भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने बुधवार को देश में नेशनल ज्यूडिशियल पॉलिसी की वकालत की। ताकि देशभर की हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में दिए जाने वाले फैसलों में समानता दिखे। CJI ने इसे एक उदाहरण देकर समझाया। उन्होंने कहा कि न्याय ऐसे इंस्ट्रूमेंट्स के सेट जैसा नहीं हो सकता जिसे अन्य इंस्ट्रूमेंट्स के बिना बजाने से सुरीली आवाज निकले। लेकिन जब साथ में बजाया जाए तो उसमें बेसुरी आवाज निकल आए। हमें एक ऐसे रिदम की जरूरत है जिसमें आवाज और भाषा भले अलग हो जाए लेकिन संवैधानिक सुर एक जैसा निकलना चाहिए। सूर्यकांत ने ये बातें सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की तरफ से आयोजित संविधान दिवस समारोह में कहीं। जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, सुप्रीम कोर्ट के सबसे सीनियर जज जस्टिस विक्रम नाथ, लॉ मिनिस्टर अर्जुन राम मेघवाल और अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी मौजूद थे। विदेशी चीफ जजों ने क्या कहा… सुप्रीम कोर्ट के अलावा संसद में भी मनाया गया संविधान दिवस संसद के सेंट्रल हॉल में बुधवार को 150 वां संविधान दिवस मनाया गया। इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान को 9 नई भाषाओं मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, ओडिया और असमिया में जारी किया। राष्ट्रपति ने कहा- संसद ने तीन तलाक जैसी सामाजिक बुराई को खत्म कर महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। GST आजादी के बाद सबसे बड़ा टैक्स सुधार है, जिसने देश की आर्थिक एकता को मजबूत किया है। राष्ट्रपति ने बताया- अनुच्छेद 370 हटाने से देश की राजनीतिक एकता में आ रही बाधा दूर हुई। नारी शक्ति बंधन कानून महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास की नई शुरुआत करेगा। इस दौरान उन्होंने संविधान की प्रस्तावना भी पढ़ी। दरअसल 26 नवंबर 1949 को भारत का संविधान बनकर तैयार हुआ था। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिडला, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और दोनों सदनों के सांसद शामिल रहे। 26 नवंबर 1949 को लागू क्यों नहीं हुआ था संविधान? संविधान सभा ने 2 साल 11 महीने और 17 दिन की कड़ी मेहनत के बाद 26 नवंबर 1949 को संविधान एडॉप्ट किया था। हालांकि, कानूनी रूप से इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया, जिस दिन हम सब रिपब्लिक डे मनाते हैं। भारत के संविधान की मूल अंग्रेजी कॉपी में 1 लाख 17 हजार 369 शब्द हैं। जिसमें 444 आर्टिकल, 22 भाग और 12 अनुसूचियां हैं। 26 जनवरी, 1930 को कांग्रेस ने देश की पूर्ण आजादी का नारा दिया था। इसी की याद में संविधान को लागू करने के लिए 26 जनवरी, 1950 तक इंतजार किया गया। 1929 में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में पहली बार पूर्ण स्वराज की शपथ ली गई थी। उस अधिवेशन में अंग्रेज सरकार से मांग की गई थी कि भारत को 26 जनवरी, 1930 तक संप्रभु दर्जा दे दिया जाए। फिर 26 जनवरी, 1930 को पहली बार पूर्ण स्वराज या स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था। इसके बाद 15 अगस्त, 1947 तक यानी अगले 17 सालों तक 26 जनवरी को ही स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता रहा। इस दिन के महत्व की वजह से 1950 में 26 जनवरी को देश का संविधान लागू किया गया और इसे गणतंत्र दिवस घोषित किया गया। भारतीय संविधान से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… भास्कर एक्सप्लेनर- संविधान लिखने में 432 निब घिस गईं: मूल कॉपी का वजन 13 किलो, नाइट्रोजन चैंबर में क्यों रखा गया है क्या आप जानते हैं कि हमारा संविधान किसने लिखा? कुछ लोगों के मन में डॉ. भीमराव अंबेडकर का नाम आएगा, जबकि इस इस सवाल का सही जवाब प्रेम बिहारी नारायण रायजादा हैं। डॉ. अंबेडकर को संविधान सभा की ड्राफ्टिंग सभा का अध्यक्ष होने के नाते संविधान निर्माता होने का श्रेय दिया जाता है, मगर प्रेम बिहारी वे शख्स हैं जिन्होंने अपने हाथ से अंग्रेजी में संविधान की मूल कॉपी यानी पांडुलिपि लिखी थी। इस काम में उन्हें 6 महीने लगे और कुल 432 निब घिस गईं। पूरी खबर पढ़ें…
भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने बुधवार को देश में नेशनल ज्यूडिशियल पॉलिसी की वकालत की। ताकि देशभर की हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में दिए जाने वाले फैसलों में समानता दिखे। CJI ने इसे एक उदाहरण देकर समझाया। उन्होंने कहा कि न्याय ऐसे इंस्ट्रूमेंट्स के सेट जैसा नहीं हो सकता जिसे अन्य इंस्ट्रूमेंट्स के बिना बजाने से सुरीली आवाज निकले। लेकिन जब साथ में बजाया जाए तो उसमें बेसुरी आवाज निकल आए। हमें एक ऐसे रिदम की जरूरत है जिसमें आवाज और भाषा भले अलग हो जाए लेकिन संवैधानिक सुर एक जैसा निकलना चाहिए। सूर्यकांत ने ये बातें सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की तरफ से आयोजित संविधान दिवस समारोह में कहीं। जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, सुप्रीम कोर्ट के सबसे सीनियर जज जस्टिस विक्रम नाथ, लॉ मिनिस्टर अर्जुन राम मेघवाल और अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी मौजूद थे। विदेशी चीफ जजों ने क्या कहा… सुप्रीम कोर्ट के अलावा संसद में भी मनाया गया संविधान दिवस संसद के सेंट्रल हॉल में बुधवार को 150 वां संविधान दिवस मनाया गया। इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान को 9 नई भाषाओं मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, ओडिया और असमिया में जारी किया। राष्ट्रपति ने कहा- संसद ने तीन तलाक जैसी सामाजिक बुराई को खत्म कर महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। GST आजादी के बाद सबसे बड़ा टैक्स सुधार है, जिसने देश की आर्थिक एकता को मजबूत किया है। राष्ट्रपति ने बताया- अनुच्छेद 370 हटाने से देश की राजनीतिक एकता में आ रही बाधा दूर हुई। नारी शक्ति बंधन कानून महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास की नई शुरुआत करेगा। इस दौरान उन्होंने संविधान की प्रस्तावना भी पढ़ी। दरअसल 26 नवंबर 1949 को भारत का संविधान बनकर तैयार हुआ था। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिडला, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और दोनों सदनों के सांसद शामिल रहे। 26 नवंबर 1949 को लागू क्यों नहीं हुआ था संविधान? संविधान सभा ने 2 साल 11 महीने और 17 दिन की कड़ी मेहनत के बाद 26 नवंबर 1949 को संविधान एडॉप्ट किया था। हालांकि, कानूनी रूप से इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया, जिस दिन हम सब रिपब्लिक डे मनाते हैं। भारत के संविधान की मूल अंग्रेजी कॉपी में 1 लाख 17 हजार 369 शब्द हैं। जिसमें 444 आर्टिकल, 22 भाग और 12 अनुसूचियां हैं। 26 जनवरी, 1930 को कांग्रेस ने देश की पूर्ण आजादी का नारा दिया था। इसी की याद में संविधान को लागू करने के लिए 26 जनवरी, 1950 तक इंतजार किया गया। 1929 में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में पहली बार पूर्ण स्वराज की शपथ ली गई थी। उस अधिवेशन में अंग्रेज सरकार से मांग की गई थी कि भारत को 26 जनवरी, 1930 तक संप्रभु दर्जा दे दिया जाए। फिर 26 जनवरी, 1930 को पहली बार पूर्ण स्वराज या स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था। इसके बाद 15 अगस्त, 1947 तक यानी अगले 17 सालों तक 26 जनवरी को ही स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता रहा। इस दिन के महत्व की वजह से 1950 में 26 जनवरी को देश का संविधान लागू किया गया और इसे गणतंत्र दिवस घोषित किया गया। भारतीय संविधान से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… भास्कर एक्सप्लेनर- संविधान लिखने में 432 निब घिस गईं: मूल कॉपी का वजन 13 किलो, नाइट्रोजन चैंबर में क्यों रखा गया है क्या आप जानते हैं कि हमारा संविधान किसने लिखा? कुछ लोगों के मन में डॉ. भीमराव अंबेडकर का नाम आएगा, जबकि इस इस सवाल का सही जवाब प्रेम बिहारी नारायण रायजादा हैं। डॉ. अंबेडकर को संविधान सभा की ड्राफ्टिंग सभा का अध्यक्ष होने के नाते संविधान निर्माता होने का श्रेय दिया जाता है, मगर प्रेम बिहारी वे शख्स हैं जिन्होंने अपने हाथ से अंग्रेजी में संविधान की मूल कॉपी यानी पांडुलिपि लिखी थी। इस काम में उन्हें 6 महीने लगे और कुल 432 निब घिस गईं। पूरी खबर पढ़ें…