लालू प्रसाद यादव को एक बार फिर RJD के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं। पटना में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इसका ऐलान किया गया। वे 2028 तक RJD के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुके गए हैं। मीटिंग को संबोधित करते हुए पहली बार राबड़ी देवी ने घर की लड़ाई पर बयान दिया। उन्होंने कहा- ‘हमारे बोलने से क्या होगा। हर घर में बंटवारा होता है।’ वो तेजस्वी और तेजप्रताप की बात रही थीं। उन्होंने आगे कहा- ‘बिहार में बेरोजगारी कोई नई बात नहीं है, सरकार ने पिछले 20 सालों में कुछ नहीं किया। हमने बिहार को कारखाने दिए, लेकिन इन (NDA) लोगों ने कुछ नहीं किया।’ ‘अगर उन्होंने विकास के लिए काम किया होता, तो वे अब क्यों घूम रहे हैं? अगर उन्होंने काम किया होता, तो उन्हें इसकी ज़रूरत नहीं पड़ती।’ लालू बोले- हम पार्टी को कभी झुकने नहीं देंगे बैठक को संबोधित करते हुए राजद सुप्रीमो लालू यादव ने कहा, ‘आप लोगों ने मुझ पर विश्वास दिखाया है और हम आपके विश्वास को झुकने नहीं देंगे।’ उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा, ‘तेजस्वी यादव दिन रात एक-एक चीजों को देखते हैं। हर जगह लगे रहते हैं। आपलोग भी पार्टी के लिए लगे रहिए। चुनाव का समय नजदीक है। हम सब को एकजुट रहना है।’ ‘गरीबों को बताना है कि बीजेपी जनता के खिलाफ क्या क्या कर रही है। तेजस्वी को हमने आगे खड़ा किया है। चुनाव आ रहा है। इसमें तेजस्वी यादव को जिम्मेदारी देना है।’ ‘हम अपने स्वस्थ की चिंता नहीं करते है। रोज रात में तेजस्वी से पूछते हैं कि कब क्या हो रहा है।’ भाषण के अंत में लालू ने कहा, ‘मैं राबड़ी देवी को मेरा, हमारे परिवार और पार्टी का ख्याल रखने के लिए धन्यवाद देता हूं।’ तेजस्वी बोले- जो जनता के लिए काम करेगा, टिकट उसी को मिलेगा तेजस्वी यादव ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा, ‘इस बार के चुनाव में क्रांति लानी है। जो जनता के बीच जाएगा, उनके लिए काम करेगा, पार्टी उसी को टिकट देगी।’ उन्होंने कहा, ‘हमलोग को एक साथ रहना है। हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष जो निर्णय लेंगे उसको मानना होगा।’ इस दौरान तेजस्वी ने नारा दिया- ‘2005 से 25, बहुत हुए नीतीश।’ नेता प्रतिपक्ष ने सीएम नीतीश पर तंज कसते हुए कहा, ‘हमें मुख्यमंत्री की सेहत को लेकर काफी चिंता होती है। एक उम्र के बाद उन्हें खुद ही त्यागपत्र दे देना चाहिए था।’ ‘अमित शाह ने उन्हें क्या बनाया दिया है। चुनाव तक मुख्यमंत्री नीतीश ही रहेंगे। उसके बाद क्या होगा, समय बताएगा।’ ‘मोदी जी अक्सर बिहार आते हैं। बिहार के लिए उन्होंने क्या किया। PM आते है तो एक बार में 100 करार रुपया खर्च होता है।’ उन्होंने मंत्री अशोक चौधरी पर तंज कसते हुए पूछा, ‘जेडीयू का मंत्री प्रोफेसर कैसे बन गया। कोई देखा है परीक्षा और इंटरव्यू देते हुए।’ 13वीं बार राष्ट्रीय अध्यक्ष बनें लालू यादव राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद लालू यादव और राबड़ी ने कार्यकर्ताओं और पार्टी नेताओं का हाथ हिलाकर अभिवादन किया। अधिवेशन की अध्यक्षता पार्टी के राष्ट्रीय निर्वाचन पदाधिकारी डॉ. रामचंद्र पूर्वे ने की। लालू यादव ने बीते 23 जून को पटना स्थित पार्टी कार्यालय में अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया था। उनके खिलाफ किसी अन्य नेता ने नामांकन नहीं किया। इसके बाद निर्वाचन पदाधिकारी डॉ. पूर्वे ने उन्हें निर्विरोध अध्यक्ष घोषित कर दिया था। कार्यक्रम में बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव समेत पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेता, सांसद, विधायक और प्रदेश भर से आए कार्यकर्ता शामिल हैं। 5 जुलाई 1997 को बनी थी RJD RJD का गठन 5 जुलाई 1997 को हुआ था। उस वक्त लालू प्रसाद यादव तत्कालीन जनता दल के अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री थे। नब्बे के दशक की शुरुआत से शुरू हुई चारा घोटाले के जांच की आंच लालू तक पहुंच चुकी थी। CBI ने जांच के बाद लालू यादव के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर ली थी। घोटाले के बड़े आरोप के बीच जनता दल का एक धड़ा लालू पर पार्टी के अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का दबाव बना रहा था। लालू ने मौके की नजाकत को समझा और आनन-फानन में अपने विश्वासपात्रों की बैठक बुलाई। इस बैठक में लालू का समर्थन करने वाले 17 लोकसभा और 8 राज्यसभा सदस्य शामिल हुए। बैठक में तय हुआ कि जनता दल का दामन छोड़कर अब नई पार्टी का गठन किया जाए। सहयोगियों का समर्थन मिला तो लालू भी तैयार हो गए। राष्ट्रीय जनता दल के गठन का ऐलान किया गया और लालू को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। लालू की इस पार्टी को लालटेन चुनाव चिह्न मिला. जिस पर लालू यादव ने दावा किया कि ये लालटेन ही गरीब की कुटिया में रोशनी लाएगी और समाजवाद का नारा बुलंद करेगा। पार्टी गठन के समय कौन-कौन नेता थे पार्टी के गठन के समय लालू प्रसाद यादव, रघुवंश प्रसाद सिंह, कांति सिंह सहित 17 लोकसभा सांसद और 8 राज्यसभा सांसदों की मौजूदगी में काफी संख्या में समर्थकों का जुटान हुआ था। पार्टी के स्थापना काल से ही लालू प्रसाद यादव ही इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। पार्टी गठन के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए लालू प्रसाद ने कहा था कि ‘हमारी पार्टी ओरिजिनल पार्टी होगी।’ नई पार्टी बनाने के कुछ ही दिन बाद लालू प्रसाद ने नई राजनीतिक चाल चलते हुए 24 जुलाई, 1997 को अपनी पत्नी राबड़ी देवी को बिहार का मुख्यमंत्री बना दिया। लालू प्रसाद ने एक साथ दो काम किए। अपनी अलग पार्टी बना ली और अपनी सत्ता भी बचा ली। मेरे बेटे लालटेन ही उठाएंगे लालू प्रसाद ने साल 1997 से साल 2005 तक अपनी पार्टी को बिहार की सत्ता में रखा। बीच में 7 दिनों के लिए नीतीश कुमार सत्ता में आए। 2015 से 2017 और 2022 से लेकर 28 फरवरी 2024 तक नीतीश के साथ रहे। अपने बेटों के बारे में लालू प्रसाद साफगोई से कह चुके हैं कि ‘मेरे बेटे लालटेन ही उठाएंगे, नीतीश अपने बेटे का बारे में सोचें।’ तेजस्वी यादव को लालू प्रसाद ने डिप्टी सीएम बनवाया और तेजप्रताप यादव को मंत्री। आरजेडी से तीसरी बार बड़ी बेटी मीसा भारती को पाटलिपुत्र लोकसभा सीट से टिकट दिया और वह दो बार हारने के बाद तीसरी बार पाटलिपुत्र सीट से जीतकर सांसद बनी। उन्हें लालू प्रसाद ने दो बार राज्यसभा भी भेजा। लालू प्रसाद ने तेजस्वी यादव को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बना दिया है! पूरे लोकसभा चुनाव में आरजेडी के स्टार प्रचारक तेजस्वी यादव ही थे। RJD का सियासी सफर RJD के गठन के वक्त बिहार की सियासत में भारी उथल-पुथल का माहौल था। चारा घोटाला मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी। विपक्ष के साथ-साथ जनता दल के एक धड़े का भी लालू पर दबाव था। ऐसी स्थिति में लालू ने राष्ट्रीय जनता दल बनाया और गिरफ्तारी तय हो जाने के बाद लालू बिहार की बागडोर पत्नी राबड़ी को सौंप कर जेल चले गए। RJD को कब कितनी सीटें मिलीं
लालू प्रसाद यादव को एक बार फिर RJD के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं। पटना में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इसका ऐलान किया गया। वे 2028 तक RJD के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुके गए हैं। मीटिंग को संबोधित करते हुए पहली बार राबड़ी देवी ने घर की लड़ाई पर बयान दिया। उन्होंने कहा- ‘हमारे बोलने से क्या होगा। हर घर में बंटवारा होता है।’ वो तेजस्वी और तेजप्रताप की बात रही थीं। उन्होंने आगे कहा- ‘बिहार में बेरोजगारी कोई नई बात नहीं है, सरकार ने पिछले 20 सालों में कुछ नहीं किया। हमने बिहार को कारखाने दिए, लेकिन इन (NDA) लोगों ने कुछ नहीं किया।’ ‘अगर उन्होंने विकास के लिए काम किया होता, तो वे अब क्यों घूम रहे हैं? अगर उन्होंने काम किया होता, तो उन्हें इसकी ज़रूरत नहीं पड़ती।’ लालू बोले- हम पार्टी को कभी झुकने नहीं देंगे बैठक को संबोधित करते हुए राजद सुप्रीमो लालू यादव ने कहा, ‘आप लोगों ने मुझ पर विश्वास दिखाया है और हम आपके विश्वास को झुकने नहीं देंगे।’ उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा, ‘तेजस्वी यादव दिन रात एक-एक चीजों को देखते हैं। हर जगह लगे रहते हैं। आपलोग भी पार्टी के लिए लगे रहिए। चुनाव का समय नजदीक है। हम सब को एकजुट रहना है।’ ‘गरीबों को बताना है कि बीजेपी जनता के खिलाफ क्या क्या कर रही है। तेजस्वी को हमने आगे खड़ा किया है। चुनाव आ रहा है। इसमें तेजस्वी यादव को जिम्मेदारी देना है।’ ‘हम अपने स्वस्थ की चिंता नहीं करते है। रोज रात में तेजस्वी से पूछते हैं कि कब क्या हो रहा है।’ भाषण के अंत में लालू ने कहा, ‘मैं राबड़ी देवी को मेरा, हमारे परिवार और पार्टी का ख्याल रखने के लिए धन्यवाद देता हूं।’ तेजस्वी बोले- जो जनता के लिए काम करेगा, टिकट उसी को मिलेगा तेजस्वी यादव ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा, ‘इस बार के चुनाव में क्रांति लानी है। जो जनता के बीच जाएगा, उनके लिए काम करेगा, पार्टी उसी को टिकट देगी।’ उन्होंने कहा, ‘हमलोग को एक साथ रहना है। हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष जो निर्णय लेंगे उसको मानना होगा।’ इस दौरान तेजस्वी ने नारा दिया- ‘2005 से 25, बहुत हुए नीतीश।’ नेता प्रतिपक्ष ने सीएम नीतीश पर तंज कसते हुए कहा, ‘हमें मुख्यमंत्री की सेहत को लेकर काफी चिंता होती है। एक उम्र के बाद उन्हें खुद ही त्यागपत्र दे देना चाहिए था।’ ‘अमित शाह ने उन्हें क्या बनाया दिया है। चुनाव तक मुख्यमंत्री नीतीश ही रहेंगे। उसके बाद क्या होगा, समय बताएगा।’ ‘मोदी जी अक्सर बिहार आते हैं। बिहार के लिए उन्होंने क्या किया। PM आते है तो एक बार में 100 करार रुपया खर्च होता है।’ उन्होंने मंत्री अशोक चौधरी पर तंज कसते हुए पूछा, ‘जेडीयू का मंत्री प्रोफेसर कैसे बन गया। कोई देखा है परीक्षा और इंटरव्यू देते हुए।’ 13वीं बार राष्ट्रीय अध्यक्ष बनें लालू यादव राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद लालू यादव और राबड़ी ने कार्यकर्ताओं और पार्टी नेताओं का हाथ हिलाकर अभिवादन किया। अधिवेशन की अध्यक्षता पार्टी के राष्ट्रीय निर्वाचन पदाधिकारी डॉ. रामचंद्र पूर्वे ने की। लालू यादव ने बीते 23 जून को पटना स्थित पार्टी कार्यालय में अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया था। उनके खिलाफ किसी अन्य नेता ने नामांकन नहीं किया। इसके बाद निर्वाचन पदाधिकारी डॉ. पूर्वे ने उन्हें निर्विरोध अध्यक्ष घोषित कर दिया था। कार्यक्रम में बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव समेत पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेता, सांसद, विधायक और प्रदेश भर से आए कार्यकर्ता शामिल हैं। 5 जुलाई 1997 को बनी थी RJD RJD का गठन 5 जुलाई 1997 को हुआ था। उस वक्त लालू प्रसाद यादव तत्कालीन जनता दल के अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री थे। नब्बे के दशक की शुरुआत से शुरू हुई चारा घोटाले के जांच की आंच लालू तक पहुंच चुकी थी। CBI ने जांच के बाद लालू यादव के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर ली थी। घोटाले के बड़े आरोप के बीच जनता दल का एक धड़ा लालू पर पार्टी के अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का दबाव बना रहा था। लालू ने मौके की नजाकत को समझा और आनन-फानन में अपने विश्वासपात्रों की बैठक बुलाई। इस बैठक में लालू का समर्थन करने वाले 17 लोकसभा और 8 राज्यसभा सदस्य शामिल हुए। बैठक में तय हुआ कि जनता दल का दामन छोड़कर अब नई पार्टी का गठन किया जाए। सहयोगियों का समर्थन मिला तो लालू भी तैयार हो गए। राष्ट्रीय जनता दल के गठन का ऐलान किया गया और लालू को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। लालू की इस पार्टी को लालटेन चुनाव चिह्न मिला. जिस पर लालू यादव ने दावा किया कि ये लालटेन ही गरीब की कुटिया में रोशनी लाएगी और समाजवाद का नारा बुलंद करेगा। पार्टी गठन के समय कौन-कौन नेता थे पार्टी के गठन के समय लालू प्रसाद यादव, रघुवंश प्रसाद सिंह, कांति सिंह सहित 17 लोकसभा सांसद और 8 राज्यसभा सांसदों की मौजूदगी में काफी संख्या में समर्थकों का जुटान हुआ था। पार्टी के स्थापना काल से ही लालू प्रसाद यादव ही इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। पार्टी गठन के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए लालू प्रसाद ने कहा था कि ‘हमारी पार्टी ओरिजिनल पार्टी होगी।’ नई पार्टी बनाने के कुछ ही दिन बाद लालू प्रसाद ने नई राजनीतिक चाल चलते हुए 24 जुलाई, 1997 को अपनी पत्नी राबड़ी देवी को बिहार का मुख्यमंत्री बना दिया। लालू प्रसाद ने एक साथ दो काम किए। अपनी अलग पार्टी बना ली और अपनी सत्ता भी बचा ली। मेरे बेटे लालटेन ही उठाएंगे लालू प्रसाद ने साल 1997 से साल 2005 तक अपनी पार्टी को बिहार की सत्ता में रखा। बीच में 7 दिनों के लिए नीतीश कुमार सत्ता में आए। 2015 से 2017 और 2022 से लेकर 28 फरवरी 2024 तक नीतीश के साथ रहे। अपने बेटों के बारे में लालू प्रसाद साफगोई से कह चुके हैं कि ‘मेरे बेटे लालटेन ही उठाएंगे, नीतीश अपने बेटे का बारे में सोचें।’ तेजस्वी यादव को लालू प्रसाद ने डिप्टी सीएम बनवाया और तेजप्रताप यादव को मंत्री। आरजेडी से तीसरी बार बड़ी बेटी मीसा भारती को पाटलिपुत्र लोकसभा सीट से टिकट दिया और वह दो बार हारने के बाद तीसरी बार पाटलिपुत्र सीट से जीतकर सांसद बनी। उन्हें लालू प्रसाद ने दो बार राज्यसभा भी भेजा। लालू प्रसाद ने तेजस्वी यादव को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बना दिया है! पूरे लोकसभा चुनाव में आरजेडी के स्टार प्रचारक तेजस्वी यादव ही थे। RJD का सियासी सफर RJD के गठन के वक्त बिहार की सियासत में भारी उथल-पुथल का माहौल था। चारा घोटाला मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी। विपक्ष के साथ-साथ जनता दल के एक धड़े का भी लालू पर दबाव था। ऐसी स्थिति में लालू ने राष्ट्रीय जनता दल बनाया और गिरफ्तारी तय हो जाने के बाद लालू बिहार की बागडोर पत्नी राबड़ी को सौंप कर जेल चले गए। RJD को कब कितनी सीटें मिलीं