पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि अगर कोई केंद्रीय कर्मचारी को नॉन-फैमिली स्टेशन (जहां परिवार नहीं रह सकता) पर ट्रांसफर किया जाता है, तो वह हर ट्रांसफर के बाद 3 साल तक सरकारी क्वार्टर कम किराए पर रख सकता है। यह फैसला उस केस में आया, जिसमें केंद्र सरकार ने कहा था कि सिर्फ पहले ट्रांसफर पर ही 3 साल तक क्वार्टर रखने की छूट है, बाकी ट्रांसफर पर नहीं। याचिकाकर्ता जॉइंट डायरेक्टर (Contracts), चीफ इंजीनियर कार्यालय, चंडीगढ़ जोन, मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज, रक्षा मंत्रालय में कार्यरत थे और जिनका ट्रांसफर 2015 में लेह और 2018 में उधमपुर (दोनों नॉन-फैमिली स्टेशन) पर हुआ था। कोर्ट ने कहा कि सरकार के बनाए 2017 के नियमों और 2018 के आदेशों में ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि सिर्फ पहले ट्रांसफर पर ही छूट मिलेगी। अगर किसी कर्मचारी को बार-बार नॉन-फैमिली स्टेशन पर भेजा जा रहा है, तो हर बार 3 साल तक क्वार्टर रखने का हक़ मिलेगा। सरकार का दोहरा रवैया ठीक नहीं सरकार ने एक कर्मचारी से जुर्माना वसूल लिया जबकि उसके पास घर रखने की छूट थी। कोर्ट ने कहा, “सरकार एक तरफ कहती है कि 3 साल की छूट है और दूसरी तरफ कहती है कि कर्मचारी ने घर खाली नहीं किया, इसलिए जुर्माना दो। ऐसा दोहरा रवैया नहीं चलेगा।” कर्मचारी को राहत, जुर्माने की रकम लौटाने के आदेश, यह मामला एक सरकारी अधिकारी का था जो 2015 में लेह और फिर 2018 में उधमपुर (दोनों नॉन-फैमिली स्टेशन) पर तैनात हुआ। वह दिसंबर 2020 तक सरकारी क्वार्टर में रहा। कोर्ट ने कहा कि उसने कोई गलत काम नहीं किया और सरकार को जुलाई 2020 से दिसंबर 2020 तक का जुर्माना और उसका ब्याज वापस करना होगा। इसलिए दी कोर्ट ने छूट कोर्ट ने कहा कि नॉन-फैमिली स्टेशन पर रहने वाले कर्मचारियों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है- जैसे
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि अगर कोई केंद्रीय कर्मचारी को नॉन-फैमिली स्टेशन (जहां परिवार नहीं रह सकता) पर ट्रांसफर किया जाता है, तो वह हर ट्रांसफर के बाद 3 साल तक सरकारी क्वार्टर कम किराए पर रख सकता है। यह फैसला उस केस में आया, जिसमें केंद्र सरकार ने कहा था कि सिर्फ पहले ट्रांसफर पर ही 3 साल तक क्वार्टर रखने की छूट है, बाकी ट्रांसफर पर नहीं। याचिकाकर्ता जॉइंट डायरेक्टर (Contracts), चीफ इंजीनियर कार्यालय, चंडीगढ़ जोन, मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज, रक्षा मंत्रालय में कार्यरत थे और जिनका ट्रांसफर 2015 में लेह और 2018 में उधमपुर (दोनों नॉन-फैमिली स्टेशन) पर हुआ था। कोर्ट ने कहा कि सरकार के बनाए 2017 के नियमों और 2018 के आदेशों में ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि सिर्फ पहले ट्रांसफर पर ही छूट मिलेगी। अगर किसी कर्मचारी को बार-बार नॉन-फैमिली स्टेशन पर भेजा जा रहा है, तो हर बार 3 साल तक क्वार्टर रखने का हक़ मिलेगा। सरकार का दोहरा रवैया ठीक नहीं सरकार ने एक कर्मचारी से जुर्माना वसूल लिया जबकि उसके पास घर रखने की छूट थी। कोर्ट ने कहा, “सरकार एक तरफ कहती है कि 3 साल की छूट है और दूसरी तरफ कहती है कि कर्मचारी ने घर खाली नहीं किया, इसलिए जुर्माना दो। ऐसा दोहरा रवैया नहीं चलेगा।” कर्मचारी को राहत, जुर्माने की रकम लौटाने के आदेश, यह मामला एक सरकारी अधिकारी का था जो 2015 में लेह और फिर 2018 में उधमपुर (दोनों नॉन-फैमिली स्टेशन) पर तैनात हुआ। वह दिसंबर 2020 तक सरकारी क्वार्टर में रहा। कोर्ट ने कहा कि उसने कोई गलत काम नहीं किया और सरकार को जुलाई 2020 से दिसंबर 2020 तक का जुर्माना और उसका ब्याज वापस करना होगा। इसलिए दी कोर्ट ने छूट कोर्ट ने कहा कि नॉन-फैमिली स्टेशन पर रहने वाले कर्मचारियों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है- जैसे