बिहार के पूर्णिया में सोमवार को एक ही परिवार के 5 लोगों की लाशें मिलीं। सभी को बुरी तरह से पीटने के बाद डीजल डालकर जिंदा जला दिया गया था। इस हत्याकांड की वजह जानने के लिए भास्कर की टीम पूर्णिया से 20 किलोमीटर दूर टेटगामा गांव पहुंची। हमने गांव वालों से बात कर पूरी कहानी जानी। लोगों से बातचीत कर समझ आया कि 2 साल से गांव में 6 लोगों की मौत हो चुकी थी। गांव वाले इसके लिए बाबूलाल उरांव के परिवार को ही दोषी मानते थे। हत्याकांड से ठीक 3 दिन पहले एक बच्चे की मौत के बाद लोगों का गुस्सा फूटा और भीड़ ने 5 लोगों को जिंदा जलाकर मार डाला। पढ़िए टेटगामा गांव में हुए हत्याकांड के पीछे की पूरी कहानी… बाबूलाल उरांव के घर की 2 तस्वीरें देखिए… हत्या के पहले भीड़ को उकसाया गया पूर्णिया के टेटगामा गांव में 200 लोग रहते हैं। आदिवासियों के गांव में अंधविश्वास में एक ही परिवार के 5 लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई। लोगों की माने तो गांव के मरर (प्रमुख) नकुल उरांव के उकसाने पर भीड़ ने इस हत्याकांड को अंजाम दिया। उसी के कहने पर गांव के लोगों ने बाबूलाल उरांव और उसके पूरे परिवार की हत्या कर दी। दरगाह गांव के किशुन देव उरांव ने हमें बताया, ‘इस गांव में 2 साल में एक-एक कर 6 लोगों की मौत हो चुकी है। इसी महीने 3 लोगों की मौत हुई, जिसमें रामदेव उरांव के बेटे की मौत हो गई थी, जबकि एक बेटे की तबीयत खराब थी।’ शक था कि सिद्धि के लिए बलि देता है परिवार टेटगामा गांव के पड़ोस में दरगाह गांव है। वारदात की जानकारी के बाद पड़ोस के गांव के लोग यहां पहुंचे थे। हमने गांव के किशुन देव उरांव और मोहनी देवी से बात की। उन्होंने बताया, ‘आदिवासियों के टेटगामा गांव में रहने वाले बाबूलाल उरांव की मां कागतो देवी झाड़फूंक का काम करती थी। उसने पहले अपने बेटे बाबूलाल उरांव, फिर बहू सीता देवी, पोते मंजित उरांव और उसकी पत्नी रनिया देवी को झाड़फूंक का काम सिखाया था। बाबूलाल के परिवार से दूर-दूर के लोग झाड़-फूंक कराने उसके घर पहुंचते थे। टेटगामा गांव के लोगों का मानना था कि बाबूलाल उरांव की मां कागतो डायन है, उसने सिद्धि के लिए पति की बलि दे दी और वो डायन बन चुकी है।’ वहीं, मोहनी देवी के मुताबिक, डायन वाली बात गलत है, कागतो देवी के पति की मौत बीमारी से हुई थी।’ बाबूलाल के परिवार से दूर रहने का कहते थे लोग मोहिनी देवी के मुताबिक, ‘टेटगामा गांव में पिछले 2 साल में गांव में 6 से ज्यादा लोगों की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो चुकी थी। इसके बाद टेटगामा गांव के लोग अपनी घर की महिलाओं को बाबूलाल और उसके घर की महिलाओं से दूर रहने को कहते थे।’ लोग अपने घर की महिलाओं को बताते थे कि कागतो, उसकी बहू और पोते की पत्नी भी डायन है। बच्चों को बाबूलाल के परिवार से दूर रहने की नसीहत दी जाती थी।’ अफवाह फैली कि रामदेव के बेटे की बलि देने वाले हैं ‘5 दिन पहले ही गांव के रहने वाले रामदेव उरांव के बेटे की अचानक तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई थी। छोटा बेटा भी बीमार था।’ रामदेव के बेटे की मौत के बाद आदिवासी टोले और आसपास के गांव में ये अफवाह फैल गई कि रामदेव के बड़े बेटे के बाद बाबूलाल का परिवार उसके छोटे बेटे की बलि लेना चाहता है।’ वारदात की 2 तस्वीरें देखिए… हत्याकांड से पहले टेटगामा गांव में पंचायत भी बैठी थी 6 जुलाई (रविवार) की रात हत्याकांड को अंजाम देने से पहले आदिवासियों के गांव टेटगामा में रात करीब 9:30 के आसपास पंचायत भी बैठी थी। पंचायत में पूरे गांव के पुरुषों को बुलाया गया था। गांव प्रमुख नकुल उरांव खुद पंचायत की अगुआई कर रहा था। पंचायत में बाबूलाल के परिवार को भी बुलाया गया, लेकिन वे लोग नहीं आए। इसके बाद पूरे परिवार की हत्या का प्लान कर भीड़ बाबूलाल के घर की ओर चली गई। घटना के चश्मदीद बाबूलाल के बड़े बेटे ललित उरांव और छोटे बेटे सोनू उरांव ने बताया, ‘जब नकुल गांव के लोगों की भीड़ लेकर बाबूलाल के घर पहुंचा, घड़ी में रात के करीब 10 बज रहे थे। वे लोग खाना खाकर सोने की तैयारी में थे।’ ‘गांव वालों ने दरवाजा खोलने को कहा। गेट खोलते ही उन्होंने मारपीट शुरू कर दी। छोटा बेटा सोनू ने किसी तरह खुद को बचाकर वहां से भाग निकला और नानी के घर जाकर पूरी बात बताई।’ ‘जब तक पुलिस को जानकारी दी जाती और पुलिस गांव में पहुंचती, पूरा गांव खाली हो चुका था। एक दो घर में सिर्फ महिलाएं और बच्चे ही थे।’ ललित और सोनू उरांव अभी अपनी नानी के यहां ही हैं। आरोपी नकुल ने गांव में पंचायत बुलाने की बात कबूली पुलिस ने वारदात के बाद 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें गांव का प्रमुख नकुल उरांव भी शामिल है। पुलिस की पूछताछ में आरोपी नकुल उरांव ने भी वारदात से पहले पंचायत बैठने की बात कबूल की है। आरोपी नकुल ने बताया है, ‘पंचायत के फैसले के बाद रात गए 10 बजे उसने 50 लोगों के साथ ओझा बाबू लाल उरांव के घर धावा बोला था।’ उधर, पुलिस को जांच पड़ताल के दौरान बाबूलाल के घर से 100 मीटर की दूरी पर साड़ी, कपड़े, झाड़ फूंक का सामान, खून से सने टॉर्च और कई दूसरी चीजें भी मिली हैं। SIT का गठन, बाकी आरोपियों की तलाश जारी ———————– पूर्णिया हत्याकांड से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए…. डायन के शक में 5 लोगों को जिंदा जलाया:पूर्णिया में घर से पीटते हुए लाई भीड़, बोरियों में भरकर ट्रैक्टर में लादा, डीजल डालकर जला दिया पूर्णिया में रविवार देर रात से लापता एक ही परिवार के 5 लोगों की सोमवार को लाशें मिली हैं। गांव वालों को परिवार की एक महिला पर डायन होने का शक था। इसे लेकर भीड़ ने 5 लोगों के साथ पहले मारपीट की। इसके बाद उन्हें घसीटते हुए चौराहे तक लाए फिर पीटा। करीब डेढ़ किलोमीटर दूर ले जाकर पांचों को जिंदा जला दिया। मृतक सीता देवी की मां रुपो देवी ने भास्कर को बताया- ‘लड़ाई-झगड़ा हुआ तो मेरी बेटी को बुलाया। पिटाई करके सिर फोड़ दिया, फिर बोरी में पैक करके पता नहीं उसके साथ क्या किया।’ पूरी खबर पढ़िए
बिहार के पूर्णिया में सोमवार को एक ही परिवार के 5 लोगों की लाशें मिलीं। सभी को बुरी तरह से पीटने के बाद डीजल डालकर जिंदा जला दिया गया था। इस हत्याकांड की वजह जानने के लिए भास्कर की टीम पूर्णिया से 20 किलोमीटर दूर टेटगामा गांव पहुंची। हमने गांव वालों से बात कर पूरी कहानी जानी। लोगों से बातचीत कर समझ आया कि 2 साल से गांव में 6 लोगों की मौत हो चुकी थी। गांव वाले इसके लिए बाबूलाल उरांव के परिवार को ही दोषी मानते थे। हत्याकांड से ठीक 3 दिन पहले एक बच्चे की मौत के बाद लोगों का गुस्सा फूटा और भीड़ ने 5 लोगों को जिंदा जलाकर मार डाला। पढ़िए टेटगामा गांव में हुए हत्याकांड के पीछे की पूरी कहानी… बाबूलाल उरांव के घर की 2 तस्वीरें देखिए… हत्या के पहले भीड़ को उकसाया गया पूर्णिया के टेटगामा गांव में 200 लोग रहते हैं। आदिवासियों के गांव में अंधविश्वास में एक ही परिवार के 5 लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई। लोगों की माने तो गांव के मरर (प्रमुख) नकुल उरांव के उकसाने पर भीड़ ने इस हत्याकांड को अंजाम दिया। उसी के कहने पर गांव के लोगों ने बाबूलाल उरांव और उसके पूरे परिवार की हत्या कर दी। दरगाह गांव के किशुन देव उरांव ने हमें बताया, ‘इस गांव में 2 साल में एक-एक कर 6 लोगों की मौत हो चुकी है। इसी महीने 3 लोगों की मौत हुई, जिसमें रामदेव उरांव के बेटे की मौत हो गई थी, जबकि एक बेटे की तबीयत खराब थी।’ शक था कि सिद्धि के लिए बलि देता है परिवार टेटगामा गांव के पड़ोस में दरगाह गांव है। वारदात की जानकारी के बाद पड़ोस के गांव के लोग यहां पहुंचे थे। हमने गांव के किशुन देव उरांव और मोहनी देवी से बात की। उन्होंने बताया, ‘आदिवासियों के टेटगामा गांव में रहने वाले बाबूलाल उरांव की मां कागतो देवी झाड़फूंक का काम करती थी। उसने पहले अपने बेटे बाबूलाल उरांव, फिर बहू सीता देवी, पोते मंजित उरांव और उसकी पत्नी रनिया देवी को झाड़फूंक का काम सिखाया था। बाबूलाल के परिवार से दूर-दूर के लोग झाड़-फूंक कराने उसके घर पहुंचते थे। टेटगामा गांव के लोगों का मानना था कि बाबूलाल उरांव की मां कागतो डायन है, उसने सिद्धि के लिए पति की बलि दे दी और वो डायन बन चुकी है।’ वहीं, मोहनी देवी के मुताबिक, डायन वाली बात गलत है, कागतो देवी के पति की मौत बीमारी से हुई थी।’ बाबूलाल के परिवार से दूर रहने का कहते थे लोग मोहिनी देवी के मुताबिक, ‘टेटगामा गांव में पिछले 2 साल में गांव में 6 से ज्यादा लोगों की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो चुकी थी। इसके बाद टेटगामा गांव के लोग अपनी घर की महिलाओं को बाबूलाल और उसके घर की महिलाओं से दूर रहने को कहते थे।’ लोग अपने घर की महिलाओं को बताते थे कि कागतो, उसकी बहू और पोते की पत्नी भी डायन है। बच्चों को बाबूलाल के परिवार से दूर रहने की नसीहत दी जाती थी।’ अफवाह फैली कि रामदेव के बेटे की बलि देने वाले हैं ‘5 दिन पहले ही गांव के रहने वाले रामदेव उरांव के बेटे की अचानक तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई थी। छोटा बेटा भी बीमार था।’ रामदेव के बेटे की मौत के बाद आदिवासी टोले और आसपास के गांव में ये अफवाह फैल गई कि रामदेव के बड़े बेटे के बाद बाबूलाल का परिवार उसके छोटे बेटे की बलि लेना चाहता है।’ वारदात की 2 तस्वीरें देखिए… हत्याकांड से पहले टेटगामा गांव में पंचायत भी बैठी थी 6 जुलाई (रविवार) की रात हत्याकांड को अंजाम देने से पहले आदिवासियों के गांव टेटगामा में रात करीब 9:30 के आसपास पंचायत भी बैठी थी। पंचायत में पूरे गांव के पुरुषों को बुलाया गया था। गांव प्रमुख नकुल उरांव खुद पंचायत की अगुआई कर रहा था। पंचायत में बाबूलाल के परिवार को भी बुलाया गया, लेकिन वे लोग नहीं आए। इसके बाद पूरे परिवार की हत्या का प्लान कर भीड़ बाबूलाल के घर की ओर चली गई। घटना के चश्मदीद बाबूलाल के बड़े बेटे ललित उरांव और छोटे बेटे सोनू उरांव ने बताया, ‘जब नकुल गांव के लोगों की भीड़ लेकर बाबूलाल के घर पहुंचा, घड़ी में रात के करीब 10 बज रहे थे। वे लोग खाना खाकर सोने की तैयारी में थे।’ ‘गांव वालों ने दरवाजा खोलने को कहा। गेट खोलते ही उन्होंने मारपीट शुरू कर दी। छोटा बेटा सोनू ने किसी तरह खुद को बचाकर वहां से भाग निकला और नानी के घर जाकर पूरी बात बताई।’ ‘जब तक पुलिस को जानकारी दी जाती और पुलिस गांव में पहुंचती, पूरा गांव खाली हो चुका था। एक दो घर में सिर्फ महिलाएं और बच्चे ही थे।’ ललित और सोनू उरांव अभी अपनी नानी के यहां ही हैं। आरोपी नकुल ने गांव में पंचायत बुलाने की बात कबूली पुलिस ने वारदात के बाद 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें गांव का प्रमुख नकुल उरांव भी शामिल है। पुलिस की पूछताछ में आरोपी नकुल उरांव ने भी वारदात से पहले पंचायत बैठने की बात कबूल की है। आरोपी नकुल ने बताया है, ‘पंचायत के फैसले के बाद रात गए 10 बजे उसने 50 लोगों के साथ ओझा बाबू लाल उरांव के घर धावा बोला था।’ उधर, पुलिस को जांच पड़ताल के दौरान बाबूलाल के घर से 100 मीटर की दूरी पर साड़ी, कपड़े, झाड़ फूंक का सामान, खून से सने टॉर्च और कई दूसरी चीजें भी मिली हैं। SIT का गठन, बाकी आरोपियों की तलाश जारी ———————– पूर्णिया हत्याकांड से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए…. डायन के शक में 5 लोगों को जिंदा जलाया:पूर्णिया में घर से पीटते हुए लाई भीड़, बोरियों में भरकर ट्रैक्टर में लादा, डीजल डालकर जला दिया पूर्णिया में रविवार देर रात से लापता एक ही परिवार के 5 लोगों की सोमवार को लाशें मिली हैं। गांव वालों को परिवार की एक महिला पर डायन होने का शक था। इसे लेकर भीड़ ने 5 लोगों के साथ पहले मारपीट की। इसके बाद उन्हें घसीटते हुए चौराहे तक लाए फिर पीटा। करीब डेढ़ किलोमीटर दूर ले जाकर पांचों को जिंदा जला दिया। मृतक सीता देवी की मां रुपो देवी ने भास्कर को बताया- ‘लड़ाई-झगड़ा हुआ तो मेरी बेटी को बुलाया। पिटाई करके सिर फोड़ दिया, फिर बोरी में पैक करके पता नहीं उसके साथ क्या किया।’ पूरी खबर पढ़िए