मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (MPCA) की कमान सिंधिया परिवार की तीसरी पीढ़ी की हाथ में होगी। महानआर्यमन सिंधिया का MPCA प्रेसिडेंट बनना तय हो गया है। एमपीसीए चुनाव के लिए शनिवार को नामांकन की अंतिम तिथि थी, लेकिन महानआर्यमन के अलावा प्रेसिडेंट पद के लिए अन्य किसी ने भी नामांकन नहीं भरा है। इससे पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री माधवराव सिंधिया और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मप्र क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके हैं। महानआर्यमन एमपीसीए के सबसे युवा अध्यक्ष होंगे। नई कार्यकारिणी का चुनाव 2 सितंबर को होना है। 30 अगस्त तक नामांकन की अंतिम तिथि थी। नई कार्यकारिणी मंगलवार को एमपीसीए की एजीएम में तीन साल के लिए चुन ली जाएगी। इसमें शामिल होने के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया और महानआर्यमन 1 सितंबर को इंदौर पहुंच जाएंगे। महानआर्यमन अभी एमपीसीए के सदस्य
29 साल के महानआर्यमन सिंधिया जल्द ही राजनीति में कदम रखने वाले हैं। इसके पीछे दो वजहों पर जोर दिया जा रहा है। पहली ये कि माधवराव सिंधिया, फिर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने क्रिकेट एसोसिएशन के जरिए ही राजनीति में कदम रखा था। महानआर्यमन वर्तमान में ग्वालियर क्रिकेट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष है और एमपीसीए के सदस्य है। ज्वाइंट सेक्रेटरी पद के लिए दो फार्म आए
एमपीसीए सदस्य राजू चौहान ने बताया कि एक पद पर दो उम्मीदवार हैं। हमें उम्मीद है कि अभी एक दिन है। सहमति से पूरी नई मैनेजिंग कमेटी बनेगी। तीन अतिरिक्त फॉर्म अमरदीप पठानिया, प्रेम पटेल और राजेश भार्गव ने लिए थे। केवल पठानिया ने ही ज्वाइंट सेक्रेटरी पद के लिए नाम भरा है। चुनाव अधिकारी 31 को करेंगे नाम प्रकाशित
– 31 अगस्त को नामांकन फॉर्म की स्क्रूटनी चुनाव अधिकारी द्वारा और नाम प्रकाशन।
– 1 सितंबर को नाम वापसी ।
– 2 सितंबर को एजीएम, काउंटिंग व रिजल्ट। 2012 में सिंधिया ने हराया था विजयवर्गीय को
2012 में एमपीसीए के चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी पैनल ने एकतरफा जीत हासिल की थी। पूरी ताकत झोंकने के बावजूद कैलाश विजयवर्गीय पैनल का एक भी उम्मीदवार जीत नहीं सका था। विजयवर्गीय को सिंधिया ने 77 वोटों से पटखनी दी थी। सिंधिया को 150 जबकि विजयवर्गीय को 73 मत ही मिले थी। सिंधिया को कहा था छोटा नेता
2010 में एमपीसीए के चुनाव के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कैलाश विजयवर्गीय को 10 वोट से हराया था। हार के बाद कैलाश ने सिंधिया को छोटा नेता बताया था। 2019 में यह रहा था परिणाम
मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (MPCA) की कमान सिंधिया परिवार की तीसरी पीढ़ी की हाथ में होगी। महानआर्यमन सिंधिया का MPCA प्रेसिडेंट बनना तय हो गया है। एमपीसीए चुनाव के लिए शनिवार को नामांकन की अंतिम तिथि थी, लेकिन महानआर्यमन के अलावा प्रेसिडेंट पद के लिए अन्य किसी ने भी नामांकन नहीं भरा है। इससे पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री माधवराव सिंधिया और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मप्र क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके हैं। महानआर्यमन एमपीसीए के सबसे युवा अध्यक्ष होंगे। नई कार्यकारिणी का चुनाव 2 सितंबर को होना है। 30 अगस्त तक नामांकन की अंतिम तिथि थी। नई कार्यकारिणी मंगलवार को एमपीसीए की एजीएम में तीन साल के लिए चुन ली जाएगी। इसमें शामिल होने के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया और महानआर्यमन 1 सितंबर को इंदौर पहुंच जाएंगे। महानआर्यमन अभी एमपीसीए के सदस्य
29 साल के महानआर्यमन सिंधिया जल्द ही राजनीति में कदम रखने वाले हैं। इसके पीछे दो वजहों पर जोर दिया जा रहा है। पहली ये कि माधवराव सिंधिया, फिर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने क्रिकेट एसोसिएशन के जरिए ही राजनीति में कदम रखा था। महानआर्यमन वर्तमान में ग्वालियर क्रिकेट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष है और एमपीसीए के सदस्य है। ज्वाइंट सेक्रेटरी पद के लिए दो फार्म आए
एमपीसीए सदस्य राजू चौहान ने बताया कि एक पद पर दो उम्मीदवार हैं। हमें उम्मीद है कि अभी एक दिन है। सहमति से पूरी नई मैनेजिंग कमेटी बनेगी। तीन अतिरिक्त फॉर्म अमरदीप पठानिया, प्रेम पटेल और राजेश भार्गव ने लिए थे। केवल पठानिया ने ही ज्वाइंट सेक्रेटरी पद के लिए नाम भरा है। चुनाव अधिकारी 31 को करेंगे नाम प्रकाशित
– 31 अगस्त को नामांकन फॉर्म की स्क्रूटनी चुनाव अधिकारी द्वारा और नाम प्रकाशन।
– 1 सितंबर को नाम वापसी ।
– 2 सितंबर को एजीएम, काउंटिंग व रिजल्ट। 2012 में सिंधिया ने हराया था विजयवर्गीय को
2012 में एमपीसीए के चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी पैनल ने एकतरफा जीत हासिल की थी। पूरी ताकत झोंकने के बावजूद कैलाश विजयवर्गीय पैनल का एक भी उम्मीदवार जीत नहीं सका था। विजयवर्गीय को सिंधिया ने 77 वोटों से पटखनी दी थी। सिंधिया को 150 जबकि विजयवर्गीय को 73 मत ही मिले थी। सिंधिया को कहा था छोटा नेता
2010 में एमपीसीए के चुनाव के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कैलाश विजयवर्गीय को 10 वोट से हराया था। हार के बाद कैलाश ने सिंधिया को छोटा नेता बताया था। 2019 में यह रहा था परिणाम