मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) राजीव कुमार 18 फरवरी को रिटायर हो रहे हैं। इससे पहले नए CEC के सिलेक्शन को लेकर 17 फरवरी को बैठक बुलाई गई है। मीटिंग में पीएम मोदी, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के अलावा नेता विपक्ष राहुल गांधी भी शामिल होंगे। कमेटी की सिफारिश के बाद राष्ट्रपति अगले CEC की नियुक्ति करेंगी। अब तक सबसे सीनियर चुनाव आयुक्त (EC) को CEC के रूप में प्रमोट किया जाता रहा है। राजीव कुमार के बाद ज्ञानेश कुमार सबसे सीनियर EC हैं। उनका कार्यकाल 26 जनवरी, 2029 तक है। ऐसे में एक नया EC भी नियुक्त किया जा सकता है। सुखबीर सिंह संधू दूसरे EC हैं। दिल्ली चुनाव की घोषणा के वक्त बताया था रिटायरमेंट प्लान
बिहार/झारखंड कैडर के 1984 बैच के IAS अधिकारी राजीव कुमार मई 2022 में CEC नियुक्त हुए थे। उनके कार्यकाल में लोकसभा चुनाव से लेकर जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव हुए। इसके अलावा 2022 में राष्ट्रपति चुनाव, 2023 में कर्नाटक, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और राजस्थान चुनाव और 2025 के हालिया दिल्ली चुनाव भी शामिल हैं। जनवरी में दिल्ली चुनाव की घोषणा करते हुए उन्होंने अपना रिटायरमेंट प्लान बताया था। उन्होंने कहा था कि मैं अगले चार-पांच महीने खुद को डिटॉक्सीफाई करूंगा। हिमालय जाऊंगा, मीडिया की चकाचौंध से दूर रहूंगा। मुझे कुछ एकांत चाहिए। उन्होंने गरीब बच्चों को पढ़ाने की इच्छा भी जताई थी। कार्यकाल में पक्षपात के आरोप भी लगे
राजीव कुमार के कार्यकाल के दौरान चुनाव आयोग पर कई आरोप लगे। विपक्ष पार्टियों ने आरोप लगाए कि चुनाव आयोग सत्तारूढ़ भाजपा का पक्ष लेता है। साथ ही EVM पर सवाल उठाते हुए इसके हैक किए जा सकने का भी दावा किया था। इस पर राजीव कुमार ने कहा था कि EVM हैक नहीं की जा सकती। मशीनें सुप्रीम कोर्ट सहित न्यायिक जांच के कई टेस्ट में सफल रही हैं। वहीं, चुनाव में गड़बड़ी के हर दावे की कड़ी जांच करने के बाद ही उसे खारिज किया गया। इस टेक्नोलॉजी ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के सिद्धांतों को कायम रखा है। वोटर टर्नआउट के आंकड़े जारी करने में देरी को लेकर भी चुनाव आयोग की आलोचना हुई। वहीं, दिल्ली चुनाव से कुछ दिन पहले AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि चुनाव आयोग ने भाजपा के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। केजरीवाल ने दिल्ली चुनाव में पार्टी और उनकी हार के पीछे राजीव कुमार और केंद्र सरकार की मिलीभगत का भी आरोप लगाया था, जिसका राजीव कुमार ने खंडन किया था। EC की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर 19 फरवरी को सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट CEC और EC की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर 19 फरवरी को सुनवाई करेगा। मामले की सुनवाई 12 फरवरी को होनी थी, लेकिन केस लिस्ट नहीं हुआ था। तब वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटीश्वर सिंह की बेंच के सामने मामला उठाया गया था। प्रशांत ने कहा था कि CEC राजीव कुमार 18 फरवरी को रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में सरकार नए CEC की नियुक्ति कर सकती है, इसलिए कोर्ट इस पर जल्द सुनवाई करे। इस पर कोर्ट ने 19 फरवरी की तारीख देते हुए कहा था कि इस बीच कुछ होता है तो वह अदालत के फैसले के अधीन होगा, इसलिए चिंता की बात नहीं है। मामला मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं से जुड़ा है। अब जानिए क्या है पूरा मामला… 2 मार्च 2023: सुप्रीम कोर्ट का फैसला- सिलेक्शन पैनल में CJI को शामिल करना जरूरी
CEC और EC की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय संविधान पीठ अपने फैसले में कहा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति एक पैनल करेगा। इसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और CJI शामिल होंगे। इससे पहले सिर्फ केंद्र सरकार इनका चयन करती थी। यह कमेटी CEC और EC के नामों की सिफारिश राष्ट्रपति से करेगी। इसके बाद राष्ट्रपति मुहर लगाएंगे। तब जाकर उनकी नियुक्ति हो पाएगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह प्रोसेस तब तक लागू रहेगा, जब तक संसद चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर कोई कानून नहीं बना लेती। 21 दिसंबर 2023: चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ा नया बिल पास केंद्र सरकार CEC और EC की नियुक्ति, सेवा, शर्तें और कार्यकाल से जुड़ा नया बिल लेकर आई। इसके तहत चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति तीन सदस्यों का पैनल करेगा। इसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष का नेता और एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होंगे। CJI को इस पैनल से बाहर रखा गया। 21 दिसंबर, 2023 को शीतकालीन सत्र के दौरान यह बिल दोनों सदनों में पास हो गया। नए कानून पर विपक्ष ने आपत्ति दर्ज कराई थी
इस कानून पर विपक्षी दलों का कहना था कि सरकार सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के आदेश के खिलाफ बिल लाकर उसे कमजोर कर रही है। कांग्रेस कार्यकर्ता जया ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया कि कानून की धारा 7 और 8 स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के सिद्धांत का उल्लंघन करती है क्योंकि इससे चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए इंडिपेंडेंट मैकेनिज्म नहीं मिलता है। इस विवाद के बीच केंद्र ने मार्च, 2024 में ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू को इलेक्शन कमिश्नर नियुक्त किया था। चुनाव आयोग में कितने आयुक्त हो सकते हैं?
चुनाव आयुक्त कितने हो सकते हैं, इसे लेकर संविधान में कोई संख्या फिक्स नहीं की गई है। संविधान का अनुच्छेद 324 (2) कहता है कि चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त हो सकते हैं। यह राष्ट्रपति पर निर्भर करता है कि इनकी संख्या कितनी होगी। आजादी के बाद देश में चुनाव आयोग में सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त होते थे। 16 अक्टूबर 1989 को प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार ने दो और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की। इससे चुनाव आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय बन गया। ये नियुक्तियां 9वें आम चुनाव से पहली की गई थीं। उस वक्त कहा गया कि यह मुख्य चुनाव आयुक्त आरवीएस पेरी शास्त्री के पर कतरने के लिए की गई थीं। 2 जनवरी 1990 को वीपी सिंह सरकार ने नियमों में संशोधन किया और चुनाव आयोग को फिर से एक सदस्यीय निकाय बना दिया। एक अक्टूबर 1993 को पीवी नरसिम्हा राव सरकार ने फिर अध्यादेश के जरिए दो और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को मंजूरी दी। तब से चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ दो चुनाव आयुक्त होते हैं। ———————————————- सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… महिला कानूनों के दुरुपयोग के आरोप वाली याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट बोला- ये मुद्दे संसद में जाकर उठाएं सुप्रीम कोर्ट ने महिला-केंद्रित कानूनों से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए उसे खारिज कर दिया। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा कि आप संसद में जाकर इन सभी आधारों को उठा सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें…
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) राजीव कुमार 18 फरवरी को रिटायर हो रहे हैं। इससे पहले नए CEC के सिलेक्शन को लेकर 17 फरवरी को बैठक बुलाई गई है। मीटिंग में पीएम मोदी, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के अलावा नेता विपक्ष राहुल गांधी भी शामिल होंगे। कमेटी की सिफारिश के बाद राष्ट्रपति अगले CEC की नियुक्ति करेंगी। अब तक सबसे सीनियर चुनाव आयुक्त (EC) को CEC के रूप में प्रमोट किया जाता रहा है। राजीव कुमार के बाद ज्ञानेश कुमार सबसे सीनियर EC हैं। उनका कार्यकाल 26 जनवरी, 2029 तक है। ऐसे में एक नया EC भी नियुक्त किया जा सकता है। सुखबीर सिंह संधू दूसरे EC हैं। दिल्ली चुनाव की घोषणा के वक्त बताया था रिटायरमेंट प्लान
बिहार/झारखंड कैडर के 1984 बैच के IAS अधिकारी राजीव कुमार मई 2022 में CEC नियुक्त हुए थे। उनके कार्यकाल में लोकसभा चुनाव से लेकर जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव हुए। इसके अलावा 2022 में राष्ट्रपति चुनाव, 2023 में कर्नाटक, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और राजस्थान चुनाव और 2025 के हालिया दिल्ली चुनाव भी शामिल हैं। जनवरी में दिल्ली चुनाव की घोषणा करते हुए उन्होंने अपना रिटायरमेंट प्लान बताया था। उन्होंने कहा था कि मैं अगले चार-पांच महीने खुद को डिटॉक्सीफाई करूंगा। हिमालय जाऊंगा, मीडिया की चकाचौंध से दूर रहूंगा। मुझे कुछ एकांत चाहिए। उन्होंने गरीब बच्चों को पढ़ाने की इच्छा भी जताई थी। कार्यकाल में पक्षपात के आरोप भी लगे
राजीव कुमार के कार्यकाल के दौरान चुनाव आयोग पर कई आरोप लगे। विपक्ष पार्टियों ने आरोप लगाए कि चुनाव आयोग सत्तारूढ़ भाजपा का पक्ष लेता है। साथ ही EVM पर सवाल उठाते हुए इसके हैक किए जा सकने का भी दावा किया था। इस पर राजीव कुमार ने कहा था कि EVM हैक नहीं की जा सकती। मशीनें सुप्रीम कोर्ट सहित न्यायिक जांच के कई टेस्ट में सफल रही हैं। वहीं, चुनाव में गड़बड़ी के हर दावे की कड़ी जांच करने के बाद ही उसे खारिज किया गया। इस टेक्नोलॉजी ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के सिद्धांतों को कायम रखा है। वोटर टर्नआउट के आंकड़े जारी करने में देरी को लेकर भी चुनाव आयोग की आलोचना हुई। वहीं, दिल्ली चुनाव से कुछ दिन पहले AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि चुनाव आयोग ने भाजपा के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। केजरीवाल ने दिल्ली चुनाव में पार्टी और उनकी हार के पीछे राजीव कुमार और केंद्र सरकार की मिलीभगत का भी आरोप लगाया था, जिसका राजीव कुमार ने खंडन किया था। EC की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर 19 फरवरी को सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट CEC और EC की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर 19 फरवरी को सुनवाई करेगा। मामले की सुनवाई 12 फरवरी को होनी थी, लेकिन केस लिस्ट नहीं हुआ था। तब वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटीश्वर सिंह की बेंच के सामने मामला उठाया गया था। प्रशांत ने कहा था कि CEC राजीव कुमार 18 फरवरी को रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में सरकार नए CEC की नियुक्ति कर सकती है, इसलिए कोर्ट इस पर जल्द सुनवाई करे। इस पर कोर्ट ने 19 फरवरी की तारीख देते हुए कहा था कि इस बीच कुछ होता है तो वह अदालत के फैसले के अधीन होगा, इसलिए चिंता की बात नहीं है। मामला मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं से जुड़ा है। अब जानिए क्या है पूरा मामला… 2 मार्च 2023: सुप्रीम कोर्ट का फैसला- सिलेक्शन पैनल में CJI को शामिल करना जरूरी
CEC और EC की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय संविधान पीठ अपने फैसले में कहा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति एक पैनल करेगा। इसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और CJI शामिल होंगे। इससे पहले सिर्फ केंद्र सरकार इनका चयन करती थी। यह कमेटी CEC और EC के नामों की सिफारिश राष्ट्रपति से करेगी। इसके बाद राष्ट्रपति मुहर लगाएंगे। तब जाकर उनकी नियुक्ति हो पाएगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह प्रोसेस तब तक लागू रहेगा, जब तक संसद चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर कोई कानून नहीं बना लेती। 21 दिसंबर 2023: चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ा नया बिल पास केंद्र सरकार CEC और EC की नियुक्ति, सेवा, शर्तें और कार्यकाल से जुड़ा नया बिल लेकर आई। इसके तहत चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति तीन सदस्यों का पैनल करेगा। इसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष का नेता और एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होंगे। CJI को इस पैनल से बाहर रखा गया। 21 दिसंबर, 2023 को शीतकालीन सत्र के दौरान यह बिल दोनों सदनों में पास हो गया। नए कानून पर विपक्ष ने आपत्ति दर्ज कराई थी
इस कानून पर विपक्षी दलों का कहना था कि सरकार सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के आदेश के खिलाफ बिल लाकर उसे कमजोर कर रही है। कांग्रेस कार्यकर्ता जया ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया कि कानून की धारा 7 और 8 स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के सिद्धांत का उल्लंघन करती है क्योंकि इससे चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए इंडिपेंडेंट मैकेनिज्म नहीं मिलता है। इस विवाद के बीच केंद्र ने मार्च, 2024 में ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू को इलेक्शन कमिश्नर नियुक्त किया था। चुनाव आयोग में कितने आयुक्त हो सकते हैं?
चुनाव आयुक्त कितने हो सकते हैं, इसे लेकर संविधान में कोई संख्या फिक्स नहीं की गई है। संविधान का अनुच्छेद 324 (2) कहता है कि चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त हो सकते हैं। यह राष्ट्रपति पर निर्भर करता है कि इनकी संख्या कितनी होगी। आजादी के बाद देश में चुनाव आयोग में सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त होते थे। 16 अक्टूबर 1989 को प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार ने दो और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की। इससे चुनाव आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय बन गया। ये नियुक्तियां 9वें आम चुनाव से पहली की गई थीं। उस वक्त कहा गया कि यह मुख्य चुनाव आयुक्त आरवीएस पेरी शास्त्री के पर कतरने के लिए की गई थीं। 2 जनवरी 1990 को वीपी सिंह सरकार ने नियमों में संशोधन किया और चुनाव आयोग को फिर से एक सदस्यीय निकाय बना दिया। एक अक्टूबर 1993 को पीवी नरसिम्हा राव सरकार ने फिर अध्यादेश के जरिए दो और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को मंजूरी दी। तब से चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ दो चुनाव आयुक्त होते हैं। ———————————————- सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… महिला कानूनों के दुरुपयोग के आरोप वाली याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट बोला- ये मुद्दे संसद में जाकर उठाएं सुप्रीम कोर्ट ने महिला-केंद्रित कानूनों से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए उसे खारिज कर दिया। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा कि आप संसद में जाकर इन सभी आधारों को उठा सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें…