देश में जनगणना, जातियों की गिनती, परिसीमन और संसद में महिला आरक्षण की कवायद एक साथ शुरू होगी, क्योंकि इनकी टाइमलाइन एक साथ आ गई हैं। जनगणना और जातीय गणना 2026 से शुरू होगी। क्योंकि 2001 में लोकसभा सीटों की संख्या 2026 तक फ्रीज की गई थी। परिसीमन की कवायद भी 2026 से होगी। क्योंकि 2021 में जनगणना समय पर होती तो परिसीमन 2031 की जनगणना के आधार पर होता। प्रशासनिक सीमाएं बदलने की छूट 31 दिसंबर 25 तक बढ़ेगी, यह पहले 1 जून 2025 थी। वहीं, महिला आरक्षण का अधिनियम 20 सितंबर 2023 में पारित हुआ था। इसमें यह व्यवस्था की गई कि इस अधिनियम के पारित होने के बाद आगामी परिसीमन और जनगणना के आंकड़ों के आधार पर महिलाओं के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में सीटें आरक्षित होंगी। समय, जो जनगणना-परिसीमन में लगेगा खर्च, प्रति व्यक्ति औसतन 100 रु. तक एक अनुमान के अनुसार, जनगणना के लिए करीब 14 हजार करोड़ रु. का आवंटन किया जा सकता है। यानी प्रति भारतीय औसतन 100 रु. का खर्च आएगा। इसमें जातीय जनगणना के अलावा नेशनल पापुलेशन रजिस्टर अपडेट करने की कवायद भी शामिल है। बता दें कि केंद्र सरकार ने 2019 में 8,754 करोड़ रु. मंजूर किए थे और 3,941 करोड़ रु. नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर अपडेट करने के लिए रखे गए। बता दें कि विपक्षी दलों ने 2025-26 के बजट में इस मद में सिर्फ 578 करोड़ रखने को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए थे। 2 शर्तें, जो जनगणना के लिए जरूरी हैं… जनगणना की प्रक्रिया 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगी, लेकिन इससे पहले दो वैधानिक जरूरतों को पूरा किया जाएगा… देश में आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी। 2021 की जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण टाल दी गई थी। आखिरी बार पूर्ण जातीय जनगणना 1931 में ब्रिटिश शासन में हुई थी। 2011 में भी हुई थी, लेकिन जाति आधारित आंकड़े सार्वजनिक नहीं हुए। आखिरी बार परिसीमन 2002 में हुआ था, जो 2001 की जनगणना के आधार पर 2008 तक लागू किया गया। जातीय जनगणना से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… देश में आजादी के बाद पहली बार जातिगत जनगणना होगी:बिहार चुनाव से पहले केंद्र का फैसला; राहुल बोले- फैसले का समर्थन, डेडलाइन तय हो देश में आजादी के बाद पहली बार जाति जनगणना कराई जाएगी। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को जाति जनगणना को मंजूरी दी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इसे मूल जनगणना के साथ ही कराया जाएगा। देश में इसी साल के आखिर में बिहार विधानसभा के चुनाव होने हैं। कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल जाति जनगणना कराने की मांग करते रहे हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि जाति जनगणना की शुरुआत सितंबर में की जा सकती है। पढ़ें पूरी खबर…
देश में जनगणना, जातियों की गिनती, परिसीमन और संसद में महिला आरक्षण की कवायद एक साथ शुरू होगी, क्योंकि इनकी टाइमलाइन एक साथ आ गई हैं। जनगणना और जातीय गणना 2026 से शुरू होगी। क्योंकि 2001 में लोकसभा सीटों की संख्या 2026 तक फ्रीज की गई थी। परिसीमन की कवायद भी 2026 से होगी। क्योंकि 2021 में जनगणना समय पर होती तो परिसीमन 2031 की जनगणना के आधार पर होता। प्रशासनिक सीमाएं बदलने की छूट 31 दिसंबर 25 तक बढ़ेगी, यह पहले 1 जून 2025 थी। वहीं, महिला आरक्षण का अधिनियम 20 सितंबर 2023 में पारित हुआ था। इसमें यह व्यवस्था की गई कि इस अधिनियम के पारित होने के बाद आगामी परिसीमन और जनगणना के आंकड़ों के आधार पर महिलाओं के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में सीटें आरक्षित होंगी। समय, जो जनगणना-परिसीमन में लगेगा खर्च, प्रति व्यक्ति औसतन 100 रु. तक एक अनुमान के अनुसार, जनगणना के लिए करीब 14 हजार करोड़ रु. का आवंटन किया जा सकता है। यानी प्रति भारतीय औसतन 100 रु. का खर्च आएगा। इसमें जातीय जनगणना के अलावा नेशनल पापुलेशन रजिस्टर अपडेट करने की कवायद भी शामिल है। बता दें कि केंद्र सरकार ने 2019 में 8,754 करोड़ रु. मंजूर किए थे और 3,941 करोड़ रु. नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर अपडेट करने के लिए रखे गए। बता दें कि विपक्षी दलों ने 2025-26 के बजट में इस मद में सिर्फ 578 करोड़ रखने को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए थे। 2 शर्तें, जो जनगणना के लिए जरूरी हैं… जनगणना की प्रक्रिया 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगी, लेकिन इससे पहले दो वैधानिक जरूरतों को पूरा किया जाएगा… देश में आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी। 2021 की जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण टाल दी गई थी। आखिरी बार पूर्ण जातीय जनगणना 1931 में ब्रिटिश शासन में हुई थी। 2011 में भी हुई थी, लेकिन जाति आधारित आंकड़े सार्वजनिक नहीं हुए। आखिरी बार परिसीमन 2002 में हुआ था, जो 2001 की जनगणना के आधार पर 2008 तक लागू किया गया। जातीय जनगणना से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… देश में आजादी के बाद पहली बार जातिगत जनगणना होगी:बिहार चुनाव से पहले केंद्र का फैसला; राहुल बोले- फैसले का समर्थन, डेडलाइन तय हो देश में आजादी के बाद पहली बार जाति जनगणना कराई जाएगी। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को जाति जनगणना को मंजूरी दी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इसे मूल जनगणना के साथ ही कराया जाएगा। देश में इसी साल के आखिर में बिहार विधानसभा के चुनाव होने हैं। कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल जाति जनगणना कराने की मांग करते रहे हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि जाति जनगणना की शुरुआत सितंबर में की जा सकती है। पढ़ें पूरी खबर…