पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तानी आतंकी ठिकानों पर की गई एयर स्ट्राइक और फिर सीजफायर चर्चा में बने हैं। इसी बीच भारत-पाक के बीच हुए पुराने युद्धों में भारत के हाथों हुई पाकिस्तान की करारी हार की चर्चाएं होने लगी हैं। 1971 के जिस युद्ध में पाकिस्तान के दो टुकड़े हुए, उसकी शुरुआत बांग्लादेश से पहले राजस्थान बॉर्डर से हुई थी। पाकिस्तान ने राजस्थान सीमा से हमला किया और उसे लोंगेवाला में बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था। पाकिस्तान के 2000 सैनिकों के सामने हमारे 120 जवानों ने जमकर मुकाबला किया। एयरफोर्स के 4 हंटर विमानों ने पाकिस्तान के 45 चाइनीज टैंक ब्लास्ट कर दिए थे। इस लड़ाई पर एयर मार्शल भरत कुमार ने ‘एपिक बैटल ऑफ लोंगेवाला’ लिखी है। उन्होंने हमले के वक्त लोंगेवाला बॉर्डर पर पोस्टेड धर्मवीर सिंह से बातचीत में पूरी कहानी को जीवंत कर दिया। इसी लोंगेवाला की लड़ाई पर बॉलीवुड में फिल्म बनी, जिसका नाम था ‘बॉर्डर’। फिल्म के कई किरदारों के नाम असली थे, हालांकि कहानी फिल्म से काफी कुछ अलग है। आज पढ़िए लोंगेवाला की उस लड़ाई के किस्से, जिसमें राजस्थान बॉर्डर के पास पाकिस्तानी टैंकों की कब्रगाह बन गई थी, पाकिस्तानी फौज भाग खड़ी हुई थी। पाकिस्तान पर हावी हो रही थी भारतीय सेना
दिसंबर 1971 में जब पूर्वी पाकिस्तान में हालात खराब होने लगे। भारतीय सेना वहां हावी होने लगी तो पाकिस्तान ने राजस्थान बॉर्डर पर हमला करके जैसलमेर और रामगढ़ पर कब्जा करने का प्लान बनाया। इसके पीछे भारत को पश्चिमी मोर्चे पर उलझाने की रणनीति थी। पाकिस्तान ने 4-5 दिसंबर 1971 की रात को जैसलमेर से 120 किलोमीटर दूर लोंगेवाला बॉर्डर से आधी रात को बॉर्डर पार कर लिया। लोंगेवाला से बॉर्डर करीब 20 किलोमीटर दूर है। बॉर्डर क्रॉस करके पाकिस्तानी फौज 45 से ज्यादा टैंकों, सैकड़ों गाड़ियों के साथ आगे बढ़ रही थी। लोंगेवाला से पहले कोई चेक पोस्ट नहीं थी। 2 हजार के सामने भारत के 120 सैनिक
पूर्वी पाकिस्तान में भारतीय फौज के दखल के बाद यह तय हो गया था कि पाकिस्तान देर-सवेर राजस्थान बॉर्डर पर हमला करेगा, इसलिए बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) को हटाकर अग्रिम चौकियों पर सेना तैनात कर दी गई थी। राजस्थान बॉर्डर पर तैनात सैनिकों को यह पता नहीं था कि हमला उसी दिन हो जाएगा। जिस वक्त हमला हुआ, उस वक्त लोंगेवाला चौकी पर गिने-चुने सैनिक ही थे। अफसर और जवान गश्त पर गए हुए थे। लोंगेवाला की पोस्ट पर 120 सैनिकों में कुछ बीएसएफ जवान भी थे। लोंगेवाला चौकी पर तैनात सैनिकों के पास दो लाइट मशीन गन, दो मोर्टार गन, कुछ रॉकेट और बारूदी सुरंगें थीं। बारूदी सुरंगें भी तब तक बिछाई नहीं थीं, लेकिन चौकी से पहले कांटेदार तार लगे हुए थे। लोंगेवाला चौकी के इंचार्ज पंजाब बटालियन के मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी थे। कैप्टन धर्मवीर भी इसी पोस्ट पर थे, लेकिन वे हमले के वक्त गश्त पर गए हुए थे। पाकिस्तानी टैंकों की आवाज को फंसी हुई गाड़ी समझ बैठे थे
एयर मार्शल भरत कुमार ने अपनी किताब में कैप्टन धर्मवीर से की गई बातचीत के हवाले से लिखा है। धर्मवीर ने एयर मार्शल भरत कुमार को दिए इंटरव्यू में बताया था कि उस रात पूर्णिमा का चांद आसमान में चमक रहा था। शांत रात थी। अचानक से तेज गड़गड़ाहट वाली आवाज आई। सबका ध्यान उस तरफ गया। सभी सैनिक भी उसे सुन रहे थे। हमने कंपनी कमांडर मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी को वायरलेस पर बताया। इस पर उन्होंने ज्यादा सीरियस नहीं लिया और तर्क दिया कि कोई गाड़ी फंस गई होगी, इस रेतीले इलाके में यह आम बात है। आधी रात को पाकिस्तानी टैंक लोंगेवाला चौकी पर
कैप्टन धर्मवीर के हवाले से एयर मार्शल भरत कुमार ने लिखा है कि रात 12 बजे पाकिस्तानी टैंक कैप्टन धर्मवीर के सामने थे। वे धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे। उनकी लाइट बंद थी। टैंक रेत में चल रहे थे, इसलिए उनकी स्पीड कम थी। कंपनी कमांडर को दोबारा सूचना दी, लेकिन उनसे संपर्क ही नहीं हो पाया। सूचना देने में मशक्कत करनी पड़ी। आनन-फानन में बटालियन मुख्यालय को बताया गया कि पाकिस्तान ने हमला कर दिया है। लोंगेवाला चौकी पर हमले को रोकने के साधन नहीं हैं, इसलिए फौज और हथियार सहित सभी संसाधन भेजने को कहा। भारत के हंटर विमानों ने रुख बदला, 45 टैंक उड़ाए
उजाला होते ही पाकिस्तानी टैंक आगे बढ़ने लगे थे। लोंगेवाला पोस्ट से कुछ ही दूरी पर तैनात भारतीय वायुसेना के दो हंटर विमान मदद के लिए पहुंच गए। हंटर विमानों ने बहुत नीचे गोता लगाते हुए पाकिस्तानी टैंकों को निशाना बनाकर आसमान से फायर किए। हंटर जेट के हमलों में टैंक ब्लास्ट होने लगे। हंटर विमानों पर एंटी एयरक्राफ्ट गन से हमले का खतरा था, इसलिए एक बार हमला करने के लिए गोता लगाकर विमान वापस हाइट पर चले जाते थे। पाकिस्तानी एंटी एयरक्राफ्ट गन इन विमानों का कुछ नहीं बिगाड़ पाई। पाकिस्तानी टैंकों को उड़ा रहे थे फाइटर जेट
एयर मार्शल भरत कुमार ने अपनी किताब में हंटर विमानों से पाकिस्तानी टैंकों को नष्ट करने वाले दोनों फाइटर पायलट के हवाले से विस्तार से लिखा है। उन्होंने लिखा- स्क्वॉड्रन लीडर डीके दास और फ्लाइट लेफ्टिनेंट इंदर गोसाई हंटर विमान से हमला कर रहे थे। करीब 4000 मीटर की हाइट से टैंक बहुत छोटे दिख रहे थे। इसलिए 1000 फीट से कम पर लाकर टैंकों पर हमला किया। जवाब में उन्होंने हंटर विमानों पर गोलाबारी की, लेकिन विमान तुरंत ऊपर उड़ गए। इससे विमानों का कुछ नहीं बिगाड़ पाए। ऐसा कई बार हुआ। देखते ही देखते हर हमले में पाकिस्तानी टैंकों को इसी तरह नष्ट किया जाने लगा। धूल का गुबार उठाने लगे थे पाकिस्तानी टैंक
पाकिस्तानी फौज ने हंटर विमानों के हमले में टैंक नष्ट होते देख चकमा देने की चाल चली। विमान से टैंक नहीं दिखे, इसलिए उन्हें जिगजैग चलाकर धूल का गुबार बनाया गया। कई टैंक एक साथ आगे-पीछे चलने लगे तो आसमान से देखने में दिक्कत हुई। इस पर हंटर विमान के पायलटों ने रॉकेट फायर करके टैंकों को नष्ट करना शुरू कर दिया। 5 दिसंबर को दिन भर यही क्रम चलता रहा। दिन भर में पाकिस्तानी फौज के 45 से ज्यादा टैंक नष्ट हो गए। चाइनीज टैंक छोड़ कर भागी पाक फौज, रेत में इंजन बंद हुए
लोंगेवाला की लड़ाई में एयरफोर्स ने पाकिस्तान के 45 से ज्यादा टैंक नष्ट कर दिए। हंटर विमानों के हमलों में पाकिस्तानी एयरफोर्स से कोई चुनौती नहीं मिली। बिना किसी हवाई विरोध के इंडियन एयरफोर्स ने एकतरफा हमले किए, जिससे एक ही दिन में पाक फौज भाग खड़ी हुई। इंडियन एयरफोर्स ने पाकिस्तानी फौज की कमर तोड़कर रख दी थी। पाकिस्तान को उनकी एयरफोर्स की तरफ से कोई मदद नहीं मिली। पाकिस्तान के ज्यादातर टैंक चाइनीज थे, जो रेगिस्तान में गर्म हो गए। कई के इंजन सीज हो गए। इन टैंकों की धीमी रफ्तार और कमजोर परफॉर्मेंस लोंगेवाला की लड़ाई में उसकी बुरी तरह हार का कारण बनी। आज भी सबूत संभाल कर रखे
लोंगेवाला की लड़ाई में पाकिस्तान को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा। इस लड़ाई की हार ने पाकिस्तानी फौज का मनोबल तोड़ दिया। पाकिस्तान की रणनीति जैसलमेर और रामगढ़ पर कब्जा करके भारत को पश्चिमी मोर्चे पर उलझाना था। लेकिन, यहां वह खुद ही उलझ गया। इस हार के बाद घोटारू पर कब्जे का प्लान बनाया, लेकिन तब तक भारतीय फौज और एयरफोर्स ने उसके मंसूबों पर पानी फेर दिया। लोंगेवाला की लड़ाई में पाकिस्तान की बुरी तरह हार के सबूतों को आज भी वॉर म्यूजियम में सहेज कर रखा हुआ है। लोंगेवाला के वॉर म्यूजियम में पाकिस्तान के नष्ट टैंकों को रखा हुआ है। लोंगेवाला की लड़ाई पर ‘बॉर्डर’ मूवी बनी
लोंगेवाला की लड़ाई पर जेपी दत्ता ने फिल्म ‘बॉर्डर’ बनाई, जो सुपरहिट रही। लोंगेवाला के हीरो मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी, कैप्टन धर्मवीर और बीएसएफ जवान भैरोंसिंह राठौड़ की भूमिका को इस फिल्म में दिखाया है। तीनों किरदारों के फिल्म में असली नाम रखे गए। कुलदीप सिंह चांदपुरी को अदम्य साहस दिखाने पर महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। भैरोंसिंह राठौड़ को सेना मेडल दिया गया। BSF जवान ने कहा- पूरी पोस्ट उड़ी, मंदिर को कुछ नहीं हुआ
लोंगेवाला की लड़ाई में सेना मेडल से सम्मानित बीएसएफ जवान भैरोंसिंह राठौड़ ने एक इंटरव्यू में कहा था- 1971 में जब पाकिस्तान से युद्ध हुआ था, उस समय मैं जैसलमेर के लोंगेवाला में ड्यूटी कर रहा था। उस वक्त ऐसी खबर आई थी लड़ाई होने वाली है, इसलिए वहां पर 23 पंजाब बटालियन आ गई थी। हमारी बीएसएफ की कंपनी को साइड में कर दिया गया था। हमने बॉर्डर के बारे में उन्हें पूरी रेकी करवाई। भैरोंसिंह राठौड़ ने एक इंटरव्यू में कहा था- जिस दिन हमला हुआ, उस दिन कैप्टन धर्मवीर पेट्रोलिंग पार्टी की अगुवाई कर रहे थे। कैप्टन धर्मवीर सिंह ने मैसेज दिया कि मैं तो इस साइड में हूं, लेकिन पाकिस्तान की सेना बॉर्डर क्रॉस कर रही है और टैंकों व गाड़ियों के बहुत ज्यादा आवाज आ रही है। आप सतर्क हो जाइए। इसके बाद सीटी बजाई और पूरा पोस्ट सतर्क हो गया। भैरोंसिंह ने इंटरव्यू में कहा था- एयरफोर्स की मदद मांगी गई। लेकिन, कहा गया कि सुबह तक इंतजार करना होगा। इतनी देर में पाकिस्तानी सेना ने पोजिशन ले ली। जब सुबह थोड़ा उजाला होने लगा तो उसकी पलटन ने आगे बढ़ना शुरू किया। जब वो हमारे मार्क के अंदर आए तो हमने फायर खोल दिया। मेरे पास एलएमजी थी। उनकी इन्फेंट्री को हमने आगे बढ़ने नहीं दिया। पीछे से फायर आ रही थी, जिससे हमारी पोस्ट का एक कमरा टूट गया था। कुछ लोगों को डर लगा, लेकिन फिर पीछे से आवाज आई तुम डरो मत। मैं तुम्हारे साथ हूं। फिर उसके बाद हमें कोई डर नहीं लगा। यह देवी का मंदिर था। हमारे पोस्ट पर बहुत कम कैजुअल्टी हुई। यह चमत्कार ही था। —- भारतीय सैनिकों के शौर्य से जुड़े किस्सों की ये खबरें भी पढ़ें… थर्मस में मुंबई से पोकरण गया परमाणु बम का उपकरण:ड्रैगन की पूंछ सहलाने जैसे कोड से अमेरिका को मात दी, भारत के न्यूक्लियर पावर बनने के किस्से राजस्थान के पोकरण से आज ही के दिन 51 साल पहले भारत परमाणु संपन्न देश बना। 18 मई 1974 को ऑपरेशन ‘स्माइलिंग बुद्धा’ की सफलता ने भारत को दुनिया में छठा परमाणु ताकत वाला देश बना दिया था। यह राह आसान नहीं थी। मुंबई से पोकरण परमाणु बम का उपकरण थर्मस में ले जाया गया था। ‘ड्रैगन की पूंछ सहलाने’ जैसे कोड का उपयोग करते हुए भारत ने अमेरिका को भनक तक नहीं लगने दी थी। (पढ़ें पूरी खबर) पाकिस्तान के दो टुकड़े करने वाले राजस्थान के फौजी अफसर:रोते थे पाक आर्मी के कई बड़े अधिकारी, बोलते थे- मुंह दिखाने लायक नहीं रहे भारत-पाकिस्तान तनाव और फिर सीजफायर के बाद फिर से पुराने युद्धों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। पाकिस्तान सभी युद्ध बुरी तरह हारा। पढ़ें पूरी खबर…
पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तानी आतंकी ठिकानों पर की गई एयर स्ट्राइक और फिर सीजफायर चर्चा में बने हैं। इसी बीच भारत-पाक के बीच हुए पुराने युद्धों में भारत के हाथों हुई पाकिस्तान की करारी हार की चर्चाएं होने लगी हैं। 1971 के जिस युद्ध में पाकिस्तान के दो टुकड़े हुए, उसकी शुरुआत बांग्लादेश से पहले राजस्थान बॉर्डर से हुई थी। पाकिस्तान ने राजस्थान सीमा से हमला किया और उसे लोंगेवाला में बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था। पाकिस्तान के 2000 सैनिकों के सामने हमारे 120 जवानों ने जमकर मुकाबला किया। एयरफोर्स के 4 हंटर विमानों ने पाकिस्तान के 45 चाइनीज टैंक ब्लास्ट कर दिए थे। इस लड़ाई पर एयर मार्शल भरत कुमार ने ‘एपिक बैटल ऑफ लोंगेवाला’ लिखी है। उन्होंने हमले के वक्त लोंगेवाला बॉर्डर पर पोस्टेड धर्मवीर सिंह से बातचीत में पूरी कहानी को जीवंत कर दिया। इसी लोंगेवाला की लड़ाई पर बॉलीवुड में फिल्म बनी, जिसका नाम था ‘बॉर्डर’। फिल्म के कई किरदारों के नाम असली थे, हालांकि कहानी फिल्म से काफी कुछ अलग है। आज पढ़िए लोंगेवाला की उस लड़ाई के किस्से, जिसमें राजस्थान बॉर्डर के पास पाकिस्तानी टैंकों की कब्रगाह बन गई थी, पाकिस्तानी फौज भाग खड़ी हुई थी। पाकिस्तान पर हावी हो रही थी भारतीय सेना
दिसंबर 1971 में जब पूर्वी पाकिस्तान में हालात खराब होने लगे। भारतीय सेना वहां हावी होने लगी तो पाकिस्तान ने राजस्थान बॉर्डर पर हमला करके जैसलमेर और रामगढ़ पर कब्जा करने का प्लान बनाया। इसके पीछे भारत को पश्चिमी मोर्चे पर उलझाने की रणनीति थी। पाकिस्तान ने 4-5 दिसंबर 1971 की रात को जैसलमेर से 120 किलोमीटर दूर लोंगेवाला बॉर्डर से आधी रात को बॉर्डर पार कर लिया। लोंगेवाला से बॉर्डर करीब 20 किलोमीटर दूर है। बॉर्डर क्रॉस करके पाकिस्तानी फौज 45 से ज्यादा टैंकों, सैकड़ों गाड़ियों के साथ आगे बढ़ रही थी। लोंगेवाला से पहले कोई चेक पोस्ट नहीं थी। 2 हजार के सामने भारत के 120 सैनिक
पूर्वी पाकिस्तान में भारतीय फौज के दखल के बाद यह तय हो गया था कि पाकिस्तान देर-सवेर राजस्थान बॉर्डर पर हमला करेगा, इसलिए बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) को हटाकर अग्रिम चौकियों पर सेना तैनात कर दी गई थी। राजस्थान बॉर्डर पर तैनात सैनिकों को यह पता नहीं था कि हमला उसी दिन हो जाएगा। जिस वक्त हमला हुआ, उस वक्त लोंगेवाला चौकी पर गिने-चुने सैनिक ही थे। अफसर और जवान गश्त पर गए हुए थे। लोंगेवाला की पोस्ट पर 120 सैनिकों में कुछ बीएसएफ जवान भी थे। लोंगेवाला चौकी पर तैनात सैनिकों के पास दो लाइट मशीन गन, दो मोर्टार गन, कुछ रॉकेट और बारूदी सुरंगें थीं। बारूदी सुरंगें भी तब तक बिछाई नहीं थीं, लेकिन चौकी से पहले कांटेदार तार लगे हुए थे। लोंगेवाला चौकी के इंचार्ज पंजाब बटालियन के मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी थे। कैप्टन धर्मवीर भी इसी पोस्ट पर थे, लेकिन वे हमले के वक्त गश्त पर गए हुए थे। पाकिस्तानी टैंकों की आवाज को फंसी हुई गाड़ी समझ बैठे थे
एयर मार्शल भरत कुमार ने अपनी किताब में कैप्टन धर्मवीर से की गई बातचीत के हवाले से लिखा है। धर्मवीर ने एयर मार्शल भरत कुमार को दिए इंटरव्यू में बताया था कि उस रात पूर्णिमा का चांद आसमान में चमक रहा था। शांत रात थी। अचानक से तेज गड़गड़ाहट वाली आवाज आई। सबका ध्यान उस तरफ गया। सभी सैनिक भी उसे सुन रहे थे। हमने कंपनी कमांडर मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी को वायरलेस पर बताया। इस पर उन्होंने ज्यादा सीरियस नहीं लिया और तर्क दिया कि कोई गाड़ी फंस गई होगी, इस रेतीले इलाके में यह आम बात है। आधी रात को पाकिस्तानी टैंक लोंगेवाला चौकी पर
कैप्टन धर्मवीर के हवाले से एयर मार्शल भरत कुमार ने लिखा है कि रात 12 बजे पाकिस्तानी टैंक कैप्टन धर्मवीर के सामने थे। वे धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे। उनकी लाइट बंद थी। टैंक रेत में चल रहे थे, इसलिए उनकी स्पीड कम थी। कंपनी कमांडर को दोबारा सूचना दी, लेकिन उनसे संपर्क ही नहीं हो पाया। सूचना देने में मशक्कत करनी पड़ी। आनन-फानन में बटालियन मुख्यालय को बताया गया कि पाकिस्तान ने हमला कर दिया है। लोंगेवाला चौकी पर हमले को रोकने के साधन नहीं हैं, इसलिए फौज और हथियार सहित सभी संसाधन भेजने को कहा। भारत के हंटर विमानों ने रुख बदला, 45 टैंक उड़ाए
उजाला होते ही पाकिस्तानी टैंक आगे बढ़ने लगे थे। लोंगेवाला पोस्ट से कुछ ही दूरी पर तैनात भारतीय वायुसेना के दो हंटर विमान मदद के लिए पहुंच गए। हंटर विमानों ने बहुत नीचे गोता लगाते हुए पाकिस्तानी टैंकों को निशाना बनाकर आसमान से फायर किए। हंटर जेट के हमलों में टैंक ब्लास्ट होने लगे। हंटर विमानों पर एंटी एयरक्राफ्ट गन से हमले का खतरा था, इसलिए एक बार हमला करने के लिए गोता लगाकर विमान वापस हाइट पर चले जाते थे। पाकिस्तानी एंटी एयरक्राफ्ट गन इन विमानों का कुछ नहीं बिगाड़ पाई। पाकिस्तानी टैंकों को उड़ा रहे थे फाइटर जेट
एयर मार्शल भरत कुमार ने अपनी किताब में हंटर विमानों से पाकिस्तानी टैंकों को नष्ट करने वाले दोनों फाइटर पायलट के हवाले से विस्तार से लिखा है। उन्होंने लिखा- स्क्वॉड्रन लीडर डीके दास और फ्लाइट लेफ्टिनेंट इंदर गोसाई हंटर विमान से हमला कर रहे थे। करीब 4000 मीटर की हाइट से टैंक बहुत छोटे दिख रहे थे। इसलिए 1000 फीट से कम पर लाकर टैंकों पर हमला किया। जवाब में उन्होंने हंटर विमानों पर गोलाबारी की, लेकिन विमान तुरंत ऊपर उड़ गए। इससे विमानों का कुछ नहीं बिगाड़ पाए। ऐसा कई बार हुआ। देखते ही देखते हर हमले में पाकिस्तानी टैंकों को इसी तरह नष्ट किया जाने लगा। धूल का गुबार उठाने लगे थे पाकिस्तानी टैंक
पाकिस्तानी फौज ने हंटर विमानों के हमले में टैंक नष्ट होते देख चकमा देने की चाल चली। विमान से टैंक नहीं दिखे, इसलिए उन्हें जिगजैग चलाकर धूल का गुबार बनाया गया। कई टैंक एक साथ आगे-पीछे चलने लगे तो आसमान से देखने में दिक्कत हुई। इस पर हंटर विमान के पायलटों ने रॉकेट फायर करके टैंकों को नष्ट करना शुरू कर दिया। 5 दिसंबर को दिन भर यही क्रम चलता रहा। दिन भर में पाकिस्तानी फौज के 45 से ज्यादा टैंक नष्ट हो गए। चाइनीज टैंक छोड़ कर भागी पाक फौज, रेत में इंजन बंद हुए
लोंगेवाला की लड़ाई में एयरफोर्स ने पाकिस्तान के 45 से ज्यादा टैंक नष्ट कर दिए। हंटर विमानों के हमलों में पाकिस्तानी एयरफोर्स से कोई चुनौती नहीं मिली। बिना किसी हवाई विरोध के इंडियन एयरफोर्स ने एकतरफा हमले किए, जिससे एक ही दिन में पाक फौज भाग खड़ी हुई। इंडियन एयरफोर्स ने पाकिस्तानी फौज की कमर तोड़कर रख दी थी। पाकिस्तान को उनकी एयरफोर्स की तरफ से कोई मदद नहीं मिली। पाकिस्तान के ज्यादातर टैंक चाइनीज थे, जो रेगिस्तान में गर्म हो गए। कई के इंजन सीज हो गए। इन टैंकों की धीमी रफ्तार और कमजोर परफॉर्मेंस लोंगेवाला की लड़ाई में उसकी बुरी तरह हार का कारण बनी। आज भी सबूत संभाल कर रखे
लोंगेवाला की लड़ाई में पाकिस्तान को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा। इस लड़ाई की हार ने पाकिस्तानी फौज का मनोबल तोड़ दिया। पाकिस्तान की रणनीति जैसलमेर और रामगढ़ पर कब्जा करके भारत को पश्चिमी मोर्चे पर उलझाना था। लेकिन, यहां वह खुद ही उलझ गया। इस हार के बाद घोटारू पर कब्जे का प्लान बनाया, लेकिन तब तक भारतीय फौज और एयरफोर्स ने उसके मंसूबों पर पानी फेर दिया। लोंगेवाला की लड़ाई में पाकिस्तान की बुरी तरह हार के सबूतों को आज भी वॉर म्यूजियम में सहेज कर रखा हुआ है। लोंगेवाला के वॉर म्यूजियम में पाकिस्तान के नष्ट टैंकों को रखा हुआ है। लोंगेवाला की लड़ाई पर ‘बॉर्डर’ मूवी बनी
लोंगेवाला की लड़ाई पर जेपी दत्ता ने फिल्म ‘बॉर्डर’ बनाई, जो सुपरहिट रही। लोंगेवाला के हीरो मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी, कैप्टन धर्मवीर और बीएसएफ जवान भैरोंसिंह राठौड़ की भूमिका को इस फिल्म में दिखाया है। तीनों किरदारों के फिल्म में असली नाम रखे गए। कुलदीप सिंह चांदपुरी को अदम्य साहस दिखाने पर महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। भैरोंसिंह राठौड़ को सेना मेडल दिया गया। BSF जवान ने कहा- पूरी पोस्ट उड़ी, मंदिर को कुछ नहीं हुआ
लोंगेवाला की लड़ाई में सेना मेडल से सम्मानित बीएसएफ जवान भैरोंसिंह राठौड़ ने एक इंटरव्यू में कहा था- 1971 में जब पाकिस्तान से युद्ध हुआ था, उस समय मैं जैसलमेर के लोंगेवाला में ड्यूटी कर रहा था। उस वक्त ऐसी खबर आई थी लड़ाई होने वाली है, इसलिए वहां पर 23 पंजाब बटालियन आ गई थी। हमारी बीएसएफ की कंपनी को साइड में कर दिया गया था। हमने बॉर्डर के बारे में उन्हें पूरी रेकी करवाई। भैरोंसिंह राठौड़ ने एक इंटरव्यू में कहा था- जिस दिन हमला हुआ, उस दिन कैप्टन धर्मवीर पेट्रोलिंग पार्टी की अगुवाई कर रहे थे। कैप्टन धर्मवीर सिंह ने मैसेज दिया कि मैं तो इस साइड में हूं, लेकिन पाकिस्तान की सेना बॉर्डर क्रॉस कर रही है और टैंकों व गाड़ियों के बहुत ज्यादा आवाज आ रही है। आप सतर्क हो जाइए। इसके बाद सीटी बजाई और पूरा पोस्ट सतर्क हो गया। भैरोंसिंह ने इंटरव्यू में कहा था- एयरफोर्स की मदद मांगी गई। लेकिन, कहा गया कि सुबह तक इंतजार करना होगा। इतनी देर में पाकिस्तानी सेना ने पोजिशन ले ली। जब सुबह थोड़ा उजाला होने लगा तो उसकी पलटन ने आगे बढ़ना शुरू किया। जब वो हमारे मार्क के अंदर आए तो हमने फायर खोल दिया। मेरे पास एलएमजी थी। उनकी इन्फेंट्री को हमने आगे बढ़ने नहीं दिया। पीछे से फायर आ रही थी, जिससे हमारी पोस्ट का एक कमरा टूट गया था। कुछ लोगों को डर लगा, लेकिन फिर पीछे से आवाज आई तुम डरो मत। मैं तुम्हारे साथ हूं। फिर उसके बाद हमें कोई डर नहीं लगा। यह देवी का मंदिर था। हमारे पोस्ट पर बहुत कम कैजुअल्टी हुई। यह चमत्कार ही था। —- भारतीय सैनिकों के शौर्य से जुड़े किस्सों की ये खबरें भी पढ़ें… थर्मस में मुंबई से पोकरण गया परमाणु बम का उपकरण:ड्रैगन की पूंछ सहलाने जैसे कोड से अमेरिका को मात दी, भारत के न्यूक्लियर पावर बनने के किस्से राजस्थान के पोकरण से आज ही के दिन 51 साल पहले भारत परमाणु संपन्न देश बना। 18 मई 1974 को ऑपरेशन ‘स्माइलिंग बुद्धा’ की सफलता ने भारत को दुनिया में छठा परमाणु ताकत वाला देश बना दिया था। यह राह आसान नहीं थी। मुंबई से पोकरण परमाणु बम का उपकरण थर्मस में ले जाया गया था। ‘ड्रैगन की पूंछ सहलाने’ जैसे कोड का उपयोग करते हुए भारत ने अमेरिका को भनक तक नहीं लगने दी थी। (पढ़ें पूरी खबर) पाकिस्तान के दो टुकड़े करने वाले राजस्थान के फौजी अफसर:रोते थे पाक आर्मी के कई बड़े अधिकारी, बोलते थे- मुंह दिखाने लायक नहीं रहे भारत-पाकिस्तान तनाव और फिर सीजफायर के बाद फिर से पुराने युद्धों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। पाकिस्तान सभी युद्ध बुरी तरह हारा। पढ़ें पूरी खबर…