मध्य प्रदेश में जहरीला कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से अब तक 25 बच्चों की मौत हो चुकी है। छिंदवाड़ा, बैतूल और पांढुर्णा जिलाें में मामले सामने आने के बाद से ही प्रदेश के हर जिले में गांव से लेकर मुख्यालय तक मेडिकल स्टोर, एजेंसी और क्लिनिक पर जांच कर अमानक दवाइयां जब्त की जा रही हैं। इसी बीच रीवा जिले में एम्बुलेंस से कफ सिरप की अवैध सप्लाई की जा रही है। दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया है कि रीवा में अब एम्बुलेंस नशे की खेप ढोने का सबसे सुरक्षित माध्यम बन गई हैं। पुलिस ने इस तस्करी के मास्टरमाइंड नितिन द्विवेदी उर्फ मंकी को गिरफ्तार किया है। वह पुलिस-प्रशासन को चकमा देकर एंबुलेंस की आड़ में पूरे शहर में कफ सिरप सप्लाई कर रहा था। प्रदेश के स्वास्थ मंत्री और डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ल का गृह जिला होने के कारण कांग्रेस इस पूरे मामले में उन्हें और सरकार काे जमकर घेर रही है। दैनिक भास्कर की टीम ने रीवा में ऐसे सात ठिकानों पर हो रही अवैध सप्लाई को अपने कैमरे में कैद किया है। पढ़िए, रिपाेर्ट… कांग्रेस ने कहा- रीवा नशीली सिरप का सबसे बड़ा गढ़
रीवा की कोतवाली पुलिस ने रविवार को चार युवकों को पकड़ा। शुरुआत में पुलिस इस बात को नकारती रही कि उनसे कुछ बरामद हुआ है। लेकिन भास्कर की पड़ताल में एएसपी ने माना कि एक एम्बुलेंस से कफ सिरप की तस्करी की जा रही थी। छिंदवाड़ा में हुई बच्चों की मौत के सिलसिले में मंगलवार को नई दिल्ली में कांग्रेस ने प्रेस वार्ता आयोजित की। इसमें कांग्रेस नेताओं ने सरकार को घेरा। इस दौरान उन्होंने रीवा का भी जिक्र किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि रीवा मध्य प्रदेश और देश के भीतर नशीली सिरप का सबसे बड़ा गढ़ बन गया है। यह स्वास्थ्य मंत्री का गृह जिला भी है। स्वास्थ्य मंत्री अपने खुद के जिले में आज तक नशीली सिरप की बिक्री पर रोक नहीं लगा पाए तो अन्य जगहों पर क्या रोक पाएंगे? एम्बुलेंस ड्राइवर से तस्कर बना ‘मंकी’
पुलिस के मुताबिक, रीवा में कफ सिरप की तस्करी का मास्टरमाइंड नितिन द्विवेदी उर्फ मंकी है। वह कभी एम्बुलेंस चलाता था। अब रीवा के सबसे बड़े शासकीय अस्पताल संजय गांधी अस्पताल की 70% से ज्यादा प्राइवेट एम्बुलेंस का संचालन करता है। नितिन ने अस्पताल को अवैध कारोबार का अड्डा बना दिया है। दिनभर मरीजों को लाने-ले जाने के नाम पर एम्बुलेंस चलती है, लेकिन उन्हीं एम्बुलेंस में छिपकर कफ सिरप की खेप शहर में पहुंचाई जाती है। नितिन दुबे खुद सामने नहीं आता बल्कि अपने पिता और छोटे भाई के नाम पर एम्बुलेंस चलाता है। उसके पिता आर्मी से रिटायर्ड हैं। नितिन पर डकैती, मारपीट जैसे दर्जनभर आपराधिक मामले दर्ज हैं। एम्बुलेंस कोई नहीं रोकता, इसी का फायदा उठाया
नितिन करोड़ों की संपत्ति का मालिक है। आलीशान घर, बैंक अकाउंट में मोटा बैलेंस और 10 से अधिक एम्बुलेंस उसके पिता और भाई के नाम पर रजिस्टर्ड हैं। वह कई वर्षों से रीवा में एम्बुलेंस से तस्करी का काम कर रहा था। वह भी इतनी सफाई से कि किसी को भनक तक नहीं लगी। नियमों के मुताबिक, एम्बुलेंस को कोई भी पुलिसकर्मी या सुरक्षाकर्मी जल्दी हाथ नहीं देता। वो भी जब एम्बुलेंस सायरन बजा रही हो। इसे संकेत माना जाता है कि जरूर कोई सीरियस मरीज एम्बुलेंस के भीतर इमरजेंसी कंडीशन में होगा। मरीज के लिए एक-एक मिनट बेहद कीमती होता है, यही वजह है कि एम्बुलेंस को कोई रोकता नहीं। बस नितिन दुबे उर्फ मंकी इसी बात का फायदा उठाता था और एम्बुलेंस के जरिए यूपी के रास्ते नशीली सिरप की खेप रीवा में पहुंचाने का काम करता था। इसी तरह जबलपुर से नशीली सिरप की सप्लाई की जाती है। उत्तर प्रदेश से रीवा तक बिना रोक-टोक निकल जाती है नशीली खेप
रीवा तक पहुंचने वाली नशीली सिरप के नेटवर्क की एक बड़ी कड़ी है, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से आने वाला रास्ता। यहां से महज ढाई घंटे के भीतर करीब 130 किलोमीटर का सफर तय कर सिरप की खेप रीवा तक पहुंचा दी जाती है। इस पूरे रूट में चार टोल प्लाजा और एक आरटीओ चेक पोस्ट है, लेकिन एम्बुलेंस में सवार तस्करों को कहीं भी रोकने या जांचने की कोशिश नहीं होती। इसका कारण साफ है, एम्बुलेंस को आपातकालीन सेवा मानते हुए टोल टैक्स से छूट मिली हुई है और आमतौर पर इन्हें चेकिंग से भी मुक्त रखा जाता है। ये हैं वो टोल प्लाजा और चेक पोस्ट, जहां से आसानी से गुजरते हैं तस्कर सामान्य गाड़ियों को इस रूट से आने-जाने में करीब ₹220 का खर्च आता है। लेकिन एम्बुलेंस न तो ये टोल देती है, न ही जांच की जाती है। यही वजह है कि नितिन ‘मंकी’ जैसे तस्कर इसी रूट को चुनते हैं। एकदम सुरक्षित, तेज और बिना सवाल-जवाब वाला। अगर वाहन रीवा-बैकुंठपुर-सिरमौर रोड से होकर आता है, तो करीब ₹150 का टोल टैक्स देना पड़ता है। जबलपुर के रास्ते कैसे सप्लाई हाेता है नशा… दूरी 232 KM- कई टोल प्लाजा, लेकिन कोई रोकटोक नहीं
सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं, जबलपुर से भी रीवा तक नशीली कफ सिरप की तस्करी सरेआम जारी है। रीवा और जबलपुर के बीच की दूरी लगभग 232 किलोमीटर है। इस रास्ते में भी कई टोल प्लाजा पड़ते हैं लेकिन यहां भी तस्करों को किसी तरह की अड़चन नहीं होती, क्योंकि तस्करी एम्बुलेंस के जरिए होती है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के निर्देशों के अनुसार, आपातकालीन सेवाओं में बाधा न आए इसलिए एम्बुलेंस से न कोई टोल वसूली होती है और न ही कोई पूछताछ। ये हैं जबलपुर से रीवा तक के प्रमुख टोल प्लाजा सामान्य वाहनों के लिए इन टोल पर ₹365 से ज्यादा का खर्च आता है, लेकिन एम्बुलेंस को यह रास्ता फ्री पास की तरह मिल जाता है। इसी का फायदा उठाकर रीवा के तस्कर इस रूट से भी नशीली सिरप की बड़ी खेप लाने का काम करते हैं।
भास्कर की पड़ताल में उजागर हुए 7 ठिकाने अड्डा नंबर 1- शिव मंदिर के पास, नीम के पेड़ के नीचे जावेद चिकन शॉप रोड के दूसरी ओर, हीरो एजेंसी से सीधे अंदर जाने पर भगवान शिव के मंदिर के पास नीम के पेड़ के नीचे एक गली में बाची लोनिया और उसकी बहू खुशबू लोनिया को नशीली सिरप बेचते हुए भास्कर ने कैमरे में कैद किया। अड्डा नंबर 2- मंदिर के पास, छोटी पुल के बगल की गली ईको पार्क रोड के सामने स्थित इस गली में मंदिर के बगल में रहने वाली राजभान लोनिया की पत्नी, जिसे ‘बड़की’ नाम से जाना जाता है, नशीली सिरप बेचते हुए दिखाई दी। अड्डा नंबर 3- भोलेनाथ मंदिर के पास, बगीचे की ओर जावेद चिकन शॉप रोड की विपरीत दिशा में हीरो एजेंसी से सीधे भीतर जाने पर, भोलेनाथ के मंदिर के पास नीम के पेड़ की सीध में नदी की ओर मौजूद बगीचे के पास, केही उर्फ आरती लोनिया और उसकी बेटी माला लोनिया अवैध सिरप बेचते हुए कैमरे में कैद हुईं। अड्डा नंबर 4- कबाड़ी मोहल्ला संतोष कबाड़ी की पत्नी रचनिया लोनिया और रोशनी लोनिया के घर के पास यह अड्डा सक्रिय है। भास्कर की टीम ने इन्हें भी सिरप बेचते हुए कैमरे में कैद किया। अड्डा नंबर 5- मंदिर के पास, छोटी पुल की गली ईको पार्क रोड की दूसरी ओर छोटी पुल के बगल वाली गली में स्थित मंदिर के पास संजना उर्फ आशा केवट अवैध सिरप बिक्री करते हुए पाई गई। अड्डा नंबर 6- ईको पार्क के सामने की गली मंदिर से बगीचे की ओर जाने वाली गली में, दिनेश केवट की पत्नी गुड़िया केवट को नशीली सिरप बेचते हुए भास्कर रिपोर्टर ने कैमरे में रिकॉर्ड किया। अड्डा नंबर 7- हीरो एजेंसी वाली गली जावेद चिकन शॉप के सामने वाली गली में हीरो एजेंसी से अंदर जाने पर, रानी लोनिया और उसकी बहन गीता लोनिया के घर के पास यह अड्डा चल रहा है, जहां सिरप का सौदा खुलेआम हो रहा है। SP बोले- अवैध धंधे में शामिल लोगाें पर कार्रवाई करेंगे
रीवा एसपी शैलेन्द्र सिंह ने नशीली कफ सिरप के अवैध कारोबार को लेकर स्पष्ट किया कि जिले के सभी थाना प्रभारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। विधायक ने कहा- रीवा बन चुका है ‘कोरेक्स सिटी’
कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने रीवा में नशीली कफ सिरप के बढ़ते चलन पर तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा- रीवा अब कोरेक्स सिटी बन चुका है। हालत यह है कि कलेक्ट्रेट परिसर तक में नशीली सिरप की खाली शीशियां पड़ी मिल रही हैं। सांसद ने कहा था कि नए पार्क में कोरेक्स की शीशियां मत फेंकना
रीवा में कोरेक्स के चलन की बात को सांसद जनार्दन मिश्रा से लेकर डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल तक कबूल कर चुके हैं। अटल पार्क के उद्घाटन के अवसर पर रीवा सांसद ने कहा था कि आजकल जहां देखो, वहां कोरेक्स की शीशियां पड़ी हैं। अब यह नया पार्क बनकर तैयार हुआ है। सभी से निवेदन है कि कम से कम यहां पर कोरेक्स की शीशियां न फेंके। वहीं, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने कहा था कि कोरेक्स का नशा रीवा में युवाओं को खोखला कर रहा है। आज जरूरत है कि युवा दृढ़ संकल्प लें और इस तरह की नशे से बचें। नशे की लत शरीर और दिमाग दोनों को तबाह करती है
रीवा के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आशय द्विवेदी का कहना है कि किसी भी तरह के नशे की लत बेहद खतरनाक हो सकती है। इससे व्यक्ति का मानसिक संतुलन बिगड़ने लगता है और शरीर पर भी गंभीर असर पड़ता है। उन्होंने बताया कि ऐसी लत से हेपेटाइटिस-सी जैसी संक्रामक बीमारियां, मिर्गी जैसे दौरे और कई बार आत्महत्या के विचार तक आने लगते हैं। CSP बोले- एम्बुलेंस से तस्करी में मुख्य आरोपी गिरफ्तार
सीएसपी राजीव पाठक ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि नशीली कफ सिरप के अवैध कारोबार में शामिल एक एम्बुलेंस संचालक को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी की पहचान नितिन द्विवेदी उर्फ मंकी के रूप में हुई है। मंकी नेटवर्क में शामिल तीन और आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने मुख्य आरोपी नितिन द्विवेदी उर्फ मंकी के साथ मिलकर नशीली कफ सिरप की तस्करी में सहयोग करने वाले फारुक उर्फ लाला पिता खालिद खान (21), निवासी बिछिया, राजू उर्फ मिथलेश पिता शिवचरण पटेल (32) निवासी नेहरू नगर और दिलसाद पिता वजूद खान (31) निवासी, जगन्नाथ मंदिर को भी पकड़ा है। अब इनसे पूछताछ कर सप्लाई चेन और बाकी सहयोगियों का पता लगाया जाएगा।
मध्य प्रदेश में जहरीला कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से अब तक 25 बच्चों की मौत हो चुकी है। छिंदवाड़ा, बैतूल और पांढुर्णा जिलाें में मामले सामने आने के बाद से ही प्रदेश के हर जिले में गांव से लेकर मुख्यालय तक मेडिकल स्टोर, एजेंसी और क्लिनिक पर जांच कर अमानक दवाइयां जब्त की जा रही हैं। इसी बीच रीवा जिले में एम्बुलेंस से कफ सिरप की अवैध सप्लाई की जा रही है। दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया है कि रीवा में अब एम्बुलेंस नशे की खेप ढोने का सबसे सुरक्षित माध्यम बन गई हैं। पुलिस ने इस तस्करी के मास्टरमाइंड नितिन द्विवेदी उर्फ मंकी को गिरफ्तार किया है। वह पुलिस-प्रशासन को चकमा देकर एंबुलेंस की आड़ में पूरे शहर में कफ सिरप सप्लाई कर रहा था। प्रदेश के स्वास्थ मंत्री और डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ल का गृह जिला होने के कारण कांग्रेस इस पूरे मामले में उन्हें और सरकार काे जमकर घेर रही है। दैनिक भास्कर की टीम ने रीवा में ऐसे सात ठिकानों पर हो रही अवैध सप्लाई को अपने कैमरे में कैद किया है। पढ़िए, रिपाेर्ट… कांग्रेस ने कहा- रीवा नशीली सिरप का सबसे बड़ा गढ़
रीवा की कोतवाली पुलिस ने रविवार को चार युवकों को पकड़ा। शुरुआत में पुलिस इस बात को नकारती रही कि उनसे कुछ बरामद हुआ है। लेकिन भास्कर की पड़ताल में एएसपी ने माना कि एक एम्बुलेंस से कफ सिरप की तस्करी की जा रही थी। छिंदवाड़ा में हुई बच्चों की मौत के सिलसिले में मंगलवार को नई दिल्ली में कांग्रेस ने प्रेस वार्ता आयोजित की। इसमें कांग्रेस नेताओं ने सरकार को घेरा। इस दौरान उन्होंने रीवा का भी जिक्र किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि रीवा मध्य प्रदेश और देश के भीतर नशीली सिरप का सबसे बड़ा गढ़ बन गया है। यह स्वास्थ्य मंत्री का गृह जिला भी है। स्वास्थ्य मंत्री अपने खुद के जिले में आज तक नशीली सिरप की बिक्री पर रोक नहीं लगा पाए तो अन्य जगहों पर क्या रोक पाएंगे? एम्बुलेंस ड्राइवर से तस्कर बना ‘मंकी’
पुलिस के मुताबिक, रीवा में कफ सिरप की तस्करी का मास्टरमाइंड नितिन द्विवेदी उर्फ मंकी है। वह कभी एम्बुलेंस चलाता था। अब रीवा के सबसे बड़े शासकीय अस्पताल संजय गांधी अस्पताल की 70% से ज्यादा प्राइवेट एम्बुलेंस का संचालन करता है। नितिन ने अस्पताल को अवैध कारोबार का अड्डा बना दिया है। दिनभर मरीजों को लाने-ले जाने के नाम पर एम्बुलेंस चलती है, लेकिन उन्हीं एम्बुलेंस में छिपकर कफ सिरप की खेप शहर में पहुंचाई जाती है। नितिन दुबे खुद सामने नहीं आता बल्कि अपने पिता और छोटे भाई के नाम पर एम्बुलेंस चलाता है। उसके पिता आर्मी से रिटायर्ड हैं। नितिन पर डकैती, मारपीट जैसे दर्जनभर आपराधिक मामले दर्ज हैं। एम्बुलेंस कोई नहीं रोकता, इसी का फायदा उठाया
नितिन करोड़ों की संपत्ति का मालिक है। आलीशान घर, बैंक अकाउंट में मोटा बैलेंस और 10 से अधिक एम्बुलेंस उसके पिता और भाई के नाम पर रजिस्टर्ड हैं। वह कई वर्षों से रीवा में एम्बुलेंस से तस्करी का काम कर रहा था। वह भी इतनी सफाई से कि किसी को भनक तक नहीं लगी। नियमों के मुताबिक, एम्बुलेंस को कोई भी पुलिसकर्मी या सुरक्षाकर्मी जल्दी हाथ नहीं देता। वो भी जब एम्बुलेंस सायरन बजा रही हो। इसे संकेत माना जाता है कि जरूर कोई सीरियस मरीज एम्बुलेंस के भीतर इमरजेंसी कंडीशन में होगा। मरीज के लिए एक-एक मिनट बेहद कीमती होता है, यही वजह है कि एम्बुलेंस को कोई रोकता नहीं। बस नितिन दुबे उर्फ मंकी इसी बात का फायदा उठाता था और एम्बुलेंस के जरिए यूपी के रास्ते नशीली सिरप की खेप रीवा में पहुंचाने का काम करता था। इसी तरह जबलपुर से नशीली सिरप की सप्लाई की जाती है। उत्तर प्रदेश से रीवा तक बिना रोक-टोक निकल जाती है नशीली खेप
रीवा तक पहुंचने वाली नशीली सिरप के नेटवर्क की एक बड़ी कड़ी है, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से आने वाला रास्ता। यहां से महज ढाई घंटे के भीतर करीब 130 किलोमीटर का सफर तय कर सिरप की खेप रीवा तक पहुंचा दी जाती है। इस पूरे रूट में चार टोल प्लाजा और एक आरटीओ चेक पोस्ट है, लेकिन एम्बुलेंस में सवार तस्करों को कहीं भी रोकने या जांचने की कोशिश नहीं होती। इसका कारण साफ है, एम्बुलेंस को आपातकालीन सेवा मानते हुए टोल टैक्स से छूट मिली हुई है और आमतौर पर इन्हें चेकिंग से भी मुक्त रखा जाता है। ये हैं वो टोल प्लाजा और चेक पोस्ट, जहां से आसानी से गुजरते हैं तस्कर सामान्य गाड़ियों को इस रूट से आने-जाने में करीब ₹220 का खर्च आता है। लेकिन एम्बुलेंस न तो ये टोल देती है, न ही जांच की जाती है। यही वजह है कि नितिन ‘मंकी’ जैसे तस्कर इसी रूट को चुनते हैं। एकदम सुरक्षित, तेज और बिना सवाल-जवाब वाला। अगर वाहन रीवा-बैकुंठपुर-सिरमौर रोड से होकर आता है, तो करीब ₹150 का टोल टैक्स देना पड़ता है। जबलपुर के रास्ते कैसे सप्लाई हाेता है नशा… दूरी 232 KM- कई टोल प्लाजा, लेकिन कोई रोकटोक नहीं
सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं, जबलपुर से भी रीवा तक नशीली कफ सिरप की तस्करी सरेआम जारी है। रीवा और जबलपुर के बीच की दूरी लगभग 232 किलोमीटर है। इस रास्ते में भी कई टोल प्लाजा पड़ते हैं लेकिन यहां भी तस्करों को किसी तरह की अड़चन नहीं होती, क्योंकि तस्करी एम्बुलेंस के जरिए होती है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के निर्देशों के अनुसार, आपातकालीन सेवाओं में बाधा न आए इसलिए एम्बुलेंस से न कोई टोल वसूली होती है और न ही कोई पूछताछ। ये हैं जबलपुर से रीवा तक के प्रमुख टोल प्लाजा सामान्य वाहनों के लिए इन टोल पर ₹365 से ज्यादा का खर्च आता है, लेकिन एम्बुलेंस को यह रास्ता फ्री पास की तरह मिल जाता है। इसी का फायदा उठाकर रीवा के तस्कर इस रूट से भी नशीली सिरप की बड़ी खेप लाने का काम करते हैं।
भास्कर की पड़ताल में उजागर हुए 7 ठिकाने अड्डा नंबर 1- शिव मंदिर के पास, नीम के पेड़ के नीचे जावेद चिकन शॉप रोड के दूसरी ओर, हीरो एजेंसी से सीधे अंदर जाने पर भगवान शिव के मंदिर के पास नीम के पेड़ के नीचे एक गली में बाची लोनिया और उसकी बहू खुशबू लोनिया को नशीली सिरप बेचते हुए भास्कर ने कैमरे में कैद किया। अड्डा नंबर 2- मंदिर के पास, छोटी पुल के बगल की गली ईको पार्क रोड के सामने स्थित इस गली में मंदिर के बगल में रहने वाली राजभान लोनिया की पत्नी, जिसे ‘बड़की’ नाम से जाना जाता है, नशीली सिरप बेचते हुए दिखाई दी। अड्डा नंबर 3- भोलेनाथ मंदिर के पास, बगीचे की ओर जावेद चिकन शॉप रोड की विपरीत दिशा में हीरो एजेंसी से सीधे भीतर जाने पर, भोलेनाथ के मंदिर के पास नीम के पेड़ की सीध में नदी की ओर मौजूद बगीचे के पास, केही उर्फ आरती लोनिया और उसकी बेटी माला लोनिया अवैध सिरप बेचते हुए कैमरे में कैद हुईं। अड्डा नंबर 4- कबाड़ी मोहल्ला संतोष कबाड़ी की पत्नी रचनिया लोनिया और रोशनी लोनिया के घर के पास यह अड्डा सक्रिय है। भास्कर की टीम ने इन्हें भी सिरप बेचते हुए कैमरे में कैद किया। अड्डा नंबर 5- मंदिर के पास, छोटी पुल की गली ईको पार्क रोड की दूसरी ओर छोटी पुल के बगल वाली गली में स्थित मंदिर के पास संजना उर्फ आशा केवट अवैध सिरप बिक्री करते हुए पाई गई। अड्डा नंबर 6- ईको पार्क के सामने की गली मंदिर से बगीचे की ओर जाने वाली गली में, दिनेश केवट की पत्नी गुड़िया केवट को नशीली सिरप बेचते हुए भास्कर रिपोर्टर ने कैमरे में रिकॉर्ड किया। अड्डा नंबर 7- हीरो एजेंसी वाली गली जावेद चिकन शॉप के सामने वाली गली में हीरो एजेंसी से अंदर जाने पर, रानी लोनिया और उसकी बहन गीता लोनिया के घर के पास यह अड्डा चल रहा है, जहां सिरप का सौदा खुलेआम हो रहा है। SP बोले- अवैध धंधे में शामिल लोगाें पर कार्रवाई करेंगे
रीवा एसपी शैलेन्द्र सिंह ने नशीली कफ सिरप के अवैध कारोबार को लेकर स्पष्ट किया कि जिले के सभी थाना प्रभारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। विधायक ने कहा- रीवा बन चुका है ‘कोरेक्स सिटी’
कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने रीवा में नशीली कफ सिरप के बढ़ते चलन पर तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा- रीवा अब कोरेक्स सिटी बन चुका है। हालत यह है कि कलेक्ट्रेट परिसर तक में नशीली सिरप की खाली शीशियां पड़ी मिल रही हैं। सांसद ने कहा था कि नए पार्क में कोरेक्स की शीशियां मत फेंकना
रीवा में कोरेक्स के चलन की बात को सांसद जनार्दन मिश्रा से लेकर डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल तक कबूल कर चुके हैं। अटल पार्क के उद्घाटन के अवसर पर रीवा सांसद ने कहा था कि आजकल जहां देखो, वहां कोरेक्स की शीशियां पड़ी हैं। अब यह नया पार्क बनकर तैयार हुआ है। सभी से निवेदन है कि कम से कम यहां पर कोरेक्स की शीशियां न फेंके। वहीं, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने कहा था कि कोरेक्स का नशा रीवा में युवाओं को खोखला कर रहा है। आज जरूरत है कि युवा दृढ़ संकल्प लें और इस तरह की नशे से बचें। नशे की लत शरीर और दिमाग दोनों को तबाह करती है
रीवा के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आशय द्विवेदी का कहना है कि किसी भी तरह के नशे की लत बेहद खतरनाक हो सकती है। इससे व्यक्ति का मानसिक संतुलन बिगड़ने लगता है और शरीर पर भी गंभीर असर पड़ता है। उन्होंने बताया कि ऐसी लत से हेपेटाइटिस-सी जैसी संक्रामक बीमारियां, मिर्गी जैसे दौरे और कई बार आत्महत्या के विचार तक आने लगते हैं। CSP बोले- एम्बुलेंस से तस्करी में मुख्य आरोपी गिरफ्तार
सीएसपी राजीव पाठक ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि नशीली कफ सिरप के अवैध कारोबार में शामिल एक एम्बुलेंस संचालक को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी की पहचान नितिन द्विवेदी उर्फ मंकी के रूप में हुई है। मंकी नेटवर्क में शामिल तीन और आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने मुख्य आरोपी नितिन द्विवेदी उर्फ मंकी के साथ मिलकर नशीली कफ सिरप की तस्करी में सहयोग करने वाले फारुक उर्फ लाला पिता खालिद खान (21), निवासी बिछिया, राजू उर्फ मिथलेश पिता शिवचरण पटेल (32) निवासी नेहरू नगर और दिलसाद पिता वजूद खान (31) निवासी, जगन्नाथ मंदिर को भी पकड़ा है। अब इनसे पूछताछ कर सप्लाई चेन और बाकी सहयोगियों का पता लगाया जाएगा।