इंडियन नेवी का 2000 साल पुरानी पाल विधि से निर्मित जहाज INSV कौंडिन्य बुधवार को 18 दिनों की यात्रा पूरी कर गुजरात से ओमान पहुंच गया। कौंडिन्य ने 29 दिसंबर को गुजरात के पोरबंदर से यात्रा शुरू की थी और 14 जनवरी को ओमान के मस्कट पहुंचा। इस यात्रा का मकसद भारत की प्राचीन समुद्री विरासत को फिर से पुनर्जीवित करना है। यह जहाज 4थी-5वीं शताब्दी के भारतीय जहाजों के मॉडल पर बना है। बिना कील या धातु के लकड़ी के तख्तों को रस्सियों से सिलकर तैयार किया गया। इस पर कोई कमरा नहीं है। क्रू मेंबर्स स्लीपिंग बैग में सोते थे। वहां बिजली की भी व्यवस्था नहीं थी। अन्य जहाजों को चेतावनी देने के लिए क्रू के पास सिर्फ हेडलैंप्स थे, जो अपने सिर पर लगाकर रखते थे। क्रू मेंबर्स ने 18 दिन खिचड़ी और अचार खाकर बिताए। क्रू मेंबर बोले- गुड मॉर्निंग इंडिया, मस्कट दिख गया प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शिप के ओमान पहुंचने की जानकारी दी। उन्होंने स्किपर कमांडर विकास श्योराण और प्रोजेक्ट हेड हेमंत कुमार के साथ तस्वीर पोस्ट करते हुए X पर लिखा- इस पल का आनंद ले रहे हैं… हमने कर दिखाया। जहाज के एक अन्य क्रू सदस्य हेमंत ने पोस्ट किया- लैंड अहॉय! मस्कट दिख गया। गुड मॉर्निंग इंडिया, गुड मॉर्निंग ओमान। समुद्री मार्ग से बिना रुके अकेले विश्व का चक्कर लगाने वाले पहले भारतीय, रिटायर्ड नौसेना कमांडर अभिलाष टॉमी ने भी कौंडिन्य की टीम को बधाई दी। जानते हैं इस जहाज के बारे में, डिजाइन अजंता गुफा की एक पेंटिंग पर 18 दिनों जहाज पर कैसे बिताए, क्रू ने तस्वीरों के जरिए दिखाया —————— नौसेना से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… नौसेना को पनडुब्बी मारने वाला आधुनिक हथियार मिलेगा:सेना को नई राइफल; ₹4,666 करोड़ खर्च होंगे रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना और नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए 4,666 करोड़ रुपए का रक्षा समझौते किया। इसके तहत सेना को 4.25 लाख से ज्यादा नई बैटल कार्बाइन राइफल मिलेंगी। इसके साथ ही नौसेना के लिए पनडुब्बी मारने वाले 48 आधुनिक हैवीवेट टॉरपीडो भी खरीदे जाएंगे। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक 2,770 करोड़ रुपए के क्लोज क्वार्टर बैटल कार्बाइन राइफल और उनसे जुड़े उपकरण खरीदे जाएंगे। पूरी खबर पढ़ें…
इंडियन नेवी का 2000 साल पुरानी पाल विधि से निर्मित जहाज INSV कौंडिन्य बुधवार को 18 दिनों की यात्रा पूरी कर गुजरात से ओमान पहुंच गया। कौंडिन्य ने 29 दिसंबर को गुजरात के पोरबंदर से यात्रा शुरू की थी और 14 जनवरी को ओमान के मस्कट पहुंचा। इस यात्रा का मकसद भारत की प्राचीन समुद्री विरासत को फिर से पुनर्जीवित करना है। यह जहाज 4थी-5वीं शताब्दी के भारतीय जहाजों के मॉडल पर बना है। बिना कील या धातु के लकड़ी के तख्तों को रस्सियों से सिलकर तैयार किया गया। इस पर कोई कमरा नहीं है। क्रू मेंबर्स स्लीपिंग बैग में सोते थे। वहां बिजली की भी व्यवस्था नहीं थी। अन्य जहाजों को चेतावनी देने के लिए क्रू के पास सिर्फ हेडलैंप्स थे, जो अपने सिर पर लगाकर रखते थे। क्रू मेंबर्स ने 18 दिन खिचड़ी और अचार खाकर बिताए। क्रू मेंबर बोले- गुड मॉर्निंग इंडिया, मस्कट दिख गया प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शिप के ओमान पहुंचने की जानकारी दी। उन्होंने स्किपर कमांडर विकास श्योराण और प्रोजेक्ट हेड हेमंत कुमार के साथ तस्वीर पोस्ट करते हुए X पर लिखा- इस पल का आनंद ले रहे हैं… हमने कर दिखाया। जहाज के एक अन्य क्रू सदस्य हेमंत ने पोस्ट किया- लैंड अहॉय! मस्कट दिख गया। गुड मॉर्निंग इंडिया, गुड मॉर्निंग ओमान। समुद्री मार्ग से बिना रुके अकेले विश्व का चक्कर लगाने वाले पहले भारतीय, रिटायर्ड नौसेना कमांडर अभिलाष टॉमी ने भी कौंडिन्य की टीम को बधाई दी। जानते हैं इस जहाज के बारे में, डिजाइन अजंता गुफा की एक पेंटिंग पर 18 दिनों जहाज पर कैसे बिताए, क्रू ने तस्वीरों के जरिए दिखाया —————— नौसेना से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… नौसेना को पनडुब्बी मारने वाला आधुनिक हथियार मिलेगा:सेना को नई राइफल; ₹4,666 करोड़ खर्च होंगे रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना और नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए 4,666 करोड़ रुपए का रक्षा समझौते किया। इसके तहत सेना को 4.25 लाख से ज्यादा नई बैटल कार्बाइन राइफल मिलेंगी। इसके साथ ही नौसेना के लिए पनडुब्बी मारने वाले 48 आधुनिक हैवीवेट टॉरपीडो भी खरीदे जाएंगे। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक 2,770 करोड़ रुपए के क्लोज क्वार्टर बैटल कार्बाइन राइफल और उनसे जुड़े उपकरण खरीदे जाएंगे। पूरी खबर पढ़ें…