जबलपुर में 10 साल से छिपकर रह रहे एक अफगानी नागरिक को एटीएस (एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड) ने गिरफ्तार किया है। सूत्रों के अनुसार, एटीएस की टीम एक सप्ताह से लगातार उस पर निगरानी रखे हुए थी। शुक्रवार को उसे जबलपुर शहर के छोटी ओमती इलाके से पकड़ा गया। जबलपुर पुलिस को एटीएस की इस पूरी कार्रवाई की भनक तक नहीं लगी। गिरफ्तार युवक का नाम सोहबत खान है, जो किराए के मकान में रहकर प्राइवेट नौकरी कर रहा था। फिलहाल एटीएस उसे किसी अज्ञात स्थान पर ले गई है। उसके पास से कई अहम दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। पश्चिम बंगाल से होते हुए भोपाल और फिर जबलपुर आया
सूत्रों के अनुसार, अफगानी नागरिक सोहबत खान 2015 में एक काम के सिलसिले में पश्चिम बंगाल से होते हुए भोपाल और फिर जबलपुर आया था। इसके बाद सोहबत ने जबलपुर के छोटी ओमती इलाके में रहने वाली एक महिला से दोस्ती की और बाद में उससे निकाह कर साथ रहने लगा। पिछले 10 सालों के दौरान सोहबत ने शहर में कई जगह प्राइवेट जॉब भी किए। अफगानियों के नकली पासपोर्ट बनवाने की कोशिश कर रहा था
सूत्रों के मुताबिक, सोहबत खान अपने अफगानी साथियों से लगातार संपर्क में था। वह जबलपुर के पासपोर्ट कार्यालय और यहां के लोकल एड्रेस के माध्यम से अफगानियों के नकली पासपोर्ट बनवाने की लगातार कोशिश कर रहा था। 20 से ज्यादा अफगानी युवक अपनी पहचान छिपाकर रह रहे थे
एटीएस को जांच के दौरान ये भी पता चला है कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में 20 से ज्यादा अफगानी युवक बिना कोई जानकारी दिए अपनी मूल पहचान छिपाकर रह रहे थे। सोहबत के 2 सहयोगी भी अरेस्ट, दोनों को भोपाल ले गई ATS
एटीएस ने सोहबत खान के अलावा उसके सहयोगी विजयनगर निवासी दिनेश गर्ग पिता श्रवण गर्ग और कटंगा रोड निवासी महेंद्र कुमार पिता माधव प्रसाद को भी गिरफ्तार किया है। इनसे भी पूछताछ की जा रही है। पता चला है कि गिरफ्तार करने के बाद एटीएस इन्हें भोपाल ले गई है। एटीएस को अभी तक जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी सोहबत खान ने 2015 में जबलपुर से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया था। 2020 में भारतीय पासपोर्ट भी बनवा लिया था। इतना ही नहीं आधार कार्ड और पासपोर्ट बनवाने से ठीक पहले पश्चिम बंगाल की जगह जबलपुर का फर्जी पता ऑनलाइन तरीके से बदला। इसके साथ ही जबलपुर के स्थानीय युवकों के दस्तावेज बनवाने, पुलिस वेरिफिकेशन करवाने और पोस्ट ऑफिस से पासपोर्ट प्राप्त करवाने की एवज में जमकर पैसे भी खर्च किए गए। आरोपी सोहबत खान का सहयोगी दिनेश गर्ग वन विभाग में गार्ड है। बीते 2 सालों से वह कलेक्ट्रेट के चुनाव सेल में काम कर रहा है। इसी तरह की ये खबर भी पढ़ें…
भोपाल में किन्नर बनकर रह रहा था बांग्लादेशी अब्दुल कलाम भोपाल पुलिस ने शहर के बुधवारा क्षेत्र से बांग्लादेशी नागरिक अब्दुल कलाम को हिरासत में लिया है। वह पहचान बदलकर कई सालों से यहां रह रहा था। लोग उसे नेहा नाम से जानते हैं। इसी नाम से उसने अपना पहचान पत्र भी बनवा रखा है। उसके फर्जी पहचान पत्र को भी कब्जे में ले लिया गया है। पढ़ें पूरी खबर…
जबलपुर में 10 साल से छिपकर रह रहे एक अफगानी नागरिक को एटीएस (एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड) ने गिरफ्तार किया है। सूत्रों के अनुसार, एटीएस की टीम एक सप्ताह से लगातार उस पर निगरानी रखे हुए थी। शुक्रवार को उसे जबलपुर शहर के छोटी ओमती इलाके से पकड़ा गया। जबलपुर पुलिस को एटीएस की इस पूरी कार्रवाई की भनक तक नहीं लगी। गिरफ्तार युवक का नाम सोहबत खान है, जो किराए के मकान में रहकर प्राइवेट नौकरी कर रहा था। फिलहाल एटीएस उसे किसी अज्ञात स्थान पर ले गई है। उसके पास से कई अहम दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। पश्चिम बंगाल से होते हुए भोपाल और फिर जबलपुर आया
सूत्रों के अनुसार, अफगानी नागरिक सोहबत खान 2015 में एक काम के सिलसिले में पश्चिम बंगाल से होते हुए भोपाल और फिर जबलपुर आया था। इसके बाद सोहबत ने जबलपुर के छोटी ओमती इलाके में रहने वाली एक महिला से दोस्ती की और बाद में उससे निकाह कर साथ रहने लगा। पिछले 10 सालों के दौरान सोहबत ने शहर में कई जगह प्राइवेट जॉब भी किए। अफगानियों के नकली पासपोर्ट बनवाने की कोशिश कर रहा था
सूत्रों के मुताबिक, सोहबत खान अपने अफगानी साथियों से लगातार संपर्क में था। वह जबलपुर के पासपोर्ट कार्यालय और यहां के लोकल एड्रेस के माध्यम से अफगानियों के नकली पासपोर्ट बनवाने की लगातार कोशिश कर रहा था। 20 से ज्यादा अफगानी युवक अपनी पहचान छिपाकर रह रहे थे
एटीएस को जांच के दौरान ये भी पता चला है कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में 20 से ज्यादा अफगानी युवक बिना कोई जानकारी दिए अपनी मूल पहचान छिपाकर रह रहे थे। सोहबत के 2 सहयोगी भी अरेस्ट, दोनों को भोपाल ले गई ATS
एटीएस ने सोहबत खान के अलावा उसके सहयोगी विजयनगर निवासी दिनेश गर्ग पिता श्रवण गर्ग और कटंगा रोड निवासी महेंद्र कुमार पिता माधव प्रसाद को भी गिरफ्तार किया है। इनसे भी पूछताछ की जा रही है। पता चला है कि गिरफ्तार करने के बाद एटीएस इन्हें भोपाल ले गई है। एटीएस को अभी तक जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी सोहबत खान ने 2015 में जबलपुर से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया था। 2020 में भारतीय पासपोर्ट भी बनवा लिया था। इतना ही नहीं आधार कार्ड और पासपोर्ट बनवाने से ठीक पहले पश्चिम बंगाल की जगह जबलपुर का फर्जी पता ऑनलाइन तरीके से बदला। इसके साथ ही जबलपुर के स्थानीय युवकों के दस्तावेज बनवाने, पुलिस वेरिफिकेशन करवाने और पोस्ट ऑफिस से पासपोर्ट प्राप्त करवाने की एवज में जमकर पैसे भी खर्च किए गए। आरोपी सोहबत खान का सहयोगी दिनेश गर्ग वन विभाग में गार्ड है। बीते 2 सालों से वह कलेक्ट्रेट के चुनाव सेल में काम कर रहा है। इसी तरह की ये खबर भी पढ़ें…
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