रुद्रप्रयाग में स्थित केदारनाथ धाम के कपाट बंद करने की धार्मिक प्रक्रिया आज दोपहर से ही शुरू हो गई थी। जिसके बाद रात होते ही इस साल की केदारनाथ भगवान की आखिरी संध्या आरती की गई, इस आरती का हिस्सा बनने के लिए हजारों की संख्या में लोग दिखे। इस दौरान पूरे मंदिर परिसर में हर हर महादेव के जयघोष लगे। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने भी मंदिर में आरती से जुड़ी एक वीडियो एक्स पर शेयर की। वहीं, दिन में मंदिर के कपाट बंद करने की प्रकिया में सबसे पहले परंपरा के अनुसार पंचमुखी डोली को पूरे मंदिर परिसर में घुमाया गया, जिसके बाद बाबा केदारनाथ ने मंदिर में प्रवेश किया। डोली के अंदर प्रवेश करते ही पुजारियों ने शीतकालीन बंद की तैयारियां शुरू कर दीं। इस अवसर पर मंदिर को करीब 12 क्विंटल फूलों से सजाया गया, जिससे पूरा परिसर दिव्यता से भर उठा। देश-विदेश से आए श्रद्धालु डमरू की थाप और ‘हर हर महादेव’ के जयकारों के साथ इस अद्भुत दृश्य को अपने कैमरों में कैद करते दिखे। चारधाम यात्रा के इस सीजन में अब तक 17 लाख 45 हजार श्रद्धालु बाबा केदारनाथ के दर्शन कर चुके हैं, जो पिछले साल के मुकाबले एक लाख से अधिक हैं। यह जून 2013 की आपदा के बाद ऐसा दूसरा मौका है, जब यात्रा में इतनी बड़ी संख्या में भक्तों ने दर्शन किए। इससे पहले 2022 में रिकार्ड 19 लाख से अधिक शिव भक्तों ने दर्शन किये थे। केदारनाथ धाम की आज की PHOTOS देखें… भैयादूज पर बंद होंगे कपाट 23 अक्टूबर यानी भैयादूज के दिन सुबह 4:30 बजे भगवान केदारनाथ की अंतिम पूजा-अर्चना, अभिषेक और आरती की जाएगी। इसके बाद समाधि पूजा कर बाबा को छह माह के लिए समाधि दी जाएगी। ठीक सुबह 8:30 बजे पंचमुखी डोली गर्भगृह से बाहर निकलेगी। इसके बाद पारंपरिक विधि-विधान के साथ मंदिर के मुख्य और पीछे के दोनों कपाटों को बंद कर सील किया जाएगा। बाबा की डोली की यात्रा का कार्यक्रम कपाट बंद होने के बाद बाबा की पंचमुखी डोली रात्रि प्रवास के लिए रामपुर पहुंचेगी। धाम से रामपुर तक डोली 26 किमी की पैदल यात्रा करेगी। 2 मई को खुले थे कपाट इस साल 2 मई को केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे। पहले ही दिन 30,154 भक्तों ने बाबा के दर्शन किए, जो अब तक का एक नया रिकॉर्ड है। तब से लेकर अब तक देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर रहा। इस साल 17 लाख 45 हजार श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जबकि पिछले साल 16 लाख 52 हजार भक्तों ने बाबा के दर्शन किए थे। मंदिर समिति की तैयारियां पूरी श्री बदरी-केदार मंदिर समिति के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी वाई.एस. पुष्पवाण ने बताया कि कपाट बंद करने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने कहा कि पूजा-अर्चना, डोली यात्रा और सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित सभी कार्य समिति की निगरानी में पूरे किए जा रहे हैं। धार्मिक परंपरा और श्रद्धा का संगम धर्मशास्त्रों के अनुसार, हर साल शीतकाल के दौरान ऊंचाई वाले धामों में बर्फबारी के कारण श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए कपाट बंद किए जाते हैं। इस अवधि में भगवान केदारनाथ ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में पूजे जाते हैं, जिसे शीतकालीन केदारनाथ कहा जाता है। यही परंपरा सदियों से चली आ रही है और श्रद्धालु इसी प्रकार छह माह बाद पुनः कपाट खुलने तक ऊखीमठ में दर्शन करते हैं।
रुद्रप्रयाग में स्थित केदारनाथ धाम के कपाट बंद करने की धार्मिक प्रक्रिया आज दोपहर से ही शुरू हो गई थी। जिसके बाद रात होते ही इस साल की केदारनाथ भगवान की आखिरी संध्या आरती की गई, इस आरती का हिस्सा बनने के लिए हजारों की संख्या में लोग दिखे। इस दौरान पूरे मंदिर परिसर में हर हर महादेव के जयघोष लगे। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने भी मंदिर में आरती से जुड़ी एक वीडियो एक्स पर शेयर की। वहीं, दिन में मंदिर के कपाट बंद करने की प्रकिया में सबसे पहले परंपरा के अनुसार पंचमुखी डोली को पूरे मंदिर परिसर में घुमाया गया, जिसके बाद बाबा केदारनाथ ने मंदिर में प्रवेश किया। डोली के अंदर प्रवेश करते ही पुजारियों ने शीतकालीन बंद की तैयारियां शुरू कर दीं। इस अवसर पर मंदिर को करीब 12 क्विंटल फूलों से सजाया गया, जिससे पूरा परिसर दिव्यता से भर उठा। देश-विदेश से आए श्रद्धालु डमरू की थाप और ‘हर हर महादेव’ के जयकारों के साथ इस अद्भुत दृश्य को अपने कैमरों में कैद करते दिखे। चारधाम यात्रा के इस सीजन में अब तक 17 लाख 45 हजार श्रद्धालु बाबा केदारनाथ के दर्शन कर चुके हैं, जो पिछले साल के मुकाबले एक लाख से अधिक हैं। यह जून 2013 की आपदा के बाद ऐसा दूसरा मौका है, जब यात्रा में इतनी बड़ी संख्या में भक्तों ने दर्शन किए। इससे पहले 2022 में रिकार्ड 19 लाख से अधिक शिव भक्तों ने दर्शन किये थे। केदारनाथ धाम की आज की PHOTOS देखें… भैयादूज पर बंद होंगे कपाट 23 अक्टूबर यानी भैयादूज के दिन सुबह 4:30 बजे भगवान केदारनाथ की अंतिम पूजा-अर्चना, अभिषेक और आरती की जाएगी। इसके बाद समाधि पूजा कर बाबा को छह माह के लिए समाधि दी जाएगी। ठीक सुबह 8:30 बजे पंचमुखी डोली गर्भगृह से बाहर निकलेगी। इसके बाद पारंपरिक विधि-विधान के साथ मंदिर के मुख्य और पीछे के दोनों कपाटों को बंद कर सील किया जाएगा। बाबा की डोली की यात्रा का कार्यक्रम कपाट बंद होने के बाद बाबा की पंचमुखी डोली रात्रि प्रवास के लिए रामपुर पहुंचेगी। धाम से रामपुर तक डोली 26 किमी की पैदल यात्रा करेगी। 2 मई को खुले थे कपाट इस साल 2 मई को केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे। पहले ही दिन 30,154 भक्तों ने बाबा के दर्शन किए, जो अब तक का एक नया रिकॉर्ड है। तब से लेकर अब तक देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर रहा। इस साल 17 लाख 45 हजार श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जबकि पिछले साल 16 लाख 52 हजार भक्तों ने बाबा के दर्शन किए थे। मंदिर समिति की तैयारियां पूरी श्री बदरी-केदार मंदिर समिति के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी वाई.एस. पुष्पवाण ने बताया कि कपाट बंद करने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने कहा कि पूजा-अर्चना, डोली यात्रा और सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित सभी कार्य समिति की निगरानी में पूरे किए जा रहे हैं। धार्मिक परंपरा और श्रद्धा का संगम धर्मशास्त्रों के अनुसार, हर साल शीतकाल के दौरान ऊंचाई वाले धामों में बर्फबारी के कारण श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए कपाट बंद किए जाते हैं। इस अवधि में भगवान केदारनाथ ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में पूजे जाते हैं, जिसे शीतकालीन केदारनाथ कहा जाता है। यही परंपरा सदियों से चली आ रही है और श्रद्धालु इसी प्रकार छह माह बाद पुनः कपाट खुलने तक ऊखीमठ में दर्शन करते हैं।