दिल्ली ब्लास्ट के बाद फरीदाबाद के मुस्लिम बहुल गांव धौज में बनी अल फलाह यूनिवर्सिटी टेरर मॉड्यूल से जुड़े डॉक्टरों की गिरफ्तारी के बाद जांच के घेरे में है। केंद्र सरकार ने इन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) को यूनिवर्सिटी के फंडिंंग की जांच के आदेश दे दिए हैं। अब तक इस यूनिवर्सिटी के 3 डॉक्टर डॉ. मुजम्मिल शकील, डॉ. शाहीन सईद और डॉ. उमर नबी का नाम दिल्ली धमाके में आ चुका है। दिल्ली धमाके में डॉ. उमर की मौत हो चुकी है। डॉ. निसार-उल-हसन, जो मेडिसिन डिपार्टमेंट में प्रोफेसर थे, इन्हें 2023 में JK LG द्वारा टेरर लिंक्स के लिए बर्खास्त किया गया था, फिर भी यहां भर्ती हो गए। दिल्ली, हरियाणा पुलिस के अलावा अलग-अलग जांच एजेंसियां यूनिवर्सिटी से जुड़े 50 लोगों से ज्यादा पूछताछ कर चुकी है। अब इसकी फंडिंग, प्रबंधन और कैंपस कल्चर पर सवाल खड़े हो गए हैं। अल-फलाह विवि, उपकुलपति, प्रो भूपिंदर कौर आनंद ने कहा हमारे दो डॉक्टरों को जांच एजेंसियों ने अरेस्ट किया है। हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि यूनिवर्सिटी का इन व्यक्तियों से कोई संबंध नहीं है, सिवाय इसके कि वे यूनिवर्सिटी में कार्यरत थे। यूनिवर्सिटी कैसे चलती, कितने स्टूडेंट्स कुछ भी आधिकारिक नहीं 1. यूनिवर्सिटी को मान्यता विवादों में आने के यूनिवर्सिटी का वेबसाइट बंद है। पहले अल फलाह को NAAC+ से मान्यता प्राप्त दिखाया जाता था। लेकिन गुरुवार को देश के कॉलेजों और यूनिवर्सिटी की गुणवत्ता का मूल्यांकन करना और उन्हें ग्रेड देने वाली संस्था नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रीडिएशन कमीशन ने झूठे मान्यता दावे के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। 2. कितने स्टूडेंट्स यूनिवर्सिटी में कितने स्टूडेंट्स पढ़ते हैं। इसका आधिकारिक डेटा नहीं है। हालांकि, 4 कॉलेज चल रहे हैं। 800+ बेड का अस्पताल है। यूनिवर्सिटी UG, PG, डिप्लोमा और PhD कोर्स चलाती है। मेडिकल में MBBS (200 सीटें), MD/MS (50 सीटें), BDS, B.Pharm; इंजीनियरिंग में B.Tech (कंप्यूटर साइंस, मैकेनिकल, सिविल); सोशल साइंस में BA (इंग्लिश, उर्दू, हिस्ट्री, जर्नलिज्म)। 2. फंडिंग और दान यूनिवर्सिटी को अरब देशों से सालाना दान मिलता है। विदेशी फंडरेजर साल में एक बार कैंपस आते हैं। फंडिंग के दुरुपयोग के संदेह के चलते NIA अब विदेशी दान के स्रोतों की जांच कर रही है। 3. रिकॉर्ड्स गायब 10 सालों के फाइनेंशियल फाइलिंग्स और FCRA रिकॉर्ड्स सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। FCRA पोर्टल पर ट्रस्ट का डेटा नहीं मिला। 4. कैंपस कल्चर आरोप है कि कैंपस में इस्लामिक स्टूडेंट्स ग्रुप्स सक्रिय हैं। ये धार्मिक सेमिनार आयोजित करते हैं। अल फलाह स्कॉलरशिप स्कीम विदेशी स्टूडेंट़्स को फाइनेंशियल स्पोर्ट भी देती है। सेमिनारों में स्पीकर्स मुख्य रूप से शिक्षा और इस्लामिक स्टडीज पर होते हैं,। राज्य स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल की आखिरी जांच 2019 में की। संस्थापक MP छोड़कर फरीदाबाद आया, यहीं कॉलेज खोला अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के फाउंडर और चांसलर जवाद अहमद सिद्दीकी हैं। वे अल फलाह इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर भी हैं। ट्रस्टी में उनके परिवार के सदस्य जैसे सुफयान अहमद सिद्दीकी और फरहीन बेग शामिल हैं, जो यूनिवर्सिटी में टीचर हैं। सिद्दीकी की डिजिटल प्रोफाइल सीमित है, लेकिन पुराने फ्रॉड और लीगल केसेज से नाम जुड़ा है। पढ़ें पूरी खबर विवादित बैकग्राउंड वाले फैकल्टी की भर्ती अब अल फलाह यूनिवर्सिटी के बारे में जानिए
दिल्ली ब्लास्ट के बाद फरीदाबाद के मुस्लिम बहुल गांव धौज में बनी अल फलाह यूनिवर्सिटी टेरर मॉड्यूल से जुड़े डॉक्टरों की गिरफ्तारी के बाद जांच के घेरे में है। केंद्र सरकार ने इन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) को यूनिवर्सिटी के फंडिंंग की जांच के आदेश दे दिए हैं। अब तक इस यूनिवर्सिटी के 3 डॉक्टर डॉ. मुजम्मिल शकील, डॉ. शाहीन सईद और डॉ. उमर नबी का नाम दिल्ली धमाके में आ चुका है। दिल्ली धमाके में डॉ. उमर की मौत हो चुकी है। डॉ. निसार-उल-हसन, जो मेडिसिन डिपार्टमेंट में प्रोफेसर थे, इन्हें 2023 में JK LG द्वारा टेरर लिंक्स के लिए बर्खास्त किया गया था, फिर भी यहां भर्ती हो गए। दिल्ली, हरियाणा पुलिस के अलावा अलग-अलग जांच एजेंसियां यूनिवर्सिटी से जुड़े 50 लोगों से ज्यादा पूछताछ कर चुकी है। अब इसकी फंडिंग, प्रबंधन और कैंपस कल्चर पर सवाल खड़े हो गए हैं। अल-फलाह विवि, उपकुलपति, प्रो भूपिंदर कौर आनंद ने कहा हमारे दो डॉक्टरों को जांच एजेंसियों ने अरेस्ट किया है। हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि यूनिवर्सिटी का इन व्यक्तियों से कोई संबंध नहीं है, सिवाय इसके कि वे यूनिवर्सिटी में कार्यरत थे। यूनिवर्सिटी कैसे चलती, कितने स्टूडेंट्स कुछ भी आधिकारिक नहीं 1. यूनिवर्सिटी को मान्यता विवादों में आने के यूनिवर्सिटी का वेबसाइट बंद है। पहले अल फलाह को NAAC+ से मान्यता प्राप्त दिखाया जाता था। लेकिन गुरुवार को देश के कॉलेजों और यूनिवर्सिटी की गुणवत्ता का मूल्यांकन करना और उन्हें ग्रेड देने वाली संस्था नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रीडिएशन कमीशन ने झूठे मान्यता दावे के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। 2. कितने स्टूडेंट्स यूनिवर्सिटी में कितने स्टूडेंट्स पढ़ते हैं। इसका आधिकारिक डेटा नहीं है। हालांकि, 4 कॉलेज चल रहे हैं। 800+ बेड का अस्पताल है। यूनिवर्सिटी UG, PG, डिप्लोमा और PhD कोर्स चलाती है। मेडिकल में MBBS (200 सीटें), MD/MS (50 सीटें), BDS, B.Pharm; इंजीनियरिंग में B.Tech (कंप्यूटर साइंस, मैकेनिकल, सिविल); सोशल साइंस में BA (इंग्लिश, उर्दू, हिस्ट्री, जर्नलिज्म)। 2. फंडिंग और दान यूनिवर्सिटी को अरब देशों से सालाना दान मिलता है। विदेशी फंडरेजर साल में एक बार कैंपस आते हैं। फंडिंग के दुरुपयोग के संदेह के चलते NIA अब विदेशी दान के स्रोतों की जांच कर रही है। 3. रिकॉर्ड्स गायब 10 सालों के फाइनेंशियल फाइलिंग्स और FCRA रिकॉर्ड्स सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। FCRA पोर्टल पर ट्रस्ट का डेटा नहीं मिला। 4. कैंपस कल्चर आरोप है कि कैंपस में इस्लामिक स्टूडेंट्स ग्रुप्स सक्रिय हैं। ये धार्मिक सेमिनार आयोजित करते हैं। अल फलाह स्कॉलरशिप स्कीम विदेशी स्टूडेंट़्स को फाइनेंशियल स्पोर्ट भी देती है। सेमिनारों में स्पीकर्स मुख्य रूप से शिक्षा और इस्लामिक स्टडीज पर होते हैं,। राज्य स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल की आखिरी जांच 2019 में की। संस्थापक MP छोड़कर फरीदाबाद आया, यहीं कॉलेज खोला अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के फाउंडर और चांसलर जवाद अहमद सिद्दीकी हैं। वे अल फलाह इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर भी हैं। ट्रस्टी में उनके परिवार के सदस्य जैसे सुफयान अहमद सिद्दीकी और फरहीन बेग शामिल हैं, जो यूनिवर्सिटी में टीचर हैं। सिद्दीकी की डिजिटल प्रोफाइल सीमित है, लेकिन पुराने फ्रॉड और लीगल केसेज से नाम जुड़ा है। पढ़ें पूरी खबर विवादित बैकग्राउंड वाले फैकल्टी की भर्ती अब अल फलाह यूनिवर्सिटी के बारे में जानिए