जम्मू के डोडा जिले में सर्चिंग ऑपरेशन के दौरान हादसे में शहीद हुए भिंड के हवलदार शैलेंद्र सिंह भदौरिया का शनिवार सुबह उनके पैतृक गांव चितावली (अटेर) में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शहीद के 6 वर्षीय बेटे भावेश भदौरिया ने मुखाग्नि दी। इससे पहले जब शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। बता दें कि डोडा में सेना का वाहन खाई में गिरने से शैलेंद्र सिंह समेत 10 जवान शहीद हुए थे। शिवानी ने शहीद पति की अंतिम विदाई के दौरान अदम्य साहस का परिचय दिया। उन्होंने पति के पार्थिव शरीर के पास रो रहे लोगों से कहा, “रोना-धोना बंद करो, कुछ नहीं होगा।” इसके बाद वह पति के पार्थिव शरीर के पास बैठ गईं और दोनों हाथों से पति के गालों को चूमते हुए बार-बार बलाएं लेती रहीं। उनका हौसला देखकर लोगों की आंखें नम हो गईं। आखिरी कॉल पर कहा था- मुझे डर लग रहा है
दैनिक भास्कर से चर्चा में पत्नी शिवानी ने बताया कि 21 जनवरी की रात उनकी शैलेंद्र से आखिरी बात हुई थी। उस रात शैलेंद्र ने एक सपना देखा था। उन्होंने बताया, “मैंने सपने में देखा कि दोनों बेटियों को बहुत पढ़ाया, पैसा खर्च किया, लेकिन वे सफल नहीं हो पाईं। घरवाले शादी को लेकर चिंतित हैं। पैसे नहीं बचे हैं।” शिवानी ने उन्हें ढांढस बंधाते हुए कहा था, “चिंता मत करो, हमारे पास प्लॉट है। रिटायरमेंट के बाद उसे बेचकर बेटियों की शादी कर देंगे।” इस पर शैलेंद्र ने कहा था- “मुझे बहुत डर लग रहा है। कुछ होने वाला है।” इसके बाद उनके शहीद होने की खबर आई। पिता बोले- दादा भी 1972 में शहीद हुए थे
शहीद के पिता हनुमत सिंह ने गर्व और नम आंखों से कहा, “मेरे तीन पुत्र हैं। तीनों ही आर्मी में हैं। शैलेंद्र मेरा दूसरा बेटा था। मुझे अपने बेटे पर गर्व है। उसने देश की सेवा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। ऐसे शूरवीर बेटे पर मैं कुर्बान हूं।” उन्होंने बताया कि शैलेंद्र के दादा भी सेना में थे। वर्ष 1972 में शहीद हुए थे। आज मेरा बेटा भी शेर की तरह शहीद हुआ है। तीनों भाई सेना में, बड़े भाई बोले- फौजी होने पर गर्व
शहीद के बड़े भाई देव सिंह ने बताया कि हम तीन भाई हैं। तीनों ही सेना में रहे हैं। मैं रिटायर हो चुका हूं। एक फौजी होने के नाते गर्व भी है कि भाई ने देश रक्षा में प्राण न्योछावर किए। अंतिम सलामी देने पहुंचे ब्रिगेडियर अमित वर्मा ने कहा कि पूरा आर्मी परिवार शहीद के परिजनों के साथ खड़ा है। परिवार को मिलने वाली सभी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। बेटे को बिलखता देख रो पड़े लोग
शहीद की अंतिम यात्रा के दौरान लोगों ने फूलों की वर्षा की और शैलेंद्र सिंह भदौरिया अमर रहें के नारे लगाए। शमशान घाट पर हजारों की भीड़ के बीच जब मासूम भावेश ने पिता का पार्थिव शरीर देखा तो वह फूट-फूटकर रोने लगा। मुखाग्नि देने से पहले वह पिता से लिपट गया। इस मौके पर मेजर अक्षय कुमार, एसडीएम शिवानी अग्रवाल और तहसीलदार जगन सिंह कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
जम्मू के डोडा जिले में सर्चिंग ऑपरेशन के दौरान हादसे में शहीद हुए भिंड के हवलदार शैलेंद्र सिंह भदौरिया का शनिवार सुबह उनके पैतृक गांव चितावली (अटेर) में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शहीद के 6 वर्षीय बेटे भावेश भदौरिया ने मुखाग्नि दी। इससे पहले जब शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। बता दें कि डोडा में सेना का वाहन खाई में गिरने से शैलेंद्र सिंह समेत 10 जवान शहीद हुए थे। शिवानी ने शहीद पति की अंतिम विदाई के दौरान अदम्य साहस का परिचय दिया। उन्होंने पति के पार्थिव शरीर के पास रो रहे लोगों से कहा, “रोना-धोना बंद करो, कुछ नहीं होगा।” इसके बाद वह पति के पार्थिव शरीर के पास बैठ गईं और दोनों हाथों से पति के गालों को चूमते हुए बार-बार बलाएं लेती रहीं। उनका हौसला देखकर लोगों की आंखें नम हो गईं। आखिरी कॉल पर कहा था- मुझे डर लग रहा है
दैनिक भास्कर से चर्चा में पत्नी शिवानी ने बताया कि 21 जनवरी की रात उनकी शैलेंद्र से आखिरी बात हुई थी। उस रात शैलेंद्र ने एक सपना देखा था। उन्होंने बताया, “मैंने सपने में देखा कि दोनों बेटियों को बहुत पढ़ाया, पैसा खर्च किया, लेकिन वे सफल नहीं हो पाईं। घरवाले शादी को लेकर चिंतित हैं। पैसे नहीं बचे हैं।” शिवानी ने उन्हें ढांढस बंधाते हुए कहा था, “चिंता मत करो, हमारे पास प्लॉट है। रिटायरमेंट के बाद उसे बेचकर बेटियों की शादी कर देंगे।” इस पर शैलेंद्र ने कहा था- “मुझे बहुत डर लग रहा है। कुछ होने वाला है।” इसके बाद उनके शहीद होने की खबर आई। पिता बोले- दादा भी 1972 में शहीद हुए थे
शहीद के पिता हनुमत सिंह ने गर्व और नम आंखों से कहा, “मेरे तीन पुत्र हैं। तीनों ही आर्मी में हैं। शैलेंद्र मेरा दूसरा बेटा था। मुझे अपने बेटे पर गर्व है। उसने देश की सेवा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। ऐसे शूरवीर बेटे पर मैं कुर्बान हूं।” उन्होंने बताया कि शैलेंद्र के दादा भी सेना में थे। वर्ष 1972 में शहीद हुए थे। आज मेरा बेटा भी शेर की तरह शहीद हुआ है। तीनों भाई सेना में, बड़े भाई बोले- फौजी होने पर गर्व
शहीद के बड़े भाई देव सिंह ने बताया कि हम तीन भाई हैं। तीनों ही सेना में रहे हैं। मैं रिटायर हो चुका हूं। एक फौजी होने के नाते गर्व भी है कि भाई ने देश रक्षा में प्राण न्योछावर किए। अंतिम सलामी देने पहुंचे ब्रिगेडियर अमित वर्मा ने कहा कि पूरा आर्मी परिवार शहीद के परिजनों के साथ खड़ा है। परिवार को मिलने वाली सभी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। बेटे को बिलखता देख रो पड़े लोग
शहीद की अंतिम यात्रा के दौरान लोगों ने फूलों की वर्षा की और शैलेंद्र सिंह भदौरिया अमर रहें के नारे लगाए। शमशान घाट पर हजारों की भीड़ के बीच जब मासूम भावेश ने पिता का पार्थिव शरीर देखा तो वह फूट-फूटकर रोने लगा। मुखाग्नि देने से पहले वह पिता से लिपट गया। इस मौके पर मेजर अक्षय कुमार, एसडीएम शिवानी अग्रवाल और तहसीलदार जगन सिंह कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।