बिहार में बुधवार को नीतीश मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ। BJP कोटे के 7 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। सबसे पहले दरभंगा से BJP विधायक संजय सरावगी ने शपथ ली। उन्होंने मैथिली में शपथ पत्र पढ़ा। इसके बाद बिहारशरीफ से BJP विधायक सुनील कुमार, दरभंगा की जाले विधानसभा सीट से BJP विधायक जीवेश मिश्रा, मुजफ्फरपुर की साहेबगंज विधानसभा से BJP विधायक राजू सिंह ने भी मंत्री पद की शपथ ली। सीतामढ़ी जिले की रीगा विधानसभा से BJP विधायक मोतिलाल प्रसाद, अमनौर विधानसभा सीट से BJP विधायक कृष्ण कुमार उर्फ मंटू, सिकटी विधानसभा सीट से BJP विधायक विजय मंडल ने शपथ ली। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान सभी विधायकों को शपथ दिलाई। NDA को सबसे ज्यादा सीटें देने वाले मिथिलांचल के 4 विधायक मंत्री बनें। बिहार के नए मंत्रियों को जानिए…. शपथ ग्रहण से पहले सुनील कुमार, मोतीलाल प्रसाद, विजय मंडल और संजय सरावगी समेत सातों विधायक बीजेपी ऑफिस पहुंचे। चारों ने प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल से मुलाकात की। इससे पहले अपर मुख्य सचिव एस सिद्धार्थ मंत्रियों की लिस्ट लेकर राजभवन पहुंचे। उन्होंने राज्यपाल के प्रधान सचिव को शपथ लेने वाले विधायकों की लिस्ट सौंपी। बुधवार सुबह करीब 10 बजे दिलीप जायसवाल ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया। उन्होंने CM नीतीश कुमार को अपना इस्तीफा सौंपा। मिथिलांचल NDA का गढ़, 70 फीसदी विधायक मिथिलांचल को NDA का गढ़ कहा जाता है। मिथिलांचल के सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, वैशली जैसे अहम जिले आते हैं। इन जिलों में विधानसभा की 60 सीटें आती हैं, इनमें 2020 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन के 40 विधायक जीते थे। राजस्व विभाग में अच्छा काम करने की कोशिश की बुधवार सुबह राजस्व मंत्री दिलीप जायसवाल ने इस्तीफे के बाद कहा- ‘BJP में एक व्यक्ति एक पद का फॉर्मूला है, इसलिए मैंने आज मुख्यमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। कैबिनेट विस्तार होना तय है। ये मुख्यमंत्री जी का अधिकार है। इसमें जातीय समीकरण का भी ध्यान रखा जाएगा।’ ‘मैंने राजस्व विभाग में हमेशा अच्छा करने की कोशिश की। भविष्य में भी मेरे बारे में चर्चा चलेगी। राजस्व विभाग में हमने सर्वे का काम शुरू किया था। उस दौरान उथल-पुथल मची हुई थी। हमने फिर भी अपना काम जारी रखा। 14 करोड़ पन्नों को हमने डिजिटल किया।’ मौजूदा कैबिनेट में 30 मंत्री नीतीश कुमार की मौजूदा कैबिनेट में कुल 30 मंत्री हैं। 6 मंत्रियों की जगह खाली है। बुधवार को दिलीप जायसवाल के मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद कुल 7 जगह खाली हो चुकी हैं। अभी तमाम ऐसे मंत्री हैं जिनके पास एक से ज्यादा विभाग हैं। विपक्ष लगातार इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरता रहा है। इसी कारण चुनाव के पहले कैबिनेट विस्तार किया जा रहा है। सरकार कैबिनेट विस्तार के जरिए जातिगत समीकरण को भी साधने की कोशिश की है। 2 विभाग वाले मंत्रियों का एक विभाग छिन सकता है जिन मंत्रियों के पास दो या दो से अधिक मंत्री पद हैं, उनसे एक विभाग को लिया जा सकता है। ये विभाग नए मंत्री को दिया जाएगा। कई ऐसे मंत्री हैं, जिसके पास दो या दो से अधिक विभाग हैं। जानकारी के मुताबिक पार्टी के बड़े चेहरे से भी विभाग की कटौती की जा सकती है। ये नए मंत्री को दी जा सकती है। ————————— ये खबर भी पढ़िए… जब नीतीश साथ नहीं, तब भागलपुर हारे मोदी: 2014 में लोकसभा हारे, 2015 में विधानसभा; इस बार विकास, जंगलराज, धर्म पर चुनाव भागलपुर, बांका, मुंगेर और लखीसराय NDA का गढ़ रहे हैं। लेकिन तभी जब नीतीश कुमार NDA में रहे। 2014 के लोकसभा चुनाव में नीतीश ने NDA से दूरी बना ली थी, तब भागलपुर और बांका दोनों सीटें RJD ने जीत ली थीं। इसी तरह 2015 के विधानसभा चुनाव में भी नीतीश कुमार NDA का हिस्सा नहीं थे, तभी NDA सभी नौ सीटें हार गया था। इस बार नीतीश और BJP साथ–साथ हैं। इसलिए NDA अपने गढ़ में वोटों को एकजुट रखने की कोशिश में लग गया है। पूरी खबर पढ़िए
बिहार में बुधवार को नीतीश मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ। BJP कोटे के 7 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। सबसे पहले दरभंगा से BJP विधायक संजय सरावगी ने शपथ ली। उन्होंने मैथिली में शपथ पत्र पढ़ा। इसके बाद बिहारशरीफ से BJP विधायक सुनील कुमार, दरभंगा की जाले विधानसभा सीट से BJP विधायक जीवेश मिश्रा, मुजफ्फरपुर की साहेबगंज विधानसभा से BJP विधायक राजू सिंह ने भी मंत्री पद की शपथ ली। सीतामढ़ी जिले की रीगा विधानसभा से BJP विधायक मोतिलाल प्रसाद, अमनौर विधानसभा सीट से BJP विधायक कृष्ण कुमार उर्फ मंटू, सिकटी विधानसभा सीट से BJP विधायक विजय मंडल ने शपथ ली। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान सभी विधायकों को शपथ दिलाई। NDA को सबसे ज्यादा सीटें देने वाले मिथिलांचल के 4 विधायक मंत्री बनें। बिहार के नए मंत्रियों को जानिए…. शपथ ग्रहण से पहले सुनील कुमार, मोतीलाल प्रसाद, विजय मंडल और संजय सरावगी समेत सातों विधायक बीजेपी ऑफिस पहुंचे। चारों ने प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल से मुलाकात की। इससे पहले अपर मुख्य सचिव एस सिद्धार्थ मंत्रियों की लिस्ट लेकर राजभवन पहुंचे। उन्होंने राज्यपाल के प्रधान सचिव को शपथ लेने वाले विधायकों की लिस्ट सौंपी। बुधवार सुबह करीब 10 बजे दिलीप जायसवाल ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया। उन्होंने CM नीतीश कुमार को अपना इस्तीफा सौंपा। मिथिलांचल NDA का गढ़, 70 फीसदी विधायक मिथिलांचल को NDA का गढ़ कहा जाता है। मिथिलांचल के सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, वैशली जैसे अहम जिले आते हैं। इन जिलों में विधानसभा की 60 सीटें आती हैं, इनमें 2020 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन के 40 विधायक जीते थे। राजस्व विभाग में अच्छा काम करने की कोशिश की बुधवार सुबह राजस्व मंत्री दिलीप जायसवाल ने इस्तीफे के बाद कहा- ‘BJP में एक व्यक्ति एक पद का फॉर्मूला है, इसलिए मैंने आज मुख्यमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। कैबिनेट विस्तार होना तय है। ये मुख्यमंत्री जी का अधिकार है। इसमें जातीय समीकरण का भी ध्यान रखा जाएगा।’ ‘मैंने राजस्व विभाग में हमेशा अच्छा करने की कोशिश की। भविष्य में भी मेरे बारे में चर्चा चलेगी। राजस्व विभाग में हमने सर्वे का काम शुरू किया था। उस दौरान उथल-पुथल मची हुई थी। हमने फिर भी अपना काम जारी रखा। 14 करोड़ पन्नों को हमने डिजिटल किया।’ मौजूदा कैबिनेट में 30 मंत्री नीतीश कुमार की मौजूदा कैबिनेट में कुल 30 मंत्री हैं। 6 मंत्रियों की जगह खाली है। बुधवार को दिलीप जायसवाल के मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद कुल 7 जगह खाली हो चुकी हैं। अभी तमाम ऐसे मंत्री हैं जिनके पास एक से ज्यादा विभाग हैं। विपक्ष लगातार इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरता रहा है। इसी कारण चुनाव के पहले कैबिनेट विस्तार किया जा रहा है। सरकार कैबिनेट विस्तार के जरिए जातिगत समीकरण को भी साधने की कोशिश की है। 2 विभाग वाले मंत्रियों का एक विभाग छिन सकता है जिन मंत्रियों के पास दो या दो से अधिक मंत्री पद हैं, उनसे एक विभाग को लिया जा सकता है। ये विभाग नए मंत्री को दिया जाएगा। कई ऐसे मंत्री हैं, जिसके पास दो या दो से अधिक विभाग हैं। जानकारी के मुताबिक पार्टी के बड़े चेहरे से भी विभाग की कटौती की जा सकती है। ये नए मंत्री को दी जा सकती है। ————————— ये खबर भी पढ़िए… जब नीतीश साथ नहीं, तब भागलपुर हारे मोदी: 2014 में लोकसभा हारे, 2015 में विधानसभा; इस बार विकास, जंगलराज, धर्म पर चुनाव भागलपुर, बांका, मुंगेर और लखीसराय NDA का गढ़ रहे हैं। लेकिन तभी जब नीतीश कुमार NDA में रहे। 2014 के लोकसभा चुनाव में नीतीश ने NDA से दूरी बना ली थी, तब भागलपुर और बांका दोनों सीटें RJD ने जीत ली थीं। इसी तरह 2015 के विधानसभा चुनाव में भी नीतीश कुमार NDA का हिस्सा नहीं थे, तभी NDA सभी नौ सीटें हार गया था। इस बार नीतीश और BJP साथ–साथ हैं। इसलिए NDA अपने गढ़ में वोटों को एकजुट रखने की कोशिश में लग गया है। पूरी खबर पढ़िए