सड़क दुर्घटना में घायल होने वाले लोगों और उनके परिवारजनों के लिए बड़ी राहत का ऐलान हुआ है। केंद्र सरकार ने मंगलवार को एक अधिसूचना जारी कर देशभर में सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए ₹1.5 लाख तक की कैशलेस ट्रीटमेंट स्कीम की घोषणा की है। सड़क परिवहन मंत्रालय की एक गैजेट अधिसूचना के मुताबिक- कोई सड़क हादसा मोटर वाहन की वजह से होता है, तो उसमें घायल व्यक्ति का इलाज कैशलेस ट्रीटमेंट स्कीम के तहत किया जाएगा। पीड़ित के साथ हादसा चाहे किसी भी सड़क पर हुआ हो। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक डेढ़ लाख की राशि को बढ़ाकर ₹2 लाख रुपए किए जाने की भी तैयारी चल रही है। किसी सड़क हादसे के बाद का एक घंटा ‘गोल्डन ऑवर’ कहलाता है। इस दौरान इलाज न मिल पाने से कई मौतें हो जाती हैं। इसी को कम करने के लिए यह योजना शुरू की जा रही है। डेढ़ लाख से ऊपर खर्च पर खुद पैसे देने होंगे
अस्पताल को प्राथमिक उपचार के बाद बड़े अस्पताल में रेफर करना है तो उस अस्पताल को तय करना होगा कि जहां रेफर किया जा रहा है, वहां मरीज को दाखिला मिले। डेढ़ लाख तक कैशलेस इलाज होने के बाद उसके भुगतान में नोडल एजेंसी के रूप में NHAI काम करेगा। यानी इलाज के बाद मरीज या उनके परिजन को डेढ़ लाख तक की रकम का भुगतान नहीं करना है। यदि इलाज में डेढ़ लाख से ज्यादा का खर्च आता है तो बढ़ा बिल मरीज या परिजन को भरना होगा। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने जताई थी चिंता इसी साल जनवरी में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने भारत में सड़क हादसों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था- सरकार सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए जल्द ही ऐसी योजना लाने पर विचार कर रही है। जिसमें तत्काल कैशलेस इलाज मिले। इस योजना को लागू करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) राज्य की पुलिस, अस्पतालों और राज्य की स्वास्थ्य एजेंसी के साथ मिलकर काम करेगा। समय पर इलाज न मिलने से मरने वालों की संख्या ज्यादा
भारत में 2023 में लगभग 1.5 लाख लोग सड़क हादसों में मारे गए। 2024 में जनवरी-अक्टूबर के बीच 1.2 लाख जानें गईं। 30-40% लोग समय पर इलाज न मिलने से दम तोड़ देते हैं। वहीं, सड़क हादसे के घायलों के इलाज में औसतन 50,000 से 2 लाख रुपए का खर्च आता है। गंभीर मामलों में खर्च 5-10 लाख तक पहुंच जाता है। डेढ़ लाख रुपए तक फ्री इलाज की योजना से हर साल करीब 10 हजार करोड़ का बोझ पड़ने का अनुमान है। ……………………… मामले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… रोड एक्सीडेंट होने पर घायलों का 7 दिन तक मुफ्त इलाज, गडकरी की घोषणा पर वो सबकुछ जो जानना जरूरी है देशभर में हुए सड़क हादसों में पिछले साल यानी 2024 में 1 लाख 80 हजार मौतें हुई हैं। मृतकों में 66% लोग 18 से 34 साल के युवा थे। अगर समय पर इलाज मिल जाता तो इनमें से कई लोगों को बचाया जा सकता था। इसी को ध्यान में रखते हुए 7 जनवरी को दिल्ली के भारत मंडपम में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कैशलेस ट्रीटमेंट योजना की घोषणा की है। पूरी खबर पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला- तलब किए बिना अफसर आदेश नहीं मानते: रोड एक्सीडेंट में घायलों के कैशलेस इलाज की स्कीम तैयार नहीं सुप्रीम कोर्ट ने रोड एक्सीडेंट में घायलों के कैशलेस इलाज की स्कीम लागू न करने पर केंद्र सरकार को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा- जब तक शीर्ष अधिकारियों को तलब न किया जाए, वे कोर्ट ऑर्डर को गंभीरता से नहीं लेते। हम पहले ही साफ कह रहे हैं, अगर हमें पता चला कि मामले में कोई प्रगति नहीं हुई है तो हम अवमानना का नोटिस जारी करेंगे। पूरी खबर पढ़ें…
सड़क दुर्घटना में घायल होने वाले लोगों और उनके परिवारजनों के लिए बड़ी राहत का ऐलान हुआ है। केंद्र सरकार ने मंगलवार को एक अधिसूचना जारी कर देशभर में सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए ₹1.5 लाख तक की कैशलेस ट्रीटमेंट स्कीम की घोषणा की है। सड़क परिवहन मंत्रालय की एक गैजेट अधिसूचना के मुताबिक- कोई सड़क हादसा मोटर वाहन की वजह से होता है, तो उसमें घायल व्यक्ति का इलाज कैशलेस ट्रीटमेंट स्कीम के तहत किया जाएगा। पीड़ित के साथ हादसा चाहे किसी भी सड़क पर हुआ हो। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक डेढ़ लाख की राशि को बढ़ाकर ₹2 लाख रुपए किए जाने की भी तैयारी चल रही है। किसी सड़क हादसे के बाद का एक घंटा ‘गोल्डन ऑवर’ कहलाता है। इस दौरान इलाज न मिल पाने से कई मौतें हो जाती हैं। इसी को कम करने के लिए यह योजना शुरू की जा रही है। डेढ़ लाख से ऊपर खर्च पर खुद पैसे देने होंगे
अस्पताल को प्राथमिक उपचार के बाद बड़े अस्पताल में रेफर करना है तो उस अस्पताल को तय करना होगा कि जहां रेफर किया जा रहा है, वहां मरीज को दाखिला मिले। डेढ़ लाख तक कैशलेस इलाज होने के बाद उसके भुगतान में नोडल एजेंसी के रूप में NHAI काम करेगा। यानी इलाज के बाद मरीज या उनके परिजन को डेढ़ लाख तक की रकम का भुगतान नहीं करना है। यदि इलाज में डेढ़ लाख से ज्यादा का खर्च आता है तो बढ़ा बिल मरीज या परिजन को भरना होगा। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने जताई थी चिंता इसी साल जनवरी में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने भारत में सड़क हादसों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था- सरकार सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए जल्द ही ऐसी योजना लाने पर विचार कर रही है। जिसमें तत्काल कैशलेस इलाज मिले। इस योजना को लागू करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) राज्य की पुलिस, अस्पतालों और राज्य की स्वास्थ्य एजेंसी के साथ मिलकर काम करेगा। समय पर इलाज न मिलने से मरने वालों की संख्या ज्यादा
भारत में 2023 में लगभग 1.5 लाख लोग सड़क हादसों में मारे गए। 2024 में जनवरी-अक्टूबर के बीच 1.2 लाख जानें गईं। 30-40% लोग समय पर इलाज न मिलने से दम तोड़ देते हैं। वहीं, सड़क हादसे के घायलों के इलाज में औसतन 50,000 से 2 लाख रुपए का खर्च आता है। गंभीर मामलों में खर्च 5-10 लाख तक पहुंच जाता है। डेढ़ लाख रुपए तक फ्री इलाज की योजना से हर साल करीब 10 हजार करोड़ का बोझ पड़ने का अनुमान है। ……………………… मामले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… रोड एक्सीडेंट होने पर घायलों का 7 दिन तक मुफ्त इलाज, गडकरी की घोषणा पर वो सबकुछ जो जानना जरूरी है देशभर में हुए सड़क हादसों में पिछले साल यानी 2024 में 1 लाख 80 हजार मौतें हुई हैं। मृतकों में 66% लोग 18 से 34 साल के युवा थे। अगर समय पर इलाज मिल जाता तो इनमें से कई लोगों को बचाया जा सकता था। इसी को ध्यान में रखते हुए 7 जनवरी को दिल्ली के भारत मंडपम में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कैशलेस ट्रीटमेंट योजना की घोषणा की है। पूरी खबर पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला- तलब किए बिना अफसर आदेश नहीं मानते: रोड एक्सीडेंट में घायलों के कैशलेस इलाज की स्कीम तैयार नहीं सुप्रीम कोर्ट ने रोड एक्सीडेंट में घायलों के कैशलेस इलाज की स्कीम लागू न करने पर केंद्र सरकार को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा- जब तक शीर्ष अधिकारियों को तलब न किया जाए, वे कोर्ट ऑर्डर को गंभीरता से नहीं लेते। हम पहले ही साफ कह रहे हैं, अगर हमें पता चला कि मामले में कोई प्रगति नहीं हुई है तो हम अवमानना का नोटिस जारी करेंगे। पूरी खबर पढ़ें…