राजस्थान में पहली बार कोरोना वायरस के कोविड-19 से भी पुराने वैरिएंट से 2 लोगों की मौत का मामला सामने आया है। अब तक साधारण फ्लू की तरह बिहैव करने वाले इन वैरिएंट से एक महिला सहित दो मरीजों की कुछ ही दिनों में मौत हो गई। भर्ती होने के बाद ही मरीजों की हालत बिगड़ने लगी थी। ऐसे में इनमें वायरस की पहचान के लिए सैंपल की लैब में जांच कराई गई थी। बायोफायर (बैक्टीरिया, वायरस आदि की पहचान करने की डायग्नोस्टिक तकनीक) से कराई गई जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मरीजों में कोरोना का कोविड-19 से भी पुराना वैरिएंट था। प्रदेश के सबसे बड़े सवाई मान सिंह (SMS) हॉस्पिटल के डॉक्टर्स का दावा है कि कोरोना वायरस के पुराने वैरिएंट से मौत होने के ये मामले चौंकाने वाले हैं। यह वैरिएंट कितना घातक है और उनकी पहचान कैसे हुई, पढ़िए- एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में…. पहले भी पाए जाते थे कोरोना वायरस
कोविड-19 की दोनों लहर से पहले भी कोरोना वायरस काफी सालों से मौजूद है। कोरोना के कई वैरिएंट मरीजों में पहले भी पाए जाते रहे हैं। कोविड-19 महामारी से पहले कभी भी इस वायरस का खतरनाक रूप सामने नहीं आया था। जयपुर के एसएमएस अस्पताल में कोरोना वायरस के तीन पुराने वैरिएंट की सक्रियता सामने आई है। इनमें से दो अलग-अलग वैरिएंट से दो मरीजों की मौत हो गई तो एक अन्य मरीज में भी पुराना वैरिएंट सामने आया है। साल 2019 में पहली बार कोरोना के कोविड-19 वायरस ने दुनियाभर में कहर बरपा दिया था। लगातार दो लहरों में दुनियाभर में लाखों लोगों की मौत हुई थी। करोड़ों लोग इस वायरस की चपेट में आए थे। हालांकि साल 2022 से कोविड-19 का असर कम होने लगा था। वैक्सीन ने लोगों को इस वायरस से सुरक्षा कवच दिया। हालांकि आज भी कोरोना के नए-नए वैरिएंट सामने आ रहे हैं। सबसे पहले जानते हैं कौन-कौन से वैरिएंट सामने आए हैं
एसएमएस अस्पताल में मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. सीएल नवल बताते हैं- अप्रैल और मई के महीने में तीन मरीज एसएमएस अस्पताल में एडमिट हुए थे। तीनों मरीज निमोनिया जैसी शिकायत के चलते एडमिट हुए थे। भर्ती होने के कुछ दिन में ही मरीजों की तबीयत तेजी से खराब हो गई। इसके बाद बायोफायर तकनीक के जरिए इन मरीजों में अलग-अलग तरह के वायरस की जांच की गई। ताकि पता लगाया जा सके कि मरीजों की तेजी से तबीयत खराब होने के पीछे असली वजह क्या है। बायोफायर के जरिए तीनों मरीज में 22 तरह के वायरस की जांच की गई। इस जांच के बाद पता चला कि इन तीनों मरीजों में ह्यूमन कोरोना वायरस 229 ई, एनएल 63 और एचकेयू-1 वायरस हैं। तेजी से बिगड़ी मरीजों की तबीयत
डॉ. सीएल नवल ने बताया तीन अलग-अलग वैरिएंट में से एनएल-63 वायरस से संक्रमित 49 साल की महिला मरीज की मौत हुई। वहीं एचकेयू-1 वायरस से 70 साल के एक बुजुर्ग की मौत हुई। तीसरे वैरिएंट 229-ई वायरस से पीड़ित 77 साल के मरीज को इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया। डॉ. नवल ने बताया कि महिला मरीज को सिर्फ डायबिटीज थी, लेकिन एनएल-63 वैरिएंट के कारण उसमें निमोनिया जल्दी से डेवलप हुआ। तमाम प्रयासों के बाद भी उसे बचा नहीं सके। इसी तरह 70 साल के मरीज को सीओपीडी की शिकायत थी। भर्ती होने के बाद मरीज की तबीयत में सुधार हुआ था। लेकिन एकाएक तबीयत खराब हुई और तीन दिन के दौरान ही उसकी वैरिएंट एचकेयू-1 से संक्रमण के कारण मौत हो गई। ये सभी कोरोना परिवार के वायरस हैं। समय-समय पर इनका म्युटेशन होता रहता है। कई बार म्युटेशन होकर वायरस खतरनाक हो जाता है। राजस्थान में इन दोनों वैरिएंट से मौत होना, गौर करने लायक है। राजस्थान में दो मरीजों की मौत कोरोना के जिस वैरिएंट से हुई है वो कोरोना आउटब्रेक करने वाले कोविड-19 से भी पहले के हैं। ऐसा नहीं है कि ये वायरस पहली बार सामने आए हैं। एसएमएस में साल 2011-12 में जांच सुविधा शुरू होने के बाद अलग-अलग जांच में ये वायरस आने की पुष्टि हुई है। लेकिन कभी आउटब्रेक (महामारी फैलने) जैसा नजर नहीं आया। कोरोना के वैरिएंट से जुड़े सवाल और उनके एक्सपर्ट के जरिए जवाब सवाल : ह्यूमन कोरोना वायरस 229 ई, एनएल 63 और एचकेयू-1 वायरस कितने घातक हैं, इनकी क्या हिस्ट्री रही है? जवाब : कोरोना वायरस एनएल 63 सबसे पहले साल 2004 में नीदरलैंड में डिटेक्ट हुआ था। एचकेयू1 साल 2004 में हॉन्गकॉन्ग में डिटेक्ट हुआ था। जबकि कोरोना वायरस 229ई साल 1966 में शिकागो में सबसे पहले सामने आया था। जिन वैरिएंट से मौत हुई थी, दोनों 21 साल पुराने हैं। सवाल : इस वैरिएंट के शुरुआती लक्षण क्या हैं, किस उम्र वर्ग के लोगों को ज्यादा परेशान कर सकता है? जवाब : कोविड-19 की ही तरह लक्षण होते हैं। थोड़े हल्के लक्षण होते हैं। यह बच्चों से लेकर हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है। सवाल : इस वैरिएंट का इलाज क्या है? जवाब : वैरिएंट की पहचान के बाद भर्ती मरीज का कोरोना के प्रोटोकॉल के अनुसार इलाज किया जाता है। सवाल : राजस्थान में यह वैरिएंट अभी तक कितने मरीजों में डिटेक्ट हुआ है? जवाब : कोविड-19 की महामारी आने से पहले ये वैरिएंट डिटेक्ट किए गए थे। तब कितने मरीज चपेट में आए थे, इसकी कहीं संख्या दर्ज नहीं है। क्योंकि महामारी से पहले इस वैरिएंट से मौत के मामले कहीं दर्ज नहीं हुए थे।
राजस्थान में पहली बार कोरोना वायरस के कोविड-19 से भी पुराने वैरिएंट से 2 लोगों की मौत का मामला सामने आया है। अब तक साधारण फ्लू की तरह बिहैव करने वाले इन वैरिएंट से एक महिला सहित दो मरीजों की कुछ ही दिनों में मौत हो गई। भर्ती होने के बाद ही मरीजों की हालत बिगड़ने लगी थी। ऐसे में इनमें वायरस की पहचान के लिए सैंपल की लैब में जांच कराई गई थी। बायोफायर (बैक्टीरिया, वायरस आदि की पहचान करने की डायग्नोस्टिक तकनीक) से कराई गई जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मरीजों में कोरोना का कोविड-19 से भी पुराना वैरिएंट था। प्रदेश के सबसे बड़े सवाई मान सिंह (SMS) हॉस्पिटल के डॉक्टर्स का दावा है कि कोरोना वायरस के पुराने वैरिएंट से मौत होने के ये मामले चौंकाने वाले हैं। यह वैरिएंट कितना घातक है और उनकी पहचान कैसे हुई, पढ़िए- एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में…. पहले भी पाए जाते थे कोरोना वायरस
कोविड-19 की दोनों लहर से पहले भी कोरोना वायरस काफी सालों से मौजूद है। कोरोना के कई वैरिएंट मरीजों में पहले भी पाए जाते रहे हैं। कोविड-19 महामारी से पहले कभी भी इस वायरस का खतरनाक रूप सामने नहीं आया था। जयपुर के एसएमएस अस्पताल में कोरोना वायरस के तीन पुराने वैरिएंट की सक्रियता सामने आई है। इनमें से दो अलग-अलग वैरिएंट से दो मरीजों की मौत हो गई तो एक अन्य मरीज में भी पुराना वैरिएंट सामने आया है। साल 2019 में पहली बार कोरोना के कोविड-19 वायरस ने दुनियाभर में कहर बरपा दिया था। लगातार दो लहरों में दुनियाभर में लाखों लोगों की मौत हुई थी। करोड़ों लोग इस वायरस की चपेट में आए थे। हालांकि साल 2022 से कोविड-19 का असर कम होने लगा था। वैक्सीन ने लोगों को इस वायरस से सुरक्षा कवच दिया। हालांकि आज भी कोरोना के नए-नए वैरिएंट सामने आ रहे हैं। सबसे पहले जानते हैं कौन-कौन से वैरिएंट सामने आए हैं
एसएमएस अस्पताल में मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. सीएल नवल बताते हैं- अप्रैल और मई के महीने में तीन मरीज एसएमएस अस्पताल में एडमिट हुए थे। तीनों मरीज निमोनिया जैसी शिकायत के चलते एडमिट हुए थे। भर्ती होने के कुछ दिन में ही मरीजों की तबीयत तेजी से खराब हो गई। इसके बाद बायोफायर तकनीक के जरिए इन मरीजों में अलग-अलग तरह के वायरस की जांच की गई। ताकि पता लगाया जा सके कि मरीजों की तेजी से तबीयत खराब होने के पीछे असली वजह क्या है। बायोफायर के जरिए तीनों मरीज में 22 तरह के वायरस की जांच की गई। इस जांच के बाद पता चला कि इन तीनों मरीजों में ह्यूमन कोरोना वायरस 229 ई, एनएल 63 और एचकेयू-1 वायरस हैं। तेजी से बिगड़ी मरीजों की तबीयत
डॉ. सीएल नवल ने बताया तीन अलग-अलग वैरिएंट में से एनएल-63 वायरस से संक्रमित 49 साल की महिला मरीज की मौत हुई। वहीं एचकेयू-1 वायरस से 70 साल के एक बुजुर्ग की मौत हुई। तीसरे वैरिएंट 229-ई वायरस से पीड़ित 77 साल के मरीज को इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया। डॉ. नवल ने बताया कि महिला मरीज को सिर्फ डायबिटीज थी, लेकिन एनएल-63 वैरिएंट के कारण उसमें निमोनिया जल्दी से डेवलप हुआ। तमाम प्रयासों के बाद भी उसे बचा नहीं सके। इसी तरह 70 साल के मरीज को सीओपीडी की शिकायत थी। भर्ती होने के बाद मरीज की तबीयत में सुधार हुआ था। लेकिन एकाएक तबीयत खराब हुई और तीन दिन के दौरान ही उसकी वैरिएंट एचकेयू-1 से संक्रमण के कारण मौत हो गई। ये सभी कोरोना परिवार के वायरस हैं। समय-समय पर इनका म्युटेशन होता रहता है। कई बार म्युटेशन होकर वायरस खतरनाक हो जाता है। राजस्थान में इन दोनों वैरिएंट से मौत होना, गौर करने लायक है। राजस्थान में दो मरीजों की मौत कोरोना के जिस वैरिएंट से हुई है वो कोरोना आउटब्रेक करने वाले कोविड-19 से भी पहले के हैं। ऐसा नहीं है कि ये वायरस पहली बार सामने आए हैं। एसएमएस में साल 2011-12 में जांच सुविधा शुरू होने के बाद अलग-अलग जांच में ये वायरस आने की पुष्टि हुई है। लेकिन कभी आउटब्रेक (महामारी फैलने) जैसा नजर नहीं आया। कोरोना के वैरिएंट से जुड़े सवाल और उनके एक्सपर्ट के जरिए जवाब सवाल : ह्यूमन कोरोना वायरस 229 ई, एनएल 63 और एचकेयू-1 वायरस कितने घातक हैं, इनकी क्या हिस्ट्री रही है? जवाब : कोरोना वायरस एनएल 63 सबसे पहले साल 2004 में नीदरलैंड में डिटेक्ट हुआ था। एचकेयू1 साल 2004 में हॉन्गकॉन्ग में डिटेक्ट हुआ था। जबकि कोरोना वायरस 229ई साल 1966 में शिकागो में सबसे पहले सामने आया था। जिन वैरिएंट से मौत हुई थी, दोनों 21 साल पुराने हैं। सवाल : इस वैरिएंट के शुरुआती लक्षण क्या हैं, किस उम्र वर्ग के लोगों को ज्यादा परेशान कर सकता है? जवाब : कोविड-19 की ही तरह लक्षण होते हैं। थोड़े हल्के लक्षण होते हैं। यह बच्चों से लेकर हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है। सवाल : इस वैरिएंट का इलाज क्या है? जवाब : वैरिएंट की पहचान के बाद भर्ती मरीज का कोरोना के प्रोटोकॉल के अनुसार इलाज किया जाता है। सवाल : राजस्थान में यह वैरिएंट अभी तक कितने मरीजों में डिटेक्ट हुआ है? जवाब : कोविड-19 की महामारी आने से पहले ये वैरिएंट डिटेक्ट किए गए थे। तब कितने मरीज चपेट में आए थे, इसकी कहीं संख्या दर्ज नहीं है। क्योंकि महामारी से पहले इस वैरिएंट से मौत के मामले कहीं दर्ज नहीं हुए थे।