‘आसमान में उड़ने वाली तोप’ यानी अटैक हेलिकॉप्टर अपाचे AH-64E गार्जियन राजस्थान पहुंच चुके हैं। ‘फ्लाइंग टैंक’ नाम से मशहूर इन हेलिकॉप्टर की तैनाती पाकिस्तान के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को टारगेट पर रखते हुए की जा रही है। अपाचे हर एक मिनट में 625 राउंड फायर करने में सक्षम है। 120 राउंड फायर एक साथ कर सकता है। इसमें ताकतवर Hellfire मिसाइलें लगी हैं। ये लंबी दूरी तक दुश्मन सेना के टैंक, बंकर, रडार स्टेशन समेत अन्य सैन्य ठिकानों को तबाह कर सकती हैं। इसका मटमैला रंग, राजस्थान के लिहाज से महत्वपूर्ण है। राजस्थान के लिहाज से ये हेलिकॉप्टर कितने महत्वपूर्ण हैं? पाकिस्तान के कौन-कौन से एयरबेस, महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने, शहर इसकी रेंज में होंगे? हेलिकॉप्टर की खूबियां क्या हैं? भास्कर टीम ने सैन्य एक्सपर्ट की मदद से ऐसे ही सवालों के जवाब जाने। पढ़िए- मंडे स्पेशल स्टोरी में…. ‘फ्लाइंग टैंक’ की सीधी रेंज में होंगे रहीमयार खान और सदिकाबाद जैसे ठिकाने
राजस्थान में आर्मी की एविएशन कोर इसका संचालन करेगी। पाकिस्तान सीमा से 200 किलोमीटर दूरी पर सामरिक लिहाज से महत्वपूर्ण जगहों पर स्क्वाड्रन तैनात होगा, ताकि किसी भी परिस्थिति में बाड़मेर से लेकर श्रीगंगानगर तक अपाचे के स्क्वॉड्रन कुछ ही समय में पहुंच सकें। अपाचे की प्रारंभिक अटैक रेंज 8 किलोमीटर है, लेकिन अपग्रेड करने के बाद 25 किलोमीटर दूर तक के ठिकानों पर हमला कर सकते हैं। ऐसे में पाकिस्तान के बहावलपुर, रहीमयार खान, चोलिस्तान, यजमान, सादिकाबाद जैसे प्रमुख ठिकाने और पाक सेना की अग्रिम चौकियां अपाचे की सीधी मारक रेंज में आ जाएंगी। बॉर्डर से सटे 4 जिले, पाकिस्तान के ये इलाके रहेंगे रेंज में श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ : पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के बहावल नगर जिले के कई गांव तबाह कर सकता है। इसमें चक 95/EB, चक 103/EB, चक 27/FF, भोजेवाली, मचका और मीरगढ़ हैं। रायसिंहनगर से 6 किलोमीटर में पाकिस्तान का चक 95/EB गांव है। अनूपगढ़ की तरफ 6 से 7 किलोमीटर चक 96 EB गांव है। खाजूवाला की तरफ से 8 किलोमीटर चक 103EB, घड़साना की तरफ से 7 किलोमीटर दूर चक 27/FF और अनूपगढ़-खाजूवाला की तरफ 6 किलोमीटर दूर भोजेवाली गांव हैं। इन गांवों के नजदीक ही पाकिस्तान आर्मी ने चौकियां भी बना रखी हैं। सूरतगढ़ की ओर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का रहीमयार खान जिले के सदिकाबाद के कुछ इलाके, इस्लाम गढ़, शदिकाबाद आते हैं। हिंदूमलकोट से 7 किलाेमीटर दूर मचका, श्रीकरणपुर से 6 किलोमीटर दूर मीरगढ़ और रायसिंहनगर से 10 किलाेमीटर दूर सदिकाबाद गांव हैं। बीकानेर व जैसलमेर : बीकानेर रेंज से बहालवलपुर-फोर्ट अब्बास महत्वपूर्ण ठिकाना है। वहीं तन्नोट जैसलमेर से 7 किलोमीटर दूर पाकिस्तान में मरोट और लोंगेवाला से 7 किलोमीटर दूर इस्लामगढ़ फोर्ट है। हालांकि, अब यह खंडहर है लेकिन पाक सेना का यह महत्वपूर्ण ठिकाना है। शाहगढ़ की तरफ से 6 किलोमीटर दूर पाकिस्तान में किली शकरगढ़ है। बाड़मेर : पाकिस्तान के सिंध प्रांत के ठिकाने लगते हैं। यहां खोखरापार (जीरो पॉइंट) मुनाबाव के ठीक सामने एक किलोमीटर दूर है, यहां तक रेल कनेक्शन भी है। पहले यहां तक थार एक्सप्रेस जाती थी। न्यू छोर-छोर कैंट में पाकिस्तान की पुलिस, सेना के रेंजर कैंप व कई बस्तियां हैं, यह मुनाबाव से 5 किलोमीटर दूर है। इन सीमावर्ती गांवों में पाक सेना के रडार, इंफ्रारेड स्कैन, ड्रोन सर्विलांस लगे हुए हैं। अपाचे हेलिकॉप्टर नाइट ऑपरेशन, लो-लेवल फ्लाइट और पिन-पॉइंट स्ट्राइक में माहिर है, जिससे ये सीमावर्ती लक्ष्य पर तेजी से अटैक कर सकते हैं। रडार, इन्फ्रारेड स्कैन व ड्रोन को तबाह कर सकते हैं। पाकिस्तान चीन-तुर्किये से जुटा रहा नए हेलिकॉप्टर, अपाचे का मुकाबला नहीं
एक्सपर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के पास 40 साल पुराने थर्ड और फोर्थ जेनरेशन के चीन निर्मित AH‑1F कोबरा हेलिकॉप्टर हैं। ये बहुत पुराने हो चुके हैं और अपाचे से इनकी कोई तुलना नहीं की जा सकती। हालांकि, पाकिस्तान अमेरिकी कंपनी के बेल AH‑1Z वाइपर, चाइना से Z‑10ME हेलिकॉप्टर और तुर्किये से पांचवीं जेनरेशन के Turkish T‑129 अटैक हेलिकॉप्टर खरीदने की योजना बना रहा है। अगर पाकिस्तान ने अपने सैन्य बेड़े में चाइनीज Z‑10ME जैसे हेलिकॉप्टर शामिल कर भी लिए तब भी टेक्नोलॉजी में ये अपाचे से काफी पीछे हैं। अपाचे AH‑64E दुनिया के सबसे आधुनिक अटैक हेलिकॉप्टरों में से एक है। इसमें लॉन्ग-बो रडार, इंफ्रारेड स्टिंगर, एयर‑टु‑एयर मिसाइल अटैक की क्षमता, इसमें लगी हेलफायर मिसाइल, हाइड्रा रॉकेट और 30mm चेन केनन गन है। दिन हो या रात, ये कभी भी ऑपरेशनल हो सकता है। जमीन से महज 30 फीट की ऊंचाई पर उड़ सकता है
अपाचे AH-64E गार्जियन की पहचान दुनियाभर की सेना में उड़ते हए टैंक के रूप में है। यह जमीन से महज 30 फीट की ऊंचाई पर उड़ सकता है, जिससे यह दुश्मन के रडार से बचा रहकर उसके बंकर, टैंक, गाड़ियां, तोप और ठिकानों पर हमला करता है। चीफ ऑफ स्टाफ-12 कोर जोधपुर से रिटायर्ड मेजर जनरल शेर सिंह बताते हैं- सेना के पास पहले से स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर ‘प्रचंड’ हैं। अब अपाचे के साथ दोनों का कॉम्बिनेशन बहुत ही बेहतरीन साबित होगा। पाकिस्तान के पुराने सिस्टम और सस्ते चीनी विकल्प आधुनिक अपाचे के सामने टिक नहीं सकते। ऐसे करता है हमला
रिटायर्ड मेजर जनरल शेर सिंह ने बताया कि अपाचे में रोटर डोम रडार लगे हैं। डोम रडार वाले हेलिकॉप्टर टारगेट की पहचान कर डिजिटल डेटा बिना डोम वाले हेलिकॉप्टरों को भेजते हैं, जो बिना देखे लक्ष्यों पर हमला कर लौट जाते हैं। यह सिस्टम UAV (ड्रोन) को कंट्रोल कर सकता है और हमला करने वाले ड्रोन को भी निर्देशित कर सकता है। खासियत जो अन्य हेलिकॉप्टर से अलग करती है फ्यूजलाज बना है भारत में
अपाचे का निर्माण अमेरिका की बोइंग कंपनी करती है। इसका ढांचा जिसे टेक्निकल भाषा में फ्यूजलाज कहा जाता है, भारत के हैदराबाद स्थित टाटा-बोइंग एयरोस्पेस लिमिटेड ने बनाया है। फ्यूजलाज विमान की मुख्य बॉडी होती है, जो पंख, पूंछ, इंजन और कॉकपिट को जोड़ता है। यह भारत की रक्षा उत्पादन क्षमताओं को भी बढ़ावा देता है। करीब 900 इंजीनियर और तकनीशियन इस संयुक्त उपक्रम में कार्यरत हैं।
’आसमान में उड़ने वाली तोप’ यानी अटैक हेलिकॉप्टर अपाचे AH-64E गार्जियन राजस्थान पहुंच चुके हैं। ‘फ्लाइंग टैंक’ नाम से मशहूर इन हेलिकॉप्टर की तैनाती पाकिस्तान के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को टारगेट पर रखते हुए की जा रही है। अपाचे हर एक मिनट में 625 राउंड फायर करने में सक्षम है। 120 राउंड फायर एक साथ कर सकता है। इसमें ताकतवर Hellfire मिसाइलें लगी हैं। ये लंबी दूरी तक दुश्मन सेना के टैंक, बंकर, रडार स्टेशन समेत अन्य सैन्य ठिकानों को तबाह कर सकती हैं। इसका मटमैला रंग, राजस्थान के लिहाज से महत्वपूर्ण है। राजस्थान के लिहाज से ये हेलिकॉप्टर कितने महत्वपूर्ण हैं? पाकिस्तान के कौन-कौन से एयरबेस, महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने, शहर इसकी रेंज में होंगे? हेलिकॉप्टर की खूबियां क्या हैं? भास्कर टीम ने सैन्य एक्सपर्ट की मदद से ऐसे ही सवालों के जवाब जाने। पढ़िए- मंडे स्पेशल स्टोरी में…. ‘फ्लाइंग टैंक’ की सीधी रेंज में होंगे रहीमयार खान और सदिकाबाद जैसे ठिकाने
राजस्थान में आर्मी की एविएशन कोर इसका संचालन करेगी। पाकिस्तान सीमा से 200 किलोमीटर दूरी पर सामरिक लिहाज से महत्वपूर्ण जगहों पर स्क्वाड्रन तैनात होगा, ताकि किसी भी परिस्थिति में बाड़मेर से लेकर श्रीगंगानगर तक अपाचे के स्क्वॉड्रन कुछ ही समय में पहुंच सकें। अपाचे की प्रारंभिक अटैक रेंज 8 किलोमीटर है, लेकिन अपग्रेड करने के बाद 25 किलोमीटर दूर तक के ठिकानों पर हमला कर सकते हैं। ऐसे में पाकिस्तान के बहावलपुर, रहीमयार खान, चोलिस्तान, यजमान, सादिकाबाद जैसे प्रमुख ठिकाने और पाक सेना की अग्रिम चौकियां अपाचे की सीधी मारक रेंज में आ जाएंगी। बॉर्डर से सटे 4 जिले, पाकिस्तान के ये इलाके रहेंगे रेंज में श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ : पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के बहावल नगर जिले के कई गांव तबाह कर सकता है। इसमें चक 95/EB, चक 103/EB, चक 27/FF, भोजेवाली, मचका और मीरगढ़ हैं। रायसिंहनगर से 6 किलोमीटर में पाकिस्तान का चक 95/EB गांव है। अनूपगढ़ की तरफ 6 से 7 किलोमीटर चक 96 EB गांव है। खाजूवाला की तरफ से 8 किलोमीटर चक 103EB, घड़साना की तरफ से 7 किलोमीटर दूर चक 27/FF और अनूपगढ़-खाजूवाला की तरफ 6 किलोमीटर दूर भोजेवाली गांव हैं। इन गांवों के नजदीक ही पाकिस्तान आर्मी ने चौकियां भी बना रखी हैं। सूरतगढ़ की ओर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का रहीमयार खान जिले के सदिकाबाद के कुछ इलाके, इस्लाम गढ़, शदिकाबाद आते हैं। हिंदूमलकोट से 7 किलाेमीटर दूर मचका, श्रीकरणपुर से 6 किलोमीटर दूर मीरगढ़ और रायसिंहनगर से 10 किलाेमीटर दूर सदिकाबाद गांव हैं। बीकानेर व जैसलमेर : बीकानेर रेंज से बहालवलपुर-फोर्ट अब्बास महत्वपूर्ण ठिकाना है। वहीं तन्नोट जैसलमेर से 7 किलोमीटर दूर पाकिस्तान में मरोट और लोंगेवाला से 7 किलोमीटर दूर इस्लामगढ़ फोर्ट है। हालांकि, अब यह खंडहर है लेकिन पाक सेना का यह महत्वपूर्ण ठिकाना है। शाहगढ़ की तरफ से 6 किलोमीटर दूर पाकिस्तान में किली शकरगढ़ है। बाड़मेर : पाकिस्तान के सिंध प्रांत के ठिकाने लगते हैं। यहां खोखरापार (जीरो पॉइंट) मुनाबाव के ठीक सामने एक किलोमीटर दूर है, यहां तक रेल कनेक्शन भी है। पहले यहां तक थार एक्सप्रेस जाती थी। न्यू छोर-छोर कैंट में पाकिस्तान की पुलिस, सेना के रेंजर कैंप व कई बस्तियां हैं, यह मुनाबाव से 5 किलोमीटर दूर है। इन सीमावर्ती गांवों में पाक सेना के रडार, इंफ्रारेड स्कैन, ड्रोन सर्विलांस लगे हुए हैं। अपाचे हेलिकॉप्टर नाइट ऑपरेशन, लो-लेवल फ्लाइट और पिन-पॉइंट स्ट्राइक में माहिर है, जिससे ये सीमावर्ती लक्ष्य पर तेजी से अटैक कर सकते हैं। रडार, इन्फ्रारेड स्कैन व ड्रोन को तबाह कर सकते हैं। पाकिस्तान चीन-तुर्किये से जुटा रहा नए हेलिकॉप्टर, अपाचे का मुकाबला नहीं
एक्सपर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के पास 40 साल पुराने थर्ड और फोर्थ जेनरेशन के चीन निर्मित AH‑1F कोबरा हेलिकॉप्टर हैं। ये बहुत पुराने हो चुके हैं और अपाचे से इनकी कोई तुलना नहीं की जा सकती। हालांकि, पाकिस्तान अमेरिकी कंपनी के बेल AH‑1Z वाइपर, चाइना से Z‑10ME हेलिकॉप्टर और तुर्किये से पांचवीं जेनरेशन के Turkish T‑129 अटैक हेलिकॉप्टर खरीदने की योजना बना रहा है। अगर पाकिस्तान ने अपने सैन्य बेड़े में चाइनीज Z‑10ME जैसे हेलिकॉप्टर शामिल कर भी लिए तब भी टेक्नोलॉजी में ये अपाचे से काफी पीछे हैं। अपाचे AH‑64E दुनिया के सबसे आधुनिक अटैक हेलिकॉप्टरों में से एक है। इसमें लॉन्ग-बो रडार, इंफ्रारेड स्टिंगर, एयर‑टु‑एयर मिसाइल अटैक की क्षमता, इसमें लगी हेलफायर मिसाइल, हाइड्रा रॉकेट और 30mm चेन केनन गन है। दिन हो या रात, ये कभी भी ऑपरेशनल हो सकता है। जमीन से महज 30 फीट की ऊंचाई पर उड़ सकता है
अपाचे AH-64E गार्जियन की पहचान दुनियाभर की सेना में उड़ते हए टैंक के रूप में है। यह जमीन से महज 30 फीट की ऊंचाई पर उड़ सकता है, जिससे यह दुश्मन के रडार से बचा रहकर उसके बंकर, टैंक, गाड़ियां, तोप और ठिकानों पर हमला करता है। चीफ ऑफ स्टाफ-12 कोर जोधपुर से रिटायर्ड मेजर जनरल शेर सिंह बताते हैं- सेना के पास पहले से स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर ‘प्रचंड’ हैं। अब अपाचे के साथ दोनों का कॉम्बिनेशन बहुत ही बेहतरीन साबित होगा। पाकिस्तान के पुराने सिस्टम और सस्ते चीनी विकल्प आधुनिक अपाचे के सामने टिक नहीं सकते। ऐसे करता है हमला
रिटायर्ड मेजर जनरल शेर सिंह ने बताया कि अपाचे में रोटर डोम रडार लगे हैं। डोम रडार वाले हेलिकॉप्टर टारगेट की पहचान कर डिजिटल डेटा बिना डोम वाले हेलिकॉप्टरों को भेजते हैं, जो बिना देखे लक्ष्यों पर हमला कर लौट जाते हैं। यह सिस्टम UAV (ड्रोन) को कंट्रोल कर सकता है और हमला करने वाले ड्रोन को भी निर्देशित कर सकता है। खासियत जो अन्य हेलिकॉप्टर से अलग करती है फ्यूजलाज बना है भारत में
अपाचे का निर्माण अमेरिका की बोइंग कंपनी करती है। इसका ढांचा जिसे टेक्निकल भाषा में फ्यूजलाज कहा जाता है, भारत के हैदराबाद स्थित टाटा-बोइंग एयरोस्पेस लिमिटेड ने बनाया है। फ्यूजलाज विमान की मुख्य बॉडी होती है, जो पंख, पूंछ, इंजन और कॉकपिट को जोड़ता है। यह भारत की रक्षा उत्पादन क्षमताओं को भी बढ़ावा देता है। करीब 900 इंजीनियर और तकनीशियन इस संयुक्त उपक्रम में कार्यरत हैं।