राजस्थान में दिवाली पर नकली घी बेचने वाले माफियाओं के चेहरों को हमने पार्ट-1 में बेनकाब किया था। ये सच दिखाया था कि कैसे मामूली मुनाफे के लिए रिफाइंड तेल के दाम में केमिकल से बना नकली घी बेच रहे हैं। इसी पड़ताल में भास्कर टीम उन फैक्ट्रियों तक भी पहुंची, जहां रात के अंधेरे में नकली घी बनकर तैयार होता है। दिन में गार्ड पहरा देते हैं। रिपोर्टर गार्ड को चकमा देकर फैक्ट्री के अंदर तक पहुंच गए। वहां नकली घी तैयार करने का पूरा सामान रखा हुआ था। एक व्यापारी को बड़ी डील का झांसा दिया। उसने आंखों के सामने महज 230 रुपए के खर्च में 3 आइटम से 2 किलो नकली घी तैयार करके दे दिया। असली घी जैसी खुशबू लाने के लिए एक केमिकल मिलाया। एक्सपर्ट का कहना है कि इस तरह से तैयार घी लोगों के हार्ट ब्लॉक कर देता है। कई गंभीर बीमारियां देता है, जिनका इलाज तक नहीं हो पाता। ऑपरेशन जहर के पार्ट-2 में पढ़िए- नकली घी बनाने वाले फैक्ट्रियों के अंदर का सच… जयपुर : नकली घी बनाकर दिखाया, व्यापारी बोला- पहचान करना मुश्किल
जयपुर के सांगानेर, चौमूं के चीथवाड़ी और आस-पास के इलाकों में कई लोग नकली घी बना रहे हैं। हम चौमूं के चीथवाड़ी इलाके में पहुंचे। यहां दर्जनभर से ज्यादा फैक्ट्रियां हैं, जहां नकली घी, मावा बनाने का कारोबार बड़े पैमाने पर होता है। लोगों ने घरों के अंदर भी फैक्ट्रियां बना रखी हैं। छापों के डर से कोई भी बोर्ड लगाकर नहीं रखता। न ही कोई पहचान उजागर करता है। हमने नकली घी बनाने वाले कुछ लोगों से संपर्क किया। चीथवाड़ी में ही एक फैक्ट्री में दाखिल हुए। एक व्यापारी मिलने को राजी हुआ। हमने बड़े ऑर्डर का लालच और डिमांड रखी कि आंखों के सामने ही नकली घी का सैंपल तैयार करना पड़ेगा। काफी आश्वासन और भरोसे में लेने के बाद वो तैयार हुआ। महज 330 रुपए के सामान से नकली घी तैयार
व्यापारी ने बताया कि नकली घी बनाने में 3 आइटम- पाम ऑयल, वेजिटेबल तेल (लोग इसे डालडा नाम से ज्यादा जानते हैं) और खुशबू के लिए खास तरह का एसेंस काम में लेते हैं। आप ये तीनों आइटम लेकर आ जाओ हम बनाकर दिखा देंगे। भास्कर टीम ने चौमूं शहर में एक किराना स्टोर से 1 लीटर पाम ऑयल 140 रुपए में, 1 लीटर वनस्पति तेल 130 रुपए और 60 रुपए में एसेंस मंगवाया। इसमें महज 330 रुपए खर्च हुए। सामान लाने के बाद व्यापारी ने अपने कारीगर को हमारे सामने नकली घी तैयार करने के निर्देश दिए। (नोट : नकली घी बनाना और मिलावटी घी तैयार करने का प्रदर्शन करना कानूनी जुर्म है, इसलिए पूरी प्रोसेस नहीं बताई जा रही) कारीगर ने महज 330 रुपए के आइटम में 15 मिनट में हमें दो लीटर नकली घी तैयार करके दे दिया। ये दिखने में एक दम शुद्ध घी की तरह दिख रहा था। रंग भी हल्का पीला था और घी जैसी खुशबू भी उसमें आ रही थी। व्यापारी ने दावा किया कि यही घी मार्केट में डबल रेट में बिकता है। चीथवाड़ी है नकली घी का गढ़, 17 अक्टूबर की रात को भी हुई कार्रवाई
चौमूं (जयपुर) के चीथवाड़ी में हाल ही में नकली दूध-घी और मावा बनाने वालों पर बड़ी कार्रवाई हुई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 17 अक्टूबर की रात 2.15 बजे छापा मारा था। जयपुर सीएमएचओ (प्रथम) डॉ. रवि शेखावत ने बताया कि टीम ने 20 से ज्यादा फैक्ट्रियों में दूध और मावे के सैंपल लिए थे। दो फैक्ट्रियों से मिल्क पाउडर, वनस्पति घी और केमिकल से बने 500 किलो से ज्यादा मावा मौके पर ही नष्ट करवाया। कई फैक्ट्रियों के मालिकों को फूड सेफ्टी एक्ट के तहत नोटिस दिए गए हैं। सिरोही : गार्ड को चकमा देकर नकली घी बनाने वाली फैक्ट्री के अंदर पहुंचे रिपोर्टर
चौमूं में पड़ताल के बाद हम सिरोही पहुंचे। सूत्रों ने हमें जानकारी दी थी कि यहां नकली घी बनाने वाला एक बड़ा माफिया है। उसकी फैक्ट्री दिन में बंद रहती है। रात के अंधेरे में नकली घी बनता है। वहां तैयार होने वाले घी को सुमेरपुर और आस-पास की मंडी में बेचा जाता है। फैक्ट्री के मेन गेट पर ताला लगा था। पास में एक गार्ड चौकीदारी कर रहा था। एक रिपोर्टर ने गार्ड से पास की फैक्ट्री किराए पर लेने की बातों में उलझाया। दूसरा रिपोर्टर फैक्ट्री के अंदर गया। फैक्ट्री के अंदर जाने पर हम चौंक गए। नकली घी बनाने का पूरा सेटअप लगा रखा था। प्रोसेसिंग यूनिट में टिन के डिब्बों का ढेर, लेबल और पैकिंग करने की मशीनें लगा रखी थीं। सील लगाने की मशीनें भी थीं। फैक्ट्री के अंदर इन मशीनों से क्या किया जाता है, वहां मौजूद गार्ड से बातचीत में सामने आया… रिपोर्टर : यह फैक्ट्री किस चीज की है, यहां क्या बनता है? गार्ड : सोयाबीन से पनीर और घी बनता है। रिपोर्टर : फैक्ट्री अभी बंद कैसे है? गार्ड : यहां रात को काम होता है, अभी कारीगर छुट्टी पर गया है, वो आएगा तब काम होगा। रिपोर्टर : यहां घी कितना और कैसे बनाते हैं? गार्ड : मुझे नहीं पता, मैं तो 2 महीने पहले ही यहां पर आया हूं। यूरिया, पाम ऑयल, आलू, मैदा से नकली घी बनाने के अलग-अलग तरीके
मार्केट में त्योहार, शादियां, होटलों से लेकर घरों में घी की डिमांड सबसे ज्यादा होती है। बढ़ती डिमांड के चलते ही लोग मार्केट में नकली घी बेचकर मुनाफा कमाते है। मुनाफे के लिए माफिया यूरिया, आलू, मैदा, पाम ऑयल, डालडा में केमिकल मिलाकर नकली घी बनाने के एक दर्जन से ज्यादा तरीके बना कर रखे हैं। रिपोर्ट सहयोग : मनोज सैनी, चौमूं ऑपरेशन जहर का पार्ट-1 भी पढ़िए… राजस्थान में नकली घी बेचने वाले माफिया कैमरे पर बेनकाब:सबसे सस्ते की कीमत 216 रुपए किलो, कोडवर्ड-वाइट, छिपिया, गुजरात बताने पर देते हैं माल ‘रिफाइंड तेल के दाम में ‘देसी घी’ मिल जाएगा…कीमत है महज 216 रुपए लीटर। पूरा 15 लीटर का पीपा खरीदने पर रेट और कम हो जाएगा। कई ढाबे-रेस्टोरेंट वाले भी यहीं से ले जा रहे हैं, मिठाइयां बना रहे हैं…(CLICK कर पूरा पढ़ें)
राजस्थान में दिवाली पर नकली घी बेचने वाले माफियाओं के चेहरों को हमने पार्ट-1 में बेनकाब किया था। ये सच दिखाया था कि कैसे मामूली मुनाफे के लिए रिफाइंड तेल के दाम में केमिकल से बना नकली घी बेच रहे हैं। इसी पड़ताल में भास्कर टीम उन फैक्ट्रियों तक भी पहुंची, जहां रात के अंधेरे में नकली घी बनकर तैयार होता है। दिन में गार्ड पहरा देते हैं। रिपोर्टर गार्ड को चकमा देकर फैक्ट्री के अंदर तक पहुंच गए। वहां नकली घी तैयार करने का पूरा सामान रखा हुआ था। एक व्यापारी को बड़ी डील का झांसा दिया। उसने आंखों के सामने महज 230 रुपए के खर्च में 3 आइटम से 2 किलो नकली घी तैयार करके दे दिया। असली घी जैसी खुशबू लाने के लिए एक केमिकल मिलाया। एक्सपर्ट का कहना है कि इस तरह से तैयार घी लोगों के हार्ट ब्लॉक कर देता है। कई गंभीर बीमारियां देता है, जिनका इलाज तक नहीं हो पाता। ऑपरेशन जहर के पार्ट-2 में पढ़िए- नकली घी बनाने वाले फैक्ट्रियों के अंदर का सच… जयपुर : नकली घी बनाकर दिखाया, व्यापारी बोला- पहचान करना मुश्किल
जयपुर के सांगानेर, चौमूं के चीथवाड़ी और आस-पास के इलाकों में कई लोग नकली घी बना रहे हैं। हम चौमूं के चीथवाड़ी इलाके में पहुंचे। यहां दर्जनभर से ज्यादा फैक्ट्रियां हैं, जहां नकली घी, मावा बनाने का कारोबार बड़े पैमाने पर होता है। लोगों ने घरों के अंदर भी फैक्ट्रियां बना रखी हैं। छापों के डर से कोई भी बोर्ड लगाकर नहीं रखता। न ही कोई पहचान उजागर करता है। हमने नकली घी बनाने वाले कुछ लोगों से संपर्क किया। चीथवाड़ी में ही एक फैक्ट्री में दाखिल हुए। एक व्यापारी मिलने को राजी हुआ। हमने बड़े ऑर्डर का लालच और डिमांड रखी कि आंखों के सामने ही नकली घी का सैंपल तैयार करना पड़ेगा। काफी आश्वासन और भरोसे में लेने के बाद वो तैयार हुआ। महज 330 रुपए के सामान से नकली घी तैयार
व्यापारी ने बताया कि नकली घी बनाने में 3 आइटम- पाम ऑयल, वेजिटेबल तेल (लोग इसे डालडा नाम से ज्यादा जानते हैं) और खुशबू के लिए खास तरह का एसेंस काम में लेते हैं। आप ये तीनों आइटम लेकर आ जाओ हम बनाकर दिखा देंगे। भास्कर टीम ने चौमूं शहर में एक किराना स्टोर से 1 लीटर पाम ऑयल 140 रुपए में, 1 लीटर वनस्पति तेल 130 रुपए और 60 रुपए में एसेंस मंगवाया। इसमें महज 330 रुपए खर्च हुए। सामान लाने के बाद व्यापारी ने अपने कारीगर को हमारे सामने नकली घी तैयार करने के निर्देश दिए। (नोट : नकली घी बनाना और मिलावटी घी तैयार करने का प्रदर्शन करना कानूनी जुर्म है, इसलिए पूरी प्रोसेस नहीं बताई जा रही) कारीगर ने महज 330 रुपए के आइटम में 15 मिनट में हमें दो लीटर नकली घी तैयार करके दे दिया। ये दिखने में एक दम शुद्ध घी की तरह दिख रहा था। रंग भी हल्का पीला था और घी जैसी खुशबू भी उसमें आ रही थी। व्यापारी ने दावा किया कि यही घी मार्केट में डबल रेट में बिकता है। चीथवाड़ी है नकली घी का गढ़, 17 अक्टूबर की रात को भी हुई कार्रवाई
चौमूं (जयपुर) के चीथवाड़ी में हाल ही में नकली दूध-घी और मावा बनाने वालों पर बड़ी कार्रवाई हुई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 17 अक्टूबर की रात 2.15 बजे छापा मारा था। जयपुर सीएमएचओ (प्रथम) डॉ. रवि शेखावत ने बताया कि टीम ने 20 से ज्यादा फैक्ट्रियों में दूध और मावे के सैंपल लिए थे। दो फैक्ट्रियों से मिल्क पाउडर, वनस्पति घी और केमिकल से बने 500 किलो से ज्यादा मावा मौके पर ही नष्ट करवाया। कई फैक्ट्रियों के मालिकों को फूड सेफ्टी एक्ट के तहत नोटिस दिए गए हैं। सिरोही : गार्ड को चकमा देकर नकली घी बनाने वाली फैक्ट्री के अंदर पहुंचे रिपोर्टर
चौमूं में पड़ताल के बाद हम सिरोही पहुंचे। सूत्रों ने हमें जानकारी दी थी कि यहां नकली घी बनाने वाला एक बड़ा माफिया है। उसकी फैक्ट्री दिन में बंद रहती है। रात के अंधेरे में नकली घी बनता है। वहां तैयार होने वाले घी को सुमेरपुर और आस-पास की मंडी में बेचा जाता है। फैक्ट्री के मेन गेट पर ताला लगा था। पास में एक गार्ड चौकीदारी कर रहा था। एक रिपोर्टर ने गार्ड से पास की फैक्ट्री किराए पर लेने की बातों में उलझाया। दूसरा रिपोर्टर फैक्ट्री के अंदर गया। फैक्ट्री के अंदर जाने पर हम चौंक गए। नकली घी बनाने का पूरा सेटअप लगा रखा था। प्रोसेसिंग यूनिट में टिन के डिब्बों का ढेर, लेबल और पैकिंग करने की मशीनें लगा रखी थीं। सील लगाने की मशीनें भी थीं। फैक्ट्री के अंदर इन मशीनों से क्या किया जाता है, वहां मौजूद गार्ड से बातचीत में सामने आया… रिपोर्टर : यह फैक्ट्री किस चीज की है, यहां क्या बनता है? गार्ड : सोयाबीन से पनीर और घी बनता है। रिपोर्टर : फैक्ट्री अभी बंद कैसे है? गार्ड : यहां रात को काम होता है, अभी कारीगर छुट्टी पर गया है, वो आएगा तब काम होगा। रिपोर्टर : यहां घी कितना और कैसे बनाते हैं? गार्ड : मुझे नहीं पता, मैं तो 2 महीने पहले ही यहां पर आया हूं। यूरिया, पाम ऑयल, आलू, मैदा से नकली घी बनाने के अलग-अलग तरीके
मार्केट में त्योहार, शादियां, होटलों से लेकर घरों में घी की डिमांड सबसे ज्यादा होती है। बढ़ती डिमांड के चलते ही लोग मार्केट में नकली घी बेचकर मुनाफा कमाते है। मुनाफे के लिए माफिया यूरिया, आलू, मैदा, पाम ऑयल, डालडा में केमिकल मिलाकर नकली घी बनाने के एक दर्जन से ज्यादा तरीके बना कर रखे हैं। रिपोर्ट सहयोग : मनोज सैनी, चौमूं ऑपरेशन जहर का पार्ट-1 भी पढ़िए… राजस्थान में नकली घी बेचने वाले माफिया कैमरे पर बेनकाब:सबसे सस्ते की कीमत 216 रुपए किलो, कोडवर्ड-वाइट, छिपिया, गुजरात बताने पर देते हैं माल ‘रिफाइंड तेल के दाम में ‘देसी घी’ मिल जाएगा…कीमत है महज 216 रुपए लीटर। पूरा 15 लीटर का पीपा खरीदने पर रेट और कम हो जाएगा। कई ढाबे-रेस्टोरेंट वाले भी यहीं से ले जा रहे हैं, मिठाइयां बना रहे हैं…(CLICK कर पूरा पढ़ें)