धनतेरस पर पूरे देश में जहां मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है, वहीं उत्तराखंड के दो पौराणिक धामों में यह दिन आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम लेकर आता है। अल्मोड़ा के जागेश्वर धाम में देवदार के जंगलों के बीच स्थित राज्य का एकमात्र कुबेर मंदिर भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहता है, तो दूसरी ओर चमोली के बद्रीनाथ धाम में सदियों पुरानी परंपरा के तहत भगवान कुबेर और यमराज की संयुक्त पूजा होती है। दोनों स्थानों पर श्रद्धालु आज के दिन बड़ी संख्या में पहुंचते हैं और धन-वैभव के साथ-साथ अकाल मृत्यु से मुक्ति की भी कामना करते हैं। जागेश्वर धाम- जहां शिवलिंग रूप में विराजते हैं कुबेर अल्मोड़ा जिले का जागेश्वर धाम भगवान शिव की नगरी के रूप में प्रसिद्ध है। यहां 125 प्राचीन मंदिरों का समूह है, जिनमें से एक दुर्लभ मंदिर भगवान कुबेर को समर्पित है। मुख्य जागेश्वर मंदिर से कुछ दूरी पर स्थित यह कुबेर मंदिर समूह आठवीं से बारहवीं शताब्दी के बीच कत्यूरी कालीन शैली में निर्मित माना जाता है। माना जाता है कि भगवान कुबेर यहां शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं और सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्तों को धन-संपदा की प्राप्ति होती है।देवदार के घने जंगलों में बसे इस स्थल की प्राकृतिक सुंदरता श्रद्धालुओं को अलौकिक शांति का अनुभव कराती है। बद्रीनाथ धाम में कुबेर और यमराज की पूजा धनतेरस के अवसर पर चमोली जिले के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में भगवान कुबेर और मृत्यु के देवता यमराज की विशेष पूजा की जाती है आज भी सुबह यहां पर विधि विधान से पूजा हुई है। यह परंपरा सदियों पुरानी है, जिसमें श्रद्धालु समृद्धि और अकाल मृत्यु से मुक्ति की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान कुबेर उत्तर दिशा के रक्षक हैं और बद्रीनाथ से लेकर माणा गांव तक उनका अधिपत्य क्षेत्र माना गया है। धनतेरस की सुबह विशेष अनुष्ठान में यमराज के लिए दक्षिण दिशा में दीपदान किया जाता है, जिससे व्यक्ति अकाल मृत्यु के भय से मुक्त होता है। कुबेर- धन और स्थिरता के प्रतीक देवता कुबेर देवता को धन, वैभव और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वे कभी सोने की लंका में विराजमान थे और बाद में भगवान विष्णु के खजांची बने। कहा जाता है कि जो व्यक्ति ईमानदारी से मेहनत करता है और दूसरों के साथ न्यायपूर्वक व्यवहार रखता है, उस पर कुबेर सदा प्रसन्न रहते हैं। धनतेरस पर उनकी पूजा से न केवल आर्थिक उन्नति, बल्कि जीवन में संतुलन और स्थिरता आती है। संरक्षण से बढ़ सकता है आध्यात्मिक पर्यटन स्थानीय पुरातत्वविदों का कहना है कि यदि जागेश्वर धाम के कुबेर मंदिर को उचित संरक्षण और प्रचार मिले, तो यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पिरिचुअल टूरिज्म का बड़ा केंद्र बन सकता है। हर साल हजारों पर्यटक यहां भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि यहीं राज्य का एकमात्र कुबेर मंदिर भी मौजूद है। पीएम मोदी बोले भी कर चुके हैं जागेश्वर धाम के दर्शन…. 14 अक्टूबर 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड के एकदिवसीय दौरे में जागेश्वर धाम और पार्वती कुंड के दर्शन किए थे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा— “अगर कोई मुझसे पूछे कि उत्तराखंड में कौन सी एक जगह जरूर देखी जानी चाहिए, तो मैं कुमाऊं क्षेत्र के पार्वती कुंड और जागेश्वर मंदिर का नाम लूंगा। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य और दिव्यता आपको मंत्रमुग्ध कर देगी।” पीएम मोदी ने यहां शिवलिंग पर जल अर्पित किया और मंदिर परिसर की पवित्रता की सराहना की था। उन्होंने कहा था कि सीमांत इलाकों को अब “देश का पहला गांव” मानकर विकसित किया जा रहा है। उनकी यह यात्रा जागेश्वर धाम को अंतरराष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन की सूची में नई पहचान दे गई। पीएम मोदी के उस दौरे की PHOTOS देखें….
धनतेरस पर पूरे देश में जहां मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है, वहीं उत्तराखंड के दो पौराणिक धामों में यह दिन आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम लेकर आता है। अल्मोड़ा के जागेश्वर धाम में देवदार के जंगलों के बीच स्थित राज्य का एकमात्र कुबेर मंदिर भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहता है, तो दूसरी ओर चमोली के बद्रीनाथ धाम में सदियों पुरानी परंपरा के तहत भगवान कुबेर और यमराज की संयुक्त पूजा होती है। दोनों स्थानों पर श्रद्धालु आज के दिन बड़ी संख्या में पहुंचते हैं और धन-वैभव के साथ-साथ अकाल मृत्यु से मुक्ति की भी कामना करते हैं। जागेश्वर धाम- जहां शिवलिंग रूप में विराजते हैं कुबेर अल्मोड़ा जिले का जागेश्वर धाम भगवान शिव की नगरी के रूप में प्रसिद्ध है। यहां 125 प्राचीन मंदिरों का समूह है, जिनमें से एक दुर्लभ मंदिर भगवान कुबेर को समर्पित है। मुख्य जागेश्वर मंदिर से कुछ दूरी पर स्थित यह कुबेर मंदिर समूह आठवीं से बारहवीं शताब्दी के बीच कत्यूरी कालीन शैली में निर्मित माना जाता है। माना जाता है कि भगवान कुबेर यहां शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं और सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्तों को धन-संपदा की प्राप्ति होती है।देवदार के घने जंगलों में बसे इस स्थल की प्राकृतिक सुंदरता श्रद्धालुओं को अलौकिक शांति का अनुभव कराती है। बद्रीनाथ धाम में कुबेर और यमराज की पूजा धनतेरस के अवसर पर चमोली जिले के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में भगवान कुबेर और मृत्यु के देवता यमराज की विशेष पूजा की जाती है आज भी सुबह यहां पर विधि विधान से पूजा हुई है। यह परंपरा सदियों पुरानी है, जिसमें श्रद्धालु समृद्धि और अकाल मृत्यु से मुक्ति की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान कुबेर उत्तर दिशा के रक्षक हैं और बद्रीनाथ से लेकर माणा गांव तक उनका अधिपत्य क्षेत्र माना गया है। धनतेरस की सुबह विशेष अनुष्ठान में यमराज के लिए दक्षिण दिशा में दीपदान किया जाता है, जिससे व्यक्ति अकाल मृत्यु के भय से मुक्त होता है। कुबेर- धन और स्थिरता के प्रतीक देवता कुबेर देवता को धन, वैभव और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वे कभी सोने की लंका में विराजमान थे और बाद में भगवान विष्णु के खजांची बने। कहा जाता है कि जो व्यक्ति ईमानदारी से मेहनत करता है और दूसरों के साथ न्यायपूर्वक व्यवहार रखता है, उस पर कुबेर सदा प्रसन्न रहते हैं। धनतेरस पर उनकी पूजा से न केवल आर्थिक उन्नति, बल्कि जीवन में संतुलन और स्थिरता आती है। संरक्षण से बढ़ सकता है आध्यात्मिक पर्यटन स्थानीय पुरातत्वविदों का कहना है कि यदि जागेश्वर धाम के कुबेर मंदिर को उचित संरक्षण और प्रचार मिले, तो यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पिरिचुअल टूरिज्म का बड़ा केंद्र बन सकता है। हर साल हजारों पर्यटक यहां भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि यहीं राज्य का एकमात्र कुबेर मंदिर भी मौजूद है। पीएम मोदी बोले भी कर चुके हैं जागेश्वर धाम के दर्शन…. 14 अक्टूबर 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड के एकदिवसीय दौरे में जागेश्वर धाम और पार्वती कुंड के दर्शन किए थे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा— “अगर कोई मुझसे पूछे कि उत्तराखंड में कौन सी एक जगह जरूर देखी जानी चाहिए, तो मैं कुमाऊं क्षेत्र के पार्वती कुंड और जागेश्वर मंदिर का नाम लूंगा। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य और दिव्यता आपको मंत्रमुग्ध कर देगी।” पीएम मोदी ने यहां शिवलिंग पर जल अर्पित किया और मंदिर परिसर की पवित्रता की सराहना की था। उन्होंने कहा था कि सीमांत इलाकों को अब “देश का पहला गांव” मानकर विकसित किया जा रहा है। उनकी यह यात्रा जागेश्वर धाम को अंतरराष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन की सूची में नई पहचान दे गई। पीएम मोदी के उस दौरे की PHOTOS देखें….