हिमाचल प्रदेश में विवादित संजौली मस्जिद को शिमला नगर निगम आयुक्त ने पूरी तरह तोड़ने के आदेश दे दिए हैं। शनिवार को निगम आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने मस्जिद को गैर कानूनी बताते हुए निचली 2 मंजिलें भी हटाने को कह दिया है। यह फैसला तब आया है जब वक्फ बोर्ड निगम की अदालत में मस्जिद की जमीन पर मालिकाना हक के कागज ही पेश नहीं कर पाया। यही नहीं, मस्जिद का नक्शा और किसी भी तरह की NOC भी मस्जिद कमेटी के पास नहीं है। जबकि, वक्फ बोर्ड लंबे समय तक जमीन पर मालिकाना हक का दावा करता रहा। अब मुस्लिम पक्ष का इस मामले में कहना है कि ऑर्डर को पूरी तरह पढ़ने और समझने के बाद ही आगे की रणनीति बनाई जाएगी। मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद लतीफ का कहना है कि अभी आदेश की कॉपी उनके पास नहीं पहुंची है। मुस्लिम पक्ष आयुक्त कोर्ट के इस फैसले को वक्फ बोर्ड के CEO जफर इकबाल के सामने रखेगा। इसके बाद सक्षम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी जाएगी। ऊपरी 3 मंजिलों को तोड़ने के आदेश पहले ही हो चुके
मस्जिद के ऊपर की 3 मंजिलों को तोड़ने के आदेश निगम आयुक्त बीते साल 5 अक्टूबर को दे चुके हैं। इसके बाद से ही मस्जिद को तोड़ने का काम चल रहा था। ताजा आदेश के बाद अब संजौली में रिहायशी इलाके में बनी मस्जिद को पूरी तरह हटाना होगा। आदेश को लेकर स्थानीय लोगों के वकील ने ये बातें बताईं… 15 साल से चल रहा था केस
निगम आयुक्त कोर्ट में यह केस 15 साल से चल रहा था। अब तक इस मामले में 50 से भी ज्यादा बार सुनवाई हो चुकी थीं। संजौली मस्जिद के आसपास के लोकल रेजिडेंट ने निगम कोर्ट में चल रहे इस केस को जल्दी निपटाने के लिए बीते साल हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका पर बीते साल 21 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने निगम आयुक्त को 8 सप्ताह में केस निपटाने के आदेश दिए, लेकिन इस अवधि में केस नहीं निपटाया जा सका। इसके बाद लोकल रेजिडेंट ने एक्जीक्यूशन पिटिशन दायर की। इस पिटिशन पर हाईकोर्ट ने 8 मई तक फैसला सुनाने के निगम आयुक्त को आदेश दिए। संजौली मस्जिद के कारण पूरे देश में मचा था बवाल
संजौली मस्जिद के कारण बीते साल पूरे देश में बवाल मचा था। दरअसल, 31 अगस्त 2024 को शिमला के मेहली में 2 समुदायों में मारपीट हुई। मारपीट करने वाले एक समुदाय के लोग संजौली मस्जिद में छिप गए। 1 सितंबर को मस्जिद के बाहर बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया। इसके बाद शिमला में कई बार हिंदू संगठनों में उग्र प्रदर्शन किया। मस्जिद कमेटी ने खुद अवैध हिस्सा तोड़ने की पेशकश की
इस दौरान संजौली में प्रदर्शनकारियों पर हल्का बल प्रयोग और वाटर कैनन का भी इस्तेमाल किया गया। इससे हिंदू संगठन भड़क गए और पूरे प्रदेश में प्रदर्शन हुए। संजौली के बाद दूसरी जगह भी मस्जिद को तोड़ने की मांग उठी। संजौली मस्जिद का विवाद तूल पकड़ ही रहा था, इस बीच 12 सितंबर को संजौली मस्जिद कमेटी खुद निगम आयुक्त कोर्ट में पहुंची और खुद अवैध हिस्सा तोड़ने की पेशकश की। तब जाकर विवाद शांत हो पाया।
हिमाचल प्रदेश में विवादित संजौली मस्जिद को शिमला नगर निगम आयुक्त ने पूरी तरह तोड़ने के आदेश दे दिए हैं। शनिवार को निगम आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने मस्जिद को गैर कानूनी बताते हुए निचली 2 मंजिलें भी हटाने को कह दिया है। यह फैसला तब आया है जब वक्फ बोर्ड निगम की अदालत में मस्जिद की जमीन पर मालिकाना हक के कागज ही पेश नहीं कर पाया। यही नहीं, मस्जिद का नक्शा और किसी भी तरह की NOC भी मस्जिद कमेटी के पास नहीं है। जबकि, वक्फ बोर्ड लंबे समय तक जमीन पर मालिकाना हक का दावा करता रहा। अब मुस्लिम पक्ष का इस मामले में कहना है कि ऑर्डर को पूरी तरह पढ़ने और समझने के बाद ही आगे की रणनीति बनाई जाएगी। मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद लतीफ का कहना है कि अभी आदेश की कॉपी उनके पास नहीं पहुंची है। मुस्लिम पक्ष आयुक्त कोर्ट के इस फैसले को वक्फ बोर्ड के CEO जफर इकबाल के सामने रखेगा। इसके बाद सक्षम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी जाएगी। ऊपरी 3 मंजिलों को तोड़ने के आदेश पहले ही हो चुके
मस्जिद के ऊपर की 3 मंजिलों को तोड़ने के आदेश निगम आयुक्त बीते साल 5 अक्टूबर को दे चुके हैं। इसके बाद से ही मस्जिद को तोड़ने का काम चल रहा था। ताजा आदेश के बाद अब संजौली में रिहायशी इलाके में बनी मस्जिद को पूरी तरह हटाना होगा। आदेश को लेकर स्थानीय लोगों के वकील ने ये बातें बताईं… 15 साल से चल रहा था केस
निगम आयुक्त कोर्ट में यह केस 15 साल से चल रहा था। अब तक इस मामले में 50 से भी ज्यादा बार सुनवाई हो चुकी थीं। संजौली मस्जिद के आसपास के लोकल रेजिडेंट ने निगम कोर्ट में चल रहे इस केस को जल्दी निपटाने के लिए बीते साल हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका पर बीते साल 21 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने निगम आयुक्त को 8 सप्ताह में केस निपटाने के आदेश दिए, लेकिन इस अवधि में केस नहीं निपटाया जा सका। इसके बाद लोकल रेजिडेंट ने एक्जीक्यूशन पिटिशन दायर की। इस पिटिशन पर हाईकोर्ट ने 8 मई तक फैसला सुनाने के निगम आयुक्त को आदेश दिए। संजौली मस्जिद के कारण पूरे देश में मचा था बवाल
संजौली मस्जिद के कारण बीते साल पूरे देश में बवाल मचा था। दरअसल, 31 अगस्त 2024 को शिमला के मेहली में 2 समुदायों में मारपीट हुई। मारपीट करने वाले एक समुदाय के लोग संजौली मस्जिद में छिप गए। 1 सितंबर को मस्जिद के बाहर बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया। इसके बाद शिमला में कई बार हिंदू संगठनों में उग्र प्रदर्शन किया। मस्जिद कमेटी ने खुद अवैध हिस्सा तोड़ने की पेशकश की
इस दौरान संजौली में प्रदर्शनकारियों पर हल्का बल प्रयोग और वाटर कैनन का भी इस्तेमाल किया गया। इससे हिंदू संगठन भड़क गए और पूरे प्रदेश में प्रदर्शन हुए। संजौली के बाद दूसरी जगह भी मस्जिद को तोड़ने की मांग उठी। संजौली मस्जिद का विवाद तूल पकड़ ही रहा था, इस बीच 12 सितंबर को संजौली मस्जिद कमेटी खुद निगम आयुक्त कोर्ट में पहुंची और खुद अवैध हिस्सा तोड़ने की पेशकश की। तब जाकर विवाद शांत हो पाया।