केंद्र सरकार देश के 26 करोड़ स्कूली बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत स्कूल में ही जांचने जा रही है। आयुष्मान भारत स्कूल स्वास्थ्य मिशन का पहला ट्रायल त्रिपुरा में सफल रहा है। इसके तहत 30 पैरामीटर पर स्कूल में ही 18 साल तक के बच्चों की स्वास्थ्य मॉनिटरिंग की गई। इनमें चोट, हिंसा, बेइज्जती, असुरक्षित संबंध, मानसिक और भावनात्मक डिसऑर्डर, आक्रामकता, हडि्डयों के विकार, दुबलापन-मोटापा, आंखों की रोशनी, त्वचा रोग, खून की कमी आदि की जांच-परख हुईं। इससे बच्चों की समय पर काउंसलिंग और मेडिकल जांचों की राह खुली। इसलिए अब इसे देशभर में लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। हालांकि 34 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के 388 जिलों के 30 हजार स्कूलों में 1.50 करोड़ बच्चों पर भी ट्रायल चल रहे हैं। इसके परिणाम आने हैं। यह मिशन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय की संयुक्त पहल है, जिसे चरणबद्ध रूप से देशभर के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में लागू किया जाना है। शुरुआत छोटे राज्यों से होगी। इन राज्यों में इसी वित्त वर्ष में लागू होगी योजना
दोनों मंत्रालयों से जुड़े अधिकारियों की मानें तो कुछ छोटे राज्यों जैसे पुद्दुचेरी, चंडीगढ़, मेघालय और मिजोरम जैसे राज्यों में चालू वित्त वर्ष के दौरान यह योजना लागू होगी, क्योंकि इन राज्यों में स्कूलों की मैपिंग आसान है। देशभर में इसे लागू करने से पहले कुछ तकनीकी व व्यवहारिक समस्याएं दूर की जानी हैं। जैसे- हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर नामित करने में कहीं महिला और पुरुष शिक्षकों की पर्याप्त संख्या में कमी, वांक्षित उम्र (45 साल तक) का नहीं होना, वेलनेस डे (मंगलवार) का संतुलन नहीं बनना आदि। आयुष्मान स्कूल मिशन क्या है, 4 पॉइंट ———————– ये खबर भी पढ़ें… 70+ उम्र वाले सभी को 5 लाख तक फ्री इलाज: आयुष्मान योजना के तहत लाभ केंद्र सरकार ने पिछले साल आयुष्मान भारत योजना को और विस्तार दे दिया था। अब 70 साल से ऊपर के सभी बुजुर्गों को इस योजना का लाभ मिल रहा है। इसके तहत हर साल 5 लाख रुपए तक का इलाज मुफ्त कराया जा सकता है। सरकार के मुताबिक, 6 करोड़ सीनियर सिटिजंस इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। इसमें देश के करीब 4.5 करोड़ परिवार शामिल होंगे। पूरी खबर पढ़ें…
केंद्र सरकार देश के 26 करोड़ स्कूली बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत स्कूल में ही जांचने जा रही है। आयुष्मान भारत स्कूल स्वास्थ्य मिशन का पहला ट्रायल त्रिपुरा में सफल रहा है। इसके तहत 30 पैरामीटर पर स्कूल में ही 18 साल तक के बच्चों की स्वास्थ्य मॉनिटरिंग की गई। इनमें चोट, हिंसा, बेइज्जती, असुरक्षित संबंध, मानसिक और भावनात्मक डिसऑर्डर, आक्रामकता, हडि्डयों के विकार, दुबलापन-मोटापा, आंखों की रोशनी, त्वचा रोग, खून की कमी आदि की जांच-परख हुईं। इससे बच्चों की समय पर काउंसलिंग और मेडिकल जांचों की राह खुली। इसलिए अब इसे देशभर में लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। हालांकि 34 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के 388 जिलों के 30 हजार स्कूलों में 1.50 करोड़ बच्चों पर भी ट्रायल चल रहे हैं। इसके परिणाम आने हैं। यह मिशन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय की संयुक्त पहल है, जिसे चरणबद्ध रूप से देशभर के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में लागू किया जाना है। शुरुआत छोटे राज्यों से होगी। इन राज्यों में इसी वित्त वर्ष में लागू होगी योजना
दोनों मंत्रालयों से जुड़े अधिकारियों की मानें तो कुछ छोटे राज्यों जैसे पुद्दुचेरी, चंडीगढ़, मेघालय और मिजोरम जैसे राज्यों में चालू वित्त वर्ष के दौरान यह योजना लागू होगी, क्योंकि इन राज्यों में स्कूलों की मैपिंग आसान है। देशभर में इसे लागू करने से पहले कुछ तकनीकी व व्यवहारिक समस्याएं दूर की जानी हैं। जैसे- हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर नामित करने में कहीं महिला और पुरुष शिक्षकों की पर्याप्त संख्या में कमी, वांक्षित उम्र (45 साल तक) का नहीं होना, वेलनेस डे (मंगलवार) का संतुलन नहीं बनना आदि। आयुष्मान स्कूल मिशन क्या है, 4 पॉइंट ———————– ये खबर भी पढ़ें… 70+ उम्र वाले सभी को 5 लाख तक फ्री इलाज: आयुष्मान योजना के तहत लाभ केंद्र सरकार ने पिछले साल आयुष्मान भारत योजना को और विस्तार दे दिया था। अब 70 साल से ऊपर के सभी बुजुर्गों को इस योजना का लाभ मिल रहा है। इसके तहत हर साल 5 लाख रुपए तक का इलाज मुफ्त कराया जा सकता है। सरकार के मुताबिक, 6 करोड़ सीनियर सिटिजंस इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। इसमें देश के करीब 4.5 करोड़ परिवार शामिल होंगे। पूरी खबर पढ़ें…