पंजाब की भगवंत मान सरकार नई लैंड पूलिंग पॉलिसी लेकर आई है। इसके तहत राज्य भर में बड़े शहरों के साथ ही छोटे कस्बों में अर्बन एस्टेट के लिए जमीन ली जाएगी। इसके पीछे सरकार की सोच बताई गई कि उचित तरीके से शहरी विकास हो। सरकार पब्लिक नोटिस दे चुकी है। इसी के साथ ही पॉलिसी का विरोध शुरू हो गया। उनका कहना है कि यह स्कीम किसानों के साथ धोखा है। विरोध बढ़ा तो सरकार को कैबिनेट मीटिंग बुलानी पड़ी। CM मान ने खुद सामने आकर कई बातें बताईं। यहां तक कहा कि लैंड पूलिंग को लेकर विरोधी दल अफवाहें फैला रहे हैं, जबकि ऐसा नहीं है। दैनिक भास्कर की टीम ने जानने की कोशिश की कि क्या है लैंड पूलिंग पॉलिसी और क्यों हो रहा इसका विरोध? और क्या कहते हैं एक्सपर्ट? ऐसे ही सवालों और जवाबों के साथ पढ़ें पूरी रिपोर्ट… 1. मान सरकार की लैंड पूलिंग पॉलिसी क्या है? पहली बार कब लाई गई?
जवाब : पंजाब में लैंड पूलिंग पॉलिसी पहली बार अकाली सरकार के समय साल 2011 में लाई गई थी। इसे पहले कैप्टन सरकार ने, फिर मान सरकार ने आगे बढ़ाते हुए पॉलिसी में कुछ संशोधन किए। इसके बाद जून 2025 को पंजाब कैबिनेट ने नई लैंड पूलिंग पॉलिसी को मंजूरी दी। इसके अनुसार, प्रदेशभर में अलग-अलग स्थानों पर जमीन अधिग्रहण कर इलाकों को विकसित किया जाएगा। इनमें इंडस्ट्रियल, कॉमर्शियल और रिहायशी सेक्टर बनेंगे। जिन लोगों से जमीन ली जाएगी, उन्हें उस जमीन की कीमत नहीं मिलेगी, बल्कि जमीन के अनुपात में कॉमर्शियल और रिहायशी प्लॉट दिए जाएंगे। यह प्रॉपर्टी उसी एरिया में दी जाएगी, जिसे सरकार विकसित करेगी। 2. सरकार ने लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत क्या नए प्रावधान किए हैं?
जवाब : मान सरकार के दावे के मुताबिक, उन्होंने पॉलिसी में मुख्य रूप से 2 बदलाव किए हैं। पहला यह कि जमीन का मालिक अपनी मर्जी से जमीन देना चाहे तो दे सकता है। यदि जमीन नहीं देना चाहता है तो सरकार उससे जबरदस्ती नहीं करेगी। पहले यह था कि सरकार एरिया में प्रोजेक्ट घोषित करती थी और उसके अधीन आने वाली पूरी जमीन अधिग्रहित कर ली जाती थी। वहीं, दूसरा बदलाव यह है कि सरकार 21 दिन के अंदर लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) देने का दावा कर रही है। इसका मतलब है कि यदि सरकार कोई जमीन अधिग्रहित कर बदले में जमीन के मालिक को प्लॉट अलॉट करती है तो 21 दिन के अंदर जमीन के मालिक को LOI दे दिया जाएगा। इसके बार जमीन का मालिक जमीन को जैसे चाहे, वैसे इस्तेमाल कर पाएगा। पहले इसमें 6 महीने तक लग जाते थे। 3. नई पॉलिसी में जमीन अधिग्रहण की क्या प्रक्रिया है?
जवाब : सरकार की नई पॉलिसी के मुताबिक, पहले अर्बन एरिया डेवेलप करने के लिए जमीन चिह्नित होगी। फिर इसका नोटिफिकेशन जारी कर जमीन मालिकों को सूचित किया जाएगा। हालांकि, सरकार के दावे के मुताबिक, जमीन मालिक चाहे तो अपनी जमीन अपने पास ही रख सकता है। लेकिन, जो लोग जमीन देना चहेंगे, उन्हें सरकार योजना में शामिल करते हुए 50 हजार रुपए का चेक देगी। इसके बाद भूमि मालिक को एक कनाल अधिग्रहित भूमि के बदले 125 वर्ग गज का रिहायशी प्लॉट और 25 वर्ग गज व्यवसायिक भूमि दिया जाएगा। मतलब यह है कि जितनी जमीन ली जाएगी, सरकार उसके बदले 33 से 38 प्रतिशत जमीन प्लॉट के रूप में वापस करेगी। हालांकि, उसकी कीमत अधिग्रहित की गई जमीन के बराबर ही होगी। हालांकि, अगर कोई जमीन मालिक कॉमर्शियल प्लॉट नहीं लेना चाहता है, तो उसके बदले उसे 3 गुना अधिक रिहायशी प्लॉट मिलेगा। यानी एक एकड़ जमीन देने वाले किसान को यदि 200 वर्ग गज का कॉमर्शियल प्लॉट नहीं चाहिए, तो उसके बदले 600 गज रिहायशी प्लॉट दिया जाएगा। सरकार का यह भी दावा है कि जमीन अधिग्रहण के बाद मालिक को जब तक बदले में प्लॉट अलॉट नहीं हो जाता, तब तक हर सार उसे 1 लाख रुपए सालाना मुआवजा दिया जाएगा। इस पर हर साल 10% का ब्याज भी दिया जाएगा। 4. क्या नोटिफिकेशन जारी होने के साथ ही जमीन मालिकों का जमीन से हक खत्म हो जाएगा?
जवाब : सरकार का दावा है कि अर्बन स्टेट बनाने का केवल नोटिफिकेशन जारी होने से जमीन मालिकों की जमीन नहीं चली जाएगी। जब तक जमीन का अधिग्रहण नहीं हो जाता, तब तक जमीन मालिक अपनी जमीन का अपनी मर्जी से इस्तेमाल कर सकते हैं। वह खेती कर सकते हैं, जमीन बेच सकते हैं, इस पर लोन भी ले सकते हैं। इसके अलावा नोटिफिकेशन के बाद सारी जमीन एक साथ अधिग्रहित नहीं की जाएगी। हर एरिया में अलग-अलग जगह चिह्नित की गई हैं, जिनमें लैंड पूलिंग का विकल्प दिया गया है। 5. सरकार की नई पॉलिसी का विरोध क्यों हो रहा? इसके पीछे क्या तर्क हैं?
जवाब : इसे लेकर जमीन मामलों के जानकार मनिक गोयल माहिर बताते हैं कि सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि जो 65,523 एकड़ जमीन अधिग्रहण करने का नोटिफिकेशन जारी किया है, उसका होगा क्या? यह जमीन कब तक विकसित होगी? मनिक गोयल के अनुसार, दूसरा पॉइंट यह है कि सरकार ने नीति को स्वैच्छिक कहा गया है, लेकिन नोटिफिकेशन के बाद जमीन पर मकान निर्माण या लोन लेने की पाबंदियां लगने से यह जबरन अधिग्रहण जैसा ही लगता है। नोटिफिकेशन जारी होने की वजह से अधिकारी लोगों की जमीनों की रजिस्ट्रियां भी नहीं कर रहे हैं। वहीं, तीसरा पॉइंट यह भी है कि मान सरकार ने जमीन अधिग्रहण के बाद उसके विकसित होने तक जमीन के मालिक को 30 हजार रुपए सालाना भत्ता देना तय किया। हालांकि, विरोध के बाद उसे 50 हजार रुपए सालाना कर दिया। लेकिन, सरकार ने जमीनों का सर्वे किए बिना इनका सालाना भत्ता तय कैसे कर दिया? जबकि, ठेके पर इन जमीनों का सालाना 80 हजार रुपए तक मिल रहा है। चौथा पॉइंट भारतीय किसान यूनियन लक्खोवाल के प्रधान हरिंद्र सिंह लक्खोवाल ने कहा कि जमीनों को एक्वायर कर सरकार या तो लोन लेगी, या फिर बड़े घरानों का इन पर कब्जा हो जाएगा। यदि सरकार 65 हजार एकड़ जमीन एक्वायर करती भी है तो इसे आबाद नहीं कर पाएगी। दूसरी तरफ बेशक सरकार कह रही है कि वह किसी किसान से जबरन जमीन नहीं छीन रही, लेकिन जो जगह एक्ववायर क्षेत्र में आ गई है, उस पर किसी तरह का चेंज ऑफ लैंड यूज (CLU) नहीं मिल रहा। यह धक्केशाही है। 6. पॉलिसी को लेकर सरकार का क्या तर्क है? ग्राफिक्स में देखिए… —————— लैंड पूलिंग पॉलिसी से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… पंजाब सरकार का लैंड पूलिंग को लेकर फैसला:प्लॉट मिलने तक मिलेंगे एक लाख रुपए सालाना; एरिया विकसित न होने तक खेती कर सकेंगे पंजाब सरकार की आज (22 जुलाई) कैबिनेट मीटिंग में लैंड पूलिंग पॉलिसी को लेकर बड़ा फैसला लिया गया। सरकार ने तय किया है लैंड पूलिंग में जमीन के बदले किसानों को प्लॉट का कब्जा देने तक सरकार उनको 1 लाख रुपए सालाना देगी। अगर इसमें देरी होती है तो हर साल इस राशि में 10 फीसदी इजाफा किया जाएगा। वहीं, जब तक एरिया विकसित नहीं होता है, तो किसान उस पर खेती कर पाएंगे। (पूरी खबर पढ़ें)
पंजाब की भगवंत मान सरकार नई लैंड पूलिंग पॉलिसी लेकर आई है। इसके तहत राज्य भर में बड़े शहरों के साथ ही छोटे कस्बों में अर्बन एस्टेट के लिए जमीन ली जाएगी। इसके पीछे सरकार की सोच बताई गई कि उचित तरीके से शहरी विकास हो। सरकार पब्लिक नोटिस दे चुकी है। इसी के साथ ही पॉलिसी का विरोध शुरू हो गया। उनका कहना है कि यह स्कीम किसानों के साथ धोखा है। विरोध बढ़ा तो सरकार को कैबिनेट मीटिंग बुलानी पड़ी। CM मान ने खुद सामने आकर कई बातें बताईं। यहां तक कहा कि लैंड पूलिंग को लेकर विरोधी दल अफवाहें फैला रहे हैं, जबकि ऐसा नहीं है। दैनिक भास्कर की टीम ने जानने की कोशिश की कि क्या है लैंड पूलिंग पॉलिसी और क्यों हो रहा इसका विरोध? और क्या कहते हैं एक्सपर्ट? ऐसे ही सवालों और जवाबों के साथ पढ़ें पूरी रिपोर्ट… 1. मान सरकार की लैंड पूलिंग पॉलिसी क्या है? पहली बार कब लाई गई?
जवाब : पंजाब में लैंड पूलिंग पॉलिसी पहली बार अकाली सरकार के समय साल 2011 में लाई गई थी। इसे पहले कैप्टन सरकार ने, फिर मान सरकार ने आगे बढ़ाते हुए पॉलिसी में कुछ संशोधन किए। इसके बाद जून 2025 को पंजाब कैबिनेट ने नई लैंड पूलिंग पॉलिसी को मंजूरी दी। इसके अनुसार, प्रदेशभर में अलग-अलग स्थानों पर जमीन अधिग्रहण कर इलाकों को विकसित किया जाएगा। इनमें इंडस्ट्रियल, कॉमर्शियल और रिहायशी सेक्टर बनेंगे। जिन लोगों से जमीन ली जाएगी, उन्हें उस जमीन की कीमत नहीं मिलेगी, बल्कि जमीन के अनुपात में कॉमर्शियल और रिहायशी प्लॉट दिए जाएंगे। यह प्रॉपर्टी उसी एरिया में दी जाएगी, जिसे सरकार विकसित करेगी। 2. सरकार ने लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत क्या नए प्रावधान किए हैं?
जवाब : मान सरकार के दावे के मुताबिक, उन्होंने पॉलिसी में मुख्य रूप से 2 बदलाव किए हैं। पहला यह कि जमीन का मालिक अपनी मर्जी से जमीन देना चाहे तो दे सकता है। यदि जमीन नहीं देना चाहता है तो सरकार उससे जबरदस्ती नहीं करेगी। पहले यह था कि सरकार एरिया में प्रोजेक्ट घोषित करती थी और उसके अधीन आने वाली पूरी जमीन अधिग्रहित कर ली जाती थी। वहीं, दूसरा बदलाव यह है कि सरकार 21 दिन के अंदर लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) देने का दावा कर रही है। इसका मतलब है कि यदि सरकार कोई जमीन अधिग्रहित कर बदले में जमीन के मालिक को प्लॉट अलॉट करती है तो 21 दिन के अंदर जमीन के मालिक को LOI दे दिया जाएगा। इसके बार जमीन का मालिक जमीन को जैसे चाहे, वैसे इस्तेमाल कर पाएगा। पहले इसमें 6 महीने तक लग जाते थे। 3. नई पॉलिसी में जमीन अधिग्रहण की क्या प्रक्रिया है?
जवाब : सरकार की नई पॉलिसी के मुताबिक, पहले अर्बन एरिया डेवेलप करने के लिए जमीन चिह्नित होगी। फिर इसका नोटिफिकेशन जारी कर जमीन मालिकों को सूचित किया जाएगा। हालांकि, सरकार के दावे के मुताबिक, जमीन मालिक चाहे तो अपनी जमीन अपने पास ही रख सकता है। लेकिन, जो लोग जमीन देना चहेंगे, उन्हें सरकार योजना में शामिल करते हुए 50 हजार रुपए का चेक देगी। इसके बाद भूमि मालिक को एक कनाल अधिग्रहित भूमि के बदले 125 वर्ग गज का रिहायशी प्लॉट और 25 वर्ग गज व्यवसायिक भूमि दिया जाएगा। मतलब यह है कि जितनी जमीन ली जाएगी, सरकार उसके बदले 33 से 38 प्रतिशत जमीन प्लॉट के रूप में वापस करेगी। हालांकि, उसकी कीमत अधिग्रहित की गई जमीन के बराबर ही होगी। हालांकि, अगर कोई जमीन मालिक कॉमर्शियल प्लॉट नहीं लेना चाहता है, तो उसके बदले उसे 3 गुना अधिक रिहायशी प्लॉट मिलेगा। यानी एक एकड़ जमीन देने वाले किसान को यदि 200 वर्ग गज का कॉमर्शियल प्लॉट नहीं चाहिए, तो उसके बदले 600 गज रिहायशी प्लॉट दिया जाएगा। सरकार का यह भी दावा है कि जमीन अधिग्रहण के बाद मालिक को जब तक बदले में प्लॉट अलॉट नहीं हो जाता, तब तक हर सार उसे 1 लाख रुपए सालाना मुआवजा दिया जाएगा। इस पर हर साल 10% का ब्याज भी दिया जाएगा। 4. क्या नोटिफिकेशन जारी होने के साथ ही जमीन मालिकों का जमीन से हक खत्म हो जाएगा?
जवाब : सरकार का दावा है कि अर्बन स्टेट बनाने का केवल नोटिफिकेशन जारी होने से जमीन मालिकों की जमीन नहीं चली जाएगी। जब तक जमीन का अधिग्रहण नहीं हो जाता, तब तक जमीन मालिक अपनी जमीन का अपनी मर्जी से इस्तेमाल कर सकते हैं। वह खेती कर सकते हैं, जमीन बेच सकते हैं, इस पर लोन भी ले सकते हैं। इसके अलावा नोटिफिकेशन के बाद सारी जमीन एक साथ अधिग्रहित नहीं की जाएगी। हर एरिया में अलग-अलग जगह चिह्नित की गई हैं, जिनमें लैंड पूलिंग का विकल्प दिया गया है। 5. सरकार की नई पॉलिसी का विरोध क्यों हो रहा? इसके पीछे क्या तर्क हैं?
जवाब : इसे लेकर जमीन मामलों के जानकार मनिक गोयल माहिर बताते हैं कि सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि जो 65,523 एकड़ जमीन अधिग्रहण करने का नोटिफिकेशन जारी किया है, उसका होगा क्या? यह जमीन कब तक विकसित होगी? मनिक गोयल के अनुसार, दूसरा पॉइंट यह है कि सरकार ने नीति को स्वैच्छिक कहा गया है, लेकिन नोटिफिकेशन के बाद जमीन पर मकान निर्माण या लोन लेने की पाबंदियां लगने से यह जबरन अधिग्रहण जैसा ही लगता है। नोटिफिकेशन जारी होने की वजह से अधिकारी लोगों की जमीनों की रजिस्ट्रियां भी नहीं कर रहे हैं। वहीं, तीसरा पॉइंट यह भी है कि मान सरकार ने जमीन अधिग्रहण के बाद उसके विकसित होने तक जमीन के मालिक को 30 हजार रुपए सालाना भत्ता देना तय किया। हालांकि, विरोध के बाद उसे 50 हजार रुपए सालाना कर दिया। लेकिन, सरकार ने जमीनों का सर्वे किए बिना इनका सालाना भत्ता तय कैसे कर दिया? जबकि, ठेके पर इन जमीनों का सालाना 80 हजार रुपए तक मिल रहा है। चौथा पॉइंट भारतीय किसान यूनियन लक्खोवाल के प्रधान हरिंद्र सिंह लक्खोवाल ने कहा कि जमीनों को एक्वायर कर सरकार या तो लोन लेगी, या फिर बड़े घरानों का इन पर कब्जा हो जाएगा। यदि सरकार 65 हजार एकड़ जमीन एक्वायर करती भी है तो इसे आबाद नहीं कर पाएगी। दूसरी तरफ बेशक सरकार कह रही है कि वह किसी किसान से जबरन जमीन नहीं छीन रही, लेकिन जो जगह एक्ववायर क्षेत्र में आ गई है, उस पर किसी तरह का चेंज ऑफ लैंड यूज (CLU) नहीं मिल रहा। यह धक्केशाही है। 6. पॉलिसी को लेकर सरकार का क्या तर्क है? ग्राफिक्स में देखिए… —————— लैंड पूलिंग पॉलिसी से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… पंजाब सरकार का लैंड पूलिंग को लेकर फैसला:प्लॉट मिलने तक मिलेंगे एक लाख रुपए सालाना; एरिया विकसित न होने तक खेती कर सकेंगे पंजाब सरकार की आज (22 जुलाई) कैबिनेट मीटिंग में लैंड पूलिंग पॉलिसी को लेकर बड़ा फैसला लिया गया। सरकार ने तय किया है लैंड पूलिंग में जमीन के बदले किसानों को प्लॉट का कब्जा देने तक सरकार उनको 1 लाख रुपए सालाना देगी। अगर इसमें देरी होती है तो हर साल इस राशि में 10 फीसदी इजाफा किया जाएगा। वहीं, जब तक एरिया विकसित नहीं होता है, तो किसान उस पर खेती कर पाएंगे। (पूरी खबर पढ़ें)