सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को धारावी रिडेवलेपमेंट प्रोजेक्ट (DRP) के लिए चल रहे निर्माण कार्य पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। साथ ही बॉम्बे हाईकोर्ट के अडाणी ग्रुप के पक्ष में दिए फैसले को पलटने से भी मना कर दिया। UAE की कंपनी सेकलिंक टेक्नोलॉजीज कॉर्प ने इस प्रोजेक्ट को अडाणी प्रापर्टीज प्राइवेट लिमिटेड को देने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले को चुनौती दी थी। इसी के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सेकलिंक ने अडाणी ग्रुप का टेंडर रद्द करने की मांग की है। धारावी रिडेवलेपमेंट प्रोजेक्ट एशिया का सबसे बड़ा शहरी पुनर्वास कार्यक्रम माना जा रहा है। पहले जानिए क्या है मामला
मुंबई के धारावी को रिडेवलेप करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने 2019 में टेंडर जारी किया था। सेकलिंक ने 7,200 करोड़ रुपए की बोली लगाकर प्रोजेक्ट हासिल किया था। इसके बाद राज्य सरकार ने 2019 और 2022 के बीच आर्थिक स्थितियों में बदलावों का हवाला देते हुए टेंडर रद्द कर दिया। 2022 में नया टेंडर जारी हुआ, इस बार प्रोजेक्ट अडाणी ग्रुप को मिला। सेकलिंक ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की। दिसंबर, 2024 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सेकलिंक की 2019 की बोली रद्द करने और 2022 में एक नया टेंडर जारी करने के महाराष्ट्र सरकार का फैसला बरकरार रखा। सेकलिंक ने 2022 में 8,640 करोड़ रुपए की बोली लगाई थी जबकि अडाणी ग्रुप ने 5,069 करोड़ रुपए की पेशकश की थी। अडाणी ग्रुप की टेंडर बोली कम होने की वजह से प्रोजेक्ट सेकलिंक की जगह अडाणी ग्रुप को मिला था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पहले से तय सभी शर्तों को मानना होगा धारावी में पार्क, हॉस्पिटल बनेंगे, हर फ्लैट में इंडिपेंडेंट किचन होंगे जुलाई, 2023 में महाराष्ट्र सरकार ने धारावी स्लम रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए अडाणी ग्रुप की बोली को मंजूरी दी थी। कंपनी के मुताबिक, यहां फ्लैट्स के अलावा स्कूल, कम्युनिटी हॉल, पार्क, हॉस्पिटल और बच्चों के लिए डे केयर सेंटर बनाए जाएंगे। रीडेवलपमेंट प्लान में इंडस्ट्रियल बिजनेस जोन भी होगा। इसमें एक कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनाया जाएगा। धारावी के स्लम एरिया को अलग-अलग फेज में डेवलप किया जाना है। इससे पहले यहां रहने वाले लोगों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा। इसके बाद नए घर बनाए जाएंगे। राज्य सरकार ने केंद्र से साल्ट पैन वाली जमीन मांगी
धारावी में लोगों को 350 स्क्वायर फीट में बने फ्लैट मिलेंगे। फ्लैट का साइज करीब 17% बढ़ाया जाएगा। प्रोजेक्ट के लिए महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र से मुंबई की साल्ट पैन की जगह मांगी है। इसके लिए राज्य सरकार ने गारंटी पत्र के साथ साल्ट पैन की जमीन ट्रांसफर करने का प्रपोजल पेश करने की मंजूरी दी है। साल्ट पैन की करीब 283.4 एकड़ जमीन का मालिकाना हक केंद्र सरकार के पास है। महाराष्ट्र सरकार इसे 99 साल की लीज पर लेना चाहती है। केंद्र सरकार से जमीन मिलने के बाद मार्केट रेट के हिसाब से इसकी कीमत चुकाई जाएगी। धारावी रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत 1 जनवरी, 2000 से पहले धारावी में बसे लोगों को फ्री में पक्का घर मिलेगा। 2000 से 2011 के बीच आकर बसे लोगों को भी घर मिलेगा, लेकिन उन्हें इसके लिए कीमत देनी होगी। पात्र लोगों को धारावी में ही घर दिया जाएगा। वहीं, अपात्र लोगों को धारावी से बाहर बसाया जाएगा। ये खबर भी पढ़ें… फडणवीस CM, 23 हजार करोड़ के धारावी प्रोजेक्ट का क्या: रद्द करना चाहते थे उद्धव 2018 में पहली बार धारावी के डेवलपमेंट के लिए टेंडर निकाला गया। तब सेकलिंक टेक्नोलॉजीज कॉर्पोरेशन ने ही टेंडर भरा था। कंपनी ने 7,200 करोड़ की सबसे ऊंची बोली लगाई थी, लेकिन उन्हें लेटर ऑफ इंटेंट नहीं दिया गया। टेंडर को दो बार एक्सटेंशन दिया गया। तब अडाणी ग्रुप ने 4,500 करोड़ की बोली लगाई थी। पढ़ें पूरी खबर…
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को धारावी रिडेवलेपमेंट प्रोजेक्ट (DRP) के लिए चल रहे निर्माण कार्य पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। साथ ही बॉम्बे हाईकोर्ट के अडाणी ग्रुप के पक्ष में दिए फैसले को पलटने से भी मना कर दिया। UAE की कंपनी सेकलिंक टेक्नोलॉजीज कॉर्प ने इस प्रोजेक्ट को अडाणी प्रापर्टीज प्राइवेट लिमिटेड को देने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले को चुनौती दी थी। इसी के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सेकलिंक ने अडाणी ग्रुप का टेंडर रद्द करने की मांग की है। धारावी रिडेवलेपमेंट प्रोजेक्ट एशिया का सबसे बड़ा शहरी पुनर्वास कार्यक्रम माना जा रहा है। पहले जानिए क्या है मामला
मुंबई के धारावी को रिडेवलेप करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने 2019 में टेंडर जारी किया था। सेकलिंक ने 7,200 करोड़ रुपए की बोली लगाकर प्रोजेक्ट हासिल किया था। इसके बाद राज्य सरकार ने 2019 और 2022 के बीच आर्थिक स्थितियों में बदलावों का हवाला देते हुए टेंडर रद्द कर दिया। 2022 में नया टेंडर जारी हुआ, इस बार प्रोजेक्ट अडाणी ग्रुप को मिला। सेकलिंक ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की। दिसंबर, 2024 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सेकलिंक की 2019 की बोली रद्द करने और 2022 में एक नया टेंडर जारी करने के महाराष्ट्र सरकार का फैसला बरकरार रखा। सेकलिंक ने 2022 में 8,640 करोड़ रुपए की बोली लगाई थी जबकि अडाणी ग्रुप ने 5,069 करोड़ रुपए की पेशकश की थी। अडाणी ग्रुप की टेंडर बोली कम होने की वजह से प्रोजेक्ट सेकलिंक की जगह अडाणी ग्रुप को मिला था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पहले से तय सभी शर्तों को मानना होगा धारावी में पार्क, हॉस्पिटल बनेंगे, हर फ्लैट में इंडिपेंडेंट किचन होंगे जुलाई, 2023 में महाराष्ट्र सरकार ने धारावी स्लम रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए अडाणी ग्रुप की बोली को मंजूरी दी थी। कंपनी के मुताबिक, यहां फ्लैट्स के अलावा स्कूल, कम्युनिटी हॉल, पार्क, हॉस्पिटल और बच्चों के लिए डे केयर सेंटर बनाए जाएंगे। रीडेवलपमेंट प्लान में इंडस्ट्रियल बिजनेस जोन भी होगा। इसमें एक कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनाया जाएगा। धारावी के स्लम एरिया को अलग-अलग फेज में डेवलप किया जाना है। इससे पहले यहां रहने वाले लोगों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा। इसके बाद नए घर बनाए जाएंगे। राज्य सरकार ने केंद्र से साल्ट पैन वाली जमीन मांगी
धारावी में लोगों को 350 स्क्वायर फीट में बने फ्लैट मिलेंगे। फ्लैट का साइज करीब 17% बढ़ाया जाएगा। प्रोजेक्ट के लिए महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र से मुंबई की साल्ट पैन की जगह मांगी है। इसके लिए राज्य सरकार ने गारंटी पत्र के साथ साल्ट पैन की जमीन ट्रांसफर करने का प्रपोजल पेश करने की मंजूरी दी है। साल्ट पैन की करीब 283.4 एकड़ जमीन का मालिकाना हक केंद्र सरकार के पास है। महाराष्ट्र सरकार इसे 99 साल की लीज पर लेना चाहती है। केंद्र सरकार से जमीन मिलने के बाद मार्केट रेट के हिसाब से इसकी कीमत चुकाई जाएगी। धारावी रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत 1 जनवरी, 2000 से पहले धारावी में बसे लोगों को फ्री में पक्का घर मिलेगा। 2000 से 2011 के बीच आकर बसे लोगों को भी घर मिलेगा, लेकिन उन्हें इसके लिए कीमत देनी होगी। पात्र लोगों को धारावी में ही घर दिया जाएगा। वहीं, अपात्र लोगों को धारावी से बाहर बसाया जाएगा। ये खबर भी पढ़ें… फडणवीस CM, 23 हजार करोड़ के धारावी प्रोजेक्ट का क्या: रद्द करना चाहते थे उद्धव 2018 में पहली बार धारावी के डेवलपमेंट के लिए टेंडर निकाला गया। तब सेकलिंक टेक्नोलॉजीज कॉर्पोरेशन ने ही टेंडर भरा था। कंपनी ने 7,200 करोड़ की सबसे ऊंची बोली लगाई थी, लेकिन उन्हें लेटर ऑफ इंटेंट नहीं दिया गया। टेंडर को दो बार एक्सटेंशन दिया गया। तब अडाणी ग्रुप ने 4,500 करोड़ की बोली लगाई थी। पढ़ें पूरी खबर…