1 अगस्त को जारी होने वाली वोटर ड्राफ्ट लिस्ट में करीब 65 लाख लोगों का नाम नहीं होगा। इस तरह अगर औसत निकालें तो 243 विधानसभा सीटों पर हर विधानसभा से करीब 26 हजार वोटर का नाम नहीं मिलेगा। चुनाव आयोग ने कहा है, ‘25 जुलाई को बिहार की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) यानी वोटर वेरिफिकेशन के पहले चरण का काम पूरा हो गया है। इसमें 65 लाख लोग अपने पते पर नहीं मिले। इसलिए उनका नाम नहीं होगा।’ हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि अगर किसी योग्य मतदाता का नाम सूची से छूट गया हो या किसी अयोग्य व्यक्ति का नाम गलती से जुड़ गया हो तो 1 अगस्त से 1 सितंबर तक आपत्ति या दावा कर सकता है। उसका नाम जोड़ा या हटाया जा सकेगा। मंडे स्पेशल में पढ़िए, हर विधानसभा में इतने वोट का क्या इम्पैक्ट पड़ सकता है और पिछले चुनाव में इससे कम वोट से कितनी सीटों पर हार जीत हुई थी? 189 सीट पर 26 हजार से कम वोटों से हुई थी जीत-हार चुनाव आयोग के मुताबिक, 65 लाख लोग अपने पते पर नहीं मिले हैं। अगर उनका नाम फाइनल लिस्ट में भी शामिल नहीं किया गया तो बिहार की 243 विधानसभा सीटों में से हर सीट पर 26 हजार 748 नाम हटेंगे। इसका असर विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है, क्योंकि जीत-हार का अंतर काफी कम होता है। 2020 विधानसभा चुनाव के आंकड़ों को देखें तो 26 हजार 400 से कम वोटों से 243 में से 189 विधानसभा सीटों पर जीत-हार तय हुआ था। इसमें से NDA 99 और महागठबंधन 85 सीटों पर जीता था। एक-एक सीट लोजपा, बसपा और निर्दलीय तथा दो सीट AIMIM जीती थी। अगर नाम कट जाएगा तो क्या करना होगा… बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल ने बताया, ‘जिन वोटर्स का नाम छूट जाएगा। उनको एक और मौका मिलेगा। उन्हें फॉर्म 6 भरना होगा। साथ ही एक डिक्लेरेशन और डॉक्यूमेंट देना होगा।’ जो मतदाता इस समय अस्थायी रूप से राज्य के बाहर रह रहे हैं और किसी अन्य स्थान पर वोटर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है, वे https://voters.eci.gov.in या ECINet ऐप के जरिए ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं। इसके अलावा, वे प्रिंटेड फॉर्म भरकर या तो परिवार के ज़रिए BLO को सौंप सकते हैं या वॉट्सऐप के माध्यम से भेज सकते हैं। फॉर्म-6 क्या हैः फॉर्म 6 एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो वोटर लिस्ट में नाम दर्ज करने के लिए भरना पड़ता है। यह फॉर्म उन व्यक्तियों के लिए है, जो पहली बार मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करना चाहते हैं या जो अपना नाम मतदाता सूची में जोड़ना चाहते हैं। फॉर्म-6 भरने में क्या-क्या जानकारी देनी होगी… आयु- आपकी आयु 18 वर्ष या अधिक होनी चाहिए। नागरिकता- आपको भारत का नागरिक होना चाहिए। पता- आपको अपना वर्तमान पता देना होगा। फोटो- आपको अपना पासपोर्ट आकार की फोटो देनी होगी। पहचान पत्र- आपको आयोग की ओर से तय पहचान पत्र में से कोई एक दस्तावेज देना होगा। मतदाता सूची में नाम- यदि आपका नाम पहले से ही मतदाता सूची में है, इस बार कट गया है तो आपको उसका विवरण देना होगा। अब वो सवाल, जिसका जवाब जानना जरूरी सवाल- फॉर्म कहां से मिलेगा? जवाब- BLO आपके घर जाकर देंगे। चुनाव आयोग के एप या वेबसाइड से डाउनलोड कर सकते हैं। सवाल- BLO की जानकारी कैसे मिलेगी? जवाब- https://ceoelection.bihar.gov.in या ईसीआई नेट ऐप से। सवाल- दस्तावेज में क्या देना होगा? जवाब- केंद्र, राज्य, पीएसयू के नियमित कर्मचारी का पहचान पत्र और पेंशन भोगी का पीपीओ, 1 जुलाई 1987 के पहले का बैंक, डाकघर, एलआईसी आदि का प्रमाण, जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, मैट्रिक सर्टिफिकेट, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, वन अधिकार प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, पारिवारिक रजिस्टर, सरकार की कोई भूमि, मकान का आवंटन प्रमाण पत्र आदि। सवाल- जन्म तिथि के अनुसार कौन सा दस्तावेज जमा करें? जवाब- 1 जुलाई 1987 से पहले जन्म: जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य है। 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच: अपना या माता-पिता में से किसी एक का दस्तावेज। 2 दिसंबर 2004 के बाद: अपना और माता-पिता में किसी एक का दस्तावेज; यदि माता-पिता भारतीय नहीं हैं, तो उनका पासपोर्ट और वीजा। सवाल- अगर जन्म भारत के बाहर हुआ हो तो क्या दस्तावेज देना होगा? जवाब- विदेश में भारतीय मिशन द्वारा जारी जन्म पंजीकरण से संबंधित दस्तावेज देना होगा। सवाल- विदेश में हैं और भारतीय नागरिकता प्राप्त है तो क्या दस्तावेज देना होगा? जवाब- फॉर्म के साथ नागरिकता पंजीकरण प्रमाण पत्र देना होगा। सवाल- 2003 के बाद जिनका नाम वोटर लिस्ट में जुड़ा है, क्या उन्हें माता-पिता का नाम या प्रूफ देने की जरूरत है? जवाब- अगर आपका नाम 2003 की वोटर लिस्ट में नहीं है और आपने बाद में नाम जुड़वाया है, तो आपको अपनी नागरिकता और जन्म से जुड़े कुछ दस्तावेज देने होंगे। इनमें माता-पिता का नाम और उनके जन्म से जुड़े प्रमाण भी शामिल हो सकते हैं। इसका मकसद केवल यह तय करना है कि आप भारतीय नागरिक हैं। 1 सितंबर तक आपत्ति या दावा का मौका 1 अगस्त को मतदाता ड्राफ्ट सूची के जारी होने के बाद कोई भी व्यक्ति या राजनीतिक दल 1 सितंबर 2025 तक विधानसभा क्षेत्र के संबंधित ERO/AERO के पास आपत्ति दर्ज करा सकता है। यदि किसी योग्य मतदाता का नाम छूट गया है, तो वह दावा प्रस्तुत करके शामिल होने की मांग कर सकता है। बिहार में SIR के पहले चरण में क्या कुछ मिला? चुनाव आयोग के मुताबिक, पहले चरण में 99.86% मतदाताओं को कवर किया गया। 7 करोड़ 89 लाख वोटरों में से 7 करोड़ 24 लाख वोटरों का गणन फॉर्म जमा हुआ है। चुनाव आयोग के जारी प्रेस नोट में बताया गया, ‘इस अभियान के दौरान 22 लाख वोटर मृत मिले। वोटर लिस्ट में 7 लाख लोग ऐसे भी मिले, जो एक से ज्यादा जगहों के वोटर हैं। करीब 36 लाख वोटर या तो स्थायी रूप से पलायन कर चुके हैं या उनका कोई पता नहीं चल पा रहा है। इन नामों को लिस्ट से हटाया जा सकता है। विशेष गहन पुनरीक्षण क्या हैः वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया कहा जाता है। यह कभी संक्षिप्त तो कभी विस्तृत रूप से कराया जाता है। बिहार में आखिरी बार 2003 में यह सब हुआ था। ————– ये भी पढ़ें… बिहार की वोटर लिस्ट से 65 लाख नाम हटे: 22 लाख की मौत हो चुकी; SIR के आंकड़े जारी, राज्य में 7.24 करोड़ वोटर चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के पहले चरण के आंकड़े जारी कर दिए हैं। इसके मुताबिक बिहार में अब 7.24 करोड़ वोटर हैं। पहले यह आंकड़ा 7.89 करोड़ था। वोटर लिस्ट रिवीजन के बाद 65 लाख नाम सूची से हटा दिए गए हैं। पूरी स्टोरी पढ़िए
1 अगस्त को जारी होने वाली वोटर ड्राफ्ट लिस्ट में करीब 65 लाख लोगों का नाम नहीं होगा। इस तरह अगर औसत निकालें तो 243 विधानसभा सीटों पर हर विधानसभा से करीब 26 हजार वोटर का नाम नहीं मिलेगा। चुनाव आयोग ने कहा है, ‘25 जुलाई को बिहार की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) यानी वोटर वेरिफिकेशन के पहले चरण का काम पूरा हो गया है। इसमें 65 लाख लोग अपने पते पर नहीं मिले। इसलिए उनका नाम नहीं होगा।’ हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि अगर किसी योग्य मतदाता का नाम सूची से छूट गया हो या किसी अयोग्य व्यक्ति का नाम गलती से जुड़ गया हो तो 1 अगस्त से 1 सितंबर तक आपत्ति या दावा कर सकता है। उसका नाम जोड़ा या हटाया जा सकेगा। मंडे स्पेशल में पढ़िए, हर विधानसभा में इतने वोट का क्या इम्पैक्ट पड़ सकता है और पिछले चुनाव में इससे कम वोट से कितनी सीटों पर हार जीत हुई थी? 189 सीट पर 26 हजार से कम वोटों से हुई थी जीत-हार चुनाव आयोग के मुताबिक, 65 लाख लोग अपने पते पर नहीं मिले हैं। अगर उनका नाम फाइनल लिस्ट में भी शामिल नहीं किया गया तो बिहार की 243 विधानसभा सीटों में से हर सीट पर 26 हजार 748 नाम हटेंगे। इसका असर विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है, क्योंकि जीत-हार का अंतर काफी कम होता है। 2020 विधानसभा चुनाव के आंकड़ों को देखें तो 26 हजार 400 से कम वोटों से 243 में से 189 विधानसभा सीटों पर जीत-हार तय हुआ था। इसमें से NDA 99 और महागठबंधन 85 सीटों पर जीता था। एक-एक सीट लोजपा, बसपा और निर्दलीय तथा दो सीट AIMIM जीती थी। अगर नाम कट जाएगा तो क्या करना होगा… बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल ने बताया, ‘जिन वोटर्स का नाम छूट जाएगा। उनको एक और मौका मिलेगा। उन्हें फॉर्म 6 भरना होगा। साथ ही एक डिक्लेरेशन और डॉक्यूमेंट देना होगा।’ जो मतदाता इस समय अस्थायी रूप से राज्य के बाहर रह रहे हैं और किसी अन्य स्थान पर वोटर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है, वे https://voters.eci.gov.in या ECINet ऐप के जरिए ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं। इसके अलावा, वे प्रिंटेड फॉर्म भरकर या तो परिवार के ज़रिए BLO को सौंप सकते हैं या वॉट्सऐप के माध्यम से भेज सकते हैं। फॉर्म-6 क्या हैः फॉर्म 6 एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो वोटर लिस्ट में नाम दर्ज करने के लिए भरना पड़ता है। यह फॉर्म उन व्यक्तियों के लिए है, जो पहली बार मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करना चाहते हैं या जो अपना नाम मतदाता सूची में जोड़ना चाहते हैं। फॉर्म-6 भरने में क्या-क्या जानकारी देनी होगी… आयु- आपकी आयु 18 वर्ष या अधिक होनी चाहिए। नागरिकता- आपको भारत का नागरिक होना चाहिए। पता- आपको अपना वर्तमान पता देना होगा। फोटो- आपको अपना पासपोर्ट आकार की फोटो देनी होगी। पहचान पत्र- आपको आयोग की ओर से तय पहचान पत्र में से कोई एक दस्तावेज देना होगा। मतदाता सूची में नाम- यदि आपका नाम पहले से ही मतदाता सूची में है, इस बार कट गया है तो आपको उसका विवरण देना होगा। अब वो सवाल, जिसका जवाब जानना जरूरी सवाल- फॉर्म कहां से मिलेगा? जवाब- BLO आपके घर जाकर देंगे। चुनाव आयोग के एप या वेबसाइड से डाउनलोड कर सकते हैं। सवाल- BLO की जानकारी कैसे मिलेगी? जवाब- https://ceoelection.bihar.gov.in या ईसीआई नेट ऐप से। सवाल- दस्तावेज में क्या देना होगा? जवाब- केंद्र, राज्य, पीएसयू के नियमित कर्मचारी का पहचान पत्र और पेंशन भोगी का पीपीओ, 1 जुलाई 1987 के पहले का बैंक, डाकघर, एलआईसी आदि का प्रमाण, जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, मैट्रिक सर्टिफिकेट, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, वन अधिकार प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, पारिवारिक रजिस्टर, सरकार की कोई भूमि, मकान का आवंटन प्रमाण पत्र आदि। सवाल- जन्म तिथि के अनुसार कौन सा दस्तावेज जमा करें? जवाब- 1 जुलाई 1987 से पहले जन्म: जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य है। 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच: अपना या माता-पिता में से किसी एक का दस्तावेज। 2 दिसंबर 2004 के बाद: अपना और माता-पिता में किसी एक का दस्तावेज; यदि माता-पिता भारतीय नहीं हैं, तो उनका पासपोर्ट और वीजा। सवाल- अगर जन्म भारत के बाहर हुआ हो तो क्या दस्तावेज देना होगा? जवाब- विदेश में भारतीय मिशन द्वारा जारी जन्म पंजीकरण से संबंधित दस्तावेज देना होगा। सवाल- विदेश में हैं और भारतीय नागरिकता प्राप्त है तो क्या दस्तावेज देना होगा? जवाब- फॉर्म के साथ नागरिकता पंजीकरण प्रमाण पत्र देना होगा। सवाल- 2003 के बाद जिनका नाम वोटर लिस्ट में जुड़ा है, क्या उन्हें माता-पिता का नाम या प्रूफ देने की जरूरत है? जवाब- अगर आपका नाम 2003 की वोटर लिस्ट में नहीं है और आपने बाद में नाम जुड़वाया है, तो आपको अपनी नागरिकता और जन्म से जुड़े कुछ दस्तावेज देने होंगे। इनमें माता-पिता का नाम और उनके जन्म से जुड़े प्रमाण भी शामिल हो सकते हैं। इसका मकसद केवल यह तय करना है कि आप भारतीय नागरिक हैं। 1 सितंबर तक आपत्ति या दावा का मौका 1 अगस्त को मतदाता ड्राफ्ट सूची के जारी होने के बाद कोई भी व्यक्ति या राजनीतिक दल 1 सितंबर 2025 तक विधानसभा क्षेत्र के संबंधित ERO/AERO के पास आपत्ति दर्ज करा सकता है। यदि किसी योग्य मतदाता का नाम छूट गया है, तो वह दावा प्रस्तुत करके शामिल होने की मांग कर सकता है। बिहार में SIR के पहले चरण में क्या कुछ मिला? चुनाव आयोग के मुताबिक, पहले चरण में 99.86% मतदाताओं को कवर किया गया। 7 करोड़ 89 लाख वोटरों में से 7 करोड़ 24 लाख वोटरों का गणन फॉर्म जमा हुआ है। चुनाव आयोग के जारी प्रेस नोट में बताया गया, ‘इस अभियान के दौरान 22 लाख वोटर मृत मिले। वोटर लिस्ट में 7 लाख लोग ऐसे भी मिले, जो एक से ज्यादा जगहों के वोटर हैं। करीब 36 लाख वोटर या तो स्थायी रूप से पलायन कर चुके हैं या उनका कोई पता नहीं चल पा रहा है। इन नामों को लिस्ट से हटाया जा सकता है। विशेष गहन पुनरीक्षण क्या हैः वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया कहा जाता है। यह कभी संक्षिप्त तो कभी विस्तृत रूप से कराया जाता है। बिहार में आखिरी बार 2003 में यह सब हुआ था। ————– ये भी पढ़ें… बिहार की वोटर लिस्ट से 65 लाख नाम हटे: 22 लाख की मौत हो चुकी; SIR के आंकड़े जारी, राज्य में 7.24 करोड़ वोटर चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के पहले चरण के आंकड़े जारी कर दिए हैं। इसके मुताबिक बिहार में अब 7.24 करोड़ वोटर हैं। पहले यह आंकड़ा 7.89 करोड़ था। वोटर लिस्ट रिवीजन के बाद 65 लाख नाम सूची से हटा दिए गए हैं। पूरी स्टोरी पढ़िए