पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, ‘लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराना संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन नहीं है।’ हालांकि, प्रस्तावित बिल में चुनाव आयोग (ECI) को दी जाने वाली शक्तियों पर चिंता उन्होंने जताई है। पूर्व CJI ने कहा कि इससे ECI को विधानसभाओं का कार्यकाल बढ़ाने या घटाने की शक्ति मिल सकती है। उन परिस्थितियों को परिभाषित किया जाना चाहिए जिनमें ECI इस शक्ति का इस्तेमाल कर सकता है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने एक देश-एक चुनाव पर बनी संसदीय समिति को अपनी लिखित राय सौंपी है। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने 17 दिसंबर, 2024 को लोकसभा में एक देश-एक चुनाव संविधान संशोधन बिल पेश किया था। पूर्व CJI क्षेत्रीय और छोटी पार्टियों पर पड़ेगा असर
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि एक साथ चुनाव कराने से बेहतर आर्थिक स्थिति वाली नेशनल पार्टियों के प्रभाव से क्षेत्रीय और छोटी पार्टियां हाशिए पर जा सकती हैं। इसके लिए चुनाव अभियान में फाइनेंस से जुड़े नियमों को मजबूत किया जाना चाहिए। वहीं, पूर्व CJI रंजन गोगोई और पूर्व CJI जेएस खेहर 11 जुलाई को समिति के साथ बिल पर चर्चा करेंगे। जस्टिस गोगोई इससे पहले मार्च में भी समिति के साथ बैठक कर चुके हैं। उस समय उन्होंने भी ECI को बहुत ज्यादा अधिकार दिए जाने पर चिंता जताई थी। पूर्व CJI यूयू ललित फरवरी में पेश हुए थे। उन्होंने भी चरणबद्ध तरीके से एक साथ चुनाव कराए जाने का समर्थन किया था। हालांकि, उन्होंने कहा था कि जिन विधानसभाओं का कार्यकाल ज्यादा बचा है, उनके समय को कम करने से कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। शुरुआती आर्थिक चुनौतियां भारी होंगी 1. सिर्फ EVM खरीद पर ₹1.5 लाख करोड़ लगेंगे निर्वाचन आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, 2034 में अगर ‘एक देश एक चुनाव’ की नीति लागू होती है तो सिर्फ ईवीएम की खरीदी के लिए ही 1.5 लाख करोड़ रुपए खर्च होंगे। यह राशि कितनी ज्यादा है, इसका अंदाजा केवल इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में अनुमानतः एक लाख करोड़ रुपए खर्च हुए थे। 2. 2034 के चुनाव में दोगुनी करनी होगी सिक्योरिटी फोर्स रामनाथ कोविंद कमेटी ने बताया कि एकसाथ चुनाव कराने के लिए सेंट्रल सिक्योरिटी फोर्सेज में 50% बढ़ोतरी करनी पड़ेगी। यानी करीब 7 लाख कर्मियों की जरूरत होगी। 2024 में सिक्योरिटी फोर्स के करीब 3.40 लाख कर्मचारियों और अधिकारियों की चुनावों में ड्यूटी लगी थी। साथ-साथ और अलग-अलग चुनाव होने पर वोटिंग पैटर्न थिंक टैंक आईडीएफसी इंस्टीट्यूट की एक स्टडी में कुछ रोचक तथ्य सामने आए हैं: एकसाथ चुनाव करवाने के 4 बड़े फायदे रामनाथ कोविंद समिति ने अपनी रिपोर्ट में एकसाथ चुनाव करवाए जाने के पक्ष में ये तर्क दिए हैं… 1. शासन में निरंतरता आएगी
देश के विभिन्न भागों में चुनावों के चल रहे चक्रों के कारण राजनीतिक दल, उनके नेता और सरकारों का ध्यान चुनावों पर ही रहता है। एक साथ चुनाव करवाने से सरकारों का फोकस विकासात्मक गतिविधियों और जनकल्याणकारी नीतियों के क्रियान्वयन पर केंद्रित होगा। 3. अधिकारी काम पर ध्यान दे पाएंगे
चुनाव की वजहों से पुलिस सहित अनेक विभागों के पर्याप्त संख्या में कर्मियों की तैनाती करनी पड़ती है। एकसाथ चुनाव कराए जाने से बार बार तैनाती की जरूरत कम हो जाएगी, जिससे सरकारी अधिकारी अपने मूल दायित्यों पर फोकस कर पाएंगे। 2. पॉलिसी पैरालिसिस रुकेगा
चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता के क्रियान्वयन से नियमित प्रशासनिक गतिविधियां और विकास कार्य बाधित हो जाते हैं। एक साथ चुनाव कराने से आदर्श आचार संहिता के लंबे समय तक लागू रहने की अवधि कम होगी, जिससे पॉलिसी पैरालिसिस कम होगा।
4. वित्तीय बोझ में कमी आएगी
एकसाथ चुनाव कराने से वित्तीय खचों में काफी कमी आ सकती है। जब भी चुनाव होते हैं, मैनपॉवर, उपकरणों और सुरक्षा उपायों के प्रबंधन पर भारी खर्च होता है। इसके अलावा राजनीतिक दलों को भी काफी खर्च करना पड़ता है। ये आंकड़े करते हैं एकसाथ चुनावों का समर्थन
• 2019-2024 के दौरान इन पांच सालों में भारत में 676 दिन आदर्श आचार संहिता लागू रही। यानी प्रति साल लगभग 113 दिन।
• अकेले 2024 के लोकसभा चुनावों में ही एक अनुमान के मुताबिक करीब 1,00,000 करोड़ रुपए खर्च हुए। —————————————————- मामले से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… एक देश-एक चुनाव 2029 तक लागू हो सकता है, कमेटी का सुझाव- सभी विधानसभाओं का कार्यकाल लोकसभा चुनाव 2029 तक किया जाए न्यूज एजेंसी PTI ने सूत्रों के हवाले से बताया कि मोदी सरकार 2029 तक देश में लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव, यानी ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ करवा सकती है। भाजपा के घोषणा पत्र में भी इसका जिक्र है। वन नेशन वन इलेक्शन पर विचार के लिए बनाई गई पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली कमेटी ने 14 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। पूरी खबर पढ़ें…
पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, ‘लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराना संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन नहीं है।’ हालांकि, प्रस्तावित बिल में चुनाव आयोग (ECI) को दी जाने वाली शक्तियों पर चिंता उन्होंने जताई है। पूर्व CJI ने कहा कि इससे ECI को विधानसभाओं का कार्यकाल बढ़ाने या घटाने की शक्ति मिल सकती है। उन परिस्थितियों को परिभाषित किया जाना चाहिए जिनमें ECI इस शक्ति का इस्तेमाल कर सकता है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने एक देश-एक चुनाव पर बनी संसदीय समिति को अपनी लिखित राय सौंपी है। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने 17 दिसंबर, 2024 को लोकसभा में एक देश-एक चुनाव संविधान संशोधन बिल पेश किया था। पूर्व CJI क्षेत्रीय और छोटी पार्टियों पर पड़ेगा असर
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि एक साथ चुनाव कराने से बेहतर आर्थिक स्थिति वाली नेशनल पार्टियों के प्रभाव से क्षेत्रीय और छोटी पार्टियां हाशिए पर जा सकती हैं। इसके लिए चुनाव अभियान में फाइनेंस से जुड़े नियमों को मजबूत किया जाना चाहिए। वहीं, पूर्व CJI रंजन गोगोई और पूर्व CJI जेएस खेहर 11 जुलाई को समिति के साथ बिल पर चर्चा करेंगे। जस्टिस गोगोई इससे पहले मार्च में भी समिति के साथ बैठक कर चुके हैं। उस समय उन्होंने भी ECI को बहुत ज्यादा अधिकार दिए जाने पर चिंता जताई थी। पूर्व CJI यूयू ललित फरवरी में पेश हुए थे। उन्होंने भी चरणबद्ध तरीके से एक साथ चुनाव कराए जाने का समर्थन किया था। हालांकि, उन्होंने कहा था कि जिन विधानसभाओं का कार्यकाल ज्यादा बचा है, उनके समय को कम करने से कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। शुरुआती आर्थिक चुनौतियां भारी होंगी 1. सिर्फ EVM खरीद पर ₹1.5 लाख करोड़ लगेंगे निर्वाचन आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, 2034 में अगर ‘एक देश एक चुनाव’ की नीति लागू होती है तो सिर्फ ईवीएम की खरीदी के लिए ही 1.5 लाख करोड़ रुपए खर्च होंगे। यह राशि कितनी ज्यादा है, इसका अंदाजा केवल इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में अनुमानतः एक लाख करोड़ रुपए खर्च हुए थे। 2. 2034 के चुनाव में दोगुनी करनी होगी सिक्योरिटी फोर्स रामनाथ कोविंद कमेटी ने बताया कि एकसाथ चुनाव कराने के लिए सेंट्रल सिक्योरिटी फोर्सेज में 50% बढ़ोतरी करनी पड़ेगी। यानी करीब 7 लाख कर्मियों की जरूरत होगी। 2024 में सिक्योरिटी फोर्स के करीब 3.40 लाख कर्मचारियों और अधिकारियों की चुनावों में ड्यूटी लगी थी। साथ-साथ और अलग-अलग चुनाव होने पर वोटिंग पैटर्न थिंक टैंक आईडीएफसी इंस्टीट्यूट की एक स्टडी में कुछ रोचक तथ्य सामने आए हैं: एकसाथ चुनाव करवाने के 4 बड़े फायदे रामनाथ कोविंद समिति ने अपनी रिपोर्ट में एकसाथ चुनाव करवाए जाने के पक्ष में ये तर्क दिए हैं… 1. शासन में निरंतरता आएगी
देश के विभिन्न भागों में चुनावों के चल रहे चक्रों के कारण राजनीतिक दल, उनके नेता और सरकारों का ध्यान चुनावों पर ही रहता है। एक साथ चुनाव करवाने से सरकारों का फोकस विकासात्मक गतिविधियों और जनकल्याणकारी नीतियों के क्रियान्वयन पर केंद्रित होगा। 3. अधिकारी काम पर ध्यान दे पाएंगे
चुनाव की वजहों से पुलिस सहित अनेक विभागों के पर्याप्त संख्या में कर्मियों की तैनाती करनी पड़ती है। एकसाथ चुनाव कराए जाने से बार बार तैनाती की जरूरत कम हो जाएगी, जिससे सरकारी अधिकारी अपने मूल दायित्यों पर फोकस कर पाएंगे। 2. पॉलिसी पैरालिसिस रुकेगा
चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता के क्रियान्वयन से नियमित प्रशासनिक गतिविधियां और विकास कार्य बाधित हो जाते हैं। एक साथ चुनाव कराने से आदर्श आचार संहिता के लंबे समय तक लागू रहने की अवधि कम होगी, जिससे पॉलिसी पैरालिसिस कम होगा।
4. वित्तीय बोझ में कमी आएगी
एकसाथ चुनाव कराने से वित्तीय खचों में काफी कमी आ सकती है। जब भी चुनाव होते हैं, मैनपॉवर, उपकरणों और सुरक्षा उपायों के प्रबंधन पर भारी खर्च होता है। इसके अलावा राजनीतिक दलों को भी काफी खर्च करना पड़ता है। ये आंकड़े करते हैं एकसाथ चुनावों का समर्थन
• 2019-2024 के दौरान इन पांच सालों में भारत में 676 दिन आदर्श आचार संहिता लागू रही। यानी प्रति साल लगभग 113 दिन।
• अकेले 2024 के लोकसभा चुनावों में ही एक अनुमान के मुताबिक करीब 1,00,000 करोड़ रुपए खर्च हुए। —————————————————- मामले से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… एक देश-एक चुनाव 2029 तक लागू हो सकता है, कमेटी का सुझाव- सभी विधानसभाओं का कार्यकाल लोकसभा चुनाव 2029 तक किया जाए न्यूज एजेंसी PTI ने सूत्रों के हवाले से बताया कि मोदी सरकार 2029 तक देश में लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव, यानी ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ करवा सकती है। भाजपा के घोषणा पत्र में भी इसका जिक्र है। वन नेशन वन इलेक्शन पर विचार के लिए बनाई गई पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली कमेटी ने 14 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। पूरी खबर पढ़ें…