मध्य प्रदेश के सीहोर स्थित वीआईटी (वेल्लोर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) यूनिवर्सिटी में छात्रों का उग्र प्रदर्शन बुधवार को भी जारी रहा। सुबह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग में कुछ छात्रों ने फिर आग लगा दी। हालात बिगड़ते देख कैंपस में पैरामिलिट्री फोर्स तैनात कर दी गई। स्वास्थ्य विभाग की टीम को भी कैंपस में बुलाया गया। टीम ने मेडिकल टेस्ट के लिए सभी छात्रों के ब्लड सैंपल लिए। छात्रों ने बताया- यूनिवर्सिटी में भोजन और पानी की खराब क्वालिटी के कारण हमारे कई साथियों को पीलिया हो गया है। 100 छात्र अस्पतालों में भर्ती हैं। कुछ की मौत भी हुई है। हमने जब विरोध में आवाज उठाई तो गार्ड ने हमारे साथ मारपीट की। इसका वीडियो भी है। मारपीट की घटना के बाद मंगलवार रात 4 हजार छात्रों ने कैंपस में बस और कारों में आग लगा दी। 5 थानों से पुलिस बल बुलाना पड़ा। यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने 30 नवंबर तक अवकाश घोषित कर दिया। इसके बाद स्टूडेंट्स यूनिवर्सिटी छोड़कर चले गए। डीन बोले- प्रोफेसर दास की मौत का वीआईटी की घटना से संबंध नहीं
वीआईटी के डीन सुरेश एम ने एक मामले में स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने बताया कि प्रोफेसर संग्राम केसरी दास (उम्र 43 वर्ष) की मौत सीहोर स्थित उनके मकान में हुई। वह वहां किराए से रहते थे। डीन ने कहा- प्रोफेसर दास की मौत का वीआईटी में कल रात हुई घटना से कोई संबंध नहीं है। यूनिवर्सिटी में हंगामे की तस्वीरें… प्रभारी मंत्री ने कलेक्टर और यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट से की बात वीआईटी कॉलेज में छात्रों के प्रदर्शन के मामले में जिले की प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर ने संज्ञान लिया है। उन्होंने कलेक्टर बालागुरु के, एसपी दीपक कुमार शुक्ला तथा कॉलेज प्रबंधन से जानकारी ली। मंत्री गौर ने शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के साथ ही छात्रों का मेडिकल टेस्ट कराने को कहा। मंत्री ने कॉलेज प्रबंधन को विद्यार्थियों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के निर्देश देते हुए संस्थान में कुछ दिनों का अवकाश घोषित करने को भी कहा, ताकि छात्र आराम कर सकें और स्थिति सामान्य होने के साथ ही वापस लौटने पर सहज महसूस कर सकें। मंत्री ने कहा- कॉलेज के मेस एवं भोजन व्यवस्था का तत्काल परीक्षण कर उसे दुरुस्त किया जाए तथा भोजन की क्वालिटी तय की जाए। सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को सुधार कर सुचारु किया जाए, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा ना हों। अभाविप ने उच्च शिक्षा मंत्री एवं विश्वविद्यालय आयोग को सौंपा ज्ञापन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने इस गंभीर स्थिति को संज्ञान में लेते हुए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार तथा निजी विश्वविद्यालय आयोग को ज्ञापन सौंपकर त्वरित हस्तक्षेप की मांग की है। अभाविप ने बताया कि छात्रों द्वारा शिकायत दर्ज कराने के प्रयासों के बाद भी मामलों को दबाने और दबाव बनाने जैसे आरोप सामने आए हैं, जिससे असंतोष और बढ़ गया है। परिषद ने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ा मामला किसी भी स्थिति में उपेक्षित नहीं किया जा सकता। अभाविप की प्रमुख मांगें अभाविप ने कहा कि हजारों विद्यार्थियों का भविष्य संस्थान से जुड़ा है, इसलिए सरकार को शीघ्र और ठोस कदम उठाने चाहिए, जिससे परिसर का वातावरण सामान्य हो सके और विद्यार्थियों में विश्वास बहाल किया जा सके।
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मध्य प्रदेश के सीहोर स्थित वीआईटी (वेल्लोर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) यूनिवर्सिटी में छात्रों का उग्र प्रदर्शन बुधवार को भी जारी रहा। सुबह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग में कुछ छात्रों ने फिर आग लगा दी। हालात बिगड़ते देख कैंपस में पैरामिलिट्री फोर्स तैनात कर दी गई। स्वास्थ्य विभाग की टीम को भी कैंपस में बुलाया गया। टीम ने मेडिकल टेस्ट के लिए सभी छात्रों के ब्लड सैंपल लिए। छात्रों ने बताया- यूनिवर्सिटी में भोजन और पानी की खराब क्वालिटी के कारण हमारे कई साथियों को पीलिया हो गया है। 100 छात्र अस्पतालों में भर्ती हैं। कुछ की मौत भी हुई है। हमने जब विरोध में आवाज उठाई तो गार्ड ने हमारे साथ मारपीट की। इसका वीडियो भी है। मारपीट की घटना के बाद मंगलवार रात 4 हजार छात्रों ने कैंपस में बस और कारों में आग लगा दी। 5 थानों से पुलिस बल बुलाना पड़ा। यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने 30 नवंबर तक अवकाश घोषित कर दिया। इसके बाद स्टूडेंट्स यूनिवर्सिटी छोड़कर चले गए। डीन बोले- प्रोफेसर दास की मौत का वीआईटी की घटना से संबंध नहीं
वीआईटी के डीन सुरेश एम ने एक मामले में स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने बताया कि प्रोफेसर संग्राम केसरी दास (उम्र 43 वर्ष) की मौत सीहोर स्थित उनके मकान में हुई। वह वहां किराए से रहते थे। डीन ने कहा- प्रोफेसर दास की मौत का वीआईटी में कल रात हुई घटना से कोई संबंध नहीं है। यूनिवर्सिटी में हंगामे की तस्वीरें… प्रभारी मंत्री ने कलेक्टर और यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट से की बात वीआईटी कॉलेज में छात्रों के प्रदर्शन के मामले में जिले की प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर ने संज्ञान लिया है। उन्होंने कलेक्टर बालागुरु के, एसपी दीपक कुमार शुक्ला तथा कॉलेज प्रबंधन से जानकारी ली। मंत्री गौर ने शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के साथ ही छात्रों का मेडिकल टेस्ट कराने को कहा। मंत्री ने कॉलेज प्रबंधन को विद्यार्थियों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के निर्देश देते हुए संस्थान में कुछ दिनों का अवकाश घोषित करने को भी कहा, ताकि छात्र आराम कर सकें और स्थिति सामान्य होने के साथ ही वापस लौटने पर सहज महसूस कर सकें। मंत्री ने कहा- कॉलेज के मेस एवं भोजन व्यवस्था का तत्काल परीक्षण कर उसे दुरुस्त किया जाए तथा भोजन की क्वालिटी तय की जाए। सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को सुधार कर सुचारु किया जाए, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा ना हों। अभाविप ने उच्च शिक्षा मंत्री एवं विश्वविद्यालय आयोग को सौंपा ज्ञापन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने इस गंभीर स्थिति को संज्ञान में लेते हुए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार तथा निजी विश्वविद्यालय आयोग को ज्ञापन सौंपकर त्वरित हस्तक्षेप की मांग की है। अभाविप ने बताया कि छात्रों द्वारा शिकायत दर्ज कराने के प्रयासों के बाद भी मामलों को दबाने और दबाव बनाने जैसे आरोप सामने आए हैं, जिससे असंतोष और बढ़ गया है। परिषद ने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ा मामला किसी भी स्थिति में उपेक्षित नहीं किया जा सकता। अभाविप की प्रमुख मांगें अभाविप ने कहा कि हजारों विद्यार्थियों का भविष्य संस्थान से जुड़ा है, इसलिए सरकार को शीघ्र और ठोस कदम उठाने चाहिए, जिससे परिसर का वातावरण सामान्य हो सके और विद्यार्थियों में विश्वास बहाल किया जा सके।
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