अहमदाबाद सिटी क्राइम ब्रांच ने स्पर्म व्हेल की उल्टी यानी एम्बरग्रीस के साथ चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इस दुर्लभ और बहुमूल्य पदार्थ की मात्रा 2.904 किलोग्राम है, जिसका अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित मूल्य 2.90 करोड़ रुपए है। कचरा बीनने का काम करने वाले मोहम्मद हनीफ को यह उल्टी मिली थी। भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत शुक्राणु व्हेल को संरक्षित प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है और उनका व्यापार अवैध है। क्राइम ब्रांच ने एक गुप्त सूचना के आधार पर आमिर शेख को सूरत से अहमदाबाद से गिरफ्तार किया था। उसके मोबाइल फोन पर स्पर्म व्हेल की उल्टी (एम्बरग्रीस) का वीडियो मिला था। क्राइम ब्रांच ने जांच की तो पता चला कि दमण के रहने वाले सहादत अली और सूरत का उस्मान शेख ने कमीशन के जरिए आमिर और उसके साथियों से एम्बरग्रीस बेचने की बात कही थी। इसी आधार पर वे एक गिरोह के जरिए एम्बरग्रीस बेचने की कोशिश कर रहे थे। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने सूरत के उस्मान शेख के घर की तलाशी ली और 2.904 किलोग्राम स्पर्म व्हेल की उल्टी जब्त कर ली। सवाल 1: क्या होती है व्हेल की उल्टी?
जवाब: व्हेल की उल्टी या एम्बरग्रीस फ्रेंच शब्द एम्बर और ग्रीस से मिलकर बना है, जिसका मतलब होता है ग्रे एम्बर। इसे व्हेल की उल्टी कहा जाता है। यह कठोर मोम की तरह होती है, जो स्पर्म व्हेल के पाचन तंत्र में मौजूद आंतों में बनती है। एम्बरग्रीस अक्सर समुद्र में तैरते हुए पाया जाता है। कई बार यह समुद्र तटों पर लहरों के साथ बहकर भी आता है। इसके साथ ही ये मरी हुई व्हेल के पेट में भी पाया जा सकता है। इसे समुद्र का खजाना या फ्लोटिंग गोल्ड भी कहते हैं। यह चीन, जापान, अफ्रीका और अमेरिका के समुद्र तटों और बहामास जैसे ट्रॉपिकल आइलैंड्स पर सबसे ज्यादा मिलता है। व्हेल की उल्टी जब व्हेल के शरीर से निकलती है, तो इसका रंग आमतौर पर हल्का पीला होता है। ये गाढ़े फैट जैसी होती है। कुछ समय बाद इसका रंग गहरा लाल हो जाता है। कई बार ये काली और सलेटी रंग की भी होती है। जब एम्बरग्रीस ताजा होता है, तो इससे मल जैसी गंध निकलती है, लेकिन जैसे-जैसे वक्त बीतता है इससे मीठी और मिट्टी जैसी सुगंध आने लगती है, जो लंबे वक्त तक बरकरार रहती है। सवाल 2: कैसे बनती है व्हेल की उल्टी?
जवाब: व्हेल की उल्टी बनने के प्रोसेस को प्रकृति की सबसे अजीबोगरीब घटनाओं में से एक माना जाता है। साइंस को पक्के तौर पर अब भी नहीं पता है कि आखिर यह बनती कैसे है। फ्लोटिंग गोल्ड: अ नैचुरल एंड (अननैचुरल) हिस्ट्री ऑफ एम्बरग्रीस नामक किताब लिखने वाले क्रिस्टोफर केंप का कहना है कि इसे व्हेल की उल्टी कहना सही नहीं है। केंप का कहना है कि कभी-कभी, मांस का टुकड़ा व्हेल के पेट से होते हुए जब उसकी आंतों में पहुंचता है, तो एक जटिल प्रोसेस के जरिए व्हेल की उल्टी बनती है। जिसे बाद में व्हेल बाहर निकाल देती है। 1783 में जर्मन फिजिशियन फ्रांज श्वेइगर ने इसे ‘कठोर व्हेल का गोबर’ कहा था। एक थ्योरी ये भी है कि जब व्हेल बहुत ज्यादा मात्रा में समुद्री जीव को खा लेती है, तो मांस के बड़े टुकड़े को पचाने के लिए ही व्हेल की आंतों में एम्बरग्रीस या व्हेल की उल्टी जैसा पदार्थ बनता है। इस थ्योरी के अनुसार, एम्बरग्रीस स्पर्म व्हेल की आंतों की पित्त नली में बनता है। सबसे पहले जापानियों ने पता लगाया था कि एम्बरग्रीस स्पर्म व्हेल से पैदा होता है। उससे पहले माना जाता था कि ये समुद्र के पास रहने वाली मधुमक्खियों से या रेजिन नामक जीवाश्म पेड़ से बनता है, जिसके तने से एम्बर बनता है। सवाल 3: एम्बरग्रीस व्हेल के शरीर से बाहर कैसे निकलता है? जवाब: एम्बरग्रीस व्हेल के शरीर से आमतौर पर दो तरीकों से निकलता है- उल्टी के रूप में मुंह से या मलद्वार से मल के रूप में। मल के रूप में निकलने वाले एम्बरग्रीस का रंग मल जैसा होता है। इससे मल की गंध आती है। हालांकि साइंस अब भी इसे लेकर एकमत नहीं है। कोई कहता है कि व्हेल वजन को बाहर निकालती है। इसीलिए इसे व्हेल की उल्टी निकनेम मिला है। कुछ का मानना है कि व्हेल के अंदर के पदार्थ इतने बड़े हो जाते हैं कि वे उसके मलाशय को फाड़ देते हैं। सवाल 4: कितनी है एक किलो व्हेल की उल्टी की कीमत? जवाब: इंटरनेशल मार्केट में व्हेल की उल्टी की कीमत 2 करोड़ रुपए किलो तक है। पिछले साल मुंबई पुलिस ने कहा था कि 1 किलो व्हेल की उल्टी की कीमत 1 करोड़ रुपए है। लखनऊ में बरामद 4.12 किलो व्हेल की उल्टी की कीमत UP STF ने 10 करोड़ रुपए बताई है, यानी करीब 2.30 करोड़ रुपए प्रति किलो। कुल मिलाकर व्हेल की उल्टी की कीमत उसकी शुद्धता और क्वॉलिटी से तय होती है। सवाल 5: आखिर इतनी कीमती क्यों है व्हेल की उल्टी? जवाब:
अहमदाबाद सिटी क्राइम ब्रांच ने स्पर्म व्हेल की उल्टी यानी एम्बरग्रीस के साथ चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इस दुर्लभ और बहुमूल्य पदार्थ की मात्रा 2.904 किलोग्राम है, जिसका अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित मूल्य 2.90 करोड़ रुपए है। कचरा बीनने का काम करने वाले मोहम्मद हनीफ को यह उल्टी मिली थी। भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत शुक्राणु व्हेल को संरक्षित प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है और उनका व्यापार अवैध है। क्राइम ब्रांच ने एक गुप्त सूचना के आधार पर आमिर शेख को सूरत से अहमदाबाद से गिरफ्तार किया था। उसके मोबाइल फोन पर स्पर्म व्हेल की उल्टी (एम्बरग्रीस) का वीडियो मिला था। क्राइम ब्रांच ने जांच की तो पता चला कि दमण के रहने वाले सहादत अली और सूरत का उस्मान शेख ने कमीशन के जरिए आमिर और उसके साथियों से एम्बरग्रीस बेचने की बात कही थी। इसी आधार पर वे एक गिरोह के जरिए एम्बरग्रीस बेचने की कोशिश कर रहे थे। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने सूरत के उस्मान शेख के घर की तलाशी ली और 2.904 किलोग्राम स्पर्म व्हेल की उल्टी जब्त कर ली। सवाल 1: क्या होती है व्हेल की उल्टी?
जवाब: व्हेल की उल्टी या एम्बरग्रीस फ्रेंच शब्द एम्बर और ग्रीस से मिलकर बना है, जिसका मतलब होता है ग्रे एम्बर। इसे व्हेल की उल्टी कहा जाता है। यह कठोर मोम की तरह होती है, जो स्पर्म व्हेल के पाचन तंत्र में मौजूद आंतों में बनती है। एम्बरग्रीस अक्सर समुद्र में तैरते हुए पाया जाता है। कई बार यह समुद्र तटों पर लहरों के साथ बहकर भी आता है। इसके साथ ही ये मरी हुई व्हेल के पेट में भी पाया जा सकता है। इसे समुद्र का खजाना या फ्लोटिंग गोल्ड भी कहते हैं। यह चीन, जापान, अफ्रीका और अमेरिका के समुद्र तटों और बहामास जैसे ट्रॉपिकल आइलैंड्स पर सबसे ज्यादा मिलता है। व्हेल की उल्टी जब व्हेल के शरीर से निकलती है, तो इसका रंग आमतौर पर हल्का पीला होता है। ये गाढ़े फैट जैसी होती है। कुछ समय बाद इसका रंग गहरा लाल हो जाता है। कई बार ये काली और सलेटी रंग की भी होती है। जब एम्बरग्रीस ताजा होता है, तो इससे मल जैसी गंध निकलती है, लेकिन जैसे-जैसे वक्त बीतता है इससे मीठी और मिट्टी जैसी सुगंध आने लगती है, जो लंबे वक्त तक बरकरार रहती है। सवाल 2: कैसे बनती है व्हेल की उल्टी?
जवाब: व्हेल की उल्टी बनने के प्रोसेस को प्रकृति की सबसे अजीबोगरीब घटनाओं में से एक माना जाता है। साइंस को पक्के तौर पर अब भी नहीं पता है कि आखिर यह बनती कैसे है। फ्लोटिंग गोल्ड: अ नैचुरल एंड (अननैचुरल) हिस्ट्री ऑफ एम्बरग्रीस नामक किताब लिखने वाले क्रिस्टोफर केंप का कहना है कि इसे व्हेल की उल्टी कहना सही नहीं है। केंप का कहना है कि कभी-कभी, मांस का टुकड़ा व्हेल के पेट से होते हुए जब उसकी आंतों में पहुंचता है, तो एक जटिल प्रोसेस के जरिए व्हेल की उल्टी बनती है। जिसे बाद में व्हेल बाहर निकाल देती है। 1783 में जर्मन फिजिशियन फ्रांज श्वेइगर ने इसे ‘कठोर व्हेल का गोबर’ कहा था। एक थ्योरी ये भी है कि जब व्हेल बहुत ज्यादा मात्रा में समुद्री जीव को खा लेती है, तो मांस के बड़े टुकड़े को पचाने के लिए ही व्हेल की आंतों में एम्बरग्रीस या व्हेल की उल्टी जैसा पदार्थ बनता है। इस थ्योरी के अनुसार, एम्बरग्रीस स्पर्म व्हेल की आंतों की पित्त नली में बनता है। सबसे पहले जापानियों ने पता लगाया था कि एम्बरग्रीस स्पर्म व्हेल से पैदा होता है। उससे पहले माना जाता था कि ये समुद्र के पास रहने वाली मधुमक्खियों से या रेजिन नामक जीवाश्म पेड़ से बनता है, जिसके तने से एम्बर बनता है। सवाल 3: एम्बरग्रीस व्हेल के शरीर से बाहर कैसे निकलता है? जवाब: एम्बरग्रीस व्हेल के शरीर से आमतौर पर दो तरीकों से निकलता है- उल्टी के रूप में मुंह से या मलद्वार से मल के रूप में। मल के रूप में निकलने वाले एम्बरग्रीस का रंग मल जैसा होता है। इससे मल की गंध आती है। हालांकि साइंस अब भी इसे लेकर एकमत नहीं है। कोई कहता है कि व्हेल वजन को बाहर निकालती है। इसीलिए इसे व्हेल की उल्टी निकनेम मिला है। कुछ का मानना है कि व्हेल के अंदर के पदार्थ इतने बड़े हो जाते हैं कि वे उसके मलाशय को फाड़ देते हैं। सवाल 4: कितनी है एक किलो व्हेल की उल्टी की कीमत? जवाब: इंटरनेशल मार्केट में व्हेल की उल्टी की कीमत 2 करोड़ रुपए किलो तक है। पिछले साल मुंबई पुलिस ने कहा था कि 1 किलो व्हेल की उल्टी की कीमत 1 करोड़ रुपए है। लखनऊ में बरामद 4.12 किलो व्हेल की उल्टी की कीमत UP STF ने 10 करोड़ रुपए बताई है, यानी करीब 2.30 करोड़ रुपए प्रति किलो। कुल मिलाकर व्हेल की उल्टी की कीमत उसकी शुद्धता और क्वॉलिटी से तय होती है। सवाल 5: आखिर इतनी कीमती क्यों है व्हेल की उल्टी? जवाब: