फरीदाबाद के बाहरी इलाकों से 10 दिन बाद यमुना नदी का पानी उतर रहा है। पीछे छोड़ रहा बर्बादी के निशान। 25 हजार की आबादी वाले गांव बसंतपुर के 500 से ज्यादा घरों में कीचड़ की 2 से 3 फीट मोटी परत चढ़ी है। घरों का सामान खराब हो चुका है। बेड-बिस्तर, कपड़े, रसोई का सामान कुछ नहीं बचा। लोग दूर से पानी ढोकर अब बार-बार घरों को धो रहे हैं। ये वो लोग हैं जो पानी बढ़ने के बाद घरों में ताले लगा दूसरे सुरक्षित इलाकों में चले गए थे। लौट तो आए हैं, लेकिन उनकी जिंदगी की दुश्वारियां कम नहीं। कई दिन से इलाके की बिजली सप्लाई कटी है। पानी की सप्लाई नहीं। अब अंधेरे में मोमबत्तियों के सहारे रात गुजार रहे हैं, इस उम्मीद में की जल्द कुछ ठीक होगा। यहां महिलाओं ने बताया कि घरों के बाहर सांप घूमते हुए दिखाई दे रहे हैं। कई तो दो से ढाई मीटर तक के हैं। यमुना का पानी आया तो रातों-रात घर छोड़ना पड़ा था। दैनिक भास्कर एप की टीम बसंतपुर गांव पहुंची। यहां लोगों को घर छोड़कर रातों-रात निकलना पड़ा था। ऐसे में लोग जरूरी सामान लेकर ही घर से निकल गए थे। 14 अगस्त को दिल्ली ओखला बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद यहां के निचले इलाकों में जलभराव शुरू हो गया था। जैसे-जैसे पानी बढ़ता गया पूरा गांव खाली होता गया। लोगों अपने रिश्तेदारों और किराए पर रहने के लिए चले गए। यमुना शांत होने और जलस्तर घटने के बाद परिवार घरों में लौट रहे हैं। 4 हजार के करीब लोग अभी भी अपने घर वापस नही लौटे है। पानी उतरने के बाद घरों में भरा कीचड़ घर की सफाई कर रहे अप्पू ने बताया कि करीब 16 साल से वो यहां पर रह रहे हैं। बाढ़ आने से कुछ महीने पहले ही पापा ने अपनी पेंशन और रिश्तेदारों से पैसा उधार लेकर घर खरीदा था। साल 2023 में आई बाढ़ में भी घर डूब गया था। अभी वो अकेले सफाई करने के लिए आए हैं। परिवार के बाकी सदस्य किराए के मकान में रह रहे हैं। रसोई का पूरा सामान बेकार हो चुका है। कभी कोई मदद करने नहीं आता। पहल भी वो अपने हालातों से खुद लड़े और इस बार भी वो खुद ही लड़ रहे हैं। कुछ थोड़ी ही दूरी पर परिवार के साथ घर से कीचड़ को निकाल रहे अहमद ने बताया कि घर में 7 फीट तक पानी भर गया था। डबल बेड, फ्रिज, अलमारी सहित दूसरे सामान पूरी तरह से खराब हो चुके हैं। दो दिन से कीचड़ निकालने में लगे, तब जाकर घर साफ हो पाया है। बिजली ना आने से रातें अंधेरे में कट रहीं नफीसा और गीता ने बताया कि रात के समय अंधेरे में रहे हैं। रात होते ही ऐसा लगता है कि पूरे गांव को अंधेरे ने निगल लिया है। शाम ढलते ही घर के गेट बंद कर लेते हैं ताकि सांप घर में ना घुसे। रात में डर तो लगता है, लेकिन रहना मजबूरी है। लोग अपनी जरूरत के हिसाब से मोमबत्ती या दूसरे उपकरणों का सहारा लेकर रात काट रहे हैं। पानी में बहकर आए सांप व अन्य जीव दिखते रहते हैं। पूरी रात डर में बीतती है। जमा पूंजी किराया चुकाने में खर्च हो गई नफीसा के घर में कोई कमाने वाला नही है। अपनी बेटी के साथ वो यहां पर करीब 7 साल पहले रहने के लिए आईं थी। पानी आने पर कोई बचाने नहीं आया। घर को छोड़कर बाहर रहने गए तो पांच दिन के ही 3000 हजार रूपए देने पड़ गए। अब जब घर आए है तो सब खत्म हो चुका है। खाना भी पड़ोस से मांगकर लाना पड़ा है। कोई 5 दिन रहकर वापस आया है तो कोई 10 दिन रहकर वापस आ गया है। ऐसे में उनको 2 हजार से लेकर 4 हजार रुपए देने पड़े। किसी ने भी महीने से कम का किराया नही दिया है। सरकार शेल्टर होम में कोई सुविधा नहीं होती, परिवार के साथ किराए पर रहना उनकी मजबूरी होती है। ब्याज पर पैसे लेकर मकान बनाया, रसोई खाली पड़ी 10 दिन बाद घर लौटीं गीता ने बताया कि बिल्डर ने झूठ बोलकर उनको जगह बेच दी। पाई-पाई जोड़कर घर तो बना लिया, लेकिन यहां चैन नहीं है। 8 महीने पहले ही यहां पर आए हैं, इससे पहले वो किराए के मकान में रहते थे। किसी से ब्याज पर पैसे लेकर मकान बनाया। लेकिन यहां पर पानी में घर छोड़ना पड़ता है। पति मजदूरी करते हैं किसी ने कोई मदद नहीं की है। घर की रसोई पूरी खाली पड़ी हुई है। अब आगे सिर पर खड़ा बीमारियों का खतरा बच्चे को गोद में उठाए घर के बाहर खड़ी शबनम बताती हैं-अब जो पानी बचा है इससे बीमारियां फैलेंगी। लेकिन यहां पर कोई मदद करने नहीं आएगा। स्वास्थ्य विभाग वाले अभी तक भी यहां पर दवाई का छिड़काव करने के लिए नहीं पहुंचे हैं। बिजली ना आने से रातें अंधेरे में पानी के कारण इस गांव में बिजली की लाइन टूट गई है, जिसके चलते बिजली विभाग अभी यहां पर बिजली की सप्लाई शुरू नहीं कर सकता है। विभाग अभी पूरी तरीके से जलभराव के खत्म होने का इंतजार कर रहा है। यहां के लोग रात के समय अंधेरे रह रहे हैं, लोग अपनी जरूरत के हिसाब से मोमबत्ती या दूसरे उपकरणों का सहारा लेकर रात के समय रहते हैं। पानी में बहकर आए जहरीले सांपों ने गांव मे जगह -जगह अपना ठिकाना बनाया हुआ है। रात के समय अंधेरे में उनके लिए घर में उनको घुसने से रोकना और भी ज्यादा चुनौती भरा हो जाता है। किराएदारों को जमकर लूटा पानी के चलते बाहर जाकर किराए पर रहकर आए गांव बसंतपुर निवासी महिला नफीसा, और अहमद ने बताया कि जहां पर वो किराए पर रहे उनसे पूरे महीने का किराया लिया गया है। कोई 5 दिन रहकर वापस आया है तो कोई 10 दिन रहकर वापस आ गया है। ऐसे में उनको 2 हजार से लेकर 4 हजार रूपए तक देने पड़े है। किसी ने भी महीने से कम का किराया नहीं दिया है। सरकार शेल्टर होम में कोई सुविधा नहीं होती, परिवार के साथ किराए पर रहना उनकी मजबूरी होती है। डीसी का दावा- 40 टीमें स्वास्थ्य की जांच कर रही डीसी विक्रम सिंह की ओर से दावा किया गया कि प्रशासन बाढ़ प्रभावित इलाके में लगातार राहत कार्य कर रहा है। बाढ़ प्रभावित इलाके में हेल्थ विभाग की 40 टीम स्वास्थ्य की जांच कर रही हैं। लोगों को दवाई उपलब्ध कराई जा रही है। गांव बसंतपुर में एम सी एफ निचले इलाकों से पानी को निकालने का काम कर रही है। जो रास्ते खराब हो चुके है उनको जल्द ही बनाया जाएगा।
फरीदाबाद के बाहरी इलाकों से 10 दिन बाद यमुना नदी का पानी उतर रहा है। पीछे छोड़ रहा बर्बादी के निशान। 25 हजार की आबादी वाले गांव बसंतपुर के 500 से ज्यादा घरों में कीचड़ की 2 से 3 फीट मोटी परत चढ़ी है। घरों का सामान खराब हो चुका है। बेड-बिस्तर, कपड़े, रसोई का सामान कुछ नहीं बचा। लोग दूर से पानी ढोकर अब बार-बार घरों को धो रहे हैं। ये वो लोग हैं जो पानी बढ़ने के बाद घरों में ताले लगा दूसरे सुरक्षित इलाकों में चले गए थे। लौट तो आए हैं, लेकिन उनकी जिंदगी की दुश्वारियां कम नहीं। कई दिन से इलाके की बिजली सप्लाई कटी है। पानी की सप्लाई नहीं। अब अंधेरे में मोमबत्तियों के सहारे रात गुजार रहे हैं, इस उम्मीद में की जल्द कुछ ठीक होगा। यहां महिलाओं ने बताया कि घरों के बाहर सांप घूमते हुए दिखाई दे रहे हैं। कई तो दो से ढाई मीटर तक के हैं। यमुना का पानी आया तो रातों-रात घर छोड़ना पड़ा था। दैनिक भास्कर एप की टीम बसंतपुर गांव पहुंची। यहां लोगों को घर छोड़कर रातों-रात निकलना पड़ा था। ऐसे में लोग जरूरी सामान लेकर ही घर से निकल गए थे। 14 अगस्त को दिल्ली ओखला बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद यहां के निचले इलाकों में जलभराव शुरू हो गया था। जैसे-जैसे पानी बढ़ता गया पूरा गांव खाली होता गया। लोगों अपने रिश्तेदारों और किराए पर रहने के लिए चले गए। यमुना शांत होने और जलस्तर घटने के बाद परिवार घरों में लौट रहे हैं। 4 हजार के करीब लोग अभी भी अपने घर वापस नही लौटे है। पानी उतरने के बाद घरों में भरा कीचड़ घर की सफाई कर रहे अप्पू ने बताया कि करीब 16 साल से वो यहां पर रह रहे हैं। बाढ़ आने से कुछ महीने पहले ही पापा ने अपनी पेंशन और रिश्तेदारों से पैसा उधार लेकर घर खरीदा था। साल 2023 में आई बाढ़ में भी घर डूब गया था। अभी वो अकेले सफाई करने के लिए आए हैं। परिवार के बाकी सदस्य किराए के मकान में रह रहे हैं। रसोई का पूरा सामान बेकार हो चुका है। कभी कोई मदद करने नहीं आता। पहल भी वो अपने हालातों से खुद लड़े और इस बार भी वो खुद ही लड़ रहे हैं। कुछ थोड़ी ही दूरी पर परिवार के साथ घर से कीचड़ को निकाल रहे अहमद ने बताया कि घर में 7 फीट तक पानी भर गया था। डबल बेड, फ्रिज, अलमारी सहित दूसरे सामान पूरी तरह से खराब हो चुके हैं। दो दिन से कीचड़ निकालने में लगे, तब जाकर घर साफ हो पाया है। बिजली ना आने से रातें अंधेरे में कट रहीं नफीसा और गीता ने बताया कि रात के समय अंधेरे में रहे हैं। रात होते ही ऐसा लगता है कि पूरे गांव को अंधेरे ने निगल लिया है। शाम ढलते ही घर के गेट बंद कर लेते हैं ताकि सांप घर में ना घुसे। रात में डर तो लगता है, लेकिन रहना मजबूरी है। लोग अपनी जरूरत के हिसाब से मोमबत्ती या दूसरे उपकरणों का सहारा लेकर रात काट रहे हैं। पानी में बहकर आए सांप व अन्य जीव दिखते रहते हैं। पूरी रात डर में बीतती है। जमा पूंजी किराया चुकाने में खर्च हो गई नफीसा के घर में कोई कमाने वाला नही है। अपनी बेटी के साथ वो यहां पर करीब 7 साल पहले रहने के लिए आईं थी। पानी आने पर कोई बचाने नहीं आया। घर को छोड़कर बाहर रहने गए तो पांच दिन के ही 3000 हजार रूपए देने पड़ गए। अब जब घर आए है तो सब खत्म हो चुका है। खाना भी पड़ोस से मांगकर लाना पड़ा है। कोई 5 दिन रहकर वापस आया है तो कोई 10 दिन रहकर वापस आ गया है। ऐसे में उनको 2 हजार से लेकर 4 हजार रुपए देने पड़े। किसी ने भी महीने से कम का किराया नही दिया है। सरकार शेल्टर होम में कोई सुविधा नहीं होती, परिवार के साथ किराए पर रहना उनकी मजबूरी होती है। ब्याज पर पैसे लेकर मकान बनाया, रसोई खाली पड़ी 10 दिन बाद घर लौटीं गीता ने बताया कि बिल्डर ने झूठ बोलकर उनको जगह बेच दी। पाई-पाई जोड़कर घर तो बना लिया, लेकिन यहां चैन नहीं है। 8 महीने पहले ही यहां पर आए हैं, इससे पहले वो किराए के मकान में रहते थे। किसी से ब्याज पर पैसे लेकर मकान बनाया। लेकिन यहां पर पानी में घर छोड़ना पड़ता है। पति मजदूरी करते हैं किसी ने कोई मदद नहीं की है। घर की रसोई पूरी खाली पड़ी हुई है। अब आगे सिर पर खड़ा बीमारियों का खतरा बच्चे को गोद में उठाए घर के बाहर खड़ी शबनम बताती हैं-अब जो पानी बचा है इससे बीमारियां फैलेंगी। लेकिन यहां पर कोई मदद करने नहीं आएगा। स्वास्थ्य विभाग वाले अभी तक भी यहां पर दवाई का छिड़काव करने के लिए नहीं पहुंचे हैं। बिजली ना आने से रातें अंधेरे में पानी के कारण इस गांव में बिजली की लाइन टूट गई है, जिसके चलते बिजली विभाग अभी यहां पर बिजली की सप्लाई शुरू नहीं कर सकता है। विभाग अभी पूरी तरीके से जलभराव के खत्म होने का इंतजार कर रहा है। यहां के लोग रात के समय अंधेरे रह रहे हैं, लोग अपनी जरूरत के हिसाब से मोमबत्ती या दूसरे उपकरणों का सहारा लेकर रात के समय रहते हैं। पानी में बहकर आए जहरीले सांपों ने गांव मे जगह -जगह अपना ठिकाना बनाया हुआ है। रात के समय अंधेरे में उनके लिए घर में उनको घुसने से रोकना और भी ज्यादा चुनौती भरा हो जाता है। किराएदारों को जमकर लूटा पानी के चलते बाहर जाकर किराए पर रहकर आए गांव बसंतपुर निवासी महिला नफीसा, और अहमद ने बताया कि जहां पर वो किराए पर रहे उनसे पूरे महीने का किराया लिया गया है। कोई 5 दिन रहकर वापस आया है तो कोई 10 दिन रहकर वापस आ गया है। ऐसे में उनको 2 हजार से लेकर 4 हजार रूपए तक देने पड़े है। किसी ने भी महीने से कम का किराया नहीं दिया है। सरकार शेल्टर होम में कोई सुविधा नहीं होती, परिवार के साथ किराए पर रहना उनकी मजबूरी होती है। डीसी का दावा- 40 टीमें स्वास्थ्य की जांच कर रही डीसी विक्रम सिंह की ओर से दावा किया गया कि प्रशासन बाढ़ प्रभावित इलाके में लगातार राहत कार्य कर रहा है। बाढ़ प्रभावित इलाके में हेल्थ विभाग की 40 टीम स्वास्थ्य की जांच कर रही हैं। लोगों को दवाई उपलब्ध कराई जा रही है। गांव बसंतपुर में एम सी एफ निचले इलाकों से पानी को निकालने का काम कर रही है। जो रास्ते खराब हो चुके है उनको जल्द ही बनाया जाएगा।