उत्तराखंड में स्थित पंचकेदारों में तीसरे केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट आज सुबह 11:30 बजे 189 दिनों बाद बंद कर दिए गए। रुद्रप्रयाग जिले में स्थित यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसे एक हजार साल से भी अधिक पुराना माना जाता है। आज अलसुबह से ही तुंगनाथ धाम में कपाट बंद करने की पारंपरिक तैयारियां शुरू हुई। सुबह 5 बजे से मंदिर में शीतकालीन पूजा-अर्चना हुई। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद सुबह 11 बजे मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह बंद कर दिए गए। कपाट बंद होने के बाद बाबा तुंगनाथ की चल उत्सव विग्रह डोली अपने शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ स्थित मर्कटेश्वर मंदिर के लिए रवाना हो रही। लगभग 30 किलोमीटर की यह यात्रा दो दिनों में पूरी होगी, जिसके बाद श्रद्धालु छह माह तक वहीं दर्शन कर सकेंगे। तुंगनाथ की PHOTOS… 1.70 लाख श्रद्धालु पहुंचे तुंगनाथ धाम मंदिर के प्रबंधक बलबीर सिंह नेगी के अनुसार, इस साल अब तक एक लाख 70 हजार से अधिक श्रद्धालु बाबा तुंगनाथ के दर्शन के लिए पहुंचे। उन्होंने बताया कि इस बार कपाट बंदी की तैयारियों में स्थानीय भक्तों और पुजारियों ने परंपरा का पूर्ण पालन किया। परंपरा के अनुसार होती है समाधि और डोली यात्रा सुबह 5 बजे से पुजारी पारंपरिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना हुई। इस दौरान बाबा तुंगनाथ के स्वयंभू लिंग को समाधि रूप में स्थापित किया गया। इसके बाद मंत्रोच्चार के बीच भोग मूर्तियों को गर्भगृह से निकालकर सभामंडप में रखी चल उत्सव विग्रह डोली में विराजमान किया गया। इसके पश्चात बाबा की डोली मंदिर की परिक्रमा कर धाम से बाहर प्रस्थान के लिए निकली। दो दिन की पैदल यात्रा के बाद पहुंचेगी मक्कूमठ बाबा तुंगनाथ की डोली बुग्यालों के रास्ते से होती हुई पहले चोपता और फिर भुनकुन में विश्राम करेगी। लगभग 30 किलोमीटर की यह पैदल यात्रा 8 नवंबर को पूरी होगी। इसके बाद मक्कूमठ स्थित मर्कटेश्वर मंदिर में बाबा का भव्य स्वागत किया जाएगा, जहां छह माह तक शीतकालीन पूजा और दर्शन होंगे।
उत्तराखंड में स्थित पंचकेदारों में तीसरे केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट आज सुबह 11:30 बजे 189 दिनों बाद बंद कर दिए गए। रुद्रप्रयाग जिले में स्थित यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसे एक हजार साल से भी अधिक पुराना माना जाता है। आज अलसुबह से ही तुंगनाथ धाम में कपाट बंद करने की पारंपरिक तैयारियां शुरू हुई। सुबह 5 बजे से मंदिर में शीतकालीन पूजा-अर्चना हुई। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद सुबह 11 बजे मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह बंद कर दिए गए। कपाट बंद होने के बाद बाबा तुंगनाथ की चल उत्सव विग्रह डोली अपने शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ स्थित मर्कटेश्वर मंदिर के लिए रवाना हो रही। लगभग 30 किलोमीटर की यह यात्रा दो दिनों में पूरी होगी, जिसके बाद श्रद्धालु छह माह तक वहीं दर्शन कर सकेंगे। तुंगनाथ की PHOTOS… 1.70 लाख श्रद्धालु पहुंचे तुंगनाथ धाम मंदिर के प्रबंधक बलबीर सिंह नेगी के अनुसार, इस साल अब तक एक लाख 70 हजार से अधिक श्रद्धालु बाबा तुंगनाथ के दर्शन के लिए पहुंचे। उन्होंने बताया कि इस बार कपाट बंदी की तैयारियों में स्थानीय भक्तों और पुजारियों ने परंपरा का पूर्ण पालन किया। परंपरा के अनुसार होती है समाधि और डोली यात्रा सुबह 5 बजे से पुजारी पारंपरिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना हुई। इस दौरान बाबा तुंगनाथ के स्वयंभू लिंग को समाधि रूप में स्थापित किया गया। इसके बाद मंत्रोच्चार के बीच भोग मूर्तियों को गर्भगृह से निकालकर सभामंडप में रखी चल उत्सव विग्रह डोली में विराजमान किया गया। इसके पश्चात बाबा की डोली मंदिर की परिक्रमा कर धाम से बाहर प्रस्थान के लिए निकली। दो दिन की पैदल यात्रा के बाद पहुंचेगी मक्कूमठ बाबा तुंगनाथ की डोली बुग्यालों के रास्ते से होती हुई पहले चोपता और फिर भुनकुन में विश्राम करेगी। लगभग 30 किलोमीटर की यह पैदल यात्रा 8 नवंबर को पूरी होगी। इसके बाद मक्कूमठ स्थित मर्कटेश्वर मंदिर में बाबा का भव्य स्वागत किया जाएगा, जहां छह माह तक शीतकालीन पूजा और दर्शन होंगे।