मैंने पूछा था कोई गलत काम तो नहीं होगा ना? उसने कहा- नहीं भाई, मेरे मजदूरी के पैसे आ रहे हैं कुवैत से। इसलिए भरोसा कर लिया… ये कहना है डूंगरपुर के अशोक डांगी का, जिसका बैंक अकाउंट साइबर ठगी का हिस्सा बन चुका है। मामला सुर्खियों में आया, जब सांसद (बांसवाड़ा) राजकुमार रोत ने केंद्रीय मंत्री और डीजीपी (राजस्थान) को पत्र लिख आदिवासियों को परेशान करने का आरोप लगाया। दैनिक भास्कर ने इस पूरे मामले की पड़ताल की। कई नए तथ्य सामने आए। ये मामला मात्र डूंगरपुर के 500 खातों तक ही सीमित नहीं है। पूरे प्रदेश में 99,045 फर्जी बैंक खातों का खुलासा हुआ है, जिनके जरिए करोड़ों की साइबर ठगी को अंजाम दिया जा चुका है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… 42 वर्षीय अशोक डांगी ने पुराने परिचित निलेश कलाल के कहने पर पंजाब नेशनल बैंक, सागवाड़ा (बांसवाड़ा) में खाता खुलवाया। निलेश ने अशोक को बताया कि उसके खुद के अकाउंट की लिमिट पूरी हो गई है और कुवैत से मजदूरी के पैसे आने हैं। भरोसा करके अशोक ने अपने डॉक्यूमेंट्स उसे दे दिए। निलेश ने उनसे दो कॉपियां लीं- एक से अकाउंट खुलवाया, दूसरी से सिम खरीदी। उसी नंबर को बैंक खाते से जोड़ा गया। फिर एटीएम कार्ड, चेक बुक और पासबुक भी निलेश ने अपने पास रख लिया। कुछ दिन बाद जब अशोक ने कार्ड मांगा तो टालने की कोशिश की। बाद में अशोक को पुलिस से सूचना मिली कि उसके अकाउंट से 12 लाख का संदिग्ध लेनदेन किया गया है। मुफ्त पैन कार्ड का लालच देकर खाता खुलवाया
ऐसा ही मामला डूंगरपुर के धंबोला निवासी लाल शंकर के साथ हुआ। नवंबर 2024 में गांव के विक्रम नाम के व्यक्ति ने मुफ्त में पैन कार्ड बनवाने के नाम पर उसके डॉक्यूमेंट्स लिए और बैंक ऑफ महाराष्ट्र में खाता खुलवाया। रोड साइड पर बैठकर सिम बेचने वाले से विक्रम ने उसके नाम से एक सिम कार्ड खरीदा, जिसका 887595XXXX नंबर था। इसी नंबर को खाते से लिंक करवा दिया। बाद में जब लाखों की ठगी इस खाते से हुई तो लाल शंकर को अपने नाम से चल रही साइबर ठगी का पता चला। प्रदेश में 99,045 संदिग्ध अकाउंट्स का खुलासा
राजस्थान पुलिस की साइबर यूनिट ने पूरे प्रदेश में जांच की। इसमें 99 हजार से ज्यादा संदिग्ध बैंक खातों का खुलासा हुआ है। इनमें से अब तक 3092 खातों पर ही कार्रवाई की गई है। 21 मामलों में FIR दर्ज हुई है। किस रेंज में कितने खाते और कितनी कार्रवाई हुई भिवाड़ी में नाम के लोग ही मौजूद नहीं, सिम कार्ड भी फर्जी
भिवाड़ी में जिन नामों से खाते खोले गए जांच में सामने आया कि उस नाम के व्यक्ति उस क्षेत्र में मौजूद ही नहीं हैं। मोबाइल नंबर भी बंद मिले। जिनके नाम से खाते खोले गए वे मजदूर वर्ग से हैं, जिनका कोई स्थायी पता नहीं है। ऐसे लोगों की पहचान करना बेहद कठिन हो गया है। 4,000 से 5,000 रु के लालच में खुलवाए जाते हैं फर्जी खाते
भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि इस साइबर फ्रॉड नेटवर्क में शामिल लोग प्रति खाता खुलवाने के लिए 4,000 से ₹5,000 तक का भुगतान करते हैं। आमतौर पर वे कम पढ़े-लिखे, गरीब या मजदूर वर्ग के लोगों को टारगेट करते हैं, जो थोड़े से पैसों में अपना आधार और पैन कार्ड दे देते हैं। इनसे खाता खुलवाने के बाद ठग खाते से जुड़ी सारी चीजें (ATM, पासबुक, चेक बुक) अपने पास रख लेते हैं। इसी के साथ संबंधित व्यक्ति के नाम से एक सिम कार्ड लेते हैं और उसे खाते से लिंक कर देते हैं। वह सिम भी उनके पास होती है, जिससे पीड़ित को ट्रांजैक्शन की कोई जानकारी नहीं मिलती। इन खातों से किया जा रहा ऑनलाइन ठगी
पुलिस जांच में सामने आया है कि इन खातों का इस्तेमाल क्रिप्टो करेंसी खरीदने, ऑनलाइन जालसाजी के लिए किया जा रहा है। इस पूरे मामले में बैंक कर्मियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। इसी के साथ अब पुलिस बैंक के अधिकारी और कर्मचारियों से भी पूछताछ कर रही है। सांसद बोले- बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत
मामले में सांसद राजकुमार रोत का कहना है कि जरूरी यह है कि पुलिस जांच करे कि पूरा प्रोसेस किसने किया? इन बच्चों के अकाउंट से जो पैसे दूसरों के खातों में ट्रांसफर हुए, वे किसके खाते हैं? सिम किसने जारी की? इसमें बैंक मैनेजर की क्या भूमिका रही? हमें तो खुद एमएलए होने के बावजूद नॉमिनेशन के समय बैंक जाकर अकाउंट खुलवाना पड़ा था। ऐसे में सवाल उठता है कि बिना बच्चों को बैंक लाए, उनके नाम से खाते कैसे खुल गए? इसका साफ मतलब है कि इसमें बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत है। —- साइबर ठगों की यह खबर भी पढ़िए… आदिवासियों के नाम पर खाते खुलवाकर 1800 करोड़ की धोखाधड़ी!:योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर खोले खाते, साइबर ठगों को बेचे राजस्थान के आदिवासी जिलों में भोले-भाले लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर एक बड़ा फर्जीवाड़ा चल रहा है। यहां कुछ बैंकों के कर्मचारियों ने लोगों से उनके आधार कार्ड, फोटो और दस्तखत ले लिए और उनके नाम से बैंक खाता खोल लिया। (पढ़ें पूरी खबर…)
मैंने पूछा था कोई गलत काम तो नहीं होगा ना? उसने कहा- नहीं भाई, मेरे मजदूरी के पैसे आ रहे हैं कुवैत से। इसलिए भरोसा कर लिया… ये कहना है डूंगरपुर के अशोक डांगी का, जिसका बैंक अकाउंट साइबर ठगी का हिस्सा बन चुका है। मामला सुर्खियों में आया, जब सांसद (बांसवाड़ा) राजकुमार रोत ने केंद्रीय मंत्री और डीजीपी (राजस्थान) को पत्र लिख आदिवासियों को परेशान करने का आरोप लगाया। दैनिक भास्कर ने इस पूरे मामले की पड़ताल की। कई नए तथ्य सामने आए। ये मामला मात्र डूंगरपुर के 500 खातों तक ही सीमित नहीं है। पूरे प्रदेश में 99,045 फर्जी बैंक खातों का खुलासा हुआ है, जिनके जरिए करोड़ों की साइबर ठगी को अंजाम दिया जा चुका है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… 42 वर्षीय अशोक डांगी ने पुराने परिचित निलेश कलाल के कहने पर पंजाब नेशनल बैंक, सागवाड़ा (बांसवाड़ा) में खाता खुलवाया। निलेश ने अशोक को बताया कि उसके खुद के अकाउंट की लिमिट पूरी हो गई है और कुवैत से मजदूरी के पैसे आने हैं। भरोसा करके अशोक ने अपने डॉक्यूमेंट्स उसे दे दिए। निलेश ने उनसे दो कॉपियां लीं- एक से अकाउंट खुलवाया, दूसरी से सिम खरीदी। उसी नंबर को बैंक खाते से जोड़ा गया। फिर एटीएम कार्ड, चेक बुक और पासबुक भी निलेश ने अपने पास रख लिया। कुछ दिन बाद जब अशोक ने कार्ड मांगा तो टालने की कोशिश की। बाद में अशोक को पुलिस से सूचना मिली कि उसके अकाउंट से 12 लाख का संदिग्ध लेनदेन किया गया है। मुफ्त पैन कार्ड का लालच देकर खाता खुलवाया
ऐसा ही मामला डूंगरपुर के धंबोला निवासी लाल शंकर के साथ हुआ। नवंबर 2024 में गांव के विक्रम नाम के व्यक्ति ने मुफ्त में पैन कार्ड बनवाने के नाम पर उसके डॉक्यूमेंट्स लिए और बैंक ऑफ महाराष्ट्र में खाता खुलवाया। रोड साइड पर बैठकर सिम बेचने वाले से विक्रम ने उसके नाम से एक सिम कार्ड खरीदा, जिसका 887595XXXX नंबर था। इसी नंबर को खाते से लिंक करवा दिया। बाद में जब लाखों की ठगी इस खाते से हुई तो लाल शंकर को अपने नाम से चल रही साइबर ठगी का पता चला। प्रदेश में 99,045 संदिग्ध अकाउंट्स का खुलासा
राजस्थान पुलिस की साइबर यूनिट ने पूरे प्रदेश में जांच की। इसमें 99 हजार से ज्यादा संदिग्ध बैंक खातों का खुलासा हुआ है। इनमें से अब तक 3092 खातों पर ही कार्रवाई की गई है। 21 मामलों में FIR दर्ज हुई है। किस रेंज में कितने खाते और कितनी कार्रवाई हुई भिवाड़ी में नाम के लोग ही मौजूद नहीं, सिम कार्ड भी फर्जी
भिवाड़ी में जिन नामों से खाते खोले गए जांच में सामने आया कि उस नाम के व्यक्ति उस क्षेत्र में मौजूद ही नहीं हैं। मोबाइल नंबर भी बंद मिले। जिनके नाम से खाते खोले गए वे मजदूर वर्ग से हैं, जिनका कोई स्थायी पता नहीं है। ऐसे लोगों की पहचान करना बेहद कठिन हो गया है। 4,000 से 5,000 रु के लालच में खुलवाए जाते हैं फर्जी खाते
भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि इस साइबर फ्रॉड नेटवर्क में शामिल लोग प्रति खाता खुलवाने के लिए 4,000 से ₹5,000 तक का भुगतान करते हैं। आमतौर पर वे कम पढ़े-लिखे, गरीब या मजदूर वर्ग के लोगों को टारगेट करते हैं, जो थोड़े से पैसों में अपना आधार और पैन कार्ड दे देते हैं। इनसे खाता खुलवाने के बाद ठग खाते से जुड़ी सारी चीजें (ATM, पासबुक, चेक बुक) अपने पास रख लेते हैं। इसी के साथ संबंधित व्यक्ति के नाम से एक सिम कार्ड लेते हैं और उसे खाते से लिंक कर देते हैं। वह सिम भी उनके पास होती है, जिससे पीड़ित को ट्रांजैक्शन की कोई जानकारी नहीं मिलती। इन खातों से किया जा रहा ऑनलाइन ठगी
पुलिस जांच में सामने आया है कि इन खातों का इस्तेमाल क्रिप्टो करेंसी खरीदने, ऑनलाइन जालसाजी के लिए किया जा रहा है। इस पूरे मामले में बैंक कर्मियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। इसी के साथ अब पुलिस बैंक के अधिकारी और कर्मचारियों से भी पूछताछ कर रही है। सांसद बोले- बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत
मामले में सांसद राजकुमार रोत का कहना है कि जरूरी यह है कि पुलिस जांच करे कि पूरा प्रोसेस किसने किया? इन बच्चों के अकाउंट से जो पैसे दूसरों के खातों में ट्रांसफर हुए, वे किसके खाते हैं? सिम किसने जारी की? इसमें बैंक मैनेजर की क्या भूमिका रही? हमें तो खुद एमएलए होने के बावजूद नॉमिनेशन के समय बैंक जाकर अकाउंट खुलवाना पड़ा था। ऐसे में सवाल उठता है कि बिना बच्चों को बैंक लाए, उनके नाम से खाते कैसे खुल गए? इसका साफ मतलब है कि इसमें बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत है। —- साइबर ठगों की यह खबर भी पढ़िए… आदिवासियों के नाम पर खाते खुलवाकर 1800 करोड़ की धोखाधड़ी!:योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर खोले खाते, साइबर ठगों को बेचे राजस्थान के आदिवासी जिलों में भोले-भाले लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर एक बड़ा फर्जीवाड़ा चल रहा है। यहां कुछ बैंकों के कर्मचारियों ने लोगों से उनके आधार कार्ड, फोटो और दस्तखत ले लिए और उनके नाम से बैंक खाता खोल लिया। (पढ़ें पूरी खबर…)