पता चला है कि लड़की है, हम लोगों को दूसरी लड़की नहीं चाहिए। मैनेजर – हो जाएगा, लेकिन आज मैडम नहीं है, पूछ कर बताते हैं। कब तक आएंगी। रिपोर्टर – कितना पैसा लगेगा? मैनेजर – फीस का मैडम बताएंगी। मेरा नंबर ले लीजिए, हम मैडम से पूछ कर आपको बता देंगे। रिपोर्टर – काम कैसे होगा? मैनेजर – हो जाएगा,सब होता है। मैनेजर बोला-हॉस्पिटल आइए सब हो जाएगा एक दिन बाद मैनेजर ने कॉल कर बोला, मैडम से बात हो गई है। आइए आपका काम हो जाएगा। मैनेजर ने विश्वास दिलाया, कहीं से कोई दिक्कत नहीं होगी। आसानी से बच्ची को बाहर निकाल दिया जाएगा। मैनेजर ने कहा, बस आप हॉस्पिटल आ जाइए, बाकी मैडम सब काम कर देंगी। इसके बाद रिपोर्टर कपल बनकर पटना के 90 फीट स्थित सर्वदा अस्पताल पहुंचे। यहां कुछ मरीज दिख रहे थे। रिसेप्शन काउंटर खाली था। थोड़ी ही देर में एक ओटी अटेंडेंट आ गया और पूछने लगा क्या काम है। रिपोर्टर ने जब समस्या बताई तो पूरी डीलिंग शुरू हो गई। रिपोर्टर – कोई गायनेकोलॉजिस्ट हैं क्या? अभी बैठी हैं, तो दिखा दीजिए? ओटी अटेंडेंट – डॉक्टर बैठती तो हैं, लेकिन अभी हॉस्पिटल में नहीं हैं। रिपोर्टर – उन्हीं से मिलना था। ओटी अटेंडेंट – देखते हैं, थोड़ा रुकिए। नर्स बोली- 5 महीने का भी हो जाता है रिपोर्टर को वेट करने के लिए बोलकर ओटी असिस्टेंट एक हेड नर्स को लेकर आया। नर्स ने रिपोर्टर की समस्या सुनी और बोली, सब हो जाता है। यह कोई बड़ी बात नहीं है। हेड नर्स ने बताया कि यहां डॉक्टर रश्मि लता बैठती हैं। वह आएंगी तो काम हो जाएगा। रिपोर्टर के हर सवाल पर हेड नर्स काम करने को तैयार हो गई। हेड नर्स ने कहा, आप मेरा नंबर ले लीजिए और दो दिन का समय दीजिए, डॉक्टर मैडम अभी थोड़ी बिजी हैं, उनसे अच्छा इस काम को पटना में कोई नहीं कर पाएगा। रिपोर्टर – मेरा केस डॉक्टर मैडम को बता दीजिएगा। हेड नर्स – कोई बात नहीं सब हो जाएगा, निश्चिंत रहिए। ओटी अटेंडेंट – आपको बेटी नहीं चाहिए, इसलिए हटा रहे हैं। रिपोर्टर – हम बहुत परेशान हैं ओटी अटेंडेंट – ये इलीगल है, आप सीधे बोलिए बच्चा नहीं रखना है, डीएनसी करना है। आप बेटी का नहीं बताइए। रिपोर्टर – कितना पैसा लगेगा ओटी अटेंडेंट – डॉक्टर ही देख कर बता देंगी। ऐसे आप 15 हजार से ऊपर मानकर चलिए। रिपोर्टर कपल बनकर पटना के 90 फीट स्थित जय माता दी हॉस्पिटल पहुंचे। अस्पताल में मरीजों की संख्या कम थी। एक दो मरीज इलाज के लिए आए थे। अंदर से एक लड़का आया और रिपोर्टर से पूरी डील की। रिपोर्टर – बच्चा है 5 महीने का उसको गिरना है। लड़का – अभी तो कोई नहीं हो पाएगा। रिपोर्टर – डॉक्टर या किसी नर्सिंग स्टाफ से बात करवा दो? लड़का – थोड़ी देर बैठिए, बताते हैं। (अंदर किसी को फोन करते हुए चला जाता है, कुछ देर में लड़का निकल कर आता है) लड़का – सर बोले हैं अभी कोई नहीं है अभी यहां नहीं हो पाएगा। रिपोर्टर – बहुत जरूरी है, कब तक लोग आएंगे। हॉस्पिटल के फर्जीवाड़े की पूरी चेन हॉस्पिटल की एक दूसरे से सेटिंग का भी खुलासा हुआ। बातचीत के दौरान हॉस्पिटल स्टाफ ने दो अन्य हॉस्पिटल के बारे में भी बताया। बोला-आप वहां भी दिखा लीजिए, डॉक्टर अच्छे हैं 5 माह का बच्चा आसानी से निकाल देंगे। हॉस्पिटल स्टाफ के बताए दोनों हॉस्पिटल पर भी रिपोर्टर कपल बनकर पहुंचे, दोनों अस्पताल गर्भ में 5 माह की बेटी को बाहर निकालने को तैयार हो गए। भास्कर रिपोर्टर कपल बनकर पटना के जीरो माइल के झखरिया स्थित जे एस मेमोरियल हॉस्पिटल पहुंचे। वहां रिसेप्शन पर एक लड़की और मैनेजर बैठे थे। रिपोर्टर ने मैनेजर से बात की और बच्चा गिराने की बात बताई। मैनेजर ने ओटी में बैठी डॉक्टर से बात की और रिपोर्टर को डॉक्टर से मिलने के लिए ओटी में भेज दिया। वहां रिपोर्टर की मुलाकात डॉक्टर ज्योति से हुई। ओटी में 3 से 4 मरीजों के सामने ही डॉक्टर ने पूरी डील की। डॉ ज्योति – बताइए कैसे क्या करना है? रिपोर्टर – मेरी वाइफ प्रेग्नेंट है, अल्ट्रा साउंड में लड़की आई है, लड़की नहीं चाहिए। डॉ ज्योति – अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट लाए हैं क्या? रिपोर्टर – हां देख लीजिए। डॉ ज्योति – रिपोर्ट देख कर बोली- बच्चा क्यों मिसकेरेज कराना चाहते हैं। रिपोर्टर – लड़की है इसलिए। डॉक्टर – आप और पहले क्यों नहीं सोचे। रिपोर्टर – देखते देखते समय निकल गया, अब लड़की का पता चल पाया है। डॉक्टर – बच्चा 5 महीने का हो गया है, आप सोच लिए हैं इसको हटा देना है। रिपोर्टर – अगर शरीर पर कोई असर ना हो तो हटा दीजिए। डॉक्टर – शरीर पर कोई असर नहीं पड़ेगा। रिपोर्टर – कोई परेशानी नहीं है, बस लड़की के कारण ही नहीं रखना चाहते हैं? डॉक्टर – देखिए ये अबॉर्शन प्रॉपर डिलीवरी की तरह ही होगा। रिपोर्टर – कितना समय लगेगा मैम? डॉक्टर – हम मरीज को 2 से 3 दिन के लिए एडमिट करेंगे। रिपोर्टर – सर्जरी करनी पड़ेगी क्या? डॉक्टर – धीरे-धीरे दवा देकर बच्चे को नुकसान करके उसको निकाल लिया जाएगा। रिपोर्टर – इसमें खर्च क्या आएगा। डॉक्टर – वो आपको नीचे मैनेजर बता देंगे। मैनेजर बोला-पूरी डिलिवरी का खर्च आएगा डॉक्टर से बातचीत के बाद रिपोर्टर कपल मैनेजर के पास पहुंचे। मैनेजर ने पैसे की पूरी डील की, बोला-मैडम से बात हो गई है। आप तैयार हो जाइए, सब काम हो जाएगा। मैनेजर ने कहा, ‘पूरा प्रोसेस एक दम नॉर्मल डिलीवरी की तरह होगा, बच्चा एक या दो महीने का रहता तो कोई दिक्कत नहीं होती है। इस तरह का केस जल्दी कोई लेता नहीं है। रिपोर्टर ने पूछा कितना पैसा लगेगा तो मैनेजर ने कहा, मान कर चलिए 30,000 का पूरा खर्च आएगा। रिपोर्टर को भर्ती कराने का दबाव बनाया जाने लगा, लेकिन रिपोर्टर घर में बात करके आने की बात कहते हुए वहां से निकल गए।’ रिपोर्टर कपल बनकर बाइपास स्थित मेडी वर्ल्ड हॉस्पिटल पहुंचे। हॉस्पिटल अबॉर्शन को लेकर हमेशा चर्चा में रहता है। कई मामलों में अस्पताल चर्चा में रहता है। रिपोर्टर के हॉस्पिटल पर पहुंचते ही रिसेप्शन पर मौजूद स्टाफ ने पूछना शुरू कर दिया। रिपोर्टर ने डॉक्टर से अकेले में बात करने को कहा। रिसेप्शनिस्ट ने डॉक्टर से बात कर मुलाकात के लिए चैंबर में भेज दिया। यहां डॉक्टर रवि ने हमसे गर्भ में बेटी के अबॉर्शन की पूरी डील की। रिपोर्टर – मेरी पत्नी 5 माह की प्रेग्नेंट है, अल्ट्रा साउंड में लड़की निकली है, मुझे दूसरी लड़की नहीं चाहिए, क्या करें। डॉ. रवि – अबॉर्शन करा लीजिए। रिपोर्टर – कैसे होगा, कोई दिक्कत तो नहीं आएगी। डॉ. रवि – पहला बच्चा कैसे हुआ था? रिपोर्टर – नॉर्मल डॉ. रवि – हो जाएगा। रिपोर्टर – कितना समय लगेगा। डॉ. रवि – ये भी नॉर्मल एक डिलीवरी ही होता है, 48 घंटे का समय लगेगा। रिपोर्टर – कितना पैसा लगेगा? डॉ. रवि- 15 हजार में हो जाएगा। बिहार में 1000 लड़कों पर 882 लड़कियों का जन्म बिहार में जन्म के समय लिंगानुपात देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से काफी कम है। 2022 में 1000 लड़कों पर 891 लड़कियों के स्तर पर था और 2023-24 में गिरकर 882 लड़कियों पर आ गया। साल 2020 से राज्य में यह अनुपात लगातार गिर रहा है, इसे देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कम माना जा रहा है। नागरिक पंजीकरण प्रणाली (CRS) के मुताबिक साल 2022 में 1000 लड़कों पर 891 लड़कियां थीं। साल 2020-2022 में यह आंकड़ा काफी कम हुआ। साल 2021 में 908 और फिर 2022 में 891 हो गया। साल 2023-24 में नागरिक पंजीकरण प्रणाली के रिपोर्ट के मुताबिक यह आंकड़ा 882 पर पहुंच गया है। यानी बिहार में जन्म के समय 1000 लड़कों पर मात्र 882 लड़कियों का जन्म हो रहा है। जन्म के समय देश में सबसे कम सेक्स रेशियो वाला राज्य बिहार बिहार में जन्म के समय लड़कियों की संख्या में लगातार कमी चिंता का विषय है। बिहार पूरे भारत में जन्म के समय सबसे कम सेक्स रेशियो वाला स्टेट है। दूसरे राज्यों में जैसे नगालैंड, अरुणाचल में लड़कियों का अनुपात लड़कों की तुलना में अधिक है। गर्भ में लिंग की जांच गंभीर अपराध गर्भ में पल रहे भ्रूण के लिंग जांच करना या करवाना तथा शिशु को जीवित पैदा होने से रोकना भ्रूण हत्या का गंभीर मामला है। अल्ट्रासाउंड या सोनोग्राफी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल भ्रूण के स्वास्थ्य को जांचने के लिए किया जाता है, लेकिन इस तकनीक से लिंग का पता लगाकर बेटियों को गर्भ में नुकसान किया जा रहा है। गर्भ में बेटियों के नुकसान कराने की घटना को लेकर ही सरकार ने कड़ा कानून बनाया और गर्भ में लिंग परीक्षण करने वालों पर सख्त कार्रवाई का आदेश दिया। ऐसा करना गर्भधारण पूर्व और प्रसूति-पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम, 1994 के तहत दण्डनीय अपराध है। जानिए क्या है PC-PNDT कानून PC-PNDT अधिनियम, 1994, भारत में कन्या भ्रूण हत्या और घटते लिंगानुपात को रोकने के लिए पारित एक कानून है। इसका मुख्य उद्देश्य जन्म से पहले शिशु के लिंग का निर्धारण करने वाली किसी भी तकनीक (जैसे अल्ट्रासाउंड या एमनियोसेंटेसिस) के उपयोग पर प्रतिबंध लगाना है। इस अधिनियम में इस तरह के लिंग निर्धारण और उसके बारे में जानकारी देने को एक दंडनीय अपराध माना गया है।
’गर्भ में 5 महीने की बेटी है। 30 हजार लाइए इसे कोख से निकाल दूंगा। आप देरी तो कर दी है, लेकिन फिर भी काम हो जाएगा। अगर आप पहले आते तो दवा से काम हो जाता, अब इंजेक्शन देकर इसे गर्भ में ही मारना होगा। इसके बाद नॉर्मल डिलिवरी की तरह इसे पेट से बाहर निकाल देंगे। थोड़ी बहुत सर्जरी की जरूरत पड़ी तो वह भी हो जाएगी, टेंशन लेने की जरूरत नहीं है…।’ यह गर्भ में बेटी का पता लगाकर उसे मौत के घाट उतारने का सुझाव देते बिहार के डॉक्टर हैं। एक दो नहीं, ऐसे 12 से अधिक डॉक्टर भास्कर के कैमरे पर गर्भ में पल रही बेटियों को जन्म से पहले मारने प्लान बताते कैद हुए हैं। भास्कर इन्वेस्टिगेशन में देखिए और पढ़िए बिहार में जन्म से पहले गर्भ में कैसे मारी जा रहीं बेटियां… 300 में तैयार हो रही अल्ट्रासाउंड की फेक रिपोर्ट डॉक्टर और हॉस्पिटल को एक्सपोज करने के लिए रिपोर्टर को अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट चाहिए थी। भास्कर रिपोर्टर कपल बनकर पटना के एक अल्ट्रासाउंड सेंटर पहुंचे। यहां महिला रिपोर्टर ने खुद को सरकारी टीचर बताया और छुट्टी के लिए 5 महीने की गर्भवती होने की रिपोर्ट बनाने को कहा। अल्ट्रासाउंड सेंटर 300 रुपए में रिपोर्ट बनाने को तैयार हो गया। बिना किसी और वेरिफिकेशन के अल्ट्रासाउंड सेंटर ने रिपोर्टर को 5 महीने की गर्भवती होने की रिपोर्ट दे दी। अल्ट्रासाउंड की फर्जी रिपोर्ट लेकर भास्कर रिपोर्टर कपल बनकर पटना के बायपास इलाके में स्थित मर्सी हॉस्पिटल पहुंचे। काउंटर पर रिसेप्शनिस्ट और हॉस्पिटल के मैनेजर बैठे थे। रिपोर्टर ने मैनेजर से कहा, ये मेरी पत्नी है। 5 महीने की प्रेग्नेंट है। अल्ट्रासाउंड कराया तो पता चला लड़की है। हम लड़की नहीं चाहते हैं। मैनेजर बोला – आपका काम हो जाएगा। मैनेजर ने कहीं कॉल किया और कुछ देर बाद रिपोर्टर से कहा बैठिए डायरेक्टर साहब आ रहें हैं। एक घंटे बाद डायरेक्टर ने चैंबर में बुलाया कपल बनकर हॉस्पिटल पहुंचे रिपोर्टर को एक घंटे तक हॉस्पिटल में बैठाया गया। इस दौरान दोनों रिपोर्टर पर हॉस्पिटल के स्टाफ नजर रखते रहे। एक घंटे इंतजार के बाद हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉक्टर योगेंद्र आए। चैंबर में बैठते ही उन्होंने सबसे पहले रिपोर्टर को बुलाया। डॉक्टर योगेंद्र को पहले से पता था, हम किस काम से आए हैं। रिपोर्टर के चैंबर में पहुंचते ही डॉक्टर ने पूरा प्लान बताना शुरू किया। रिपोर्टर – मेरी एक बेटी पहले से है, इतनी महंगाई में दूसरी बेटी नहीं रख सकते? योगेश – अल्ट्रा साउंड रिपोर्ट लाए हैं, दिखाइए? रिपोर्टर – हां लाए हैं। योगेश – (रिपोर्ट देखते हुए) दवा खिलाई है। रिपोर्टर – नहीं सर योगेश – 5 महीने की हो गई है तो होने दीजिए, बाकी अगर आपको नहीं रखना हो तो हो जाएगा। रिपोर्टर – डॉक्टर साहब आप प्रोसेस बताएं, क्या करना होगा इसके लिए? योगेश – इसमें पहले दवा देंगे उससे नहीं हुआ तो ऑपरेशन भी करना पड़ सकता है। रिपोर्टर – कोई दिक्कत तो नहीं होगी। योगेश – देखिए इसमें भी नॉर्मल डिलीवरी की तरह ही होता है। रिपोर्टर – मतलब, नहीं समझा? योगेश – पहले दवा देंगे, ब्लीडिंग होगी, बच्चेदानी का मुंह खुल जाएगा, फिर बच्चा निकाल देंगे। रिपोर्टर – इसमें कोई दिक्कत तो नहीं होगी सर? योगेश – अगर ऐसे बच्चा नहीं निकला तो, ऑपरेशन करके निकालेंगे। रिपोर्टर – बहुत ब्लीडिंग तो नहीं होगी सर? योगेश – हां, इसमें तो थोड़ा ब्लीडिंग का चांस रहता ही है। रिपोर्टर – इसके बाद दोबारा बच्चा कर सकते हैं, या नहीं? योगेश – जैसे नॉर्मल डिलिवरी होती है, उसी तरह होगा। शरीर पर असर नहीं होना चाहिए। रिपोर्टर – इसमें कितना वक्त लगता है, खर्च कितना आएगा? योगेश – दो से तीन दिन एडमिट होना होगा, उस समय खर्च पता चलेगा। रिपोर्टर – खर्च का पहले पता रहेगा तो ठीक होगा? योगेश – मैडम से पूछ लेते हैं, आप बाहर वेट कीजिए। मोबाइल बाहर रखवाकर रिपोर्टर को बुलाया रिपोर्टर कपल काफी देर तक बाहर बैठे रहे। थोड़ी देर बाद, रिसेप्शनिस्ट रिपोर्टर के पास आई और कहा कि अपना मोबाइल बाहर रखकर अंदर चलिए। हम मोबाइल बाहर छोड़कर अंदर गया। थोड़ी देर तक माहौल बनाने के बाद पैसे की डील की गई। चैंबर में जाते ही डॉक्टर योगेश ने बताया, देखिए ये पूरा इलीगल है। बच्चा 5 महीने का हो गया है। आपका काम हो जाएगा 30 से 32 हजार का खर्च आएगा और 3 दिन का समय लगेगा। मरीज को एडमिट करना पड़ेगा। हम घर में राय विमर्श करने की बात कहकर बाहर आ गए और मैनेजर से कहा कि पैसा ज्यादा बता रहे हैं। मैनेजर ने कहा कि आइए ना कुछ कम करा देंगे। रिपोर्टर कपल बनकर पटना के बायपास स्थित ईश्वर दयाल मेमोरियल अस्पताल पहुंचे। रिसेप्शन पर एक लड़की मिली जो हमारी समस्या सुनने के बाद इलाज की व्यवस्था कराने में जुट गई। लड़की ने कहा डॉक्टर नहीं हैं, मैनेजर हैं। मैनेजर ने ही रिपोर्टर को चैंबर में बुलाया। रिपोर्टर – मैं अपनी पत्नी के साथ आया हूं, पत्नी 5 माह की प्रेग्नेंट हैं। अल्ट्रा साउंड में पता चला है कि लड़की है, हम लोगों को दूसरी लड़की नहीं चाहिए। मैनेजर – हो जाएगा, लेकिन आज मैडम नहीं है, पूछ कर बताते हैं। कब तक आएंगी। रिपोर्टर – कितना पैसा लगेगा? मैनेजर – फीस का मैडम बताएंगी। मेरा नंबर ले लीजिए, हम मैडम से पूछ कर आपको बता देंगे। रिपोर्टर – काम कैसे होगा? मैनेजर – हो जाएगा,सब होता है। मैनेजर बोला-हॉस्पिटल आइए सब हो जाएगा एक दिन बाद मैनेजर ने कॉल कर बोला, मैडम से बात हो गई है। आइए आपका काम हो जाएगा। मैनेजर ने विश्वास दिलाया, कहीं से कोई दिक्कत नहीं होगी। आसानी से बच्ची को बाहर निकाल दिया जाएगा। मैनेजर ने कहा, बस आप हॉस्पिटल आ जाइए, बाकी मैडम सब काम कर देंगी। इसके बाद रिपोर्टर कपल बनकर पटना के 90 फीट स्थित सर्वदा अस्पताल पहुंचे। यहां कुछ मरीज दिख रहे थे। रिसेप्शन काउंटर खाली था। थोड़ी ही देर में एक ओटी अटेंडेंट आ गया और पूछने लगा क्या काम है। रिपोर्टर ने जब समस्या बताई तो पूरी डीलिंग शुरू हो गई। रिपोर्टर – कोई गायनेकोलॉजिस्ट हैं क्या? अभी बैठी हैं, तो दिखा दीजिए? ओटी अटेंडेंट – डॉक्टर बैठती तो हैं, लेकिन अभी हॉस्पिटल में नहीं हैं। रिपोर्टर – उन्हीं से मिलना था। ओटी अटेंडेंट – देखते हैं, थोड़ा रुकिए। नर्स बोली- 5 महीने का भी हो जाता है रिपोर्टर को वेट करने के लिए बोलकर ओटी असिस्टेंट एक हेड नर्स को लेकर आया। नर्स ने रिपोर्टर की समस्या सुनी और बोली, सब हो जाता है। यह कोई बड़ी बात नहीं है। हेड नर्स ने बताया कि यहां डॉक्टर रश्मि लता बैठती हैं। वह आएंगी तो काम हो जाएगा। रिपोर्टर के हर सवाल पर हेड नर्स काम करने को तैयार हो गई। हेड नर्स ने कहा, आप मेरा नंबर ले लीजिए और दो दिन का समय दीजिए, डॉक्टर मैडम अभी थोड़ी बिजी हैं, उनसे अच्छा इस काम को पटना में कोई नहीं कर पाएगा। रिपोर्टर – मेरा केस डॉक्टर मैडम को बता दीजिएगा। हेड नर्स – कोई बात नहीं सब हो जाएगा, निश्चिंत रहिए। ओटी अटेंडेंट – आपको बेटी नहीं चाहिए, इसलिए हटा रहे हैं। रिपोर्टर – हम बहुत परेशान हैं ओटी अटेंडेंट – ये इलीगल है, आप सीधे बोलिए बच्चा नहीं रखना है, डीएनसी करना है। आप बेटी का नहीं बताइए। रिपोर्टर – कितना पैसा लगेगा ओटी अटेंडेंट – डॉक्टर ही देख कर बता देंगी। ऐसे आप 15 हजार से ऊपर मानकर चलिए। रिपोर्टर कपल बनकर पटना के 90 फीट स्थित जय माता दी हॉस्पिटल पहुंचे। अस्पताल में मरीजों की संख्या कम थी। एक दो मरीज इलाज के लिए आए थे। अंदर से एक लड़का आया और रिपोर्टर से पूरी डील की। रिपोर्टर – बच्चा है 5 महीने का उसको गिरना है। लड़का – अभी तो कोई नहीं हो पाएगा। रिपोर्टर – डॉक्टर या किसी नर्सिंग स्टाफ से बात करवा दो? लड़का – थोड़ी देर बैठिए, बताते हैं। (अंदर किसी को फोन करते हुए चला जाता है, कुछ देर में लड़का निकल कर आता है) लड़का – सर बोले हैं अभी कोई नहीं है अभी यहां नहीं हो पाएगा। रिपोर्टर – बहुत जरूरी है, कब तक लोग आएंगे। हॉस्पिटल के फर्जीवाड़े की पूरी चेन हॉस्पिटल की एक दूसरे से सेटिंग का भी खुलासा हुआ। बातचीत के दौरान हॉस्पिटल स्टाफ ने दो अन्य हॉस्पिटल के बारे में भी बताया। बोला-आप वहां भी दिखा लीजिए, डॉक्टर अच्छे हैं 5 माह का बच्चा आसानी से निकाल देंगे। हॉस्पिटल स्टाफ के बताए दोनों हॉस्पिटल पर भी रिपोर्टर कपल बनकर पहुंचे, दोनों अस्पताल गर्भ में 5 माह की बेटी को बाहर निकालने को तैयार हो गए। भास्कर रिपोर्टर कपल बनकर पटना के जीरो माइल के झखरिया स्थित जे एस मेमोरियल हॉस्पिटल पहुंचे। वहां रिसेप्शन पर एक लड़की और मैनेजर बैठे थे। रिपोर्टर ने मैनेजर से बात की और बच्चा गिराने की बात बताई। मैनेजर ने ओटी में बैठी डॉक्टर से बात की और रिपोर्टर को डॉक्टर से मिलने के लिए ओटी में भेज दिया। वहां रिपोर्टर की मुलाकात डॉक्टर ज्योति से हुई। ओटी में 3 से 4 मरीजों के सामने ही डॉक्टर ने पूरी डील की। डॉ ज्योति – बताइए कैसे क्या करना है? रिपोर्टर – मेरी वाइफ प्रेग्नेंट है, अल्ट्रा साउंड में लड़की आई है, लड़की नहीं चाहिए। डॉ ज्योति – अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट लाए हैं क्या? रिपोर्टर – हां देख लीजिए। डॉ ज्योति – रिपोर्ट देख कर बोली- बच्चा क्यों मिसकेरेज कराना चाहते हैं। रिपोर्टर – लड़की है इसलिए। डॉक्टर – आप और पहले क्यों नहीं सोचे। रिपोर्टर – देखते देखते समय निकल गया, अब लड़की का पता चल पाया है। डॉक्टर – बच्चा 5 महीने का हो गया है, आप सोच लिए हैं इसको हटा देना है। रिपोर्टर – अगर शरीर पर कोई असर ना हो तो हटा दीजिए। डॉक्टर – शरीर पर कोई असर नहीं पड़ेगा। रिपोर्टर – कोई परेशानी नहीं है, बस लड़की के कारण ही नहीं रखना चाहते हैं? डॉक्टर – देखिए ये अबॉर्शन प्रॉपर डिलीवरी की तरह ही होगा। रिपोर्टर – कितना समय लगेगा मैम? डॉक्टर – हम मरीज को 2 से 3 दिन के लिए एडमिट करेंगे। रिपोर्टर – सर्जरी करनी पड़ेगी क्या? डॉक्टर – धीरे-धीरे दवा देकर बच्चे को नुकसान करके उसको निकाल लिया जाएगा। रिपोर्टर – इसमें खर्च क्या आएगा। डॉक्टर – वो आपको नीचे मैनेजर बता देंगे। मैनेजर बोला-पूरी डिलिवरी का खर्च आएगा डॉक्टर से बातचीत के बाद रिपोर्टर कपल मैनेजर के पास पहुंचे। मैनेजर ने पैसे की पूरी डील की, बोला-मैडम से बात हो गई है। आप तैयार हो जाइए, सब काम हो जाएगा। मैनेजर ने कहा, ‘पूरा प्रोसेस एक दम नॉर्मल डिलीवरी की तरह होगा, बच्चा एक या दो महीने का रहता तो कोई दिक्कत नहीं होती है। इस तरह का केस जल्दी कोई लेता नहीं है। रिपोर्टर ने पूछा कितना पैसा लगेगा तो मैनेजर ने कहा, मान कर चलिए 30,000 का पूरा खर्च आएगा। रिपोर्टर को भर्ती कराने का दबाव बनाया जाने लगा, लेकिन रिपोर्टर घर में बात करके आने की बात कहते हुए वहां से निकल गए।’ रिपोर्टर कपल बनकर बाइपास स्थित मेडी वर्ल्ड हॉस्पिटल पहुंचे। हॉस्पिटल अबॉर्शन को लेकर हमेशा चर्चा में रहता है। कई मामलों में अस्पताल चर्चा में रहता है। रिपोर्टर के हॉस्पिटल पर पहुंचते ही रिसेप्शन पर मौजूद स्टाफ ने पूछना शुरू कर दिया। रिपोर्टर ने डॉक्टर से अकेले में बात करने को कहा। रिसेप्शनिस्ट ने डॉक्टर से बात कर मुलाकात के लिए चैंबर में भेज दिया। यहां डॉक्टर रवि ने हमसे गर्भ में बेटी के अबॉर्शन की पूरी डील की। रिपोर्टर – मेरी पत्नी 5 माह की प्रेग्नेंट है, अल्ट्रा साउंड में लड़की निकली है, मुझे दूसरी लड़की नहीं चाहिए, क्या करें। डॉ. रवि – अबॉर्शन करा लीजिए। रिपोर्टर – कैसे होगा, कोई दिक्कत तो नहीं आएगी। डॉ. रवि – पहला बच्चा कैसे हुआ था? रिपोर्टर – नॉर्मल डॉ. रवि – हो जाएगा। रिपोर्टर – कितना समय लगेगा। डॉ. रवि – ये भी नॉर्मल एक डिलीवरी ही होता है, 48 घंटे का समय लगेगा। रिपोर्टर – कितना पैसा लगेगा? डॉ. रवि- 15 हजार में हो जाएगा। बिहार में 1000 लड़कों पर 882 लड़कियों का जन्म बिहार में जन्म के समय लिंगानुपात देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से काफी कम है। 2022 में 1000 लड़कों पर 891 लड़कियों के स्तर पर था और 2023-24 में गिरकर 882 लड़कियों पर आ गया। साल 2020 से राज्य में यह अनुपात लगातार गिर रहा है, इसे देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कम माना जा रहा है। नागरिक पंजीकरण प्रणाली (CRS) के मुताबिक साल 2022 में 1000 लड़कों पर 891 लड़कियां थीं। साल 2020-2022 में यह आंकड़ा काफी कम हुआ। साल 2021 में 908 और फिर 2022 में 891 हो गया। साल 2023-24 में नागरिक पंजीकरण प्रणाली के रिपोर्ट के मुताबिक यह आंकड़ा 882 पर पहुंच गया है। यानी बिहार में जन्म के समय 1000 लड़कों पर मात्र 882 लड़कियों का जन्म हो रहा है। जन्म के समय देश में सबसे कम सेक्स रेशियो वाला राज्य बिहार बिहार में जन्म के समय लड़कियों की संख्या में लगातार कमी चिंता का विषय है। बिहार पूरे भारत में जन्म के समय सबसे कम सेक्स रेशियो वाला स्टेट है। दूसरे राज्यों में जैसे नगालैंड, अरुणाचल में लड़कियों का अनुपात लड़कों की तुलना में अधिक है। गर्भ में लिंग की जांच गंभीर अपराध गर्भ में पल रहे भ्रूण के लिंग जांच करना या करवाना तथा शिशु को जीवित पैदा होने से रोकना भ्रूण हत्या का गंभीर मामला है। अल्ट्रासाउंड या सोनोग्राफी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल भ्रूण के स्वास्थ्य को जांचने के लिए किया जाता है, लेकिन इस तकनीक से लिंग का पता लगाकर बेटियों को गर्भ में नुकसान किया जा रहा है। गर्भ में बेटियों के नुकसान कराने की घटना को लेकर ही सरकार ने कड़ा कानून बनाया और गर्भ में लिंग परीक्षण करने वालों पर सख्त कार्रवाई का आदेश दिया। ऐसा करना गर्भधारण पूर्व और प्रसूति-पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम, 1994 के तहत दण्डनीय अपराध है। जानिए क्या है PC-PNDT कानून PC-PNDT अधिनियम, 1994, भारत में कन्या भ्रूण हत्या और घटते लिंगानुपात को रोकने के लिए पारित एक कानून है। इसका मुख्य उद्देश्य जन्म से पहले शिशु के लिंग का निर्धारण करने वाली किसी भी तकनीक (जैसे अल्ट्रासाउंड या एमनियोसेंटेसिस) के उपयोग पर प्रतिबंध लगाना है। इस अधिनियम में इस तरह के लिंग निर्धारण और उसके बारे में जानकारी देने को एक दंडनीय अपराध माना गया है।