हरियाणा में कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) के लिए दोबारा पोर्टल खुलवाने वाली याचिका मंगलवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। युवाओं ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर रजिस्ट्रेशन कर चुके कैंडिडेट्स के डेटा में करेक्शन और एक ही शिफ्ट में एग्जाम कराने को लेकर याचिका लगाई थी। सरकार की तरफ से कोर्ट में एडवोकेट जनरल प्रमेंद्र चौहान पेश हुए। उन्होंने हाईकोर्ट में कहा कि जो कैंडिडेट अपना रिजर्वेशन सर्टिफिकेट पहले किन्हीं कारणों ने नहीं दे पाए हैं, उन्हें एग्जाम में राहत दी जाएगी। जिन कैंडिडेट्स ने सर्टिफिकेट एग्जाम की लास्ट डेट से पहले अप्लाई किया है। इन उम्मीदवारों के लिए रजिस्ट्रेशन पोर्टल करेक्शन के लिए खोला जाएगा। जिससे वह अपना सर्टिफिकेट करेक्ट कर सकें। हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (HSSC) ने CET एग्जाम जुलाई में कराने की तैयारी की है। इसके लिए 13 लाख से ज्यादा युवाओं ने आवेदन किया है। रजिस्ट्रेशन की डेट बढ़वाने के लिए याचिकाकर्ता ने ये 3 पॉइंट्स दिए…. 1. सरल पोर्टल पर नहीं बन पाए सर्टिफिकेट
याचिकाकर्ता शीतल, निशा और नैंसी ने कहा है कि वे अन्य अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग से संबंध रखती हैं। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) ने नवीनतम सर्टिफिकेट अपलोड करने के लिए कहा था। इसके लिए सरल पोर्टल पर आवेदन किया था, लेकिन यह सर्टिफिकेट समय पर नहीं बन पाया। इसलिए, उन्हें जनरल कैटेगरी में रजिस्ट्रेशन करना पड़ा। याचिका में मांग की गई है कि उन्हें आरक्षण का लाभ तभी मिल सकता है जब उनके रजिस्ट्रेशन में सुधार हो। इसलिए करेक्शन करने और नए रजिस्ट्रेशन के लिए पोर्टल दोबारा खोला जाए। इस बार रजिस्ट्रेशन के लिए केवल 15 दिन का समय दिया गया। जबकि, 2022 में एक साल से ज्यादा समय तक रजिस्ट्रेशन होता रहा था। 2. OTP लेट आता था
एक याचिकाकर्ता तनु ने कहा कि जब वह पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर रही थी, तो बार-बार वन टाइम पासवर्ड (OTP) लेट आता था। इस कारण वह रजिस्ट्रेशन नहीं कर पाई। ओटीपी लेट आने के कारण जो युवा पंजीकरण नहीं कर सके, वे तभी पंजीकरण कर सकते हैं जब पोर्टल दोबारा खुले। इसलिए, नए पंजीकरण के लिए पोर्टल दोबारा खोला जाए। 3. नॉर्मलाइजेशन लागू न किया जाए
एक और याचिकाकर्ता ने नॉर्मलाइजेशन का भी हवाला दिया। इसके अनुसार, एक से ज्यादा शिफ्टों में एग्जाम होगा और नॉर्मलाइजेशन किया जाएगा। सभी शिफ्टों में एक समान प्रश्न नहीं आ सकते। याचिकाकर्ता ने मांग की कि जैसे सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मेडिकल साइंस मामले में नेशनल बोर्ड ने एक ही शिफ्ट में पेपर कराया है, उसी तरह CET का पेपर भी एक ही शिफ्ट में कराया जाए। रिजर्वेशन सर्टिफिकेट के 2 जरूरी पॉइंट्स… दो कैटेगरी को मिल सकता है फायदा
हरियाणा CET का मामला हाईकोर्ट में पहुंचा है। हालांकि, इस मामले में रिजर्वेशन की दो कैटेगरी को फायदा मिल सकता है। पहला पिछड़ा वर्ग (BC) और दूसरा इकॉनामिकली वीकर सेक्शन (EWS)। कानूनी जानकारों ने इसकी वजह बताई है कि इनके रिजर्वेशन सर्टिफिकेट टाइम बाउंड हैं। इनमें इनकम की लिमिट होती है। सबसे अहम बात यह है कि ये इनकम फाइनेंशियल ईयर से बनते हैं। ऐसे में हाईकोर्ट इन दोनों रिजर्वेशन कैटेगरी के फायदे में फैसला दे सकता है। SC-DSM को कम फायदे के आसार
शेड्यूल्ड कास्ट (SC), वंचित अनुसूचित जातियां (DSC), डायग्नोस्टिक एंड स्टेटिस्टिकल मैनुअल ऑफ मेंटल डिसऑर्डर (DSM) जैसी अन्य रिजर्वेशन की कैटेगरी के लिए इस मामले में बहुत कम संभावना दिख रही है। इसकी वजह यह है कि इनकी प्रमाण पत्र की वैधता ज्यादा होती है। ऐसे में हाईकोर्ट के इनके मामले में फैसला फेवर में न देने की संभावना है।
हरियाणा में कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) के लिए दोबारा पोर्टल खुलवाने वाली याचिका मंगलवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। युवाओं ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर रजिस्ट्रेशन कर चुके कैंडिडेट्स के डेटा में करेक्शन और एक ही शिफ्ट में एग्जाम कराने को लेकर याचिका लगाई थी। सरकार की तरफ से कोर्ट में एडवोकेट जनरल प्रमेंद्र चौहान पेश हुए। उन्होंने हाईकोर्ट में कहा कि जो कैंडिडेट अपना रिजर्वेशन सर्टिफिकेट पहले किन्हीं कारणों ने नहीं दे पाए हैं, उन्हें एग्जाम में राहत दी जाएगी। जिन कैंडिडेट्स ने सर्टिफिकेट एग्जाम की लास्ट डेट से पहले अप्लाई किया है। इन उम्मीदवारों के लिए रजिस्ट्रेशन पोर्टल करेक्शन के लिए खोला जाएगा। जिससे वह अपना सर्टिफिकेट करेक्ट कर सकें। हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (HSSC) ने CET एग्जाम जुलाई में कराने की तैयारी की है। इसके लिए 13 लाख से ज्यादा युवाओं ने आवेदन किया है। रजिस्ट्रेशन की डेट बढ़वाने के लिए याचिकाकर्ता ने ये 3 पॉइंट्स दिए…. 1. सरल पोर्टल पर नहीं बन पाए सर्टिफिकेट
याचिकाकर्ता शीतल, निशा और नैंसी ने कहा है कि वे अन्य अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग से संबंध रखती हैं। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) ने नवीनतम सर्टिफिकेट अपलोड करने के लिए कहा था। इसके लिए सरल पोर्टल पर आवेदन किया था, लेकिन यह सर्टिफिकेट समय पर नहीं बन पाया। इसलिए, उन्हें जनरल कैटेगरी में रजिस्ट्रेशन करना पड़ा। याचिका में मांग की गई है कि उन्हें आरक्षण का लाभ तभी मिल सकता है जब उनके रजिस्ट्रेशन में सुधार हो। इसलिए करेक्शन करने और नए रजिस्ट्रेशन के लिए पोर्टल दोबारा खोला जाए। इस बार रजिस्ट्रेशन के लिए केवल 15 दिन का समय दिया गया। जबकि, 2022 में एक साल से ज्यादा समय तक रजिस्ट्रेशन होता रहा था। 2. OTP लेट आता था
एक याचिकाकर्ता तनु ने कहा कि जब वह पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर रही थी, तो बार-बार वन टाइम पासवर्ड (OTP) लेट आता था। इस कारण वह रजिस्ट्रेशन नहीं कर पाई। ओटीपी लेट आने के कारण जो युवा पंजीकरण नहीं कर सके, वे तभी पंजीकरण कर सकते हैं जब पोर्टल दोबारा खुले। इसलिए, नए पंजीकरण के लिए पोर्टल दोबारा खोला जाए। 3. नॉर्मलाइजेशन लागू न किया जाए
एक और याचिकाकर्ता ने नॉर्मलाइजेशन का भी हवाला दिया। इसके अनुसार, एक से ज्यादा शिफ्टों में एग्जाम होगा और नॉर्मलाइजेशन किया जाएगा। सभी शिफ्टों में एक समान प्रश्न नहीं आ सकते। याचिकाकर्ता ने मांग की कि जैसे सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मेडिकल साइंस मामले में नेशनल बोर्ड ने एक ही शिफ्ट में पेपर कराया है, उसी तरह CET का पेपर भी एक ही शिफ्ट में कराया जाए। रिजर्वेशन सर्टिफिकेट के 2 जरूरी पॉइंट्स… दो कैटेगरी को मिल सकता है फायदा
हरियाणा CET का मामला हाईकोर्ट में पहुंचा है। हालांकि, इस मामले में रिजर्वेशन की दो कैटेगरी को फायदा मिल सकता है। पहला पिछड़ा वर्ग (BC) और दूसरा इकॉनामिकली वीकर सेक्शन (EWS)। कानूनी जानकारों ने इसकी वजह बताई है कि इनके रिजर्वेशन सर्टिफिकेट टाइम बाउंड हैं। इनमें इनकम की लिमिट होती है। सबसे अहम बात यह है कि ये इनकम फाइनेंशियल ईयर से बनते हैं। ऐसे में हाईकोर्ट इन दोनों रिजर्वेशन कैटेगरी के फायदे में फैसला दे सकता है। SC-DSM को कम फायदे के आसार
शेड्यूल्ड कास्ट (SC), वंचित अनुसूचित जातियां (DSC), डायग्नोस्टिक एंड स्टेटिस्टिकल मैनुअल ऑफ मेंटल डिसऑर्डर (DSM) जैसी अन्य रिजर्वेशन की कैटेगरी के लिए इस मामले में बहुत कम संभावना दिख रही है। इसकी वजह यह है कि इनकी प्रमाण पत्र की वैधता ज्यादा होती है। ऐसे में हाईकोर्ट के इनके मामले में फैसला फेवर में न देने की संभावना है।