मुंबई के बलार्ड एस्टेट में स्थित IFBE (आइस फैक्ट्री) में शनिवार को तारा एम खन्ना की पहली एकल कला प्रदर्शनी हुई। इस प्रदर्शनी का नाम था– ‘Still, it Moves’। यह शो एक ही दिन के लिए था और सुबह 11 बजे से शाम 8 बजे तक लोगों के लिए खुला रहा। इसमें तारा ने अपने अलग अंदाज में कुदरत, चलती हुई चीजों, ठहराव और आध्यात्मिक सोच को दिखाया। यह एक कंटेंपरेरी आर्ट यानी आधुनिक कला की खास झलक थी। तारा एम खन्ना से सवाल-जवाब… सवाल: इस प्रदर्शनी की थीम क्या है? जवाब: ‘Still, it Moves’ गति और स्थिरता के बीच के संबंध को टटोलने की कोशिश है। इसमें प्रकृति की लय, परिवर्तन और आत्म-समर्पण को चित्रों के जरिए महसूस किया जा सकता है। सवाल: आपकी पेंटिंग में अध्यात्म की झलक भी है? जवाब: बिल्कुल। यह प्रदर्शनी मेरे लिए एक आध्यात्मिक भेंट है। एक कृतज्ञता का भाव। मैंने देवी-देवताओं के चित्रों को भी शामिल किया है। मेरा मानना है कि सच्ची कला, आत्मा से निकलती है। सवाल: “सेक्रेड स्वे” पेंटिंग के बारे में बताइए। जवाब: यह श्रीकृष्ण को केंद्र में रखती है। एक सुनहरी रोशनी में वह नृत्यरत हैं। यह उनके भीतर की मासूमियत और बौद्धिकता को एक साथ दर्शाने की कोशिश है। सवाल: इसका टाइटल “सेक्रेड स्वे” क्यों रखा? जवाब: क्योंकि यह जीवन की निरंतर गति में छिपी हुई स्थिरता का प्रतीक है। एक पवित्र संतुलन। सवाल: आपको इस छवि का विचार कहां से मिला? जवाब: मेरी शुरुआती स्मृतियां। जहां-जहां मैंने मूर्तियां, मंदिर, देवी-देवताओं की झलकें देखी थीं, वही आधार बनीं। सवाल: एक अन्य पेंटिंग में जंगल और सूर्यास्त दिखाई देता है। उसका क्या भाव है? जवाब: वह वापसी का समय है। सब कुछ घर लौट रहा है। यह एक गहरी, अंतर्मन की यात्रा को दर्शाती है। सवाल: दो नावों वाली पेंटिंग में क्या संदेश छुपा है? जवाब: वह ट्रांजिशन का प्रतीक है। एक नाव जा रही है और एक आ रही है। समय चलता रहता है, कुछ जाता है, कुछ आता है। सवाल: आपने इन पेंटिंग्स को पूरा करने में कितना समय लिया? जवाब: करीब तीन हफ्ते लगे। हालांकि, यह प्रोसेस सालों से मेरे अंतस में चल रही थी। सवाल: आपकी कला यात्रा की शुरुआत कब हुई? जवाब: मुझे लगता है कि पांचवी कक्षा से पहले ही मुझे एहसास हो गया था कि मैं इसी दिशा में जाऊंगी। स्कूल में भी लोगों ने मेरे काम को पहचाना। सवाल: क्या कोई कलाकार रहे हैं, जिनसे आप प्रभावित हुईं? जवाब: मैं एम.एफ. हुसैन और राजा रवि वर्मा जैसे नामों की कद्र करती हूं, लेकिन मेरी प्रेरणा समकालीन अनुभवों और खुद मुझसे आती है। आज का आर्ट सीन बहुत विविध है। सवाल: आपकी शैली को किस श्रेणी में रखा जाए? जवाब: शायद इसे “मैजिकल रियलिज्म” कहा जा सकता है। जहां यथार्थ और कल्पना के बीच एक पुल बनता है। एब्सट्रैक्ट और फिगरेटिव आर्ट के मेल जैसा। सवाल: आपकी सबसे बड़ी प्रेरणा क्या है? जवाब: प्रकृति। मैं बहुत यात्रा करती हूं और अपने अनुभवों को रिकॉर्ड करती हूं। भगवान के प्रति श्रद्धा भी मेरी कला का एक गहरा हिस्सा है। सवाल: प्रकृति और भगवान के बीच क्या संबंध देखते हैं आप? जवाब: मेरे लिए दोनों एक-दूसरे में समाहित हैं। मैंने इस प्रदर्शनी में उसी संतुलन को खोजने की कोशिश की है।
मुंबई के बलार्ड एस्टेट में स्थित IFBE (आइस फैक्ट्री) में शनिवार को तारा एम खन्ना की पहली एकल कला प्रदर्शनी हुई। इस प्रदर्शनी का नाम था– ‘Still, it Moves’। यह शो एक ही दिन के लिए था और सुबह 11 बजे से शाम 8 बजे तक लोगों के लिए खुला रहा। इसमें तारा ने अपने अलग अंदाज में कुदरत, चलती हुई चीजों, ठहराव और आध्यात्मिक सोच को दिखाया। यह एक कंटेंपरेरी आर्ट यानी आधुनिक कला की खास झलक थी। तारा एम खन्ना से सवाल-जवाब… सवाल: इस प्रदर्शनी की थीम क्या है? जवाब: ‘Still, it Moves’ गति और स्थिरता के बीच के संबंध को टटोलने की कोशिश है। इसमें प्रकृति की लय, परिवर्तन और आत्म-समर्पण को चित्रों के जरिए महसूस किया जा सकता है। सवाल: आपकी पेंटिंग में अध्यात्म की झलक भी है? जवाब: बिल्कुल। यह प्रदर्शनी मेरे लिए एक आध्यात्मिक भेंट है। एक कृतज्ञता का भाव। मैंने देवी-देवताओं के चित्रों को भी शामिल किया है। मेरा मानना है कि सच्ची कला, आत्मा से निकलती है। सवाल: “सेक्रेड स्वे” पेंटिंग के बारे में बताइए। जवाब: यह श्रीकृष्ण को केंद्र में रखती है। एक सुनहरी रोशनी में वह नृत्यरत हैं। यह उनके भीतर की मासूमियत और बौद्धिकता को एक साथ दर्शाने की कोशिश है। सवाल: इसका टाइटल “सेक्रेड स्वे” क्यों रखा? जवाब: क्योंकि यह जीवन की निरंतर गति में छिपी हुई स्थिरता का प्रतीक है। एक पवित्र संतुलन। सवाल: आपको इस छवि का विचार कहां से मिला? जवाब: मेरी शुरुआती स्मृतियां। जहां-जहां मैंने मूर्तियां, मंदिर, देवी-देवताओं की झलकें देखी थीं, वही आधार बनीं। सवाल: एक अन्य पेंटिंग में जंगल और सूर्यास्त दिखाई देता है। उसका क्या भाव है? जवाब: वह वापसी का समय है। सब कुछ घर लौट रहा है। यह एक गहरी, अंतर्मन की यात्रा को दर्शाती है। सवाल: दो नावों वाली पेंटिंग में क्या संदेश छुपा है? जवाब: वह ट्रांजिशन का प्रतीक है। एक नाव जा रही है और एक आ रही है। समय चलता रहता है, कुछ जाता है, कुछ आता है। सवाल: आपने इन पेंटिंग्स को पूरा करने में कितना समय लिया? जवाब: करीब तीन हफ्ते लगे। हालांकि, यह प्रोसेस सालों से मेरे अंतस में चल रही थी। सवाल: आपकी कला यात्रा की शुरुआत कब हुई? जवाब: मुझे लगता है कि पांचवी कक्षा से पहले ही मुझे एहसास हो गया था कि मैं इसी दिशा में जाऊंगी। स्कूल में भी लोगों ने मेरे काम को पहचाना। सवाल: क्या कोई कलाकार रहे हैं, जिनसे आप प्रभावित हुईं? जवाब: मैं एम.एफ. हुसैन और राजा रवि वर्मा जैसे नामों की कद्र करती हूं, लेकिन मेरी प्रेरणा समकालीन अनुभवों और खुद मुझसे आती है। आज का आर्ट सीन बहुत विविध है। सवाल: आपकी शैली को किस श्रेणी में रखा जाए? जवाब: शायद इसे “मैजिकल रियलिज्म” कहा जा सकता है। जहां यथार्थ और कल्पना के बीच एक पुल बनता है। एब्सट्रैक्ट और फिगरेटिव आर्ट के मेल जैसा। सवाल: आपकी सबसे बड़ी प्रेरणा क्या है? जवाब: प्रकृति। मैं बहुत यात्रा करती हूं और अपने अनुभवों को रिकॉर्ड करती हूं। भगवान के प्रति श्रद्धा भी मेरी कला का एक गहरा हिस्सा है। सवाल: प्रकृति और भगवान के बीच क्या संबंध देखते हैं आप? जवाब: मेरे लिए दोनों एक-दूसरे में समाहित हैं। मैंने इस प्रदर्शनी में उसी संतुलन को खोजने की कोशिश की है।